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'Npa' - 81 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • सरकारी बैंकों को जोरदार झटका, तीन महीनों में घाटा 3.5 गुना बढ़ा

    सरकारी बैंकों को जोरदार झटका, तीन महीनों में घाटा 3.5 गुना बढ़ा

    एक साल पहले सार्वजनिक क्षेत्र के इन 21 सरकारी बैंकों का कुल घाटा 4,284.45 करोड़ रुपये रहा था.

  • रघुराम राजन ने कहा, सरकार के लिए 'कार की सीट बेल्ट' की तरह है रिजर्व बैंक, जानिए क्या है वजह...

    रघुराम राजन ने कहा, सरकार के लिए 'कार की सीट बेल्ट' की तरह है रिजर्व बैंक, जानिए क्या है वजह...

    RBI और सरकार में बढ़ते टकराव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन (Raghuram Rajan) ने कहा कि केंद्रीय बैंक किसी सरकार के लिए 'कार की सीट बेल्ट' की तरह होता है, जिसके बिना नुकसान हो सकता है.

  • राहुल का हमला, प्रधानमंत्री को आर्थिक अव्यवस्था ठीक करने के लिए RBI से चाहिए इतने रुपये...

    राहुल का हमला, प्रधानमंत्री को आर्थिक अव्यवस्था ठीक करने के लिए RBI से चाहिए इतने रुपये...

    कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर पीएम मोदी पर हमला बोला है. राहुल गांधी ने एक मीडिया रिपोर्ट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि 'प्रधानमंत्री को अपने विलक्षण आर्थिक सिद्धांतों के कारण फैली अव्यवस्था' को ठीक करने के लिए अब रिजर्व बैंक से 3.60 लाख करोड़ रुपये की बड़ी राशि की जरूरत पड़ गई है. एक अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सरकार रिजर्व बैंक से 3.60 लाख करोड़ रुपये की मांग कर रही है.

  • बड़े डिफॉल्टरों पर आरबीआई इतना मेहरबान क्यों?

    बड़े डिफॉल्टरों पर आरबीआई इतना मेहरबान क्यों?

    भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल को उन लोगों के नाम बताने में क्या परेशानी है जिन्होंने 50 करोड़ से लेकर 1 लाख करोड़ तक के लोन नहीं चुकाए हैं. भारतीय रिज़र्व बैंक कौन होता है उनकी इज्ज़त या साख की चिन्ता करने वाला वो भी जो बैंक का लोन नहीं चुका रहे हैं.

  • क्या सरकार की नज़र भारतीय रिज़र्व बैंक के रिज़र्व पर है?

    क्या सरकार की नज़र भारतीय रिज़र्व बैंक के रिज़र्व पर है?

    भारतीय रिज़र्व बैंक के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने 2010 में अर्जेंटीना के वित्त संकट का हवाला क्यों दिया कि केंद्रीय बैंक और सरकार के बीच जब विवाद हुआ तो केंद्रीय बैंक के गवर्नर से इस्तीफा दे दिया और फिर वहां आर्थिक तबाही मच गई. एक समझदार सरकार अपने तात्कालिक सियासी फायदे के लिए एक ऐसी संस्था को कमतर नहीं करेगी जो देश के दूरगामी हितों की रक्षा करती है.

  • भारतीय रिजर्व बैंक की स्वायत्तता में दखल क्यों?

    भारतीय रिजर्व बैंक की स्वायत्तता में दखल क्यों?

    जब स्वदेशी जागरण मंच भारतीय रिजर्व बैंक को सलाह देने लगे कि उसे क्या करना है तो इसका मतलब यही है कि भारत में ईज ऑफ डूइंग वाकई अच्छा हो गया है. नोटबंदी के समय नोटों की गिनती में जो लंबा वक्त लगा, रिज़र्व बैंक ने सामान्य रिपोर्ट में नोटबंदी पर दो चार लाइन लिख दी, तब किसी को नहीं लगा कि उर्जित पटेल को इस्तीफा दे देना चाहिए. बल्कि तब रिजर्व बैंक को भी नहीं लगा कि सरकार हस्तक्षेप कर रही है. उसकी स्वायत्तता पर हमला हो रहा है. सबको उर्जित पटेल अर्जित पटेल लग रहे थे. अब उर्जित पटेल का इस्तीफा भी मांगा जा रहा है और उनके भी इस्तीफा देने की ख़बर आ रही है. 

  • ठीकरा फुड़वाने के लिए रिजर्व बैंक अपना सिर तैयार रखे...

    ठीकरा फुड़वाने के लिए रिजर्व बैंक अपना सिर तैयार रखे...

    देश की माली हालत को लेकर रहस्य पैदा हो गया है. रिज़र्व बैंक और सरकार के बीच कुछ चल पड़ने की खबरें हैं. क्या चल रहा है? ये अभी नहीं पता. उजागर न किए जाने का कारण यह है कि आम तौर पर रिजर्व बैंक और सरकार के बीच कुछ भी चलने की बातें तब तक नहीं की जातीं जब तक सरकार कोई फैसला न ले ले. लेकिन हैरत की बात ये है कि सरकार ने आश्चर्यजनक रूप से रिजर्व बैंक के बारे में एक बयान जारी किया है. कुछ गड़गड़ होने का शक पैदा होने के लिए इतना काफी से ज्यादा है. 

  • संवैधानिक संस्थाओं की साख बची रहने दें जेटली जी 

    संवैधानिक संस्थाओं की साख बची रहने दें जेटली जी 

    यह 2015 का साल था जब वित्त मंत्री अरुण जेटली राज्यसभा की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहे थे. उनका कहना था कि जनता की चुनी हुई लोकसभा के पारित विधेयकों पर राज्यसभा को सवाल उठाने का हक़ नहीं है. तब लोकसभा के स्पीकर रहे सोमनाथ चटर्जी ने भी इसकी आलोचना की थी और कांग्रेस सांसद मधुसूदन मिस्त्री ने जेटली के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पेश किया था. दिलचस्प यह है कि अरुण जेटली तब यह बात कह रहे थे जब वे ख़ुद लोकसभा चुनाव हारकर राज्यसभा की मार्फ़त संसद में आए और मंत्री बने.

  • 90,000 करोड़ की डिफॉल्टर IL&FS कंपनी डूबी तो आप भी डूबेंगे...

    90,000 करोड़ की डिफॉल्टर IL&FS कंपनी डूबी तो आप भी डूबेंगे...

    IL&FS (INFRASTRUCTURE LEASING AND FINANCIAL SERVICES) का नाम बहुत लोगों ने नहीं सुना होगा. यह एक सरकारी क्षेत्र की कंपनी है जिसकी 40 सहायक कंपनियां हैं. इसे नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी की श्रेणी में रखा जाता है जो बैंकों से लोन लेती हैं. जिसमें कंपनियां निवेश करती हैं और आम जनता जिसके शेयर ख़रीदती है.

  • बैंकों को फंसे कर्ज के मामले में 2019-20 तक झेलना पड़ सकता है दबाव

    बैंकों को फंसे कर्ज के मामले में 2019-20 तक झेलना पड़ सकता है दबाव

    बैंक अब गैर-कंपनी वर्ग में संपत्तियों की गुणवत्ता को लेकर दबाव देख रहे हैं. इस लिहाज से बैंकों को कुल मिलाकर फंसे कर्ज के मामले में 2019-20 तक दबाव झेलना पड़ सकता है.

  • प्रधानमंत्री जी, बैंकों के लाखों करोड़ न चुकाने वाली कंपनियां कौन हैं, मालिक कौन हैं?

    प्रधानमंत्री जी, बैंकों के लाखों करोड़ न चुकाने वाली कंपनियां कौन हैं, मालिक कौन हैं?

    क्या प्रधानमंत्री उन कंपनियों के नाम ले सकते हैं जिन्होंने भारत की जनता के जमा पैसे से सस्ती दरों पर लोन लिया और उस लोन का दस लाख करोड़ बैंकों को वापस नहीं किया? क्या वित्त मंत्री उन कंपनियों के नाम ले सकते हैं? क्या अमित शाह नाम ले सकते हैं? क्या कांग्रेस से राहुल गांधी, चिदंबरम नाम ले सकते हैं? जब ये दोनों नेता लोन लेकर भागने वालों के नाम नहीं ले सकते हैं तो फिर ये बहस हो किस चीज़ की रही है?

  • हे राजन! तब तुम्हीं थे न जो राजन का मज़ाक उड़ा रहे थे, राजन को ज़िम्मेदार बता रहे थे?

    हे राजन! तब तुम्हीं थे न जो राजन का मज़ाक उड़ा रहे थे, राजन को ज़िम्मेदार बता रहे थे?

    अप्रैल 2015 में हिन्दुस्तान टाइम्स ने लिखा था कि रघुराम राजन ने नॉन परफॉर्मिंग असेट के कुछ हाई-प्रोफाइल फ्रॉड की सूची प्रधानमंत्री कार्यालय को सौंपी थी. मांग की थी कि जांच हो और कुछ को जेल भेजा जाए. अखबार के अनुसार राजन ने 17,500 करोड़ के फ्रॉड के बारे में सूचना दी थी. इसमें विनसम डायमंड एंड ज्वेलरी, ज़ूम डेवलपर्स, तिवारी ग्रुप, सूर्य विनायक इंडस्ट्री, डेक्कन क्रोनिकल होल्डिंग, फर्स्ट लीजिंग कंपनी ऑफ इंडिया, सूर्या फार्मा. इन कंपनियों के नाम हिन्दुस्तान टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से लिखा था. दो साल बाद विनसम डायमंड के खिलाफ सीबीआई ने मामला दर्ज किया था.

  • बैंकों का एनपीए बढ़ने के लिए कौन है ज़िम्मेदार?

    बैंकों का एनपीए बढ़ने के लिए कौन है ज़िम्मेदार?

    बैंकों ने जितना लोन दिया, उस लोन का जितना हिस्सा बहुत देर तक नहीं लौटता है तो वह नॉन परफार्मिंग असेट हो जाता है. जिसे एनपीए कहते हैं. एनपीए को लेकर यूपीए बनाम एनडीए हो रहा है. लेकिन जिसने इन दोनों सरकारों में लोन लिया या नहीं चुकाया, उसका तो नाम ही कहीं नहीं आ रहा है. 2015 में जब आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष अग्रवाल ने भारतीय रिज़र्व बैंक से पूछा था कि लोन नहीं देने वालों के नाम बता दीजिए तो रिजर्व बैंक ने इंकार कर दिया था. जबकि सुप्रीम कोर्ट ने नाम बताने के लिए कहा था. क्या यह अजीब नहीं है कि जिन लोगों ने लोन नहीं चुकाया उनका नाम राजनीतिक दल के नेता नहीं लेते हैं. न प्रधानमंत्री लेते हैं न राहुल गांधी लेते हैं न अमित शाह नाम लेते हैं. क्या यह मैच फिक्सिंग नहीं है. असली खिलाड़ी बहस से गायब है और दोनों तरफ के कोच भिड़े हुए हैं.

  • RBI के पूर्व गवर्नर राजन का खुलासा: PMO को भेजी थी बहुचर्चित बैंकिंग घोटालेबाजों की लिस्ट, मगर...

    RBI के पूर्व गवर्नर राजन का खुलासा: PMO को भेजी थी बहुचर्चित बैंकिंग घोटालेबाजों की लिस्ट, मगर...

    भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि बैंकिंग धोखाधड़ी से जुड़े बहुचर्चित मामलों की सूची प्रधानमंत्री कार्यालय को समन्वित कार्रवाई के लिए सौंपी गई थी. राजन ने संसद की एक समिति को लिखे पत्र में यह बात कही है. आकलन समिति के चेयरमैन मुरली मनोहर जोशी को भेजे पत्र में राजन ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग प्रणाली में धोखाधड़ियों का आकार बढ़ रहा है. हालांकि, यह कुल गैर निष्पादित आस्तयों (एनपीए) की तुलना में अभी काफी छोटा है.

  • यूपीए के समय हुआ कोयला घोटाला ही बैंकों के कर्ज डूबने (NPA) की वजह बना : रघुराम राजन

    यूपीए के समय हुआ कोयला घोटाला ही बैंकों के कर्ज डूबने (NPA) की वजह बना : रघुराम राजन

    बैंकिंग क्षेत्र में डूबे कर्ज (NPA) को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच बयानबाजी चल रही है. इसी बीच रिजर्व बैंक पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि कांग्रेस की अगुवाई में चली यूपीए सरकार के समय हुए कोयला घोटाला राजकाज से जुड़ी विभिन्न समस्याएं ही इसकी बड़ी वजह है.

  • पीएम मोदी ने कहा- यूपीए के समय एक फोन पर कर्ज दिया जाता था, पी. चिदंबरम ने पूछा- 2014 के बाद क्या हुआ

    पीएम मोदी ने कहा- यूपीए के समय एक फोन पर कर्ज दिया जाता था, पी. चिदंबरम ने पूछा- 2014 के बाद क्या हुआ

    यूपीए शासनकाल में दिए गए कर्ज पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने रविवार को पूछा कि एनडीए सरकार को यह बताना चाहिए कि उनके समय में दिए गए कितने कर्ज डूब गए. कांग्रेस नेता ने इस संबंध में कई ट्वीट किए. उन्होंने अपने ट्वीट में कहा, ''मई 2014 के बाद कितना कर्ज दिया गया और उनमें से कितनी राशि डूब (नॉन पर्फोर्मिंग एसेट्स) गई. चिदंबरम ने कहा कि यह सवाल संसद में पूछा गया लेकिन अब तक इस पर कोई जवाब नहीं आया है. 

  • 2014 से पहले जिन 12 बड़े डिफॉल्टरों को दिया गया था लोन उन पर कार्रवाई शुरू : पीएम मोदी

    2014 से पहले जिन 12 बड़े डिफॉल्टरों को दिया गया था लोन उन पर कार्रवाई शुरू : पीएम मोदी

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) का उद्घाटन करने के बाद कांग्रेस पर हमला बोला है. उन्होंने कहा कि सरकार बनने के कुछ समय बाद ही अहसास हो गया था कि कांग्रेस देश की अर्थव्यवस्था को एक लैंडमाइन पर बैठाकर गई है.

  • UPA सरकार की देन है NPA की समस्या, बांटे गए थे 'अंधाधुंध कर्ज' : जेटली

    UPA सरकार की देन है NPA की समस्या, बांटे गए थे 'अंधाधुंध कर्ज' : जेटली

    संप्रग सरकार के दौरान आर्थिक वृद्धि दर के आंकड़ों को लेकर सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस में जुबानी जंग के बीच जेटली ने कहा कि उस समय की वृद्धि अंधाधुंध ऋण के बलबूते थी.

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