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'Prime time' - 384 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • गुजरात का जनादेश : बीजेपी को सरकार दी, ख़ुद को एक विपक्ष दिया

    गुजरात का जनादेश : बीजेपी को सरकार दी, ख़ुद को एक विपक्ष दिया

    गुजरात ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जो सुंदर संतुलन बनाया है वह बहुत कमाल का है. यह एक ऐसा नतीजा है जिससे किसी का दिल नहीं जला होगा. भले किसी के सारे सपने पूरे न हुए हों.

  • क्‍या दिखावे के लिए है आदर्श आचार संहिता?

    क्‍या दिखावे के लिए है आदर्श आचार संहिता?

    कुछ तो बात है एग्ज़िट पोल में. वरना टीवी स्टुडियो में वक्ता दो-दो घंटे नहीं बैठते, वो भी सिर्फ दो या पांच मिनट बोलने के लिए. एंकर लोग ऐसे बोल रहे हैं जैसे आंधी में अशोक का पेड़ झुक रहा हो. वो उठते हैं झुकते हैं गिरते हैं और कई बार लगता है कि गिरा ही देंगे करीब वाले वक्ता को. एग्जिट पोल चुनावी त्योहार का आख़िरी मेला है. इस मेले में लोग खूब झूला झूल रहे हैं.

  • न्याय के पक्ष में खड़े होने से डर कैसा? रवीश कुमार के साथ प्राइम टाइम 

    न्याय के पक्ष में खड़े होने से डर कैसा? रवीश कुमार के साथ प्राइम टाइम 

    कैलिफोर्निया के किसी कॉलेज के बाहर गोली चल जाती है तो आज कल हमारे अंग्रेज़ी चैनल सीधा लाइव करने लगते हैं. इस घटना की डिटेल सुनते हुए आपको कितना बुरा लग रहा होगा, मैं समझ सकता हूं पर बताना ज़रूरी भी तो है कि हमारे समाज में क्रूरता की कितनी परतें हैं. 

  • न्याय की चौखट पर इतना अन्याय क्यों? रवीश कुमार के साथ प्राइम टाइम 

    न्याय की चौखट पर इतना अन्याय क्यों? रवीश कुमार के साथ प्राइम टाइम 

    सिस्टम के सितम में आज हम टिन के इस मकान में रहने वाले एक पिता राजू आगे की बात करेंगे. महाराष्ट्र का एक ज़िला है अहमदनगर, इस ज़िले के जामखेड़ तालुका का एक गांव है खरडा. इसी गांव के रहने वाले हैं राजू आगे. आइये आपको खर्डा गांव ही ले चलते हैं. गांव के बाहर आपको कस्बे का अहसास कराएगा. चहल पहल के हिसाब से गांव से ज़्यादा लगता है. 15 हज़ार की आबादी वाला यह बड़ा गांव है. इसी गांव के एक छोर पर है राजू आगे का यह मकान जो टिन का बना है. इसकी छत पर डिश एंटिना है. घर के भीतर टीवी है मगर दीवार पर अंबेडकर हैं, बुद्ध भगवान हैं और दोनों के बगल में एक लड़के की तस्वीर है जिसका नाम है नितिन आगे. नितिन आगे की तीन साल पहले हत्या कर दी गई थी, जिसके इंसाफ के लिए राजू आगे लड़ाई लड़ रहे हैं.

  • लव जिहाद के नाम पर हिंसा के लिए उकसाने वाले कौन?

    लव जिहाद के नाम पर हिंसा के लिए उकसाने वाले कौन?

    6 दिसंबर से 11 दिसंबर आ गया, पांच दिन गुज़रने के बाद क्या आपसे या सबसे पूछा जा सकता है कि आपने राजस्थान के राजसमंद की घटना पर क्या सोचा. पांच दिनों से देख रहा हूं कि इस घटना को लेकर सोशल मीडिया में लोग तरह तरह की प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं.

  • आपके बैंक खातों में जमा पैसा कितना सुरक्षित?

    आपके बैंक खातों में जमा पैसा कितना सुरक्षित?

    10 अगस्त 2017 में लोकसभा में पेश हुए फाइनेंशियल रेज़्यूलेशन एंड डिपोज़िट इंन्श्योरेंस बिल को लेकर चर्चा हो रही है. 18 अगस्त को यह बिल लोकसभा की संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दी गई, इस समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश नहीं की है मगर इसके कुछ प्रावधानों को लेकर मीडिया में चर्चा है कि बैंकों में जमा आपका पैसा सुरक्षित नहीं है.

  • सिस्टम के शिकार लोगों को न्याय कैसे? रवीश कुमार के साथ प्राइम टाइम

    सिस्टम के शिकार लोगों को न्याय कैसे? रवीश कुमार के साथ प्राइम टाइम

    बाबरी मस्जिद की घटना हमारे सिस्टम के बड़े स्तर पर फेल होने और आज तक फेल होते रहने का सबसे शर्मनाक और अचूक उदाहरण है.

  • क्या आप कभी इस सिस्टम के शिकार हुए? रवीश कुमार के साथ प्राइम टाइम

    क्या आप कभी इस सिस्टम के शिकार हुए? रवीश कुमार के साथ प्राइम टाइम

    आज आपसे एक बात कहनी है. क्या आप न्यूज़ चैनलों या मीडिया के अनुसार बदल रहे हैं? आए दिन नेताओं के निम्नस्तरीय राजनीतिक बयानों पर घमासान चर्चा होती है. कहीं ऐसा तो नहीं कि इन्हीं चर्चाओं को आप ख़बर या सूचना समझ रहे हैं, क्या इन चर्चाओं से आपको सिस्टम की पारदर्शिता नज़र आती है.

  • क्‍या राहुल की ताजपोशी वंशवाद का उदाहरण?

    क्‍या राहुल की ताजपोशी वंशवाद का उदाहरण?

    राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बन गए हैं. उनके नामांकन के विरोध में किसी भी कांग्रेस नेता ने उम्मीदावारी का दावा नहीं किया है. परिवारवाद का आरोप राजीव गांधी का पीछा कर रहा है. सोनिया गांधी का भी पीछा कर रहा था, राहुल गांधी और इंदिरा गांधी का भी पीछा करता रहा है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : क्या जीडीपी में सुधार का दौर शुरू हो गया?

    प्राइम टाइम इंट्रो : क्या जीडीपी में सुधार का दौर शुरू हो गया?

    सेंट्रल स्टैटिस्टिकल ऑफिस ने इस वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही का जीडीपी आंकड़ा जारी कर दिया है. पहली तिमाही की तुलना में जीडीपी की दर में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. इसके पहले 31 अगस्त को पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून की जीडीपी आई थी, इस बार जुलाई से सितंबर की जीडीपी आई है.

  • प्राइम टाइम : अवैध होर्डिंग-पोस्टरों पर कार्रवाई कब होगी?

    प्राइम टाइम : अवैध होर्डिंग-पोस्टरों पर कार्रवाई कब होगी?

    हमारी सारी बहसें अंत में व्यवस्था की उस मेज़ पर आकर ख़त्म होती है जहां किसी आम आदमी को उसका हक मिलना है. यह हक सूचना के अधिकार से लेकर जीने के अधिकार तक और कानून के पालन तक का होता है. हम अक्सर व्यवस्थाओं को बहुत रियायत दे देते हैं. जब उनकी लापरवाही से किसी की जान चली जाती है तो समझ नहीं पाते कि इसके लिए ज़िम्मेदार कौन है. आप अपने शहरों में देखते ही होंगे, कोई त्योहार आया नहीं कि नेताओं की तस्वीरें बिजली से लेकर ट्रैफिक लाइट के खंभे पर टंग जाती है. हर दल के लोग यही करते हैं. बिना मतलब एक ही पोस्टर में चार-चार त्योहारों की बधाई और उसमें तीस-चालीस चेहरे ठूंस कर आपको घूर रहे होते हैं. इनकी वजह से किनती दुर्घटनाएं होते होते बचती होंगी या फिर आस पास का नज़ारा भद्दा लगने लगता होगा, यह आप समझ सकते हैं. कई बार ये जानलेवा भी हो जाते हैं. 

  • प्राइम टाइम : पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय का हाल

    प्राइम टाइम : पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय का हाल

    अमरीका की ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी, कंसास स्टेट यूनिवर्सिटी, इलिनोइस यूनिवर्सिटी, पेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी और मिसौरी यूनिवर्सिटी ने अपना सहयोग दिया था. इसके लिए 1959 में इलिनोइस यूनिवर्सिटी ने ब्लू प्रिंट तैयार किया था. तब जाकर भारत में पहला कृषि विश्व विद्यालय कायम हुआ था. जिसका बाद में नाम पड़ा गोविंदबल्लभ पंत कृषि और प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : क्या जज बीएच लोया की मौत से पर्दा उठ पाएगा?

    प्राइम टाइम इंट्रो : क्या जज बीएच लोया की मौत से पर्दा उठ पाएगा?

    सीबीआई के स्पेशल जज बृजगोपाल हरिमोहन लोया की मौत के बाद की प्रक्रियाओं को लेकर कैरवां पत्रिका में जो सवाल उठे हैं, उसके समानांतर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट आ गई है. कुछ जगहों पर एक्सप्रेस की रिपोर्ट कैरवां की रिपोर्ट को काटती है तो कुछ जगहों पर एक्सप्रेस की रिपोर्ट को लेकर ही नए संदेह खड़े हो जाते हैं.

  • सीबीआई जज की मौत के सवालों पर चुप्पी जारी - पार्ट 2

    सीबीआई जज की मौत के सवालों पर चुप्पी जारी - पार्ट 2

    बुधवार के प्रेस कांफ्रेंस में कैमरों को देखकर आपको अंदाज़ा हो जाएगा कि आए थे तो थे इतने चैनल फिर भी वो ख़बर कहां गई. एक जज की मौत को लेकर सवाल हों, क्या उसकी भी ख़बर लिखने की हिम्मत नहीं बची है तो एक सवाल आप खुद से पूछिए कि हर महीने केबल और अखबार का बिल क्यों देते हैं. किसी मंदिर में दान क्यों नहीं कर देते हैं इतना पैसा. किसी ग़रीब का भला ही हो जाएगा.

  • सीबीआई जज की मौत को लेकर उठे सवाल

    सीबीआई जज की मौत को लेकर उठे सवाल

    पहाड़ों में जितनी बर्फ नहीं गिरी है उससे कहीं ज़्यादा दिल्ली में सत्ता के गलियारों में बर्फ गिर रही है. दो दिनों से दिल्ली में बर्फ की सिल्ली गिर रही है मगर कोई इसके बारे में बात नहीं करना चाहता. एक ऐसी रिपोर्ट आई है जिसे लेकर पढ़ने वालों की सांसें जम जाती हैं, जो भी पढ़ता है अपना फोन बंद कर देता है कि कहीं कोई इस पर प्रतिक्रिया न मांग ले.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : दयाल सिंह सांध्य कॉलेज का नाम बदलने पर बवाल

    प्राइम टाइम इंट्रो : दयाल सिंह सांध्य कॉलेज का नाम बदलने पर बवाल

    पंजाब नेशनल बैंक तो अपने घरों के आसपास आपने देखा ही होगा, उस बैंक के पहले और आजीवन चेयरमैन रहे. पंजाब नेशनल बैंक भारतीयों के द्वारा चलाया जाने वाला पहला बैंक था. जिस समय उनकी हैसियत के अमीर गुरुद्वारा, मंदिर बना रहे थे, दयाल सिंह मजीठिया बैंक बना रहे थे, यूनिवर्सिटी बना रहे थे, कांग्रेस की स्थापना करने वालों में शामिल हो रहे थे, एक अख़बार द ट्रिब्यून कायम कर रहे थे जो 125 साल से अधिक समय से हमारे बीच आज तक चला आ रहा है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : ऐसे बनेगा इक्कीसवीं सदी का भारत?

    प्राइम टाइम इंट्रो : ऐसे बनेगा इक्कीसवीं सदी का भारत?

    आज रजत जयंती दिवस हैं. यूनिवर्सटी सीरीज़ का 25वां अंक हम धूम धाम की जगह बूम बाम से मनाने जा रहे हैं. ऐसी कहानियां जिसे आप देखकर खुद को दिलासा देंगे कि आप बच गए. सिस्टम जब विस्फोट करता है तो उसके छर्रे जाने कितनी पीढ़ियों की पीठ में धंस जाते हैं, जिसका हिसाब कोई नहीं कर सकता.

  • यूनिवर्सिटी सीरीज का 24वां अंक : शिक्षा पर निवेश इतना कम क्यों? रवीश कुमार के साथ प्राइम टाइम

    यूनिवर्सिटी सीरीज का 24वां अंक : शिक्षा पर निवेश इतना कम क्यों? रवीश कुमार के साथ प्राइम टाइम

    यूनिवर्सटी सीरीज़ का 24वां अंक आप देख रहे हैं. भारत में इस बात के अनगिनत प्रमाण हैं कि शिक्षा ने लाखों लोगों को ग़रीबी और जाति के शोषण से मुक्त किया है मगर अब वही शिक्षा हमारे भीतर नई तरह की असमानता पैदा करती जा रही है.

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