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'Prime time' - 443 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • योगी सरकार के मंत्री ओमप्रकाश राजभर की 'पीलिया' पॉलिटिक्‍स

    योगी सरकार के मंत्री ओमप्रकाश राजभर की 'पीलिया' पॉलिटिक्‍स

    क्या आप जानते हैं कि भारत में एक मंत्री ऐसे भी हैं जो श्राप भी देते हैं. यह उनका संवैधानिक अधिकार तो नहीं है मगर कहां से उन्होंने श्राप देने की शक्ति प्राप्त की है, ये कोई देवता ही बता सकते हैं. ओम प्रकाश राजभर योगी सरकार में मंत्री हैं. भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष भी हैं.

  • कर्नाटक के राज्‍यपाल के फैसले पर उठे सवाल

    कर्नाटक के राज्‍यपाल के फैसले पर उठे सवाल

    सुप्रीम कोर्ट के रात भर जाग जाने से जो दिन दहाड़े हो रहा था उसके होने पर कोई आंच नहीं आई. पर यह क्या कम है कि सुप्रीम कोर्ट के जज साहिबान रात भर सरकार और विपक्ष का पक्ष सुनते रहे. ऐसे वक्त में जब कोई सुन ले इसकी तलाश में नेता नहीं जनता भी मारी मारी फिर रही है, देश की सर्वोच्च अदालत के सुन लेने से ही करार आ जाना चाहिए.

  • दुनियाभर में बड़े उलट फेर, क्या बने रहेंगे भारत-ईरान संबंध?

    दुनियाभर में बड़े उलट फेर, क्या बने रहेंगे भारत-ईरान संबंध?

    पिछले कुछ दिनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी कुछ हुआ है. मध्य एशिया में स्थिति फिर से बिगड़ने लगी है. अमेरिका के राष्ट्रपति ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते से अलग कर लिया है. मलेशिया के चुनावी नतीजों से भी दुनिया हैरान है. इस वक्त जब दुनिया जवान दिख रही है, नेताओं की मार्केटिंग यंग लीडर के रूप में हो रही है, 92 साल के महाथिर मोहम्मद ने प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले ली है.

  • इतिहास से खिलवाड़ क्यों कर रहे हैं पीएम मोदी?

    इतिहास से खिलवाड़ क्यों कर रहे हैं पीएम मोदी?

    आवश्यकता है ऐसे किसी भी व्यक्ति कि जो नेहरू और भगत सिंह पर गलत-सलत जानकारी रखता हो, या ऐसी जानकारी रखता हो जिसे गलत तरीके से पेश किया जा सके. ऐसे किसी योग्य को तुरंत उन लोगों से संपर्क करना चाहिए जो प्रधानमंत्री के भाषण के लिए रिसर्च करते हैं या फिर सीधे प्रधानमंत्री से ही संपर्क करना चाहिए. जरूरी है कि योग्य व्यक्ति इतिहास के बारे में कुछ नहीं जानता हो या फिर वही जानता हो जो इतिहास में ही न हो.

  • क्या सरकार को किसानों की वाकई फिक्र है?

    क्या सरकार को किसानों की वाकई फिक्र है?

    न्यूज चैनलों पर नेताओं के भाषणों का अतिक्रमण हो गया है. उनके भाषण झूठ से भरे होते हैं, उन्माद फैलाने वाले होते हैं, मुद्दों से भटकाने वाले होते हैं. इतिहास तो गलत होता ही है. दूसरी तरफ आम जनता अपनी-अपनी समस्याओं को लेकर लाचार खड़ी है कि कोई उसे आवाज़ दे दे. मध्य प्रदेश में सिपाही की परीक्षा देने वाले छात्र अब गिड़गिड़ाने की स्थिति में आ गए हैं. रो रहे हैं कि कोई उनकी बात सामने रख दे.

  • यूपी-बिहार की ट्रेनें सबसे ज़्यादा देरी से क्यों?

    यूपी-बिहार की ट्रेनें सबसे ज़्यादा देरी से क्यों?

    आज जब सुबह एक यात्री दर्शक ने रेलवे टाइम टेबल का स्क्रीन शॉट भेजा कि अमृतसर से दरभंगा के बीच चलने वाली 15212 जननायक एक्सप्रेस 57 घंटे लेट है तो यकीन नहीं हुआ. 44 घंटे तक लेट चलने वाली ट्रेन से सामाना हो चुका था मगर 57 घंटे ट्रेन चलती होगी, इस सूचना को ग्रहण करने की मानसिक तैयारी नहीं थी. जननायक एक्सप्रेस अमृतसर से दरभंगा के बीच चलती है. इसमें सारी बोगी जनरल होती है, क्योंकि इससे बिहार के मज़दूर पंजाब मंज़दूरी करने जाते हैं.

  • ट्रेनों की लेटलतीफ़ी कब तक आम बात रहेगी?

    ट्रेनों की लेटलतीफ़ी कब तक आम बात रहेगी?

    आपको आज एक ट्रेन की कहानी बताता हूं. नाम तो इसका स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस है, लेकिन इसकी हालत किसी गुलाम जैसी है. स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस बिहार के जयनगर से चलकर दिल्ली के आनंद विहार स्टेशन पर आती है. कुल 22 स्टेशनों से होते हुए यह ट्रेन अपना सफर पूरा करती है. आए दिन यात्री मैसेज करते रहते हैं कि इस ट्रेन का कुछ कीजिए. हम समझ नहीं पाते थे कि लोग क्यों इस ट्रेन को लेकर परेशान हैं. आज जब रेल मंत्रालय की वेबसाइट चेक की तो डर गया.

  • क्या सूचना के अधिकार का क़ानून बीमार पड़ गया?

    क्या सूचना के अधिकार का क़ानून बीमार पड़ गया?

    सूचना का अधिकार कोई सामान्य अधिकार नहीं है. अधिकारी जब बिना बात के जनता के काम नहीं करते हैं तो जनता इसी कानून का सहारा लेकर अपना बचाव करती है. लेकिन अगर राज्यों से लेकर दिल्ली तक आयुक्त ही नहीं होंगे तो उस ग़रीब जनता का क्या होगा जो पेंशन, राशन या अन्य तरह की सरकारी मदद के लिए यहां से वहां भटक रही होती है.

  • जनता के असली मुद्दों पर बात क्यों नहीं होती?

    जनता के असली मुद्दों पर बात क्यों नहीं होती?

    क्या वाकई नेताओं की ज़ुबान फ़िसल रही है या सोच समझ कर इस तरह के बयान दिए जा रहे हैं ताकि गोदी मीडिया जनता के सवालों को छोड़ इन्हीं सब पर चर्चा करता रहे. ये बयान ऐसे होते हैं जिससे आपका मनोरंजन होता है. हंसी हंसी के खेल में पता भी नहीं चलता कि आपका ख़ज़ाना लुट गया है.

  • सुप्रीम कोर्ट के भविष्य को लेकर चिंता क्यों?

    सुप्रीम कोर्ट के भविष्य को लेकर चिंता क्यों?

    सुप्रीम कोर्ट का भविष्य क्या होगा, इस पर चर्चा की मांग को लेकर दो वरिष्ठ जज अगर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को पत्र लिखें तो क्या यह कोई सामान्य घटना है. सुप्रीम कोर्ट के भविष्य को क्या ख़तरा है, जिसे हम अनदेखा कर रहे हैं. किस भरोसे पर हम अनदेखा कर रहे हैं. हो सकता है कि दोनों जज बढ़ाचढ़ा कर कह रहे हों तब भी क्या इसे अनदेखा कर दिया जाना चाहिए. जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस मदन लोकुर उन चार जजों में शामिल थे, जिन्होंने 12 जनवरी को प्रेस के सामने आकर कहा था कि सुप्रीम कोर्ट में सब कुछ ठीक नहीं है. न्यायपालिका की स्वतंत्रता को ख़तरा है. न्यायपालिका नहीं बचेगी तो लोकतंत्र नहीं बचेगा.

  • समाज की पुरुष प्रधान मानसिकता कैसे ख़त्म होगी?

    समाज की पुरुष प्रधान मानसिकता कैसे ख़त्म होगी?

    जिस देश और समाज में बात-बात में औरतों को मार देना आसान हो, वहां औरतों के खिलाफ होने वाली हिंसा को लेकर हम कभी ईमानदार नहीं हो सकते हैं. बलात्कार की घटना के प्रति कई बार हम इतने सामान्य हो जाते हैं कि फर्क ही नहीं पड़ता और कई बार इतना गुस्सा हो जाते हैं कि बहुत से लोग फांसी की बात करने लगते हैं. हाथ काट लेने से लेकर चौराहे पर बांध कर पत्थरों से मारने की बात करने लगते हैं. वे बताते हैं कि उन्हें इतना गुस्सा आ गया है ऐसी ख़बरों को सुनकर. उनके भीतर हिंसा की ऐसी विभत्स कल्पनाएं कैसे पनपने लगती हैं, इसका कोई अध्ययन नहीं है.

  • बच्ची से दरिंदगी करने वालों का बचाव क्यों?

    बच्ची से दरिंदगी करने वालों का बचाव क्यों?

    हम कहां जा रहे हैं, यह जानने से पहले हम कहां आ पहुंचे हैं, ज़रा रुक कर देख लेना चाहिए. जम्मू के कठुआ में बलात्कार के मामले में हमारे समाज ने अपना नक़ाब ख़ुद ही उतार दिया है. हम बेटियों की परवाह करते हैं यह ढोंग भी अपने आप सामने आ गया है. कठुआ में आठ साल की बच्ची के साथ बलात्कार के बारे में ही सुन लेंगे तो आपको यकीन हो जाएगा कि आप एक मरे हुए समय में जीने का भरम पाल रहे हैं.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : क्या RTI में गलत सूचनाएं भी दी जा रही हैं? 

    प्राइम टाइम इंट्रो : क्या RTI में गलत सूचनाएं भी दी जा रही हैं? 

    सूचना आपको बदल देती है. ग़लत सूचना से आप दंगाई बन जाते हैं जैसे आपने देखा कि उत्तराखंड के अगस्त्यमुनि में कैसे लोग ग़लत सूचना के कारण दंगाई में बदल गए और दुकानों को जला आए. अगर उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत सही जानने का दावा किया होता, कोशिश की होती तो वे अपराधी बनने से बच सकते थे और किसी की दुकानें नहीं जलतीं.

  • हम नफ़रत फैलाने वालों के शिकार क्यों बन रहे हैं?

    हम नफ़रत फैलाने वालों के शिकार क्यों बन रहे हैं?

    अब भी वक्त है, आप घरों से निकलकर समाज के छोटे-छोटे हिस्सों को दंगाई बनाने के इस प्रोजेक्ट के खिलाफ आवाज़ उठाइये. बहुत देर हो चुकी है और यह देरी बढ़ती जा रही है. हर जगह एक भीड़ खड़ी है, जिसे व्हाट्स अप के ज़रिए वीडियो और ऑडियो का इशारा मिलते ही वो दंगाई में बदल जाती है.

  • नौकरी सीरीज का 32वां भाग : बेरोजगारों का दर्द आखिर कौन समझेगा ? 

    नौकरी सीरीज का 32वां भाग : बेरोजगारों का दर्द आखिर कौन समझेगा ? 

    भारत में बेरोज़गारों की न तो संख्या किसी को मालूम है और न ही उनके जीवन के भीतर की कहानी. हमारे लिए बेरोज़गार हमेशा नाकाबिल नौजवान होता है जो मौके की तलाश में एक ही शहर और एक ही कमरे में कई साल तक पड़ा रहता है. कई बार तो लोग इसलिए भी बेकार कहते हैं कि वह सरकारी नौकरी की तलाश कर रहा है. सरकार चलाने के लिए नेता मारा मारी किए रहते हैं लेकिन जब कोई नौजवान उसी सरकार में अपने लिए संभावना की मांग करता है तो उसे फालतू समझा जाने लगता है. आप या हम हर शहर में बेरोज़गारों की रैली देखते हैं, नज़र घुमा लेते हैं. वे हफ्तों से धरने पर बैठे रहते हैं उनकी परवाह कोई नहीं करता है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : देश का किसान और जवान है परेशान 

    प्राइम टाइम इंट्रो : देश का किसान और जवान है परेशान 

    मुद्दों की मारामारी में आगरा से एक किसान का फोन आता है कि अक्तूबर के महीने में आलू के जो बीज बोए थे उनका उत्पादन काफी कम हुआ है. वे पहले से बर्बादी का सामना कर रहे थे मगर इस बार मार और पड़ गई है. टीवी का जो चरित्र हो गया है और दर्शकों की पसंद जिस तरह से बन गई है, उसके बीच आलू किसान की हालत पर आप चर्चा करेंगे तो किसकी दिलचस्पी होगी. क्या ऐसा हो सकता है कि अफरीदी और आलू को जोड़ कर चर्चा की जाए ताकि बहुत सारे प्रवक्ता ऑफिस के बाहर लाइन लगाकर खड़े हो जाएं कि हम भी बोलेंगे हम भी बोलेंगे. इस समस्या का समाधान आखिर कब निकलेगा.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : बाबाओं को राज्यमंत्री बनाना ठीक है?

    प्राइम टाइम इंट्रो : बाबाओं को राज्यमंत्री बनाना ठीक है?

    कभी फुर्सत हो तो सोचिएगा कि चुनाव आते ही नेता मठों और बाबाओं के यहां दौरे क्यों करते हैं, क्या चुनाव के बाद ये बाबा लोग आपकी नौकरी से लेकर शिक्षा की समस्या को लेकर संसद से लेकर सड़क पर आवाज़ उठाते हैं.

  • फ़ेक न्यूज़ से सही मंशा के साथ निपटने की ज़रूरत

    फ़ेक न्यूज़ से सही मंशा के साथ निपटने की ज़रूरत

    भारत के प्रधानमंत्री ने सूचना व प्रसारण मंत्रालय के उस फैसले को वापस ले लिया जिसके विरोध में मंगलवार सुबह से पत्रकारों के बीच हलचल थी. सोमवार शाम को सूचना व प्रसारण मंत्रालय की तरफ से एक प्रेस रीलीज जारी होती है कि अगर किसी पत्रकार को फेक न्यूज़ गढ़ते हुए या उसके फैलाने में भागीदार पाया गया तो उसकी सरकारी मान्यता हमेशा के लिए रद्द कर दी जाएगी.

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