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'Prime time' - 315 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • प्राइम टाइम इंट्रो: वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा कैसे दिया जाए?

    प्राइम टाइम इंट्रो: वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा कैसे दिया जाए?

    भारत के संविधान की धारा 51-ए में कहा गया है कि भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करे. क्या आप बता सकतें कि संविधान की इस भावना के आधार पर मौजूदा दौर में कौन सा ऐसा नेता है जो अपना कर्तव्य पूरा कर रहा है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : सरकारी विभागों की पोल खोलती सीएजी रिपोर्ट

    प्राइम टाइम इंट्रो : सरकारी विभागों की पोल खोलती सीएजी रिपोर्ट

    भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक, सीएजी की रिपोर्ट की अजीब स्थिति है. सरकारी पक्ष नहीं चाहता कि इस रिपोर्ट को कोई और देख ले, विपक्ष नहीं देख पाता क्योंकि इस रिपोर्ट में उनकी सरकारों के बारे में भी टिप्पणियां होती हैं. सीएजी की रिपोर्ट से गुज़रते हुए आप तमाम विभागों की हालत तमाम राज्यों में समझ सकते हैं.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : क्या निजता के लिए नया क़ानून बने?

    प्राइम टाइम इंट्रो : क्या निजता के लिए नया क़ानून बने?

    26 जनवरी 1950 के संविधान लागू होने के 67 साल बाद भारत की सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ इस बात पर विचार कर रही है कि निजता, प्राइवेसी आपका मौलिक अधिकार है या नहीं. 9 जजों की बेंच के सामने यह सवाल आधार के संदर्भ में आया है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : किसानों की समस्याओं का हल क्या?

    प्राइम टाइम इंट्रो : किसानों की समस्याओं का हल क्या?

    समस्या यह है कि किसान दिल्ली आ जाते हैं तब भी कोई नहीं सुनता, मीडिया में आ जाते हैं तब भी किसी को फर्क नहीं पड़ता. ऐसा नहीं है कि सरकार कुछ करने का दावा नहीं करती है, उसके तमाम दावों और योजनाओं और उनकी वेबसाइट के बाद भी खेती का संकट जहां तहां से निकल ही आता है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : ये सीवर हैं या मौत के कुएं?

    प्राइम टाइम इंट्रो : ये सीवर हैं या मौत के कुएं?

    स्वर्ण सिंह, दीपू, अनिल और बलविंदर ये न तो विधायकों के नाम हैं और न ही सांसदों के. न ही ये लोग दल-बदल कर सरकार बनाने का प्रयास कर रहे थे. बहुतों के लिहाज़ से बड़ा काम नहीं कर रहे थे, मेरे लिहाज़ से अगर ये अपना काम नहीं करते तो सीवेज का गंदा पानी हमारे आपके घरों में भर आता. ये चारों लोग 14 जुलाई के दिन दिल्ली के घिटोरनी में एक सेप्टिक टैंक की सफाई करते वक्त मारे गए. टैंक में बनने वाली ज़हरीले गैस से इनका दम घुट गया

  • प्राइम टाइम इंट्रो : पेड न्‍यूज से लेकर फेक न्‍यूज तक

    प्राइम टाइम इंट्रो : पेड न्‍यूज से लेकर फेक न्‍यूज तक

    फेक न्यूज़ का एक और हमसफ़र है पेड न्यूज़. पैसा लेने का तत्व पेड न्यूज़ में भी है और फेक न्यूज़ में भी है. चुनावों में पेड न्यूज़ का क्या आतंक है आप किसी भी दल के उम्मीदवार से पूछ लीजिए. अब पेड न्यूज़ के कई तरीके आ गए हैं.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : फ़ेक न्यूज़ को कैसे पहचानें?

    प्राइम टाइम इंट्रो : फ़ेक न्यूज़ को कैसे पहचानें?

    फेक न्यूज़ की यह तीसरी कड़ी है. बड़ी चुनौती है कि कोई कैसे पता लगाए कि फेक न्यूज़ है या नहीं. राजनीतिक विचारधारा से प्रेरित हो कर कई वेबसाइट मौजूद हैं जो न्यूज़ संगठन के भेष में आपके साथ छल कर रही हैं. भारत में इस तरह की कई वेबसाइट हैं जिनके नाम इस तरह से रखे गए हैं जिन्हें देखकर लगता है कि कोई न्यूज़ संगठन होगा. दिक्कत ये है कि इनकी चोरी पकड़ लेने के बाद भी जो सफाई होती है वो उस झूठ का पीछा नहीं कर पाती है जो बहुत दूर निकल चुकी होती है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : फेक न्यूज़ नफरत फैलाने की साजिश?

    प्राइम टाइम इंट्रो : फेक न्यूज़ नफरत फैलाने की साजिश?

    क्या आप फेक न्यूज़ से सावधान हैं? दुनियाभर में फेक न्यूज़ लोकतंत्र का गला घोंटने और तानाशाहों की मौज का ज़रिया बन गया है. राजधानी से लेकर ज़िला स्तर तक फेक न्यूज़ गढ़ने और फैलाने में एक पूरा तंत्र विकसित हो चुका है. यही नहीं संवैधानिक पदों पर बैठे लोग भी फेक न्यूज़ दे रहे हैं. कमज़ोर हो चुका मीडिया उनके सामने सही तथ्यों को रखने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है. पहले पन्ने पर राष्ट्र प्रमुख का बयान छपता है जिसमें फेक जानकारी होती और जब गलती पकड़ी जाती है तो फिर वही अखबार अगले दिन उसी स्पेस में छापने की हिम्मत नहीं जुटा पाता है कि राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री ने झूठा बयान दिया है. मीडिया, पत्रकार और पाठक दर्शक के लिए पता लगाना बहुत जोखिम का काम हो गया है कि न्यूज़ असली है या नकली. पूरी दुनिया में इस बीमारी से लड़ने पर विचार हो रहा है. फेक न्यूज़ से कैसे बचा जाए.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : अमरनाथ यात्रियों पर हमला कश्मीरियत पर धब्बा लगाने की साज़िश?

    प्राइम टाइम इंट्रो : अमरनाथ यात्रियों पर हमला कश्मीरियत पर धब्बा लगाने की साज़िश?

    अमरनाथ यात्रियों पर हमले के बाद की राजनीति ऊपरी स्तर पर कहीं ज़्यादा परिपक्व और संभली हुई है, लेकिन दूसरे दर्जे के नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच इस घटना को लेकर प्रतिक्रियाएं सारी सीमाएं पार कर गई हैं.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : कैसे बचें झूठी खबरों के जंजाल से?

    प्राइम टाइम इंट्रो : कैसे बचें झूठी खबरों के जंजाल से?

    फेक न्यूज़ हर जगह है. हम पत्रकारों को लेकर भी फेक न्यूज़ गढ़ा गया. मुख्यधारा के चैनल और अखबार फेक न्यूज़ का धड़ल्ले से इस्तमाल कर रहे हैं. फेक न्यूज़ का एक ही मकसद है. आप भीड़ का हिस्सा बनें, दंगाई बनें और घर से बाहर न भी निकलें तो भी खाने की मेज़ पर बैठकर धारणाएं गढ़ते रहें कि देखो जी आज कल उनका दिमाग़ चढ़ गया है, वो ऐसे होते हैं, उन्हें ऐसे होना होगा, सबक तो सिखाना ही होगा.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : नशे की गिरफ़्त में फंसते लोग

    प्राइम टाइम इंट्रो : नशे की गिरफ़्त में फंसते लोग

    राजनीति और कूटनीति का रास्ता अलग अलग होता है. राजनीति के रास्ते में राहुल गांधी कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी चीन पर चुप क्यों हैं. कूटनीति के रास्ते प्रधानमंत्री मोदी जर्मनी में चीन के राष्ट्रपति की तारीफ करते हैं.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : चीन का इरादा आखिर क्‍या है?

    प्राइम टाइम इंट्रो : चीन का इरादा आखिर क्‍या है?

    क्या आपने भी महसूस किया है कि जब भी पाकिस्तान की बात आती है हमारा मीडिया का एक बड़ा हिस्सा युद्ध का उन्माद फैलाने लगता है, भारत के संयम को ललकारने लगता है, लेकिन जब चीन की बात आती है तो वही मीडिया और उसके एंकरों की भाषा में रक्षा, रणनीति की शब्दावली तो है लेकिन मार दो, फोड़ दो, दिखा दो टाइप के सड़क छाप विश्लेषण नहीं हैं.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : युवा बेरोज़गार या सरकार बेरोज़गार?

    प्राइम टाइम इंट्रो : युवा बेरोज़गार या सरकार बेरोज़गार?

    समस्याओं के अनगिनत टापू होते हैं, लेकिन जब करीब जाकर देखिये तो टापू में समंदर नज़र आने लगता है, जहां आम जनता जाने कितनी तरह की चुनौतियों का सामना कर रही होती है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : अपनों को हत्यारा बनाने से पहले संभल जाइये!

    प्राइम टाइम इंट्रो : अपनों को हत्यारा बनाने से पहले संभल जाइये!

    उम्मीद है आपके भीतर रेल चलने लगी होगी. रेल की आवाज़ के साथ आपकी सांसों ने आपसे कुछ कहा होगा कि जो हो रहा है वो ठीक नहीं है. भीड़ को राजनैतिक मान्यता मिलने लगी है. औपचारिकता के नाम पर दो तीन दिन बीत जाने के बाद निंदा जैसा बयान आता है. फिर उसके कुछ दिन बाद भीड़ किसी और को मार देती है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : राज्यों पर कर्ज़ माफ़ी का दबाव, केंद्र का कर्ज़ माफ़ी से इनकार

    प्राइम टाइम इंट्रो : राज्यों पर कर्ज़ माफ़ी का दबाव, केंद्र का कर्ज़ माफ़ी से इनकार

    ये भी एक फैशन हो गया है, लोन लिया तो लोन वेभर करो. ये उस बयान का हिस्सा है जो केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने मुंबई में दिया है. किसानों की कर्ज़ माफ़ी फ़ैशन हो गया है. मुंबई में यह बयान दिया है कि कहीं इससे प्रभावित होकर उनकी पार्टी के मुख्यमंत्री देवेंद फडणवीस कर्ज़ माफ़ी का अपना फ़ैसला वापस न ले लें.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : रामनाथ कोविंद आम सहमति से चुने जाएंगे?

    प्राइम टाइम इंट्रो : रामनाथ कोविंद आम सहमति से चुने जाएंगे?

    बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने दलित पृष्ठभूमि को ठीक से रेखांकित कर दिया ताकि उनका दलित होना राज्यपाल, राज्यसभा और वकालत के विशाल अनुभवों के कारण पीछे न रह जाए. सोमवार को बीजेपी संसदीय समिति की बैठक में फैसला हुआ कि बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति पद के लिए एनडीए के उम्मीदवार होंगे.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : कृषि मंत्री योग में हैं, किसान आंदोलन में

    प्राइम टाइम इंट्रो : कृषि मंत्री योग में हैं, किसान आंदोलन में

    महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में किसानों का इतना बड़ा आंदोलन हो गया लेकिन कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह अपने संसदीय क्षेत्र मोतिहारी में बाबा रामदेव के साथ योग कार्यक्रम में दिखाई दिये. ऐसे तनावपूर्ण समय में किसानों के बीच न जाने की सलाह राहुल गांधी को दी गई मगर उस पर बेहतर अमल कृषि मंत्री ने किया. पांच किसानों की मौत के बाद भी कृषि मंत्री नहीं बोले हैं. शायद उनका मन योग में रमा हुआ है. किसानों से बातचीत में भी उनकी कोई भूमिका अभी तक सामने नहीं आई है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : आखिर क्‍या हो रहा है इस मीडिया में...

    प्राइम टाइम इंट्रो : आखिर क्‍या हो रहा है इस मीडिया में...

    इतना भी घबराने की ज़रूरत नहीं है. बस जानने की ज़रूरत है कि इस मीडिया में क्या हो रहा है. फिर आपको समझ आ जाएगा कि आपके साथ क्या होने जा रहा है. डराने वाले ताकतवर होते हैं, यह बात सही है. पर उसका क्या करेंगे जिसके पास ताकत नहीं होती मगर जो डरता नहीं है.