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Prime time intro


'Prime time intro' - 383 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • झारखंड में पेड न्यूज का नया चेहरा

    झारखंड में पेड न्यूज का नया चेहरा

    पेड न्यूज़ का नया रूप आया है. आया है, तो क्या कमाल आया है. क्या आपने या किसी नॉन रेज़िडेंट इंडियन ने यह सुना है कि सरकार अपनी योजनाओं की तारीफ छपवाने के लिए टेंडर निकाले और पत्रकारों से कहे कि वे अर्जी दें कि कैसे तारीफ करेंगे? विदेशों में ऐसा होता है या नहीं, ये तो नान रेज़िडेंट इंडियन ही बता सकते हैं कि क्या वाशिंगटन पोस्ट, गार्डियन, न्यूयार्क टाइम्स अपने पत्रकारों से कहे कि वे सरकार का टेंडर लें, उसकी योजना की जमकर तारीफ करते हुए लेख लिखें और फिर उसे दफ्तर ले आएं ताकि फ्रंट पेज पर छाप सकें? इसलिए कहा कि ऐसा कमाल बहुत कम होता है. युगों-युगों में एक बार होता है जब चाटुकारिता आफिशियल हो जाती है. वैसे भी होती है लेकिन जब विज्ञापन निकले, तारीफ के पैसे मिलें, यह बताया जाए तो चाटुकारिता पारदर्शी हो जाती है.

  • पटना हाईकोर्ट में जज के फैसले से सनसनी क्यों?

    पटना हाईकोर्ट में जज के फैसले से सनसनी क्यों?

    पटना हाई कोर्ट में आज अप्रत्याशित हुआ. जस्टिस राकेश कुमार के फैसले को 24 घंटे के भीतर 11 जजों की बेंच ने निरस्त कर दिया. जस्टिस राकेश कुमार से इस वक्त सारा काम ले लिया गया है. वो किसी केस की सुनवाई नहीं कर रहे हैं. इस फैसले में ऐसा क्या था कि सुबह-सुबह 11 जजों की बैठक हुई और पूरे फैसले को निरस्त किया. जस्टिस राकेश कुमार पूर्व आईएएस अधिकारी केपी रमैय्या की अग्रिम ज़मानत के मामले में सुनवाई कर रहे थे. 23 मार्च 2018 को हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत की याचिका ठुकरा दी थी.

  • जम्मू कश्मीर को लेकर कोर्ट, सरकार और सियासत में घमासान

    जम्मू कश्मीर को लेकर कोर्ट, सरकार और सियासत में घमासान

    श्रीनगर में राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि छह महीने के भीतर कश्मीर में इतना विकास होगा कि उस पार का कश्मीर आहें भरेगा. 50 नए डिग्री कॉलेज खुलेंगे और 50,000 पद दो से तीन महीने में भरे जाएंगे. राज्यपाल मलिक ने बताया कि इंटरनेट की सेवा देर से बहाल होगी, क्योंकि उसका इस्तेमाल आतंक के लिए हो रहा है. मोबाइल फोन के बारे में स्थिति के हिसाब से फैसला लिया जाता रहेगा और लैंडलाइन सेवा हर जगह बहाल कर दी गई है.

  • क्या सरकार के दबाव में है भारतीय रिज़र्व बैंक?

    क्या सरकार के दबाव में है भारतीय रिज़र्व बैंक?

    भारतीय रिजर्व बैंक 1 लाख 76 हजार 51 करोड़ रुपये भारत सरकार को देगा. यह पैसा रिजर्व बैंक की आकस्मिक निधि और सरप्लस का है जिसे अंग्रेज़ी में कंटीजेंसी फंड कहते हैं. 1949 में भारतीय रिज़र्व बैंक अपने मौजूदा स्वरूप में आता है, और तब से लेकर आज तक उसके इतिहास में इतना पैसा कभी रिजर्व बैंक से भारत सरकार को नहीं गया है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : उद्योग जगत को मिल गई इनकम टैक्स से मुक्ति!

    प्राइम टाइम इंट्रो : उद्योग जगत को मिल गई इनकम टैक्स से मुक्ति!

    2014 के बाद शायद यह पहला बड़ा मौक़ा है जब उद्योगपतियों की सुगबुगाहट, खुली नाराज़गी और अर्थव्यवस्था के संकट के दबाव में वित्त मंत्री निमर्ला सीतारमण ने प्रेस कांफ्रेस में कई बड़े एलान किए. ये वो एलान थे जिनके बारे में सरकार के पीछे हटने की उम्मीद कम नज़र आ रही थी

  • भारत की अर्थव्यवस्था में मंदी जैसे हालात क्यों?

    भारत की अर्थव्यवस्था में मंदी जैसे हालात क्यों?

    न्यूज़ चैनल देखने से लगता है कि सारा देश कश्मीर, आबादी और आरक्षण को लेकर व्यस्त है. हो सकता है कि सारा देश व्यस्त हो भी, लेकिन डेढ़ लाख बैंकर इन विषयों को लेकर व्यस्त नहीं हैं. बल्कि इस शनिवार और रविवार तो उन्हें टीवी देखने का भी मौका नहीं मिला होगा कि कश्मीर पर नया बयान क्या आया है. उन्हें यह भी पता नहीं होगा कि चर्चा में दूसरे एंगल से प्रवेश पाने के लिए शिवराज सिंह चौहान और साध्वी प्रज्ञा ने जवाहर लाल नेहरू को अपराधी कहा है. नेहरू को कुछ भी बोलकर आप चैनलों के स्क्रीन पर टिकर से लेकर टिक टैक तक जगह पा सकते हैं. चूंकि नेता लोग नेहरू को अपराधी बताने में व्यस्त हैं, इसलिए डेढ़ लाख बैंकरों से कहा गया होगा कि कम से कम आप लोग अर्थव्यवस्था को लेकर कुछ व्यस्त रहें और आइडिया दें कि भारत की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन का कैसे बनाया जा सकता है.

  • जम्मू-कश्मीर का भरोसा जीतने की मोदी की कोशिश

    जम्मू-कश्मीर का भरोसा जीतने की मोदी की कोशिश

    प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में आतंकवाद से लड़ते हुए जान देने वाले जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के जवानों अफसरों और नागरिकों को भी याद किया. गुलामदीन, कर्नल सोनम वांग्चुक, रुखसाना कौसर, औरंगजेब. संविधान में भरोसा करने वाले नागरिकों सो भरोसा दिलाया कि उनके सपने पूरे होंगे.

  • ऐसे माहौल में कैसे काम करेगा अफसर?

    ऐसे माहौल में कैसे काम करेगा अफसर?

    इंदौर नगर निगम के कर्मचारियों पर बल्ला चलाने के आरोप में जेल बंद आकाश विजयवर्गीय जब बाहर आए तो कहा कि उन्हें पछतावा नहीं है लेकिन अब वे गांधी के रास्ते पर चलेंगे. वैसे गांधी के रास्ते में प्रायश्चित करना भी था. यही क्या कम है कि आज भी लोग गांधी के रास्ते पर चलना चाहते हैं. बस उस रास्ते पर अब गांधी नहीं मिलते हैं. प्रधानमंत्री मोदी पर कांग्रेस ने चौकीदार चौर है का आरोप लगाया तो उन्होंने मैं भी चौकीदार हूं का नारा दिया. इसी से प्रेरित होकर एक गायक ने विधायक आकाश विजयवर्गीय के समर्थन में म्यूज़िक वीडियो लांच किया है. मेरी गुजारिश है कि आकाश को सुपर हीरो बनाने वाले इस वीडियो को आप जब देखें तो गाना समाप्त होने तक चुप रहें और गाना जब समाप्त हो जाए तो उसके बाद भी चुप रहें.

  • क्या गन्ने का जूस बेचेंगे उत्तर प्रदेश के युवा?

    क्या गन्ने का जूस बेचेंगे उत्तर प्रदेश के युवा?

    पकौड़ा तलना भी रोज़गार है. प्रधानमंत्री के इस कथन को राजनीतिक और सामाजिक तौर से बहुतों ने मज़ाक उड़ाया था. मगर 2019 के रिजल्ट ने मज़ाक उड़ाने वालों को नकार दिया. जो लोग अब भी इसका राजनीतिक और सामाजिक मज़ाक उड़ाते हैं उन्हें अपनी राय में संशोधन कर लेना चाहिए. शायद इसी जनसमर्थन से उत्साहित होकर उत्तर प्रदेश सरकार ने 23 जून को एक ट्वीट किया. इस ट्वीट में कहा गया है कि युवाओं को बड़ी संख्या में रोज़गार उपलब्ध कराने की दिशा में अग्रसर यूपी सरकार ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के ज़रिए ऋण मुहैया करवाकर नौजवानों को गन्ने के जूस के कारोबार से जोड़ने का फैसला लिया है.

  • बिहार के सरकारी अस्पतालों की व्यथा-कथा

    बिहार के सरकारी अस्पतालों की व्यथा-कथा

    आज बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने एक ट्वीट किया है कि राबड़ी देवी बताएं, उनके शासन में मेडिकल कॉलेजों की क्या स्थिति थी. यह सुनकर किसी को भी लग सकता है कि राबड़ी देवी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद काफी कुछ सुधार हुआ होगा.

  • बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था कब तक बीमार रहेगी?

    बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था कब तक बीमार रहेगी?

    बिहार के मुज़फ्फरपुर ज़िले में 109 बच्चों की मौत हो चुकी है. यह आधिकारिक आंकड़ा है. मीडिया में आंकड़ा तो 130 पार कर गया है. जब तक हम पूरे बिहार के हेल्थ सिस्टम और बजट को नहीं समझेंगे, बड़े सवाल नहीं करेंगे. श्री कृष्ण मेडिकल कालेज अस्पताल के कुछ वीडियो लेकर तड़क भड़क करने से कुछ नहीं होगा. आप अभी भी स्वास्थ्य से जुड़े असली मसलों से भाग रहे हैं. यह एक दिन का मामला नहीं है.

  • क्या हिंदी को लेकर हमारा समाज उदासीन हुआ?

    क्या हिंदी को लेकर हमारा समाज उदासीन हुआ?

    अगले तीन चरण के चुनाव मुख्य रूप से हिन्दी भाषी प्रदेशों में ही हो रहे हैं. लेकिन इन प्रदेशों में हिन्दी की ही हालत ख़राब है. हिन्दी बोलने वाले नेताओं के स्तर पर क्या ही चर्चा की जाए, उनके भाषणों में करुणा तो जैसे लापता हो गई है. आक्रामकता के नाम पर गुंडई के तेवर नज़र आते हैं. सांप्रदायिकता से लैस हिन्दी ऐसे लगती है जैसे चुनावी रैलियों में बर्छियां चल रही हों. चुनाव के दौरान बोली जाने वाली भाषा का मूल्यांकन हम बेहद सीमित आधार पर करते हैं. यह देखने के लिए कि आचार संहिता का उल्लंघन हुआ है या नहीं. मगर भाषा की भी तो आचार संहिता होती है. उसका अपना संसार होता है,संस्कार होता है. ज्ञान का भंडार होता है. उन सबका क्या.

  • हम कितना असंवेदनशील बनाना चाहते हैं समाज को

    हम कितना असंवेदनशील बनाना चाहते हैं समाज को

    भोपाल से बीजेपी की उम्मीदवार प्रज्ञा ठाकुर ने भले ही अपने बयान से किनारा कर लिया लेकिन हेमंत करकरे के बारे में उनके बयान का असर गया नहीं है. प्रज्ञा ठाकुर भले ही इस बयान को छोड़ अपने राजनीतिक प्रचार में आगे निकल गईं हैं मगर उनके बयान हेमंत करकरे के साथ काम करने वाले पुलिस अफसरों की अंतरात्मा को चुनौती दे रहे हैं.

  • कांग्रेस के घोषणा पत्र में न्याय योजना सबसे ख़ास

    कांग्रेस के घोषणा पत्र में न्याय योजना सबसे ख़ास

    2019 के चुनावों के लिए कांग्रेस का घोषणा पत्र आ गया है. इधर-उधर के बयानों से बेहतर है कि अब घोषणा पत्रों में लिखी गई बातों को पकड़ा जाए. उन्हें याद रखा जाए. उसी तरह से जैसे 2014 के चुनावों में बीजेपी के घोषणा पत्र की कई बातों को पूरे पांच साल याद रखा गया. कांग्रेस के घोषणा पत्र के कवर पर लिखा है हम निभाएंगे. पहले पन्ने पर राहुल गांधी का बयान लिखा है कि मेरा किया हुआ वादा मैंने कभी नहीं तोड़ा. प्रस्तावना में राहुल गांधी ने लिखा है कि पांच साल में जो सबसे ख़तरनाक चीज़ें हुईं हैं वह यह कि आम जनता के बीच प्रधानमंत्री और उनके मंत्रिमंडल के शब्दों ने अपना विश्वास खो दिया है. उन्होंने हमें केवल खोखले वादे, असफल कार्यक्रम, झूठे आंकड़े, भय और नफरत का वातारण दिया है.

  • क्या एक साल में 20 लाख पद भरे जा सकेंगे?

    क्या एक साल में 20 लाख पद भरे जा सकेंगे?

    राहुल गांधी ने कहा है कि उनकी सरकार आई तो 31 मार्च 2020 तक 22 लाख सरकारी वैकेंसी को भर देंगे. नंबर भी है और डेडलाइन भी. क्या वाकई कोई सरकार 26 मई 2019 को शपथ लेकर 31 मार्च 2020 तक 22 लाख नौजवानों को नौकरी दे सकती है? लगता है राहुल गांधी प्राइम टाइम देखने लगे हैं. यह सही है कि हम डेढ़ साल से नौकरी सीरीज़ के भंवर में फंसे हुए हैं.

  • पहली बार सियासी बातचीत में छाया 'चौकीदार'

    पहली बार सियासी बातचीत में छाया 'चौकीदार'

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 मार्च को देश भर के असली चौकीदारों से बात करेंगे. शाम साढ़े चार बजे यह बातचीत होगी. दावा किया जा रहा है कि 25 लाख चौकीदारों को संबोधित किया जाएगा. 31 मार्च को उन चौकीदारों से भी बात करेंगे जो ट्विटर पर बने हैं. इसका मतलब यह हुआ कि बीजेपी चौकीदार वाले अभियान को लेकर गंभीर है. तो हमने सोचा कि उन 25 लाख चौकीदारों में से झारखंड में 10,000 चौकीदारों का हाल पहले ही बता दें, जिन्हें कई महीनों से सैलरी नहीं मिली है. कुछ ज़िलों में नवंबर से सैलरी नहीं मिली है तो कुछ ज़िलों में जनवरी के बाद सैलरी नहीं मिली है. हर त्योहार से पहले इनकी यही खबर होती है कि दिवाली से पहले वेतन नहीं मिला तो फीकी रहेगी दिवाली और होली से पहले वेतन नहीं मिला तो फीकी रहेगी होली.

  • पत्रकारों को अवमानना की सजा सुनाने पर सवाल

    पत्रकारों को अवमानना की सजा सुनाने पर सवाल

    इस चुनाव में मीडिया भी एक मुद्दा है. इस मीडिया के लिए आप कैसे लड़ेंगे यह एक मुश्किल सवाल है, मीडिया खुद के लिए लड़ पाएगा या नहीं यह उसका सवाल है. मगर मीडिया एक मुद्दा है. मीडिया पर इस तरह हमला है और इतना हमला है कि आप भी किन-किन सवालों की परवाह करेंगे, और इसी तरह धीरे-धीरे आप उन सवालों को नज़रअंदाज़ कर सामान्य होने लगेंगे.

  • युद्ध का विरोध करना युद्ध से घबराने की बात नहीं

    युद्ध का विरोध करना युद्ध से घबराने की बात नहीं

    जिसकी आशंका की जा रही है उसकी एक झलक आज दिखी है. अगर यह उसी दिशा में जाती दिख रही है तो अब सबको गंभीर होकर सोचना चाहिए. क्या बुधवार की सुबह जो हुआ वह भारत पाकिस्तान को युद्ध की लेकर जा सकता है.

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