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Rail ministry


'Rail ministry' - 40 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • यात्रियों की सुरक्षा के लिए रेलवे ने उठाया बड़ा कदम, अब प्लेन की तरह ट्रेनों में भी होगा ब्लैक बॉक्स

    यात्रियों की सुरक्षा के लिए रेलवे ने उठाया बड़ा कदम, अब प्लेन की तरह ट्रेनों में भी होगा ब्लैक बॉक्स

    रेलयात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेल ने लोको कैब वॉइस रिकॉर्डिंग (एलसीवीआर) डिवाइस इंजन में लगाने का फैसला किया है. यह जानकारी रेल मंत्रालय के एक अधिकारी ने दी. 

  • आखिर कैसे रुकें रेल दुर्घटनाएं, जब पटरियों की मरम्मत करने वाले गैंगमैन के खाली हैं हजारों पद

    आखिर कैसे रुकें रेल दुर्घटनाएं, जब पटरियों की मरम्मत करने वाले गैंगमैन के खाली हैं हजारों पद

    पटरियों की चेकिंग से लेकर मरम्मत का कार्य जो गैंगमैन करते हैं, सिर्फ उनके 60 हजार से ज्यादा पद खाली हैं. वहीं अन्य स्तर के 1.31 पद खाली हैं. जिससे रेल दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सही दिशा में रेलवे के प्लान आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं. 

  • रेलवे ने जारी किए 5 सालों में सुरक्षा के बेहतर आंकड़े, इस साल हादसों में सबसे कम मौतें

    रेलवे ने जारी किए 5 सालों में सुरक्षा के बेहतर आंकड़े, इस साल हादसों में सबसे कम मौतें

    रेल मंत्रालय के एक अधिकारी ने आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए यह जानकारी दी है.

  • रेल मंत्री ने ट्वीट किया है...

    रेल मंत्री ने ट्वीट किया है...

    रेलमंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट किया है कि अप्रैल-जून में हुई लेटलतीफी की तुलना में जुलाई में 10 प्रतिशत का सुधार हुआ है.

  • 707 रेलवे स्टेशनों पर वाई-फाई सुविधा शुरू : केंद्र

    707 रेलवे स्टेशनों पर वाई-फाई सुविधा शुरू : केंद्र

    रेल मंत्रालय ने हाल्ट स्टेशनों को छोड़कर सभी स्टेशनों पर नि:शुल्क वाई-फाई सुविधा प्रदान करने का फैसला किया है. रेल राज्य मंत्री राजेन गोहेन ने बुधवार को लोकसभा में कहा, "वर्ष 2016-17 में 100 स्टेशनों पर, वर्ष 2017-18 में 200 स्टेशनों पर और वर्ष 2018-19 में 500 स्टेशनों पर वाई-फाई सुविधा प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया था. इसके मद्देनजर अब तक कुल 707 स्टेशनों पर वाई-फाई सुविधा शुरू कर दी गई है."

  • रेल का धंधा डबल मगर कर्मचारी 18 लाख से घटकर 13 लाख...

    रेल का धंधा डबल मगर कर्मचारी 18 लाख से घटकर 13 लाख...

    लोकसभा टीवी के अनुराग पुनेठा के सवाल का जवाब देते हुए भारतीय रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्विनी लोहानी कहते हैं कि रेलवे लगातार कर्मचारियों की संख्या में कमी लाती जा रही है. जब बिजनेस डबल हो चुका है तब हम पहले के 18 लाख कर्मचारियों की तुलना में 13 लाख पर आ गए. लोहानी कहते हैं कि हमें वैकेंसी भरनी हैं अन्यथा रेलवे चला नहीं पाएंगे.

  • सरकार को नौकरों की कितनी चिंता?

    सरकार को नौकरों की कितनी चिंता?

    देहरादून का एक वीडियो वायरल हो रहा है. 28 जून के इस वीडियो में दिख रहा है उसमें देखने के लिए कई बातें हैं. एक अध्यापिका हैं जो सिस्टम से झुंझलाई हुई हैं, उनकी कोई नहीं सुन रहा है, सामने एक मुख्यमंत्री हैं जो बैठे तो हैं सुनने के लिए मगर सुनते ही झुंझला जा रहे हैं, एक मीडिया है जो कभी आम लोगों की समस्या से वास्ता नहीं रखता मगर एक मुख्यमंत्री ने बेअदबी की है तो उसमें चटखारे ले रहा है.

  • रेलवे में दस लाख नौकरियों का दावा कब पूरा होगा ?

    रेलवे में दस लाख नौकरियों का दावा कब पूरा होगा ?

    भारत का नौजवान जिन सवालों पर नेताओं को बोलते सुनना चाहता है, नेता पूरी कोशिश में लगे हैं कि उन सवालों पर न बोला जाए. टीवी के ज़रिए सवालों से देश को बहकाकर वहां ले जाया जा रहा है जहां उस बहस का कोई मतलब नहीं मगर उस बहस में चंद मिनटों का रोमांच ज़रूर है. लम्हों को धोखा देकर पीढ़ियों को बर्बाद किया जा रहा है. अच्छी बात यही है कि भारत के नौजवानों ने भी कसम खा ली है कि राजनीति के इस खेल को नहीं समझना है वरना इंदौर की डॉक्टर स्मृति लहरपुरे ने फीस के जिस दबाव में आत्महत्या की है, उस सवाल पर नेताओं को फर्क भले न पड़े, नौजवानों का सर शर्म से झुक जाना चाहिए था. अच्छी बात है कि कुछ मेडिकल संस्थानों के छात्रों ने स्मृति लहरपुरे के समर्थन में प्रदर्शन किया है. देश के ढाई करोड़ नौजवान 31 मार्च से इंतज़ार कर रहे हैं कि रेलवे के ग्रुप-डी और ग्रुप-सी की जो परीक्षा का फॉर्म भरा था वो परीक्षा कब होगी.

  • रेलवे को लेकर सरकार के दावे ज़मीन पर कितने खरे?

    रेलवे को लेकर सरकार के दावे ज़मीन पर कितने खरे?

    इधर कुछ दिनों में रेल मंत्री और रेलवे बोर्ड के चैयरमैन के लेट से चलने को लेकर कई बयान आए हैं. हम उन बयानों के ज़रिए समीक्षा करेंगे कि कारण क्या है, सवाल क्या है और सबके जवाब क्या हैं. क्या सभी एक बात कर रहे हैं या जो कह रहे हैं वो सही बात कर रहे हैं.

  • भारतीय ट्रेनों की लेटलतीफ़ी की दास्तान

    भारतीय ट्रेनों की लेटलतीफ़ी की दास्तान

    मोदी सरकार के चार साल हुए हैं तो रेल मंत्रालय के भी चार साल हुए हैं. इस दौरान दो काबिल नेताओं को रेल मंत्री बनने का मौका मिला है. पहले सुरेश प्रभु और फिर डाइनैमिक पीयूष गोयल. आपके जमा टैक्स से रेल मंत्रालय के विज्ञापनों में न तो ट्रेन के देरी से चलने का डिटेल होता है और न ही प्लेटफार्म पर ठंडे पानी की ख़राब वेडिंग मशीन का.

  • भारतीय रेल की लेटलतीफ़ी कब ख़त्म होगी?

    भारतीय रेल की लेटलतीफ़ी कब ख़त्म होगी?

    भारतीय रेल की देर से चलने की बीमारी किस हद तक पहुंच गई इसका एक किस्सा बताता हूं. देरी से चलने की आदत ऐसी हो गई है कि एक सांसद जी अपने क्षेत्र में रेलगाड़ी के स्टॉपेज का स्वागत करने पहुंच गए. अपने समय से पहुंचे लेकिन ट्रेन उनके चले जाने के कई घंटे बाद तक नहीं आई.

  • क्या रेलयात्री अपने अधिकारों पर ज़ोर देते हैं?

    क्या रेलयात्री अपने अधिकारों पर ज़ोर देते हैं?

    भारतीय रेल की एक खूबी है. वो जैसे चाहती है यात्री उसके हिसाब से ढल जाते हैं. अगर ट्रेन 30 घंटे की देरी से चले तो यात्री उसके हिसाब से एडजस्ट हो जाते हैं. असुविधाओं से एडस्ट होना यात्री होना होता है. हम रेल के हर सवाल से इतना एडजस्ट कर चुके हैं कि तीस घंटे की देरी से पहुंच कर भी सीधा घर चले जाते हैं. क्योंकि हम अपने समय का सम्मान नहीं करते हैं.

  • यूपी-बिहार की ट्रेनें सबसे ज़्यादा देरी से क्यों?

    यूपी-बिहार की ट्रेनें सबसे ज़्यादा देरी से क्यों?

    आज जब सुबह एक यात्री दर्शक ने रेलवे टाइम टेबल का स्क्रीन शॉट भेजा कि अमृतसर से दरभंगा के बीच चलने वाली 15212 जननायक एक्सप्रेस 57 घंटे लेट है तो यकीन नहीं हुआ. 44 घंटे तक लेट चलने वाली ट्रेन से सामाना हो चुका था मगर 57 घंटे ट्रेन चलती होगी, इस सूचना को ग्रहण करने की मानसिक तैयारी नहीं थी. जननायक एक्सप्रेस अमृतसर से दरभंगा के बीच चलती है. इसमें सारी बोगी जनरल होती है, क्योंकि इससे बिहार के मज़दूर पंजाब मंज़दूरी करने जाते हैं.

  • भारतीय रेल लेटलतीफ़ी की शिकार क्यों?

    भारतीय रेल लेटलतीफ़ी की शिकार क्यों?

    क्या आप ऐसी ट्रेन का इंतज़ार करना चाहेंगे तो 44 घंटे लेट चलती हो. यही एक ट्रेन नहीं है. रेल यात्रियों से बात कीजिए. 7 घंटे से लेकर 44 घंटे की देरी से चलने वाली ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों से बात कीजिए, उनकी पीड़ा आपसे सुनी नहीं जाएगी.

  • 1 मई को दिल्ली से चली सीमांचल एक्‍सप्रेस 4 मई तक जोगबनी नहीं पहुंची, रेल मंत्री कहां हैं...

    1 मई को दिल्ली से चली सीमांचल एक्‍सप्रेस 4 मई तक जोगबनी नहीं पहुंची, रेल मंत्री कहां हैं...

    1 मई को आनंद विहार से चली 12488 सीमांचल एक्‍सप्रेस 4 मई तक जोगबनी नहीं पहुंची है. शनिवार सुबह एक यात्री का मेल आया तो अब हैरानी नहीं हुई बल्कि शर्म आई कि चार दिनों में भी रेल अपनी मंज़िल पर नहीं पहुंच पाती है.

  • रेलगाड़ियां 30-30 घंटे तक लेट कैसे हो जाती हैं?

    रेलगाड़ियां 30-30 घंटे तक लेट कैसे हो जाती हैं?

    बिहार के जयनगर से चल कर नई दिल्ली आने वाली स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस पिछले कई महीनों से कई घंटे की देरी से चल रही थी. जब हमने इस ट्रेन की पिछले दो चार दिनों का रिकॉर्ड देखा तो यह ट्रेन 20 से 30 घंटे की देरी से चल रही थी. हमने कहा कि जब तक यह ट्रेन समय से नहीं चलेगी हम इसका बार बार प्राइम टाइम में ज़िक्र करते रहेंगे.

  • रेलगाड़ियां समय पर क्यों नहीं पहुंच सकतीं?

    रेलगाड़ियां समय पर क्यों नहीं पहुंच सकतीं?

    ट्रेन तो हमेशा ही देर चलती रही है, तो क्या इसी कारण यह सवाल पूछना बंद कर दिया जाए कि ट्रेन लेट क्यों चल रही है. इस वक्त तो कुहासा भी नहीं है न ही तीज त्योहारों के कारण स्पेशल ट्रेन की संख्या बढ़ी है, फिर भी कई ट्रेनें बीस से तीस घंटे की देरी से क्यों चल रही हैं.

  • अगर आपको रेलवे से कोई शिकायत है, तो 'मदद' एप्प बनेगा मददगार

    अगर आपको रेलवे से कोई शिकायत है, तो 'मदद' एप्प बनेगा मददगार

    अगर आप रेलवे से संबंधित कोई शिकायत दर्ज कराना चाहते हैं तो इसके लिए आपके पास ट्विटर, फेसबुक, हेल्पलाइन या शिकायत रजिस्टर आदि की सुविधा है. लेकिन अब रेलवे इससे आगे एक कदम बढ़ा रहा है. रेलवे इस महीने के आखिरी में ‘मदद’ (मोबाइल एप्लीकेशन फॉर डिजायर्ड असिस्टेन्स ड्यूरिंग ट्रैवल ) के नाम से एक मोबाइल एप्लीकेशन लाने जा रहा है जिसके जरिए यात्री खाने की गुणवत्ता या गंदे शौचालय या किसी अन्य मुद्दे पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे. इस एप के जरिए वे आपात सेवाओं के लिए भी आग्रह कर सकेंगे. 

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