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Rakesh kumar malviya


'Rakesh kumar malviya' - 88 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • 'ट्रेन में ठंड से कंपकपी छूट रही थी... एक अनजाने हाथ ने आकर चादर डाल दी...'

    'ट्रेन में ठंड से कंपकपी छूट रही थी... एक अनजाने हाथ ने आकर चादर डाल दी...'

    एक रात जब आप रेल के सफर में हों और चादर छूट जाए तो. स्लीपर कोच में सर्द हवाओं और अंदर से उठती हल्की सी कंपकंपी से बचने का सिवाए एक ही रास्ता कि आप अपने शरीर को सिकोड़ लें, घुटनों को उपर तक लें आएं या बैग में पड़े कुछ कपड़ों का जुगाड़ करने का सोचें. इस स्थिति में ऐसा भी हो सकता है कि अनजाना सा हाथ आपके शरीर पर बिना कोई जान-पहचान के आपके सिकुड़े हुए शरीर पर चादर फैला दे और उसके बाद आप सुकून से आपकी रात गुजर जाए.

  • क्या रेप रोक पाने में कारगर होगा एमपी का फांसी फार्मूला?

    क्या रेप रोक पाने में कारगर होगा एमपी का फांसी फार्मूला?

    पिछले कई सालों से मध्यप्रदेश में बच्‍चों और महिलाओं पर अपराध के मामलों में अव्‍वल है. अब मप्र ही पहला ऐसा राज्य बनने जा रहा है जहां बलात्कारियों को मृत्युदंड की सजा दी जाएगी. मध्यप्रदेश में अगले साल चुनाव हैं, स्‍वाभाविक रूप से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी सक्रियता तेज कर दी है.

  • गुजरात चुनाव : CD छोड़िए, इन मुद्दों का तो पोस्टर भी नहीं बनता

    गुजरात चुनाव : CD छोड़िए, इन मुद्दों का तो पोस्टर भी नहीं बनता

    जब गुजरात सरीखे राज्य में चुनावी बयार शुरू होकर धीरे-धीरे पूरे मुल्क में इसलिए बिखरेगी, क्योंकि यह तो सीधे तौर पर प्रधानमंत्री की साख का मामला है. विपक्ष इसलिए पूरा ज़ोर लगाएगा, क्योंकि गुजरात जीत लिया तो उनका आधा रास्ता तय हो जाएगा. इसलिए दोनों ही स्तरों पर यह प्रतिष्ठा का विषय तो है ही.

  • क्या हम शिक्षकों को पढ़ाने देंगे?

    क्या हम शिक्षकों को पढ़ाने देंगे?

    बहुत पहले से शिक्षकों के जनगणना में डयूटी लगाए जाने सहित कई तरह के गैर शैक्षणिक कार्यों के कार्टून अखबारों में बनते-छपते रहे हैं. इसमें नया यह है कि इस बात को भी अब नापा-तौला जाएगा कि एक समाज में शिक्षक की हैसियत क्या है और उसकी छवि को समाज में किस तरह से गढ़ा जा रहा है. इसमें सबसे बड़ी विडंबना यही है कि नीतिगत रूप से उसकी भूमिका शिक्षक से ज्यादा प्रबंधन की मानी जाने लगी है, ठीक अखबारों के संपादकों जैसी.

  • टोल की सड़कों पर इतराना कैसा …?

    टोल की सड़कों पर इतराना कैसा …?

    भारतीय जनता पार्टी में मोदी-अमित युग आने के बाद देश के टॉप टेन भाजपाई लीडर्स में शुमार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सड़क पर दिए बयान की आम जनता में भद पि‍ट रही है, क्‍योंकि वह रोज सड़कों पर नि‍कलती है और उनकी सच्‍चाई जानती है. क्या मध्यप्रदेश में वाकई सड़कों की हालत बेहतर है और क्या सचमुच इतनी बेहतर है कि अमेरिका से भी अच्छी हैं, इस बात पर तमाम तरह का मजाक हो सकता है और हुआ भी.

  • क्या ट्रैक्टर के लिए कार जैसा लोन मिल सकता है ?

    क्या ट्रैक्टर के लिए कार जैसा लोन मिल सकता है ?

    सवाल यह है कि जब मध्‍यमवर्गीय नौकरीपेशा वर्ग पर बैंक इतनी आसानी से भरोसा कर सकती है, जि‍स पर भी मंदी की मार से नौकरी जाने का खतरा लगातार मंडराता ही रहता है, तब वह कि‍सानों पर ऐसा भरोसा क्‍यों नहीं कर पाती ? क्‍या बैंकों का नजरि‍या भी यह नहीं बताता कि भारत के अंदर कि‍सानों की हालत इतनी ज्‍यादा खराब है, जि‍स पर बैंक भरोसा ही नहीं करते और उनको उस ‘फोर पीज’ से भी नीचे की कैटेग‍री में डाल दि‍या गया है, जि‍न्‍हें बैंक लोन देने से कतराते हैं. आपको शायद याद हो, क्‍योंकि यह ज्‍यादा पुरानी बात नहीं जब खेती को जीवन जीने के संसाधनों में ‘सबसे उत्तम’ माना-कहा जाता था.

  • कैसे पूरा होगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गरीबी हटाओ का नारा?

    कैसे पूरा होगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गरीबी हटाओ का नारा?

    इधर देश के प्रधानमंत्री ने गरीबी हटाओ का नारा दिया और उसके दो दिन बाद ग्लोबल हंगर इंडेक्स ने बताया कि भारत इसमें तीन अंक नीचे खिसक गया है.

  • सुप्रीम कोर्ट का फैसला बेहद अहम, लेकिन क्या रुकेंगे बच्चों के खिलाफ अपराध...?

    सुप्रीम कोर्ट का फैसला बेहद अहम, लेकिन क्या रुकेंगे बच्चों के खिलाफ अपराध...?

    देखा जाए तो इस फैसले के लागू किए जाने के पहले ही देश के एक और कानून 'बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम' का उल्लंघन हो चुका होता है. इसका उल्‍लंघन करने पर भी कड़े प्रावधान किए गए हैं, लेकिन हर साल सरकार खुद ही यह बताती है कि उसने देश में लाखों बाल विवाह होने से रोके हैं.

  • नवरात्रि में नारी शक्ति की यह कैसी पूजा ?

    नवरात्रि में नारी शक्ति की यह कैसी पूजा ?

    नवरात्रि  में हमारा समाज कन्याओं की पूजा करता आया है. उन्हें भोजन पर आमंत्रित किया जाता है. चरण धोकर स्वागत किया जाता है.

  • माफ कीजि‍ए, मैं यह पुरस्‍कार नहीं ले सकता!

    माफ कीजि‍ए, मैं यह पुरस्‍कार नहीं ले सकता!

    खेती-किसानी करने वाला एक सामान्‍य व्यक्ति मुख्यमंत्री के हाथों मिलने जा रहा सम्मान लौटा दे तो चर्चा होना स्वाभाविक ही है. असहिष्णुता के मुद्दे पर नामचीन साहित्यकारों ने पुरस्‍कार वापस कर दि‍ए थे, इसकी खूब प्रतिक्रिया भी हुई थी. हाल-फि‍लहाल एक किसान द्वारा पुरस्‍कार लेने से मना कर देना का यह पहला मामला है. यह कि‍सान हैं बाबूलाल दाहिया.

  • हमने घर बैठे-बैठे ही, सारा मंज़र देख लिया...

    हमने घर बैठे-बैठे ही, सारा मंज़र देख लिया...

    पिछले दिनों ख्यात व्यंग्यकार हरिशंकर परसाईं की जन्मस्थली जमानी गांव में आयोजित संगोष्ठी में किसी ने कहा था कि परसाईं इस वक्त ऐसा लिख रहे होते, तो जेल में होते, संभवत: दुष्यंत को भी रोज़-ब-रोज़ ट्रोल कर दिया जाता.

  • जो सच-सच बोलेंगे मारे जाएंगे

    जो सच-सच बोलेंगे मारे जाएंगे

    पत्रकार गौरी लंकेश मानवता के लिए कोई खतरा पैदा नहीं कर रही थी. उससे पहले कलबुर्गी, दाभोलकर, पनसारे और ऐसे कई और नाम भी मानवता के लिए कोई खतरा पैदा नहीं कर रहे थे. हो सकता है, कि उनकी लिखी, खोली गई बातें किसी भी पक्ष को चुभने वाली हों, लेकिन यही तो उनकी जिम्मेदारी भी थी.

  • अब भी अधूरा है एक शि‍क्षक का 'दिवास्वप्न'... जानते हैं यह क्या है?

    अब भी अधूरा है एक शि‍क्षक का 'दिवास्वप्न'... जानते हैं यह क्या है?

    शिक्षक दिवस के मौके पर आप 85 पेज की एक छोटी सी किताब को पढ़कर इतना सब कुछ हासिल कर सकते हैं जो न केवल आपकी कक्षाओं में अपितु जीवन में बड़े रूप में काम आ सकता है

  • यूं ही नहीं हुईं 30 बच्चों की मौत, भयावह है सरकारी अस्पतालों का सच

    यूं ही नहीं हुईं 30 बच्चों की मौत, भयावह है सरकारी अस्पतालों का सच

    इंदौर में सबसे अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं मिलने का दावा किया जाता है. एमवाय अस्पताल में दो महीने पहले 17 लोगों की कुछ घंटों में ही मौत हो गई थी.

  • रियल लाइफ में भी ‘मेरा बाप चोर है!’

    रियल लाइफ में भी ‘मेरा बाप चोर है!’

    आपको दीवार फिल्म याद है! दीवार फिल्म का अमिताभ बच्चन यानी ‘विजय’ याद है. आपको विजय के हाथ पर लिखा ‘मेरा बाप चोर है’ याद है? होगा ही… आखिर इसी फिल्म के बलबूते तो सदी के महानायक अमिताभ बच्चन का करियर परवान चढ़ा. अलबत्ता हाथ पर लिखी यह इबारत रील पर सबसे बड़ा ड्रामा साबित हुई.

  • हि‍दुस्‍तान की ऐसी तस्‍वीर जि‍से आप नहीं देखना चाहेंगे...

    हि‍दुस्‍तान की ऐसी तस्‍वीर जि‍से आप नहीं देखना चाहेंगे...

    पूरे नौ माह तक अपनी कोख में एक जीवन पाल रही स्त्री के सामने ठीक अंतिम क्षण इतने भारी पड़ने वाले होंगे किसने सोचा होगा. एक शिशु का जन्म लेते ही धरती पर यूं गिर जाना, और जन्म लेते ही मौत को पा जाना, यह दुखों का कितना बड़ा पहाड़ होगा, क्या हम और आप सोच सकते हैं, इस दर्द को महसूस कर सकते हैं, क्या इस दर्द को दूर कर सकते हैं?

  • देश के सरकारी प्राइमरी स्कूलों में नौ लाख शिक्षक कम, कैसे सुधरेगी गुणवत्ता

    देश के सरकारी प्राइमरी स्कूलों में नौ लाख शिक्षक कम, कैसे सुधरेगी गुणवत्ता

    देश में यूपीए सरकार अपनी जिन उपलब्धियों को बताती रही है उनमें शिक्षा का अधिकार भी शामिल था. एक अप्रैल 2010 से इसे देशभर में लागू किया गया था और तीन साल की समय सीमा में इसके प्रावधानों को जमीनी स्तर पर लागू किया जाना था. बहरहाल यूपीए सरकार इसे समय सीमा में नहीं कर पाई और इस अवधि को दो साल और बढ़ा दिया गया.

  • चम्पारण बनाम कोल्हान : किसे याद रखेंगे हम...?

    चम्पारण बनाम कोल्हान : किसे याद रखेंगे हम...?

    सोचना होगा कि इस देश में शांति की स्थापना के लिए युद्ध की वकालत करने वाले लोगों को क्या वास्तव में हिंसा में ही इसका रास्ता दिखता है...? यदि हिंसा में हल को खोजा जाएगा तो यह हल केवल देश की सीमाओं तक नहीं रह पाएगा, यह मानसिकता कब आपकी अपनी चौखट तक चली आएगी, इसका पता भी नहीं चलेगा...

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