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Rakesh malviya blog


'Rakesh malviya blog' - 25 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • क्या आजकल मुख्यमंत्री के गांव में रात बिताने का भी नहीं होता असर...?

    क्या आजकल मुख्यमंत्री के गांव में रात बिताने का भी नहीं होता असर...?

    मुख्यमंत्री ने इस गांव में रात बिताने के बाद माना था कि इस इलाके में भयंकर गरीबी है. उन्होंने कहा था कि वह चुनाव होने के कारण उस वक्त कोई घोषणा नहीं कर सकते, लेकिन चुनाव के बाद पूरी सरकार लेकर जाएंगे और इलाके की तस्वीर बदल देंगे. इलाके की जनता ने इस वादे के बाद भी यहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) को नहीं जिताया. जिस गांव ने मुख्यमंत्री की मेज़बानी की, उस गांव की तस्वीर भी नहीं बदल सकी. प्रधानमंत्री आवास योजना इसका एक उदाहरण मात्र है, और यह गांव कई और योजनाओं से भी अछूता है.

  • हर दो मिनट में होती है तीन बच्चों की मौत, लेकिन यह मुद्दा नहीं...

    हर दो मिनट में होती है तीन बच्चों की मौत, लेकिन यह मुद्दा नहीं...

    आखिर कोई क्यों यह आवाज़ नहीं उठाता है कि दुनिया में शिशु मृत्यु के सर्वाधिक आंकड़े भारत के हैं, जिसके बाद नाइजीरिया का नंबर है. यहां तक कि गरीब देश भी अपने आंकड़े सुधार रहे हैं.

  • एक लाख स्कूल के बच्चों के पास नहीं प्रिय शिक्षक चुनने का विकल्प 

    एक लाख स्कूल के बच्चों के पास नहीं प्रिय शिक्षक चुनने का विकल्प 

    आज शिक्षक दिवस है. देश के तकरीबन 14 लाख स्कूलों के बच्चे अपने प्रिय शिक्षक को तरह-तरह से शुभकामना दे रहे होंगे. किसी ने अपने प्रिय शिक्षक के चेहरे पर मुस्कान बिखेरने के लिए घर के बगीचे से फूल तोड़कर दिया होगा, कुछ ने ग्रीटिंग कार्ड बनाकर दिया होगा. किसी भी आधारभूत सुविधा से ज़्यादा बड़ी ज़रूरत शिक्षक का होना है. हम सभी के ज़हन में अपने-अपने प्रिय या अप्रिय भी शिक्षक की छवि कैद ज़रूर होती है, लेकिन देखिए कि देश की एक बड़ी विडम्बना है कि देश के लाखों बच्चों के पास अपने प्रिय शिक्षक चुनने का विकल्प ही नहीं है, क्योंकि वहां उन्हें पढ़ाने के लिए केवल एक ही शिक्षक मौजूद है. एक ही शिक्षक के भरोसे पूरा स्कूल है, सारी कक्षाएं हैं, ऐसे में आप खुद ही सोच लीजिए कि हमारे देश के ऐसे स्कूल का क्या होने वाला है...? बिना शिक्षक के स्कूल कैसे चलने वाले हैं, भविष्य का भारत कैसे और कैसा बनने वाला है...?

  • बच्चों का अपराधी है हमारा समाज...

    बच्चों का अपराधी है हमारा समाज...

    बच्चे हैं. यूं भी हाशिये पर हैं. लेकिन जो शेल्टर होम के बच्चे हैं, वे तो भयावह पीड़ा को पहले ही भोग चुके होते हैं. एक जो बच्‍चा शेल्‍टर होम में दाखि‍ल होता है, उसकी सैकड़ों दारुण कहानियां बन चुकी होती हैं.

  • विश्व स्तनपान सप्ताह पर विशेष: एक छोटे से कारण से भारत की अर्थव्यवस्था का करोड़ों का नुकसान

    विश्व स्तनपान सप्ताह पर विशेष: एक छोटे से कारण से भारत की अर्थव्यवस्था का करोड़ों का नुकसान

    हम सोचते हैं कि देश को बड़े मामलों से नुकसान पहुंचता है, जब शेयर बाजार बैठ जाता है, डॉलर के मुकाबले रुपया गिर जाता है, वगैरह-वगैरह. पर सोचिए कि एक छोटी सी आदत का न होना, या उसके विषय में भ्रांति होने से भी देश भारी गड्ढे में चला जाता है.

  • जो भूख से मरीं, सिर्फ दिल्ली की नहीं, देश की नागरिक थीं

    जो भूख से मरीं, सिर्फ दिल्ली की नहीं, देश की नागरिक थीं

    जिस दिन देश की राजधानी दिल्ली में तीन बच्चियों की भूख से मौत की ख़बर पढ़ी, ठीक उसी दिन अख़बार में एक और ख़बर थी कि अकेले मध्य प्रदेश में 55 लाख टन गेहूं सरप्लस है.

  • विश्व बालश्रम निषेध दिवस : नोबेल पुरस्कार मिलने से बच्चों का क्या बदला...?

    विश्व बालश्रम निषेध दिवस : नोबेल पुरस्कार मिलने से बच्चों का क्या बदला...?

    अंतरराष्ट्रीय बाल श्रमिक दिवस भी ऐसा ही मौका है. भले ही हमें नोबेल पुरस्कार मिल गया हो, लेकिन शर्मनाक है कि देश में बाल मजदूरों की हालत अब भी चिंतनीय बनी हुई है. सरकारी आंखों को बाल मजदूर दिखाई ही नहीं देते हैं, इसलिए वह इस पर लगातार गलत जवाब देते हैं. इसलिए कोई कार्रवाई भी नहीं होती, सब हरा-हरा दिखाई देता है.

  • जी हां, यह हिंदुस्तान का ही एक मकान है...

    जी हां, यह हिंदुस्तान का ही एक मकान है...

    तस्वीर देखकर आप तय कर लीजिए कि इसे घर कहा जाएगा या नहीं कहा जाएगा. हम सोचते हैं कि केवल शहरों में ही बेघरबार लोग सड़कों पर सोते हैं, जिन्हें सड़कों या गलियारों में सोने से रोकने के लिए कीलें ठुकवा दी जाती हैं.

  • टीबी को घेर लि‍या है 'नि‍जीकरण की बीमारी' ने

    टीबी को घेर लि‍या है 'नि‍जीकरण की बीमारी' ने

    यह भी तय कि‍या जाना चाहि‍ए कि यदि 2025 तक देश से टीबी खत्‍म हो रहा है तो क्‍या उसे इस तेज गति से अपना दायरा फैला रहीं और लोगों को गरीबी में धकेल रहीं नि‍जी स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं ले जाएंगी, या इसका रास्‍ता स्‍वास्‍थ्‍य बीमा के जरि‍ए खोजा जाएगा, जि‍सका एक वि‍श्‍लेषण यह भी कहता है कि यह सार्वजनि‍क स्‍वास्‍थ्य सेवाओं के लि‍ए घातक ही साबि‍त होगा.

  • क्या सुरक्षित मातृत्व को गंभीरता से नहीं लेतीं सरकारें

    क्या सुरक्षित मातृत्व को गंभीरता से नहीं लेतीं सरकारें

    अब से तकरीबन 12 साल बाद जब देश में मातृत्व स्वास्थ्य की समीक्षा की जाएगी तो यह देखा जाएगा कि इस संबंध में देश ने अपना आंकड़ा कितना दुरुस्त किया. उसके लिए यह भी जरूरी होगा कि इस विषय पर लगातार और गंभीर काम किए जाएं. आखिर देश में विकास के मानक केवल जीडीपी से ही नहीं तौले जाने चाहिए. देशवासियों का गुणवत्तापूर्ण जीवन सेहत और स्वास्थ्य इसमें बहुत महत्वपूर्ण हैं और यह तभी संभव है जब विकास की दिशा सही तय हो.

  • एक साल में कहां गायब हो गए 63 हजार बच्चे?

    एक साल में कहां गायब हो गए 63 हजार बच्चे?

    नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की 2016 की रिपोर्ट में मिसिंग चिल्ड्रन के बारे में जो आंकड़े आते हैं उनमें सबसे ज्‍यादा चौंकाने वाला तथ्य यह है कि एक साल में इस सेक्शन के तहत गायब होने वाले बच्चों की संख्या में 63407 बच्चे और जुड़ गए हैं.

  • क्या रेप रोक पाने में कारगर होगा एमपी का फांसी फार्मूला?

    क्या रेप रोक पाने में कारगर होगा एमपी का फांसी फार्मूला?

    पिछले कई सालों से मध्यप्रदेश में बच्‍चों और महिलाओं पर अपराध के मामलों में अव्‍वल है. अब मप्र ही पहला ऐसा राज्य बनने जा रहा है जहां बलात्कारियों को मृत्युदंड की सजा दी जाएगी. मध्यप्रदेश में अगले साल चुनाव हैं, स्‍वाभाविक रूप से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी सक्रियता तेज कर दी है.

  • रियल लाइफ में भी ‘मेरा बाप चोर है!’

    रियल लाइफ में भी ‘मेरा बाप चोर है!’

    आपको दीवार फिल्म याद है! दीवार फिल्म का अमिताभ बच्चन यानी ‘विजय’ याद है. आपको विजय के हाथ पर लिखा ‘मेरा बाप चोर है’ याद है? होगा ही… आखिर इसी फिल्म के बलबूते तो सदी के महानायक अमिताभ बच्चन का करियर परवान चढ़ा. अलबत्ता हाथ पर लिखी यह इबारत रील पर सबसे बड़ा ड्रामा साबित हुई.

  • हि‍दुस्‍तान की ऐसी तस्‍वीर जि‍से आप नहीं देखना चाहेंगे...

    हि‍दुस्‍तान की ऐसी तस्‍वीर जि‍से आप नहीं देखना चाहेंगे...

    पूरे नौ माह तक अपनी कोख में एक जीवन पाल रही स्त्री के सामने ठीक अंतिम क्षण इतने भारी पड़ने वाले होंगे किसने सोचा होगा. एक शिशु का जन्म लेते ही धरती पर यूं गिर जाना, और जन्म लेते ही मौत को पा जाना, यह दुखों का कितना बड़ा पहाड़ होगा, क्या हम और आप सोच सकते हैं, इस दर्द को महसूस कर सकते हैं, क्या इस दर्द को दूर कर सकते हैं?

  • बजट में कहा तो... पर क्या टीबी को हराना आसान है?

    बजट में कहा तो... पर क्या टीबी को हराना आसान है?

    आंगन में बैठी इन महिलाओं को गौर से देखिए. इनके माथे पर बिंदी नहीं है. मांग में सिंदूर भी नहीं. ये सभी विधवा हैं. पति को खोने के बाद अब ये लाचार सी जिंदगी जी रही हैं. यह महिलाएं मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले के पोहरी ब्लॉक के एक ही गांव जाखनौद के एक मोहल्ले में रहती हैं. इन सभी के पति टीबी के कारण मौत का असमय ही शिकार हो गए. इस जिले में गांव-गांव की ऐसी ही कहानी है, जहां आपको मोहल्ले के मोहल्ले टीबी से पीड़ित मिलेंगे. शिवपुरी ही क्यों, तकरीबन 17 हजार साल पुरानी टीबी की यह बीमारी चुपचाप देश के गांव-गांव में फैल रही है. शिवपुरी जिले के बारे में तो कहा जाता है कि इस जिले में रहने वाले बच्चे कुपोषण से असमय मरते हैं और सहरिया आदिवासी टीबी से.

  • अरुण जेटली के बजट भाषण से लगा, हम भारत के लोग, टैक्स चोर हैं

    अरुण जेटली के बजट भाषण से लगा, हम भारत के लोग, टैक्स चोर हैं

    यह कहना सही नहीं लगता कि‍ नागरिक देश के लिए अपना योगदान नहीं देते. आरोप तो यह है कि देश की व्यवस्थाएं ही इस कर से देश की सेवा पूरे ईमान से नहीं कर पातीं. थोड़ा-सा व्यंग्य आपने हम पर कर दिया, चलिए, थोड़ा-सा हम भी आप पर कर देते हैं. बजट में हिसाब बराबर हुआ.

  • मध्य प्रदेश का दशरथ मांझी ‘सुखदेव’, पत्थरों में निकाला पानी

    मध्य प्रदेश का दशरथ मांझी ‘सुखदेव’, पत्थरों में निकाला पानी

    वो न ‘शानदार’ बोलता है, न ‘जबर्दस्त’ न ‘जिंदाबाद’. सुखदेव किसी के गम मे बावरे भी न हैं. उनका मानसिक संतुलन बिलकुल ठीक है. लेकिन उनका हौसला बीवी की जुदाई में गमगीन दशरथ मांझी से बिलकुल भी कम नहीं है. वही दशरथ मांझी जिसकी कहानी आप रुपहले परदे पर देख चुके हैं. दशरथ ने पहाड़ तोड़ सड़क निकाल दी, सुखदेव ने बंजर पथरीली जमीन खोद पाताल से पानी निकाल दिया.

  • एक त्रासदी जो हमसे सवाल करती है...

    एक त्रासदी जो हमसे सवाल करती है...

    भोपाल की ज़मीन और उस खूनी कारखाने में अब भी मौजूद हजारों टन जहरीले कचरे को हटाए बिना क्या भोपाल असल मायनों में स्वच्छ हो सकता है.

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