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Ravish Kumar News in Hindi


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  • भारत माता की जय के पवित्र नारे को अर्णब गोस्वामी से बचाइये

    भारत माता की जय के पवित्र नारे को अर्णब गोस्वामी से बचाइये

    अर्णब गोस्वामी ने व्हाट्स एप चैट को लेकर एक बयान जारी किया. उसमें कहीं नहीं लिखा कि चैट फ़र्ज़ी है. बालाकोट हमले की जानकारी के मामले में वे पाकिस्तान को घुसा कर ढाल बना रहे हैं. क्या TRP मामले में भी पाकिस्तान है ?

  • अर्णब के व्हाट्सऐप चैट पर बोलना था PM को, बोल रहे हैं राहुल गांधी, क्यों?

    अर्णब के व्हाट्सऐप चैट पर बोलना था PM को, बोल रहे हैं राहुल गांधी, क्यों?

    राहुल गांधी किसानों को लेकर एक पुस्तिका जारी करने प्रेस कांफ्रेंस में आते हैं. उनसे कई तरह से सवाल-जवाब होते हैं. एक सवाल इस व्हाट्स एप चैट को लेकर चुप्पी के बारे में होता है जिसके जवाब में राहुल गांधी पहले अंग्रेज़ी में और फिर हिन्दी में बोलते हैं.

  • कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन के 50 दिन पूरे

    कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन के 50 दिन पूरे

    संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट की बनाई कमेटी को महत्व नहीं देना चाहता है. कमेटी के सदस्यों को लेकर काफी आलोचना हो रही है और उनकी आलोचना के साथ साथ सुप्रीम कोर्ट की भी हो रही है. किसान आंदोलन के 51 दिन हो गए.

  • किसान संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट की बनाई कमेटी को ठुकराया

    किसान संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट की बनाई कमेटी को ठुकराया

    जितने स्पष्ट किसान थे कि कोर्ट की कमेटी में नहीं जाना है उतना ही स्पष्ट अदालत थी कि कमेटी बनानी ही है. कमेटी बन गई है और सदस्यों के नाम आ गए हैं. सरकार भी चाहती थी कि कमेटी बन जाए. सरकार नहीं चाहती थी कि कानून के लागू होने पर रोक लगे. सुप्रीम कोर्ट ने कानून के लागू होने पर रोक लगा दी है. सोमवार को लगा था कि सरकार कटघरे में है, मंगलवार को लग रहा है किसान कटघरे में हैं.

  • कृषि कानूनों पर सरकार के रुख से सुप्रीम कोर्ट नाराज...

    कृषि कानूनों पर सरकार के रुख से सुप्रीम कोर्ट नाराज...

    आपको विश्वास हो या न हो, हम सुप्रीम कोर्ट हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा तो किसानों से लेकिन अहसास करा दिया सरकार को कि हम सुप्रीम कोर्ट हैं. कोर्ट के सवालों के सामने सरकार के वकील बल्लेबाजों के विकेट कभी उखड़ते नज़र आए तो कभी गेंद कहीं और बल्ला कहीं और. पूरी बहस से अगर आप सरकारी पक्ष के तमाम वकीलों की दलीलों से कुछ वाक्यों को चुन लें तो पता चलता है कि सरकार कितने कमज़ोर दलीलों से लड़ रही है और उसकी असली चिन्ता क्या है?

  • इतनी भी बेरुख़ी से विदा न कीजिए 2020 को, जाने वाला नहीं है

    इतनी भी बेरुख़ी से विदा न कीजिए 2020 को, जाने वाला नहीं है

    यह साल कई सालों तक रहने आया है. तरक्की के जिन रास्तों पर दुनिया चली जा रही थी उसके सफ़र के लिए कुछ ज़रूरी सामान छूट गए थे. उसी को याद दिलाने आया है 2020.

  • किसान आंदोलन का मुक़ाबला सूचना तंत्र से

    किसान आंदोलन का मुक़ाबला सूचना तंत्र से

    एक महीना पहले हाईवे को बीच से काट देने और सीमेंट के बने भीमकाय बोल्डरों से रास्ता रोकने की तस्वीरों से लगा था कि किसान बैरिकेड की दीवार नहीं पार कर पाएंगे. बेशक सरकार ने किसानों को दिल्ली आने से रोक दिया लेकिन किसानों ने भी अपने आंदोलन को बैरिकेड में बदल दिया है. किसान आंदोलन सरकार के बनाए बैरिकेड की दीवारों से अपनी दीवार ऊंची करने लगा. मगर बैरिकेड सिर्फ वही नहीं थे जिसे पुलिस लगा रही थी.

  • किसानों के सवाल बड़े हैं या 2000 रुपये का सम्मान बड़ा है

    किसानों के सवाल बड़े हैं या 2000 रुपये का सम्मान बड़ा है

    प्रधानमंत्री को पैसे की ताक़त में बहुत यक़ीन है. इसलिए वे आंदोलनरत किसानों से बात नहीं कर इस राशि के बहाने किसानों से बात करेंगे.

  • क्या आप व्हाट्स एप में गुड मार्निंग मैसेज भेजने वालों में से हैं

    क्या आप व्हाट्स एप में गुड मार्निंग मैसेज भेजने वालों में से हैं

    किसी दिन इस दुनिया से सूरज अपना लोटा लेकर ग़ायब भी हो जाए और कह दे कि मैंने उगना डूबना छोड़ दिया है तो भी ये लोग मैसेज भेजते रहेंगे.

  • सरदार ने किसानों से कहा पोल्सन को भगाओ, मोदी ने कहा पोल्सन से लिपट जाओ

    सरदार ने किसानों से कहा पोल्सन को भगाओ, मोदी ने कहा पोल्सन से लिपट जाओ

    प्रधानमंत्री कहते हैं कि भारत में कृषि और सहायक सेक्टर का कारोबार 28 लाख करोड़ का है और इसमें से 8 लाख करोड़ अकेले दूध उत्पादन का है. बिना समर्थन मूल्य और मंडी ख़रीद के खुले बाज़ार के कारण ऐसा हुआ है.

  • लगातार बड़ा हो रहा है किसानों के आंदोलन का दायरा

    लगातार बड़ा हो रहा है किसानों के आंदोलन का दायरा

    हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को मंगलवार को किसानों के विरोध का सामना करना पड़ा. मुख्यमंत्री अंबाला में नगरपालिका के चुनाव प्रचार के लिए गए थे लेकिन उनके काफिले के बीचे नारे लगाते किसानों का काफिला चलने लगा.

  • बिहार में मंडी ख़त्म हुई तो बिहार के किसान बर्बाद हो गए

    बिहार में मंडी ख़त्म हुई तो बिहार के किसान बर्बाद हो गए

    बिहार के किसानों को गेहूं और धान का दाम नहीं मिलता है. मक्का और दाल का भी नहीं मिलता है. अगर वहां मंडी होती तो कुछ प्रतिशत ही सही किसानों को MSP तो मिलती.

  • आतंकवादी से अब किसान दलाल हो गया

    आतंकवादी से अब किसान दलाल हो गया

    आवश्यकता है आंदोलन पर बैठे किसानों को एक परिभाषा की. 26 दिन से आंदोलन चल रहा है कि अभी तक सरकार के मंत्री और बीजेपी के विधायक, सांसद आंदोलन पर बैठे किसानों की एक ऐसी परिभाषा नहीं खोज पाए हैं जो सभी को मंज़ूर हो. बीजेपी के वरिष्ठ विधायक और बिहार के कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह ने आंदोलन पर बैठे किसानों को दलाल कहा है. यही नहीं कृषि मंत्री के अनुसार किसान आंदोलन तभी किसानों का कहलाएगा जब देश के 5 लाख गांवों में भी आंदोलन होगा और उन्हें दिखाई देगा.

  • जनता अपने जन-मृत्यु के महाभोज की तैयारी करे, ख़ुश रहे

    जनता अपने जन-मृत्यु के महाभोज की तैयारी करे, ख़ुश रहे

    किसानों की लड़ाई शाहीन बाग़ की तरह हो गई है. धरना तो है लेकिन उसके बाद कुछ नहीं. सरकार को फ़र्क़ नहीं पड़ता है. इसके पहले बेरोजगार लड़ कर हिन्दू मुसलमान में बंट चुके हैं.

  • किसान आंदोलन में सुप्रीम कोर्ट का दखल नहीं

    किसान आंदोलन में सुप्रीम कोर्ट का दखल नहीं

    सुप्रीम कोर्ट में किसान आंदोलन को मौजूदा जगह से हटाने को लेकर याचिकाकर्ता के वकील हरीश साल्वे और सरकार के वकील अटार्नी जनरल तुषार मेहता ने जो दलीलें रखीं हैं उनमें आंदोलनों के भविष्य की झलक देखी जा सकती है. ये वही दलीलें हैं जो शाहीन बाग़ के समय से पब्लिक स्पेस में औपचारिक रूप लेती जा रही हैं.

  • अफवाहों, गलत खबरों का अब किसान देंगे जवाब

    अफवाहों, गलत खबरों का अब किसान देंगे जवाब

    संसद का शीतकालीन सत्र नहीं होगा मगर सर्दी पड़ेगी. शीतकालीन सत्र नहीं होगा यह सुन कर आप यह न सोचें कि सर्दी की छुट्टी हो गई. सिंतबर के महीने में संसद का सत्र होने में कोई दिक्कत नहीं आई जिसमें कृषि विधेयक पास हुए थे, लेकिन दिसंबर के महीने में कोरोना के कारण शीतकालीन सत्र नहीं होगा जब किसान आंदोलन कर रहे हैं.

  • अफवाहों, गलत खबरों का अब किसान देंगे जवाब

    अफवाहों, गलत खबरों का अब किसान देंगे जवाब

    संसद का शीतकालीन सत्र नहीं होगा मगर सर्दी पड़ेगी. शीतकालीन सत्र नहीं होगा यह सुन कर आप यह न सोचें कि सर्दी की छुट्टी हो गई. सिंतबर के महीने में संसद का सत्र होने में कोई दिक्कत नहीं आई जिसमें कृषि विधेयक पास हुए थे, लेकिन दिसंबर के महीने में कोरोना के कारण शीतकालीन सत्र नहीं होगा जब किसान आंदोलन कर रहे हैं.

  • अफवाहों, गलत खबरों का अब किसान देंगे जवाब

    अफवाहों, गलत खबरों का अब किसान देंगे जवाब

    संसद का शीतकालीन सत्र नहीं होगा मगर सर्दी पड़ेगी. शीतकालीन सत्र नहीं होगा यह सुन कर आप यह न सोचें कि सर्दी की छुट्टी हो गई. सिंतबर के महीने में संसद का सत्र होने में कोई दिक्कत नहीं आई जिसमें कृषि विधेयक पास हुए थे, लेकिन दिसंबर के महीने में कोरोना के कारण शीतकालीन सत्र नहीं होगा जब किसान आंदोलन कर रहे हैं.

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