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Ravish kumar


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  • क्यों भीड़ के आगे बेबस है प्रशासन?

    क्यों भीड़ के आगे बेबस है प्रशासन?

    उत्तर प्रदेश में 28 साल के सुजीत कुमार को लोगों ने चोर समझ कर मारा पीटा और जला दिया. सुजीत कुमार अपने ससुराल जा रहे थे. कुत्तों ने उनका पीछा किया तो वे एक घर में छिप गए. लोगों ने उन्हें चोर समझ लिया और पेट्रोल डालकर जलाने की कोशिश की.

  • अरविंद अब भी अड़े हैं कि जीडीपी 2.5 प्रतिशत अधिक बताई जा रही है

    अरविंद अब भी अड़े हैं कि जीडीपी 2.5 प्रतिशत अधिक बताई जा रही है

    आपको याद होगा कि मोदी सरकार के पूर्व आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने कहा था कि 2011 से लेकर 2016 के बीच जीडीपी का डाटा सही नहीं है. जो बताया गया है वो 2.5 प्रतिशत अधिक है. उनके दावे के आधार पर कई प्रश्न उठे थे जिसका जवाब अरविंद ने दिया है. बताया है कि 2011 से 2016 के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को कई गंभीर झटके लगे हैं. निर्यात ध्वस्त हो गया, बैंक घाटे में आ गए,

  • विश्‍वास मत की प्रक्रिया पूरी करने की मियाद क्‍या हो?

    विश्‍वास मत की प्रक्रिया पूरी करने की मियाद क्‍या हो?

    कर्नाटक विधानसभा में विश्वास मत पेश तो हो गया है. अब इस बात पर बहस हो रही है कि स्पीकर एक ही दिन में विश्वास मत की प्रक्रिया पूरी करें. कर्नाटक के राज्यपाल ने भी कहा है कि विश्वास मत एक दिन में पूरा हो. क्या संविधान में ऐसी कोई प्रक्रिया है कि राज्यपाल स्पीकर से कहें कि वे किसी प्रक्रिया को कब पूरी करें.

  • कुलभूषण जाधव पर भारत के पक्ष में आया इंटरनेशनल कोर्ट का फ़ैसला

    कुलभूषण जाधव पर भारत के पक्ष में आया इंटरनेशनल कोर्ट का फ़ैसला

    भारत ने कोर्ट से मांग की थी कि पाकिस्तान की मिलिट्री कोर्ट के फैसले को रद्द किया जाए. पाकिस्तान को आदेश दिया जाए कि वह मिलिट्री कोर्ट के फैसले को रद्द करे और जाधव को सुरक्षित भारत भेजे. कोर्ट ने इसे नहीं माना. लेकिन कई बिन्दुओं पर कोर्ट ने पाकिस्तान के रवैयों और दलीलों को ठुकराया है. कोर्ट ने कहा कि पाकिस्तान का यह आरोप कि भारत ने इस मामले को अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में लाकर प्रक्रियाओं का दुरुपयोग किया है.

  • क्या सरकारी कर्मचारियों की संख्या कम करना शानदार उपलब्धि है?

    क्या सरकारी कर्मचारियों की संख्या कम करना शानदार उपलब्धि है?

    एक विकल्प है कि BSNL और MTNL को 4 जी स्पेक्ट्रम दे दिया जाए. लेकिन इससे भी ये कंपनियां पटरी पर नहीं आएंगी. BSNL ने आखिरी बार 2008 में मुनाफा कमाया था. उसके बाद से यह कंपनी 82,000 करोड़ का घाटा झेल चुकी है. दिसंबर 2018 तक यह आंकड़ा 90,000 करोड़ के पार जा सकता है. इसके कर्मचारियों पर राजस्व का 66 प्रतिशत खर्च होने लगा है जो 2006 में 21 फीसदी था और 2008 में 27 फीसदी था.

  • सोशल मीडिया के अभियान जमीन पर कहां?

    सोशल मीडिया के अभियान जमीन पर कहां?

    सेल्फी से क्या किसी योजना को बढ़ावा मिलता है, उसकी सफलता सुनिश्चित होती है, क्या सेल्फी से प्रेरणा मिलती है, अगर इसका जवाब हां में होता तो आज हमारे देश में प्रेरणा की बाढ़ आ चुकी होती. हर लम्हा सोशल मीडिया पर अनगिनत तादाद में सेल्फी अपलोड होती रहती है. गुरु पूर्णिमा के दिन भारत के मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने एक वीडियो मेसेज जारी किया है और सेल्फी विद गुरु करने की बात की है.

  • सबकुछ काफी ठीक है बस अर्थव्यवस्था में नौकरी, सैलरी और सरकार के पास पैसे नहीं हैं...

    सबकुछ काफी ठीक है बस अर्थव्यवस्था में नौकरी, सैलरी और सरकार के पास पैसे नहीं हैं...

    जून में निर्यात का आंकड़ा 41 महीनों में सबसे कम रहा है. आयात भी 9 प्रतिशत कम हो गया है जो कि 34 महीने में सबसे कम है. सरकार मानती है कि दुनिया भर में व्यापारिक टकरावों के कारण ऐसा हुआ है. सरकार ने 2018-19 और 2019-20 के दौरान पेट्रोलियम उत्पादों पर सरचार्ज लगाकर 17000 करोड़ वसूले हैं.

  • हमारे समाज में बच्चियां कितनी सुरक्षित?

    हमारे समाज में बच्चियां कितनी सुरक्षित?

    इन सब व्यवस्थाओं के बाद भी 24,212 मामलों में से मात्र 911 मामलों में ही फैसला आ सका है. यह रिकॉर्ड बेहद साधारण है. ख़राब भी कहा जा सकता है. 11,981 बलात्कार के मामलों में जांच ही चल रही है. 4871 मामलों में पुलिस अदालत को रिपोर्ट सौंप सकी है. 6449 मामलों में ट्रायल शुरू हो सकी है. 911 मामलों में सज़ा हुई है. 

  • रवीश कुमार का ब्लॉग : लोगों की आंखें अंधी, कान बहरे, मुंह से ज़ुबान ग़ायब है, चीन में सच बताने के लिए कोई बचा नहीं

    रवीश कुमार का ब्लॉग : लोगों की आंखें अंधी, कान बहरे, मुंह से ज़ुबान ग़ायब है, चीन में सच बताने के लिए कोई बचा नहीं

    ''उन्मुक्त आवाज़ की जगह सिमट गई है. आप स्वतंत्र पत्रकार हैं, कहना ख़तरनाक हो गया है. राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शासन में ऐसे पत्रकार ग़ायब हो गए हैं. सरकार ने दर्जनों पत्रकारों को प्रताड़ित किया है और जेल में बंद कर दिया है. समाचार संस्थाओं ने गहराई से की जाने वाली रिपोर्टिंग बंद कर दी है. चीन में शी जिनपिंग के साथ मज़बूत नेता का उफान फिर से आया है. इसका नतीजा यह हुआ है कि चीन के प्रेस में आलोचनात्मक रिपोर्टिंग बंद हो गई है. यह संपूर्ण सेंसरशिप का दौर है. हमारे जैसे पत्रकार करीब करीब विलुप्त हो गए हैं'. 43 साल की पत्रकार ज़ांग वेनमिन का यह बयान न्यूयार्क टाइम्स में छपा है.

  • राम का नाम आराधना के लिए या हत्या के लिए?

    राम का नाम आराधना के लिए या हत्या के लिए?

    इस सवाल पर लौट आइये इससे पहले कि हम जवाब देने के बजाए नज़रें चुराने लगें. राम का नाम साधना और अराधना के लिए है या इसके नाम पर हत्या करने के लिए है. अभी भले लगता हो कि हमारी ड्राइंग रूम से दूर शायद दिल्ली से बहुत दूर कुछ लोगों का यह काम है और भारत जैसे देश में अपवाद हैं तो आप गलती कर रहे हैं. इनके पीछे की सियासी खुराक कहां से आ रही है, आप इतने भी भोले नहीं है कि सब बताना ही पड़े.

  • बेटियों को अपनी मर्जी से शादी का हक देते हैं हम?

    बेटियों को अपनी मर्जी से शादी का हक देते हैं हम?

    करियर की च्वाइस तो है, पायलट बनने की भी च्वाइस है, डॉक्टर बनने की भी है, आज कल की लड़कियां जो हैं, ताली बजाते हुआ मां बाप खूब फोटो खिंचाते हैं, कुछ लोग स्लोगन भी लिख जाते हैं कि आज कल की लड़कियां. लेकिन जब वही आज कल की लड़कियां अपनी च्वाइस से शादी करती हैं तब जाकर पता चलता है कि जो माता पिता या भाई ताली बजा रहे थे उनके भीतर एक संभावित हत्यारा भी छिपा है.

  • धोनी का लौटना देखा नहीं गया...

    धोनी का लौटना देखा नहीं गया...

    महेंद्र सिंह धोनी के रन आउट होने को लेकर अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट लिखी. रवीश कुमार ने लिखा- आज मन उदास है. रन आउट होकर धोनी को लौटता देख अच्छा नहीं लगा. धोनी को मैदान में उतरने से पहले बल्ले को सूंघते देखा. लगा जैसे समझा रहे हों कि आज साथ देना. आज खेलना है.

  • वित्त मंत्रालय में पत्रकारों का जाना हुआ आसान, ख़बरों का आना हुआ मुश्किल

    वित्त मंत्रालय में पत्रकारों का जाना हुआ आसान, ख़बरों का आना हुआ मुश्किल

    मैं सपने में था. सपने में वित्त मंत्रालय था. कमरे में अफ़सर फाइलों को पलट रहे थे. उनके पलटते ही नंबर बदल जाते थे. पीले-पीले पन्नों को गुलाबी होते देख रहा था. 0 के आगे 10 लगा देने से 100 हो जा रहा था. 100 से 00 हटा देने पर नंबर 1 हो जा रहा था. कुछ अफ़सरों की निगाहें भी मिल गईं. मिलते ही उन्होंने निगाहें चुरा लीं. उनकी आंखों में काजल था, पानी नहीं था.

  • कर्नाटक के बहाने विपक्ष के खात्मे का प्लान

    कर्नाटक के बहाने विपक्ष के खात्मे का प्लान

    कर्नाटक कांग्रेस के नेता डीके शिवकुमार मुंबई के रेनासां होटल में जाना चाहते थे, मुंबई एयरपोर्ट से सीधे पोवई स्थित रेनेसां होटल मुंबई पहुंच गए. पुलिस के हाथ में विधायकों का पत्र था. शिवकुमार के हाथ में होटल में कमरे की बुकिंग का कागज़. पुलिस ने शिवकुमार को रोक दिया. कहा कि विधायको ने पत्र लिखा है कि उन्हें सुरक्षा चाहिए, क्योंकि उन्हें डर है कि शिवकुमार और मुख्यमंत्री कुमारस्वामी कभी भी अंदर आ सकते हैं. हम भारत के भोले भाले लोग विपक्ष की सरकारों को निरंगत ढ़हते ढ़हाते देख रहे हैं.

  • आर्थिक सर्वे और बजट के आंकड़ों में अंतर कैसे?

    आर्थिक सर्वे और बजट के आंकड़ों में अंतर कैसे?

    श्रीनिवासन जैन ने एक रिपोर्ट की है. बजट से 1 लाख 70 हज़ार करोड़ का हिसाब ग़ायब है. प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य रथिन रॉय ने आर्थिक सर्वे और बजट का अध्ययन किया. उन्होंने देखा कि आर्थिक सर्वे में सरकार की कमाई कुछ है और बजट में सरकार की कमाई कुछ है. दोनों में अंतर है. बजट में राजस्व वसूली सर्वे से एक प्रतिशत ज्यादा है. यह राशि 1 लाख 70 हज़ार करोड़ की है, क्या इतनी बड़ी राशि की बजट में चूक हो सकती है.

  • यशंवत सिन्हा इस तरह से अटल बिहारी वाजपेयी के मंत्रिमंडल में बने थे वित्त मंत्री

    यशंवत सिन्हा इस तरह से अटल बिहारी वाजपेयी के मंत्रिमंडल में बने थे वित्त मंत्री

    इसकी जानकारी खुद यशवंत सिन्हा ने ट्विटर पर अपने ट्वीट के जरिए दी. उन्होंने ट्वीट कर लिखा, ''मेरी आत्मकथा 'रिलेंटलेस' (Relentless) पुस्तक 15 जुलाई को पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी द्वारा आईआईसी के मल्टिपर्पज हॉल में शाम 6 बजे विमोचन किया जाएगा.''

  • बेहतर लाइब्रेरी और शिक्षकों की मांग को लेकर पिथौरागढ़ के छात्रों का अनोखा आंदोलन...

    बेहतर लाइब्रेरी और शिक्षकों की मांग को लेकर पिथौरागढ़ के छात्रों का अनोखा आंदोलन...

    कुछ दिन पहले दिल्ली के नज़फ़गढ़ से एक छात्र ने लिखा था कि उसके गांव में लाइब्रेरी नहीं है. लाइब्रेरी जाने के लिए उसे दिल्ली में ही 40 किलोमीटर का सफ़र करना पड़ता है. शायद वह पहला मौका था या पहला दर्शक था जिसने लाइब्रेरी के लिए हमें पत्र लिखा था. पिछले कुछ दिनों से उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से छात्रों के मैसेज आ रहे थे कि वे लाइब्रेरी और किताबों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. ऐसा कब सुना है आपने कि छात्र अपने कॉलेज की कबाड़ हो चुकी लाइब्रेरी को बेहतर करने के लिए आंदोलन कर रहे हों. ज़ाहिर है इस पर ध्यान जाना ही चाहिए.

  • टि्वटर पर झगड़ने लगे हैं क्रोधित करोड़पतिगण, क्या भक्ति से ध्यानभंग कर दिया बजट ने

    टि्वटर पर झगड़ने लगे हैं क्रोधित करोड़पतिगण, क्या भक्ति से ध्यानभंग कर दिया बजट ने

    बहुत से पत्रकार टाइमलाइन पर दैनिक प्रासंगिकता स्नान कर रहे थे. यह नए प्रकार का स्नान है. उन्होंने कई साल से कोई ख़बर नहीं की है जिससे लगे कि उनमें पत्रकारीय क्षमता है. काफी धूल जम गई है. इसलिए वे सरकार के समर्थन में ट्विट कर किसी से सवाल दाग देते हैं. फिर उनका एडिटर या मालिक नहीं पूछता कि तुम्हारी खबर कहां हैं. यह एक प्रकार का गंगा स्नान है जिसे मैं प्रांसिगकता स्नान कहता हूं.