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Ravish kumar


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  • CBI के अधिकारी ने एनएसए अजीत डोभाल पर लगाए सनसनीखेज़ आरोप

    CBI के अधिकारी ने एनएसए अजीत डोभाल पर लगाए सनसनीखेज़ आरोप

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्री पर कई करोड़ के रिश्वत लेने का आरोप लगा है. यह आरोप किसी राह चलते ने नहीं बल्कि सीबीआई के डीआईजी ने बाक़ायदा लिखकर सुप्रीम कोर्ट में जमाकर लगाया है.

  • क्या प्रधानमंत्री मोदी मध्यप्रदेश की एक सभा में मेरा लिखा यह भाषण पढ़ सकते हैं?

    क्या प्रधानमंत्री मोदी मध्यप्रदेश की एक सभा में मेरा लिखा यह भाषण पढ़ सकते हैं?

    आज मैंने भाषण का तरीका बदल दिया है. मैंने अलग-अलग फार्मेट में भाषण दिए हैं लेकिन आज मैं वो करने जा रहा हूं जो कांग्रेस के नेता पिछले सत्तर साल में नहीं कर सके. मैंने रटा-रटाया भाषण छोड़कर कुछ नया करने का फैसला किया है. मुझे यह कहने में संकोच नहीं कि यह भाषण रवीश कुमार ने लिखा है, लेकिन दोस्तो, भाषण कोई भी लिखे, अगर वह राष्ट्रहित में है. पर मैंने भी कह दिया कि मैं पढूंगा वही जो सरकारी दस्तावेज़ पर आधारित होता है.

  • राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर पत्रकारों, पारा शिक्षकों की पिटाई...

    राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर पत्रकारों, पारा शिक्षकों की पिटाई...

    आज कल हर दिन कोई न कोई दिवस यानी डे आ जाता है. एक डे जाता नहीं कि दूसरा डे आ जाता है. हर डे की अपनी प्रतिज्ञा होती है और न भूलने की कसमें होती हैं, मगर ये उसी दिन तक के लिए वैलिड होती है. अगले दिन दूसरा डे आता है, पोस्टर बैनर सब बदल जाता है. नए सिरे से प्रतिज्ञा लेनी पड़ती है कि हम इनके आदर्शों को नहीं भूलेंगे. भूल जाते हैं कि पिछले दिन ऐसी ही एक प्रतिज्ञा ले चुके हैं.

  • क्या रमन सिंह चौथी बार मुख्यमंत्री बन पाएंगे?

    क्या रमन सिंह चौथी बार मुख्यमंत्री बन पाएंगे?

    छत्तीसगढ़ के चुनावों में चार-चार मोर्चा है. एक मोर्चा है रमन सिंह का जो 15 साल से मुख्यमंत्री हैं, चौथी बार बनना चाहते हैं. कांग्रेस पार्टी ने अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है. अजित जोगी की जनता कांग्रेस और मायावती की बसपा का तीसरा मोर्चा है. चौथा मोर्चा है समाजवादी पार्टी और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी.

  • कॉलेजों में शिक्षक नहीं हैं तो छत्तीसगढ़ के छात्र कॉलेज जाना ही बंद कर दें...?

    कॉलेजों में शिक्षक नहीं हैं तो छत्तीसगढ़ के छात्र कॉलेज जाना ही बंद कर दें...?

    घोषणापत्र देखकर भले जनता वोट न करती हो मगर चुनावों के समय इसे ठीक से देखा जाना चाहिए. दो चार बड़ी हेडलाइन खोजकर हम लोग भी घोषणापत्र को किनारे लगा देते हैं. राजनीतिक दल कुछ तो समय लगाते होंगे, बात-विचार करते होंगे कि क्या इसमें रखा जा रहा है और क्या इससे निकाला जा रहा है, इसी को समझकर चुनावी चर्चाओं में घोषणापत्र को गंभीरता से लिया जाना चाहिए.

  • क्या रफ़ाल सौदे में कहीं कुछ छुपाया जा रहा है?

    क्या रफ़ाल सौदे में कहीं कुछ छुपाया जा रहा है?

    रफाल विमान सौदा सिर्फ सरकार के लिए ही टेस्ट नहीं है, बल्कि मीडिया के लिए भी परीक्षा है. आप दर्शक मीडिया की भूमिका को लेकर कई सवाल करते भी रहते हैं. यह बहुत अच्छा है कि आप मीडिया और गोदी मीडिया के फर्क को समझ रहे हैं. हम सबको परख रहे हैं.

  • किसानों से किए गए वादे कितने पूरे होते हैं?

    किसानों से किए गए वादे कितने पूरे होते हैं?

    हमने पिछले कई सालों में किसानों के कई आंदोलन देखे. 29-30 इस आंदोलन के केंद्र में दो मुद्दे प्रमुख रूप से रहे. फसलों का सही दाम दिया जाए और फसल बिकने की व्यवस्था सही की जाए. मोदी सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य को अपने वादे के हिसाब से लागत से डेढ़ गुना देने का दावा करती है लेकिन तथ्य कुछ दूसरे भी होते हैं.

  • कैंसर की चुनौती से निपटने की तैयारी कितनी?

    कैंसर की चुनौती से निपटने की तैयारी कितनी?

    भारत कैंसर से लड़ने के लिए कितना तैयार है? महानगरों को छोड़ राज्यों की राजधानियों और कस्बों में कैंसर से लड़ाई की हमारी तैयारी क्या है? गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पार्रिकर कैंसर से जूझ रहे हैं. विदेशों में भी इलाज के लिए गए और फिर वापस आकर एम्स में भी इलाज करवाया.

  • चुनाव प्रभारी मंत्री बन रह गए हैं देश के शिक्षा मंत्री जावड़ेकर, नई शिक्षा नीति कहां है?

    चुनाव प्रभारी मंत्री बन रह गए हैं देश के शिक्षा मंत्री जावड़ेकर, नई शिक्षा नीति कहां है?

    2014 के घोषणापत्र में बीजेपी ने नई शिक्षा नीति का वादा किया था. इंटरनेट पर सर्च कीजिए, वो नई शिक्षा नीति कहां है, अता-पता नहीं चलेगा. हमने अख़बारों में छपे इस संदर्भ में उनके बयानों का विश्लेषण किया है और साथ ही उनके ट्विटर हैंडल के ट्वीटस और री-ट्वीट्स का जिससे हम देख सकें कि प्रकाश जावड़ेकर देश की शिक्षा को लेकर कितने ट्वीट करते हैं और बीजेपी को लेकर कितने.

  • वसुंधरा जी आपने वाक़ई 44 लाख नौकरियां दी हैं?

    वसुंधरा जी आपने वाक़ई 44 लाख नौकरियां दी हैं?

    राजस्थान बीजेपी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया है कि भाजपा ने 15 लाख नौकरियां देने का वादा किया था. 44 लाख से अधिक लोगों को नौकरियां दी हैं. 9 नवंबर का ट्वीट है. राजस्थान बीजेपी का ट्वीट है तो यह राजस्थान के बारे में ही दावा होगा. मैंने एक दिन नहीं, कई हफ़्ते प्राइम टाइम में नौकरी सीरीज़ की है. हमने देखा है और दिखाया है कि कैसे पंजाब, मध्य प्रदेश, बिहार, यूपी और राजस्थान में नौजवानों को विज्ञापन देकर उलझाया जाता है. हमारे नौजवानों ने बहुत विरोध किया. प्रदर्शन किया. अपनी जवानियां बर्बाद होती देखी मगर किसी ने उनका साथ नहीं दिया. मुझे यक़ीन नहीं होता कि राजस्थान में 44 लाख नौकरियां दी गई हैं.

  • वसुंधरा जी आपने वाक़ई 44 लाख नौकरियां दी हैं?

    वसुंधरा जी आपने वाक़ई 44 लाख नौकरियां दी हैं?

    राजस्थान बीजेपी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया है कि भाजपा ने 15 लाख नौकरियां देने का वादा किया था. 44 लाख से अधिक लोगों को नौकरियां दी हैं. 9 नवंबर का ट्वीट है. राजस्थान बीजेपी का ट्वीट है तो यह राजस्थान के बारे में ही दावा होगा. मैंने एक दिन नहीं, कई हफ़्ते प्राइम टाइम में नौकरी सीरीज़ की है. हमने देखा है और दिखाया है कि कैसे पंजाब, मध्य प्रदेश, बिहार, यूपी और राजस्थान में नौजवानों को विज्ञापन देकर उलझाया जाता है. हमारे नौजवानों ने बहुत विरोध किया. प्रदर्शन किया. अपनी जवानियां बर्बाद होती देखी मगर किसी ने उनका साथ नहीं दिया. मुझे यक़ीन नहीं होता कि राजस्थान में 44 लाख नौकरियां दी गई हैं.

  • फेक न्यूज़ बनाम असली न्यूज़ की लड़ाई

    फेक न्यूज़ बनाम असली न्यूज़ की लड़ाई

    पूरी दुनिया में झूठ एक नई चुनौती बनकर उभरा है. झूठ की दीवार हमारे आस पास बड़ी होती जा रही है और चौड़ी भी होती जा रही है. झूठ की इस दीवार को भेदना आसान नहीं है. व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी के ज़रिए रोज़ना कई प्रकार के झूठ फैलाए जा रहे हैं.

  • छठ पर विशेष : येल यूनिवर्सिटी के म्यूज़ियम में कैसे पहुंची बिहार से सूर्य की कलाकृति 

    छठ पर विशेष : येल यूनिवर्सिटी के म्यूज़ियम में कैसे पहुंची बिहार से सूर्य की कलाकृति 

    क्या छठ  (Chhath Puja) का संबंध बौद्ध परंपराओं से रहा होगा? जिस तरह से छठ में पुजारी की भूमिका नगण्य है, उससे यह मुमकिन लगता है. क्या छठ बौद्ध परंपरा है जिसे बाद में सबने अपनाया. मेरी यह टिप्पणी बिना इतिहास के संदर्भों से मिलान किए हुए है, इसलिए कुछ भी आधिकारिक नज़रिए से नहीं कह रहा.

  • क्या भारत में पत्रकारों के सवालों पर अंकुश नहीं?

    क्या भारत में पत्रकारों के सवालों पर अंकुश नहीं?

    अमरीका में मध्यावधि चुनाव के नतीजे आए हैं. उन नतीज़ों पर अलग से चर्चा हो सकती है, होनी भी चाहिए लेकिन एक बात की चर्चा हिन्दुस्तान के पत्रकारों के बीच ज़्यादा है. उनके बीच भी है जो भारत की मीडिया को गोदी मीडिया में बदलते हुए देख रहे हैं.

  • रौशनी के अंधेरे में अल्पमत-अल्पसंख्यक सा अकेला खड़ा रहा सुप्रीम कोर्ट

    रौशनी के अंधेरे में अल्पमत-अल्पसंख्यक सा अकेला खड़ा रहा सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट का आदेश व्यावहारिक नहीं था. सरकार अगर आदेशों को लागू न करे तो सुप्रीम कोर्ट का हर आदेश ग़ैर व्यावहारिक हो सकता है. एक दिन ये नेता यह भी कह देंगे कि सुप्रीम कोर्ट का होना ही व्यावहारिक नहीं है. हमें जनादेश मिला है, फैसला भी हमीं करेंगे. पटाखे न छोड़ने का आदेश 23 अक्तूबर को आया था मगर भीड़ की हिंसा पर काबू पाने का आदेश तो जुलाई में आया था. कोर्ट ने ज़िला स्तर पर पुलिस को क्या करना है, इसका पूरा खाका बना दिया था. फिर भी दशहरे के बाद बिहार के सीतामढ़ी में क्या हुआ.

  • राम मंदिर का मुद्दा फिर क्यों गर्माने लगा है?

    राम मंदिर का मुद्दा फिर क्यों गर्माने लगा है?

    2019 से पहले 1992 आ रहा है बल्कि आ चुका है. इंतज़ार अब इस बात का है कि प्रधानमंत्री नरेंद मोदी कब 1992 के इस सियासी खेल में उतरते हैं. 2014 में प्रधानमंत्री की उम्मीदवार के तौर पर नरेंद मोदी के भाषणों को याद कीजिए, क्या आपको कोई भाषण याद आता है जो मुख्य रूप से राम मंदिर पर केंद्रित हो.

  • राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनावों में फोन बांटने का खेल क्या है?

    राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनावों में फोन बांटने का खेल क्या है?

    हमारे वक्त की राजनीति को सिर्फ नारों से नहीं समझा जा सकता है. इतना कुछ नया हो रहा है कि उसके अच्छे या बुरे के असर के बारे में ठीक-ठीक अंदाज़ा लगाना मुश्किल हो रहा है. समझना मुश्किल हो रहा है कि सरकार जनता के लिए काम कर रही है या चंद उद्योगपतियों के लिए.

  • बड़े डिफॉल्टरों पर आरबीआई इतना मेहरबान क्यों?

    बड़े डिफॉल्टरों पर आरबीआई इतना मेहरबान क्यों?

    भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल को उन लोगों के नाम बताने में क्या परेशानी है जिन्होंने 50 करोड़ से लेकर 1 लाख करोड़ तक के लोन नहीं चुकाए हैं. भारतीय रिज़र्व बैंक कौन होता है उनकी इज्ज़त या साख की चिन्ता करने वाला वो भी जो बैंक का लोन नहीं चुका रहे हैं.

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