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Ravish kumar


'Ravish kumar' - more than 1000 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • ओ जाने वाले हो सके तो भारत लौट के आना...

    ओ जाने वाले हो सके तो भारत लौट के आना...

    मुंबई के मशहूर बिल्डर हीरानंदानी ग्रुप के संस्थापक सुरेंद्र हीरानंदानी ने भारत की नागरिकता छोड़ दी है. अब वे साइप्रस के नागरिक हो गए हैं. साइप्रस की ख़्याति टैक्स हैवेन्स के रूप में है, मतलब जहां कर चुकाने का झंझट कम है.

  • महाभियोग पर रवीश कुमार की त्वरित टिप्पणी...

    महाभियोग पर रवीश कुमार की त्वरित टिप्पणी...

    इन पांच आरोपों में से मुख्य आरोप इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज को लेकर है. सीबीआई चीफ जस्टिस के पास इनके खिलाफ सबूत लेकर गई थी और मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी जो चीफ जस्टिस मिश्रा ने नहीं दी. सिब्बल ने कहा कि क्यो नहीं दी. क्या कारण थे, यह जांच से सामने आएगा. दूसरा आरोप था कि जब चीफ जस्टिस मिश्रा उड़ीसा हाईकोर्ट में वकील थे तब ग़लत हल़फ़नामे के आधार पर ज़मीन ली थी. एडीएम ने 1985 में ही कैंसल कर दिया था मगर 2012 तक वो ज़मीन नहीं लौटाई. 2012 में जब सुप्रीम कोर्ट में आए.

  • मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल की एक साल की फीस 21 लाख?

    मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल की एक साल की फीस 21 लाख?

    आप लोग बीजेपी बनाम कांग्रेस की लड़ाई में ही रहते हैं. ज़रा बताइये कि इनमें से किसी की सरकार आने पर क्या बदल जाएगा? क्या पुलिस ठीक हो जाएगी, क्या अदालतों का रवैया बदल जाएगा? एक छात्र ने जो लिखा है मैं उसकी जगह आप सभी को रखता हूं. जो कांग्रेस के समर्थक हैं, सपा बसपा के समर्थक हैं और जो बीजेपी संघ के हैं, वे ईमानदारी से बताएं कि इस तरह की लूट को रोकने की हिम्मत किसी में है?

  • लव जिहाद पर सियासत के बाद रसगुल्ला चांप रहे हैं बीजेपी नेता, कम्युनल केक के चक्कर में कांग्रेस

    लव जिहाद पर सियासत के बाद रसगुल्ला चांप रहे हैं बीजेपी नेता, कम्युनल केक के चक्कर में कांग्रेस

    हिन्दू मुस्लिम शादी को लव जिहाद बताकर सियासत के बाद अब इन शादियों में रसगुल्ला चांप रहे हैं बीजेपी नेता, कम्युनल केक के चक्कर में कांग्रेस. पिछले साल मई में रिपब्लिक चैनल पर हैदराबाद से एक स्टिंग चला था. आप यू ट्यूब पर इसकी डिबेट निकाल कर देखिए, सर फट जाएगा. स्टिंग में तीन लड़कों को ISI के लिए काम करने वाला बताया गया था. जब पुलिस ने देशद्रोह का केस दर्ज किया था तब इसे चैनल ने अपनी कामयाबी के रूप में पेश किया ही होगा. लेकिन इंडियन एक्सप्रेस के पेज नंबर 8 पर ख़बर है कि चैनल ने स्टिंग के ओरिजिनल टेप नहीं दिए. इसलिए पुलिस केस बंद करने जा रही है.

  • आपकी आमदनी अठन्नी और भाजपा की आमदनी चकरघिन्नी

    आपकी आमदनी अठन्नी और भाजपा की आमदनी चकरघिन्नी

    मार्च में ख़त्म ही तिमाही की रिपोर्ट बताती है कि निफ्टी से जुड़ी चोटी की पचास कंपनियों की आमदनी में 10 प्रतिशत तक की ही वृद्धि हुई है जो पिछले साल से कम है. एक रिपोर्ट यह भी बताती है कि कोरपोरेट सेक्टर में काम करने वालों की सैलरी में 10 प्रतिशत से कम की ही वृद्धि होगी.

  • बच्ची से रेप और हत्या का मामला हिंदू-मुस्लिम कैसे हो गया?

    बच्ची से रेप और हत्या का मामला हिंदू-मुस्लिम कैसे हो गया?

    साल 2012 का दिसबंर था. एक अंग्रेज़ी अख़बार में निर्भया के साथ बलात्कार और फिर हत्या की ख़बर विस्तार से छपी थी. उसी शाम या उसके अगले दिन वो ख़बर टीवी पर सवार होती है और देखते देखते दो तीन दिनों के भीतर जैसे जैसे उस कांड की एक एक कहानी लोगों तक पहुंचनी शुरू होती है, लोग घरों से बाहर आने लगते हैं. शुरूआत लेफ्ट से जुड़े महिला संगठनों ने की थी मगर बाद में वो आंदोलन पहले दिल्ली का हुआ है, फिर देश का हो गया.

  • ग्लोबल चुनाव आयुक्त ज़करबर्ग का शुक्रिया...

    ग्लोबल चुनाव आयुक्त ज़करबर्ग का शुक्रिया...

    विश्व के मुख्य चुनाव आयुक्त श्रीयुत मार्क ज़करबर्ग जी ने अहसान जताते हुए कहा है कि वे यह सुनिश्चित करेंगे कि भारत और पाकिस्तान में मुक्त और तटस्थ चुनाव हों. इसके लिए सबकुछ करेंगे. मार्क ज़करबर्ग जी ने अमरीकी सिनेट में सांसदों के सवालों के जवाब में यह आश्वासन दिया है.

  • हिन्दुस्तान में हत्यारों की भीड़ रैपिड एक्शन फोर्स की तरह तैयार खड़ी है

    हिन्दुस्तान में हत्यारों की भीड़ रैपिड एक्शन फोर्स की तरह तैयार खड़ी है

    क्या बात है कोई मुझे कठुआ और उन्नाव रेप केस के लिए ललकार नहीं रहा है, जैसे बंगाल और केरल को लेकर ललकारते हैं? सारा तिरंगा जम्मू चला गया है क्या? एक सड़ी हुई राजनीति के बीमार लोगों से पूछता हूं कि वे कब तक यहां और वहां का मैच खेलेंगे.

  • बच्ची से दरिंदगी करने वालों का बचाव क्यों?

    बच्ची से दरिंदगी करने वालों का बचाव क्यों?

    हम कहां जा रहे हैं, यह जानने से पहले हम कहां आ पहुंचे हैं, ज़रा रुक कर देख लेना चाहिए. जम्मू के कठुआ में बलात्कार के मामले में हमारे समाज ने अपना नक़ाब ख़ुद ही उतार दिया है. हम बेटियों की परवाह करते हैं यह ढोंग भी अपने आप सामने आ गया है. कठुआ में आठ साल की बच्ची के साथ बलात्कार के बारे में ही सुन लेंगे तो आपको यकीन हो जाएगा कि आप एक मरे हुए समय में जीने का भरम पाल रहे हैं.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : क्या RTI में गलत सूचनाएं भी दी जा रही हैं? 

    प्राइम टाइम इंट्रो : क्या RTI में गलत सूचनाएं भी दी जा रही हैं? 

    सूचना आपको बदल देती है. ग़लत सूचना से आप दंगाई बन जाते हैं जैसे आपने देखा कि उत्तराखंड के अगस्त्यमुनि में कैसे लोग ग़लत सूचना के कारण दंगाई में बदल गए और दुकानों को जला आए. अगर उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत सही जानने का दावा किया होता, कोशिश की होती तो वे अपराधी बनने से बच सकते थे और किसी की दुकानें नहीं जलतीं.

  • हम नफ़रत फैलाने वालों के शिकार क्यों बन रहे हैं?

    हम नफ़रत फैलाने वालों के शिकार क्यों बन रहे हैं?

    अब भी वक्त है, आप घरों से निकलकर समाज के छोटे-छोटे हिस्सों को दंगाई बनाने के इस प्रोजेक्ट के खिलाफ आवाज़ उठाइये. बहुत देर हो चुकी है और यह देरी बढ़ती जा रही है. हर जगह एक भीड़ खड़ी है, जिसे व्हाट्स अप के ज़रिए वीडियो और ऑडियो का इशारा मिलते ही वो दंगाई में बदल जाती है.

  • नौकरी सीरीज का 32वां भाग : बेरोजगारों का दर्द आखिर कौन समझेगा ? 

    नौकरी सीरीज का 32वां भाग : बेरोजगारों का दर्द आखिर कौन समझेगा ? 

    भारत में बेरोज़गारों की न तो संख्या किसी को मालूम है और न ही उनके जीवन के भीतर की कहानी. हमारे लिए बेरोज़गार हमेशा नाकाबिल नौजवान होता है जो मौके की तलाश में एक ही शहर और एक ही कमरे में कई साल तक पड़ा रहता है. कई बार तो लोग इसलिए भी बेकार कहते हैं कि वह सरकारी नौकरी की तलाश कर रहा है. सरकार चलाने के लिए नेता मारा मारी किए रहते हैं लेकिन जब कोई नौजवान उसी सरकार में अपने लिए संभावना की मांग करता है तो उसे फालतू समझा जाने लगता है. आप या हम हर शहर में बेरोज़गारों की रैली देखते हैं, नज़र घुमा लेते हैं. वे हफ्तों से धरने पर बैठे रहते हैं उनकी परवाह कोई नहीं करता है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : देश का किसान और जवान है परेशान 

    प्राइम टाइम इंट्रो : देश का किसान और जवान है परेशान 

    मुद्दों की मारामारी में आगरा से एक किसान का फोन आता है कि अक्तूबर के महीने में आलू के जो बीज बोए थे उनका उत्पादन काफी कम हुआ है. वे पहले से बर्बादी का सामना कर रहे थे मगर इस बार मार और पड़ गई है. टीवी का जो चरित्र हो गया है और दर्शकों की पसंद जिस तरह से बन गई है, उसके बीच आलू किसान की हालत पर आप चर्चा करेंगे तो किसकी दिलचस्पी होगी. क्या ऐसा हो सकता है कि अफरीदी और आलू को जोड़ कर चर्चा की जाए ताकि बहुत सारे प्रवक्ता ऑफिस के बाहर लाइन लगाकर खड़े हो जाएं कि हम भी बोलेंगे हम भी बोलेंगे. इस समस्या का समाधान आखिर कब निकलेगा.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : बाबाओं को राज्यमंत्री बनाना ठीक है?

    प्राइम टाइम इंट्रो : बाबाओं को राज्यमंत्री बनाना ठीक है?

    कभी फुर्सत हो तो सोचिएगा कि चुनाव आते ही नेता मठों और बाबाओं के यहां दौरे क्यों करते हैं, क्या चुनाव के बाद ये बाबा लोग आपकी नौकरी से लेकर शिक्षा की समस्या को लेकर संसद से लेकर सड़क पर आवाज़ उठाते हैं.

  • फ़ेक न्यूज़ से सही मंशा के साथ निपटने की ज़रूरत

    फ़ेक न्यूज़ से सही मंशा के साथ निपटने की ज़रूरत

    भारत के प्रधानमंत्री ने सूचना व प्रसारण मंत्रालय के उस फैसले को वापस ले लिया जिसके विरोध में मंगलवार सुबह से पत्रकारों के बीच हलचल थी. सोमवार शाम को सूचना व प्रसारण मंत्रालय की तरफ से एक प्रेस रीलीज जारी होती है कि अगर किसी पत्रकार को फेक न्यूज़ गढ़ते हुए या उसके फैलाने में भागीदार पाया गया तो उसकी सरकारी मान्यता हमेशा के लिए रद्द कर दी जाएगी.

  • क्‍या सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्‍ट को कमजोर नहीं किया है?

    क्‍या सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्‍ट को कमजोर नहीं किया है?

    आज़ादी के बाद दलित राजनीति का एक बड़ा पक्ष रहा है बिना हिंसा के आंदोलन, आज वो टूट गया. हिंसा किसने की, कैसे हुई इसका आधिकारिक पक्ष आता रहेगा मगर तस्वीरों में जो दिख रहा था, वह दलित आंदोलन का हिस्सा कभी नहीं रहा.

  • CBSE के अलावा SSC, MPPCS, UPPCS, BPSC, HSSC, RRB भी ज़रूरी मुद्दे हैं...

    CBSE के अलावा SSC, MPPCS, UPPCS, BPSC, HSSC, RRB भी ज़रूरी मुद्दे हैं...

    कर्मचारी चयन आयोग में सब कुछ ठीक नहीं है. छात्र जब मांग कर रहे हैं तो उनकी बात को सुना जाना चाहिए. एसएससी की परीक्षा देने वाले छात्रों की संख्या करोड़ में तो होगी ही. इनका कोई नेता नहीं है. संगठन भी नहीं है. न ही विश्वविद्यालयों में चुनाव जीतने वाली एनएसयूआई या एबीवीपी इनके मुद्दों का प्रतिनिधित्व करती है. फिर भी ये हर बार हज़ारों की संख्या में दिल्ली आकर प्रदर्शन कर रहे हैं.

  • प्राइम टाइम का असर, उत्तराखंड में प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में फीस वृद्धि वापस

    प्राइम टाइम का असर, उत्तराखंड में प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में फीस वृद्धि वापस

    उत्तराखंड सरकार और वहां के प्राइवेट मेडिकल कॉलेज का शुक्रिया. उनसे एक ऐसा अपराध होते होते बचा है जो एक दिन उनके लिए ही नैतिक बोझ बन जाता. अपने नागरिकों से आर्थिक ज़्यादती करना ठीक नहीं है. जिस तरह से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने वहां के तीन प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में 400 प्रतिशत की फीस वृद्धि का फैसला वापस लिया है, उसकी प्रशंसा की जानी चाहिए.

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