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Ravish kumar article


'Ravish kumar article' - 46 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • कोई सरेआम तो कोई गुमनाम मगर बोल रहा है, गुजरात बोल रहा है

    कोई सरेआम तो कोई गुमनाम मगर बोल रहा है, गुजरात बोल रहा है

    गुजरात हाईकोर्ट में कोविड-19 से जुड़ी याचिकों की सुनवाई करने वाली बेंच में बदलाव किया गया है. जस्टिस जे बी पारदीवाला और आई जे वोरा की बेंच ने गुजरात की जनता को आश्वस्त किया था कि अगर सरकार कोविड-19 की लड़ाई में लापरवाह है तो आम लोगों की ज़िंदगी का रखवाला अदालत है.

  • भारत में 22 करोड़ तो US मे 4 करोड़ बेरोज़गार, मीडिया में भारी छंटनी

    भारत में 22 करोड़ तो US मे 4 करोड़ बेरोज़गार, मीडिया में भारी छंटनी

    मीडिया में भी बड़ी संख्या में नौकरियां जा रही हैं. जो अखबार साधन संपन्न हैं, जिनसे पास अकूत संपत्ति हैं वे सबसे पहले नौकरियां कम करने लगें. सैंकड़ों की संख्या में पत्रकार निकाल दिए गए हैं.

  • रवीश कुमार की कोरोना वायरस को लेकर बिहार के लोगों से अपील

    रवीश कुमार की कोरोना वायरस को लेकर बिहार के लोगों से अपील

    मंदिर मस्जिद के बंद करने से लोगों में यह सूचना तेज़ी से फैलती है कि क्यों बंद किया गया है. कोरोना के कारण बंद किया गया है ताकि लोग एक दूसरे के क़रीब न आएँ. इससे जागरूकता फैलती है.

  • फेक न्यूज़ से जूझ रहे थे सरदार पटेल भी

    फेक न्यूज़ से जूझ रहे थे सरदार पटेल भी

    मेवात में तीस हज़ार मेव मुसलमानों को मारा गया था. इस घटना के बारे में इतिहासकार यास्मिन खान ने लिखा है कि पास की दो रियासतों के पास अपनी छोटी-सी टुकड़ी थी.

  • रवीश कुमार का ब्लॉग: मोदी जी को 400 नहीं 545 सीट दीजिए लेकिन उनकी भाषा मत लीजिए

    रवीश कुमार का ब्लॉग: मोदी जी को 400 नहीं 545 सीट दीजिए लेकिन उनकी भाषा मत लीजिए

    छह साल बाद अर्थव्यवस्था फेल है. इस दौरान जिनकी ज़िंदगी बर्बाद हुई उसे सुधरने में बहुत वक्त लग जाएगा. आप प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री की भाषा देखिए.

  • अपने ही देश के आठ राज्यों में नहीं जा पा रहे हैं प्रधानमंत्री और गृहमंत्री

    अपने ही देश के आठ राज्यों में नहीं जा पा रहे हैं प्रधानमंत्री और गृहमंत्री

    वैसे क्या आपको पता है कि 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 समाप्त होने के बाद प्रधानमंत्री और गृहमंत्री दोनों की कश्मीर नहीं गए हैं. भाषण तो बड़ा दिया था कि कश्मीर के लोग हमारे हैं. हम गले लगाएंगे लेकिन अभी तक जाने का वक्त नहीं मिला.

  • देश को 15-20 साल पीछे ले गई मोदी सरकार, GDP की दर 5 प्रतिशत

    देश को 15-20 साल पीछे ले गई मोदी सरकार, GDP की दर 5 प्रतिशत

    2016 में प्रधानमंत्री ने नोटबंदी का बोगस और आपराधिक फ़ैसला लिया था. तभी पता चल गया कि उन्होंने देश की गाड़ी गड्ढे में गिरा दी है मगर झांसा दिया गया कि दूरगामी परिणाम आएंगे. तब नशा था.

  • कितने सपने कितने अरमां लाया हूँ मैं...

    कितने सपने कितने अरमां लाया हूँ मैं...

    मेरे रिटायरमेंट का टाइम आ रहा है तो थोड़ा ठेले पर अकेले चाय पीने की आदत डालनी है. काश मेरी एक बात दुनिया मान लेती कि भारत का कोई भी टीवी चैनल नहीं देखती. अपने घरों से कटवा देती. पर कोई बात नहीं. मैंने कम से कम कहा तो आपसे. फेल हो गया तो हो गया. हम कौन सा आई आई टी टॉपर थे. वैसे बहुतों ने टीवी देखना बंद कर दिया. उनका शुक्रिया.

  • महिलाओं की सुरक्षा में घोर लापरवाही, 5 साल में केंद्र ने राज्यों को निर्भया फंड के लिए दिए 2000 करोड़, पर 20% भी नहीं हुए खर्च

    महिलाओं की सुरक्षा में घोर लापरवाही, 5 साल में केंद्र ने राज्यों को निर्भया फंड के लिए दिए 2000 करोड़, पर 20% भी नहीं हुए खर्च

    आप अगर इतने ही परेशान हैं तो अपने शहर के अंधेरे कोनों की पहचान कीजिए और सांसदों/विधायकों से कहिए कि अपने फंड से वहाँ लाइट लगाएँ. वे लगाते भी हैं.ू

  • आंतरिक मामले में विदेशी सांसदों का दख़ल क्यों?

    आंतरिक मामले में विदेशी सांसदों का दख़ल क्यों?

    भारत का अभिन्न अंग है. भारत का आंतरिक मामला है. तो फिर भारत के अभिन्न और आंतरिक कश्मीर में बाहरी देशों के सांसदों के दौरे को सुविधाएं क्यों उपलब्ध कराई जा रही हैं. यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि जब भारत की लाइन अभिन्न और आतंरिकता की रही है तो इन सांसदों के निजी दौरे की सरकारी व्यवस्था क्यों कराई गई.

  • कश्मीर अंदरूनी मामला तो यूरोपीय सांसद क्यों करेंगे दौरा

    कश्मीर अंदरूनी मामला तो यूरोपीय सांसद क्यों करेंगे दौरा

    जिस कश्मीर का दौरा करने के लिए विदेशी पत्रकारों को अनुमति नहीं दी गई, दिल्ली स्थित राजनयिकों ने कश्मीर जाने की अनुमति मांगी तो सरकार ने मना कर दिया, अमरीका के कांग्रेसमैन क्रिस वॉन होलेन को श्रीनगर जाने का अनुरोध भारत ने ठुकरा दिया. अब ऐसा क्या हुआ कि भारत ने यूरोपीयन संघ के 27 सांसदों को कश्मीर जाने की अनुमति दे दी है.

  • आंदोलन की राह पर मध्‍यप्रदेश पुलिस के परिवार वाले, यूपी के सिपाही भी परेशान हैं

    आंदोलन की राह पर मध्‍यप्रदेश पुलिस के परिवार वाले, यूपी के सिपाही भी परेशान हैं

    अगर देश भर के सिपाही एक हो जाएं तो वे काम करने के बेहतर हालात और सैलरी हासिल कर लेंगे. यूपी के सिपाही भी परेशान हैं. दूर पोस्टिंग होती है. सैलरी कम होती है तो दो जगह ख़र्चा चलाना मुश्किल होता है. छुट्टी नहीं मिलती तो पत्नी से मिलने नहीं जा सकते. उनके जीवन में प्यार ही नहीं है. शादी के बाद हनीमून पर भी नहीं जा पाते. दहेज लेकर शादी करते हैं और उसी दहेज की अटैची में कपड़ा रखकर पत्नी से जुदा हो जाते हैं. सिपाही चौबीस घंटे काम करते हैं. उनकी हालत दयनीय है.

  • आसमां का रंग गुलाबी ही होता है. The Sky is Pink होता है...

    आसमां का रंग गुलाबी ही होता है. The Sky is Pink होता है...

    गुलाबी ही तो होता है आसमान. बल्कि सिर्फ गुलाबी नहीं होता. वैसे ही जैसे सिर्फ नीला नहीं होता. पीला भी होता है. सफेद भी और गहरा लाल भी. सुनहरा भी. आसमान को सिर्फ नीले रंग से नहीं समझा जा सकता है. जब तक आप इस धारणा से बाहर नहीं निकलते हैं, इस फिल्म को देखते हुए भी आप नहीं देख पाते हैं. थियेटर में होते हुए भी आप बाहर होते हैं. जहां अरबों बच्चों की तरह आपको भी आसमान को सिर्फ एक ही रंग से देखना सीखाया गया है. जैसा रंग आज अपने आस-पास देखते हैं. कोई फ़िल्म सियासत पर बात न करते हुए, सियासत को समझने का ऐसे ही ताकत देती है. वही फ़िल्म है ये. जिन्होंने ये फ़िल्म देखी है, वो बहुत दिनों तक इससे बाहर नहीं निकल पाएंगे.

  • जो काम निर्मला सीतारमण अधूरा छोड़ गई थीं उसे केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पूरा किया

    जो काम निर्मला सीतारमण अधूरा छोड़ गई थीं उसे केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पूरा किया

    मैं देशभक्त हूं. सच्चा भी और अच्छा भी. दोनों का कांबो(युग्म) कम ही देशभक्त में मिलता है जो कि मुझमें मिलता हुआ दिखाई दे रहा है. इसलिए रविशंकर प्रसाद के हर बयान के साथ हूं. एक राष्ट्रवादी सरकार के मंत्री की योग्यता की सीमा नहीं होती. वह एक ही समय में अर्थशास्त्री भी होता है. कानूनविद भी होता है. शिक्षाविद भी होता है. राष्ट्रवाद की राजनीति आपको असीमित क्षमताओं से लैस कर देती है. यह बात रविशंकर प्रसाद का मज़ाक उड़ाने वाले कभी नहीं समझ पाएंगे.

  • 2015 से 2017 के बीच भारत के पासपोर्ट की रैकिंग तेजी से गिरी, तो ताकत कैसे बढ़ी?

    2015 से 2017 के बीच भारत के पासपोर्ट की रैकिंग तेजी से गिरी, तो ताकत कैसे बढ़ी?

    Henley & Partners की ग्लोबल पासपोर्ट इडेक्स की ताज़ा रिपोर्ट में यह बात सामने आई है. इसके आंकने का आधार है कि एक देश का पासपोर्ट लेकर आपको कितने देशों में बिना पहले से विज़ा लिए वहां पहुंचने की अनुमति मिलती है. पहुंचने के बाद वीज़ा मिल जाता है.

  • रात भर पेड़ों की हत्या होती रही, रात भर जागने वाली मुंबई सोती रही

    रात भर पेड़ों की हत्या होती रही, रात भर जागने वाली मुंबई सोती रही

    यह न्याय के बुनियादी सिद्धांतों के ख़िलाफ़ है. मामला सुप्रीम कोर्ट में था तो कैसे पेड़ काटे गए. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में मामला था तो पेड़ कैसे काटे गए. क्या अब से फांसी की सज़ा हाईकोर्ट के बाद ही दे दी जाएगी. सुप्रीम कोर्ट में अपील का कोई मतलब नहीं रहेगा? वहां चल रही सुनवाई का इंतज़ार नहीं होगा? आरे के पेड़ों को इस देश की सर्वोच्च अदालत का भी न्याय नहीं मिला. उसके पहले ही वे काट दिए गए. मार दिए गए.

  • बंगलुरू के ब्रिगेड रोड मार्केट संघ के सुहैल यूसुफ साहब...

    बंगलुरू के ब्रिगेड रोड मार्केट संघ के सुहैल यूसुफ साहब...

    मार्केट में पार्किंग की वजह से तंगी हो रही थी. सौ से कुछ अधिक दुकानें हैं. पार्किंग की समस्या का समाधान निकल नहीं पा रहा था. यूसुफ़ साहब ने बाजार संघ के पैसे से पार्किंग वेंडिंग मशीन लगाने का फ़ैसला किया. ऐसी मशीनें हमें पेरिस और न्यूयार्क में देखी है. आप कार पार्क करते हैं. मशीन में नंबर पंच करते हैं और तय समय के लिए पार्क कर चले जाते हैं.

  • ह्यूस्टन में प्रधानमंत्री अमेरिका की महानता की भी तारीफ करें और सीखें

    ह्यूस्टन में प्रधानमंत्री अमेरिका की महानता की भी तारीफ करें और सीखें

    आज़ादी के बाद भारत के किस शहर में दूसरे शहर में आकर लोग बसे? जिनकी तुलना आप न्यूयार्क के न्यू जर्सी या ब्रिटेन के साउथ हॉल से कर सकते हैं. अमरीका के कितने ही मोहल्ले हैं जो भारतीयों के गढ़ के रूप में पहचाने जाते हैं बल्कि वहाँ भारतीय आराम से अमरीकी लोगों के बीच में रहते हैं. दुकानें हैं. उनकी कंपनियां हैं. बिल्कुल सुरक्षित जीवन जी रहे हैं. वहां जाते ही सब सिस्टम की बड़ाई करने लगते हैं. उनकी बातों से आपको एक बार नहीं लगेगा कि अमरीका की पुलिस मदद नहीं करती या आती है तो रिश्वत लेकर चली जाती है या उन्हें फ़र्ज़ी केस में फंसा देने का डर है. बल्कि मैंने देखा है कि भारत से ज़्यादा वहां जाकर लोग सिस्टम और समाज को लेकर सुरक्षित महसूस करते हैं. इसलिए तरक़्क़ी भी ख़ूब करते हैं.

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