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Ravish kumar blog


'Ravish kumar blog' - 121 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • क्या प्रधानमंत्री मोदी मध्यप्रदेश की एक सभा में मेरा लिखा यह भाषण पढ़ सकते हैं?

    क्या प्रधानमंत्री मोदी मध्यप्रदेश की एक सभा में मेरा लिखा यह भाषण पढ़ सकते हैं?

    आज मैंने भाषण का तरीका बदल दिया है. मैंने अलग-अलग फार्मेट में भाषण दिए हैं लेकिन आज मैं वो करने जा रहा हूं जो कांग्रेस के नेता पिछले सत्तर साल में नहीं कर सके. मैंने रटा-रटाया भाषण छोड़कर कुछ नया करने का फैसला किया है. मुझे यह कहने में संकोच नहीं कि यह भाषण रवीश कुमार ने लिखा है, लेकिन दोस्तो, भाषण कोई भी लिखे, अगर वह राष्ट्रहित में है. पर मैंने भी कह दिया कि मैं पढूंगा वही जो सरकारी दस्तावेज़ पर आधारित होता है.

  • क्या रमन सिंह चौथी बार मुख्यमंत्री बन पाएंगे?

    क्या रमन सिंह चौथी बार मुख्यमंत्री बन पाएंगे?

    छत्तीसगढ़ के चुनावों में चार-चार मोर्चा है. एक मोर्चा है रमन सिंह का जो 15 साल से मुख्यमंत्री हैं, चौथी बार बनना चाहते हैं. कांग्रेस पार्टी ने अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है. अजित जोगी की जनता कांग्रेस और मायावती की बसपा का तीसरा मोर्चा है. चौथा मोर्चा है समाजवादी पार्टी और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी.

  • कॉलेजों में शिक्षक नहीं हैं तो छत्तीसगढ़ के छात्र कॉलेज जाना ही बंद कर दें...?

    कॉलेजों में शिक्षक नहीं हैं तो छत्तीसगढ़ के छात्र कॉलेज जाना ही बंद कर दें...?

    घोषणापत्र देखकर भले जनता वोट न करती हो मगर चुनावों के समय इसे ठीक से देखा जाना चाहिए. दो चार बड़ी हेडलाइन खोजकर हम लोग भी घोषणापत्र को किनारे लगा देते हैं. राजनीतिक दल कुछ तो समय लगाते होंगे, बात-विचार करते होंगे कि क्या इसमें रखा जा रहा है और क्या इससे निकाला जा रहा है, इसी को समझकर चुनावी चर्चाओं में घोषणापत्र को गंभीरता से लिया जाना चाहिए.

  • वसुंधरा जी आपने वाक़ई 44 लाख नौकरियां दी हैं?

    वसुंधरा जी आपने वाक़ई 44 लाख नौकरियां दी हैं?

    राजस्थान बीजेपी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया है कि भाजपा ने 15 लाख नौकरियां देने का वादा किया था. 44 लाख से अधिक लोगों को नौकरियां दी हैं. 9 नवंबर का ट्वीट है. राजस्थान बीजेपी का ट्वीट है तो यह राजस्थान के बारे में ही दावा होगा. मैंने एक दिन नहीं, कई हफ़्ते प्राइम टाइम में नौकरी सीरीज़ की है. हमने देखा है और दिखाया है कि कैसे पंजाब, मध्य प्रदेश, बिहार, यूपी और राजस्थान में नौजवानों को विज्ञापन देकर उलझाया जाता है. हमारे नौजवानों ने बहुत विरोध किया. प्रदर्शन किया. अपनी जवानियां बर्बाद होती देखी मगर किसी ने उनका साथ नहीं दिया. मुझे यक़ीन नहीं होता कि राजस्थान में 44 लाख नौकरियां दी गई हैं.

  • वसुंधरा जी आपने वाक़ई 44 लाख नौकरियां दी हैं?

    वसुंधरा जी आपने वाक़ई 44 लाख नौकरियां दी हैं?

    राजस्थान बीजेपी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया है कि भाजपा ने 15 लाख नौकरियां देने का वादा किया था. 44 लाख से अधिक लोगों को नौकरियां दी हैं. 9 नवंबर का ट्वीट है. राजस्थान बीजेपी का ट्वीट है तो यह राजस्थान के बारे में ही दावा होगा. मैंने एक दिन नहीं, कई हफ़्ते प्राइम टाइम में नौकरी सीरीज़ की है. हमने देखा है और दिखाया है कि कैसे पंजाब, मध्य प्रदेश, बिहार, यूपी और राजस्थान में नौजवानों को विज्ञापन देकर उलझाया जाता है. हमारे नौजवानों ने बहुत विरोध किया. प्रदर्शन किया. अपनी जवानियां बर्बाद होती देखी मगर किसी ने उनका साथ नहीं दिया. मुझे यक़ीन नहीं होता कि राजस्थान में 44 लाख नौकरियां दी गई हैं.

  • छठ पर विशेष : येल यूनिवर्सिटी के म्यूज़ियम में कैसे पहुंची बिहार से सूर्य की कलाकृति 

    छठ पर विशेष : येल यूनिवर्सिटी के म्यूज़ियम में कैसे पहुंची बिहार से सूर्य की कलाकृति 

    क्या छठ  (Chhath Puja) का संबंध बौद्ध परंपराओं से रहा होगा? जिस तरह से छठ में पुजारी की भूमिका नगण्य है, उससे यह मुमकिन लगता है. क्या छठ बौद्ध परंपरा है जिसे बाद में सबने अपनाया. मेरी यह टिप्पणी बिना इतिहास के संदर्भों से मिलान किए हुए है, इसलिए कुछ भी आधिकारिक नज़रिए से नहीं कह रहा.

  • रौशनी के अंधेरे में अल्पमत-अल्पसंख्यक सा अकेला खड़ा रहा सुप्रीम कोर्ट

    रौशनी के अंधेरे में अल्पमत-अल्पसंख्यक सा अकेला खड़ा रहा सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट का आदेश व्यावहारिक नहीं था. सरकार अगर आदेशों को लागू न करे तो सुप्रीम कोर्ट का हर आदेश ग़ैर व्यावहारिक हो सकता है. एक दिन ये नेता यह भी कह देंगे कि सुप्रीम कोर्ट का होना ही व्यावहारिक नहीं है. हमें जनादेश मिला है, फैसला भी हमीं करेंगे. पटाखे न छोड़ने का आदेश 23 अक्तूबर को आया था मगर भीड़ की हिंसा पर काबू पाने का आदेश तो जुलाई में आया था. कोर्ट ने ज़िला स्तर पर पुलिस को क्या करना है, इसका पूरा खाका बना दिया था. फिर भी दशहरे के बाद बिहार के सीतामढ़ी में क्या हुआ.

  • जब येल यूनिवर्सिटी की क्लास में बैठे रवीश कुमार...

    जब येल यूनिवर्सिटी की क्लास में बैठे रवीश कुमार...

    मैंने हार्वर्ड में भी एक क्लास किया था. तीन घंटे की क्लास थी, मगर एक घंटे से कम बैठा. प्रोफेसर ने झट से अनुमति दे दी थी. उस क्लास में पहली बार देखा कि कई देशों से आए छात्रों की क्लास कैसी होती है. वैसे येल के ही GENDER AND SEXUALITY STUDIES की प्रोफेसर इंदरपाल ग्रेवाल ने भी न्योता दिया कि आप मेरी भी क्लास में आ जाइए, लेकिन तब समय कम था. प्रोफेसर ग्रेवाल नारीवादी मसलों पर दुनिया की जानी-मानी प्रोफेसर हैं. फेमिनिस्ट हैं. मेरी बदकिस्मती.

  • कोलंबिया जर्नलिज्म स्कूल का एक सफर

    कोलंबिया जर्नलिज्म स्कूल का एक सफर

    1912 में जब हम अपनी आज़ादी की लड़ाई की रूपरेखा बना रहे थे तब यहां न्यूयार्क में जोसेफ़ पुलित्ज़र कोलंबिया स्कूल ऑफ़ जर्नलिज़्म की स्थापना कर रहे थे. सुखद संयोग है कि 1913 में गणेश शंकर विद्यार्थी कानपुर में प्रताप की स्थापना कर रहे थे. तो ज़्यादा दुखी न हों, लेकिन यह संस्थान पत्रकारिता की पढ़ाई के लिए दुनिया भर में जाना जाता है.

  • रोशनी प्रधानमंत्री से आ रही है, इसलिए पुलिस आईबी को पीट रही है

    रोशनी प्रधानमंत्री से आ रही है, इसलिए पुलिस आईबी को पीट रही है

    “रोशनी नहीं है, अंधेरा दिख रहा है”- प्रधानमंत्री मोदी... “रोशनी आपसे आ रही है प्रधानमंत्री जी”- आनंद महिंद्रा... महान भारत की बर्बादी के दौर में उस खूबसूरत मंच पर हुआ यह संवाद शेक्सपियर के संवादों से भी क्लासिक है.

  • सीबीआई की पार्वती और पारो में किसे चुनेंगे देवदास हुजूर...

    सीबीआई की पार्वती और पारो में किसे चुनेंगे देवदास हुजूर...

    आपने फिल्म देवदास में पारो और पार्वती के किरदार को देखा होगा. नहीं देख सके तो कोई बात नहीं. सीबीआई में देख लीजिए. सरकार के हाथ की कठपुतली दो अफ़सर उसके इशारे पर नाचते-नाचते आपस में टकराने लगे हैं. इन दोनों को इशारे पर नचाने वाले देवदास सत्ता के मद में चूर हैं. नौकरशाही के भीतर बह रहा गंदा नाला ही छलका है. राजनीति का परनाला वहीं गिरता है, जहां से उसके गिरने की जगह बनाई गई होती है. चार्जशीट का खेल करने वाली सीबीआई अपने ही दफ़्तर में एफआईआर और चार्जशीट का खेल खेल रही है. महान मोदी कैलेंडर देख रहे हैं, ताकि किसी महान पुरुष की याद के बहाने भाषण देने निकल जाएं.

  • मधुमेह रोगियों के पांव जल्दी ही बहुत खूबसूरत होंगे, जमीन पर रखने लायक!

    मधुमेह रोगियों के पांव जल्दी ही बहुत खूबसूरत होंगे, जमीन पर रखने लायक!

    सन 1701 में येल यूनिवर्सिटी की बुनियाद पड़ी थी. चार सौ साल की यात्रा पूरी करने वाली इस यूनिवर्सिटी की आत्मा ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड में बसती है, जबकि है अमरीका के न्यू हेवन शहर में. यहां दो दिनों से भटक रहा हूं. आज भटकते हुए बायो-मेकेनिक्स की प्रयोगशाला में पहुंचा. यहां तीन भारतीय छात्र नीलिमा, निहव और अली हमारे पांव और उंगलियों की स्थिरता और उसके जरिए लगने वाले बल के बीच संतुलन का अध्ययन कर रहे हैं.

  • 'प्रधानसेवक' ही भारत के 'प्रधान इतिहासकार' घोषित हों...

    'प्रधानसेवक' ही भारत के 'प्रधान इतिहासकार' घोषित हों...

    प्रधानमंत्री इसीलिए आज के ज्वलंत सवालों के जवाब देना भूल जा रहे हैं, क्योंकि वह इन दिनों नायकों के नाम, जन्मदिन और उनके दो-चार काम याद करने में लगे हैं. मेरी राय में उन्हें एक 'मनोहर पोथी' लिखनी चाहिए, जो बस अड्डे से लेकर हवाई अड्डे पर बिके. इस किताब का नाम 'मोदी-मनोहर पोथी' हो.

  • 3800 आरोपियों वाले व्यापम घोटाले पर प्रधानमंत्री मोदी बोल सकते हैं?

    3800 आरोपियों वाले व्यापम घोटाले पर प्रधानमंत्री मोदी बोल सकते हैं?

    लखनऊ की डॉक्टर मनीषा शर्मा ने इसी महीने आत्महत्या कर ली. मनीषा मध्यप्रदेश के व्यापम मामले में गिरफ़्तार हो चुकी थीं और उन्हें सीबीआई के बुलाने पर ग्वालियर भी जाना था मगर ज़हर का इंजेक्शन लगा लिया. उन पर किसी और छात्र के बदले इम्तिहान देकर पास कराने के आरोप थे. आत्महत्या के कारणों की प्रमाणिक बातें नहीं आईं हैं क्योंकि मीडिया अब भारत के इतिहास के सबसे बड़े परीक्षा घोटाले में दिलचस्पी नहीं लेता है. व्यापम मामले से जुड़े कितने लोगों की इन वजहों से मौत हो गई फिर भी इसे लेकर चुप्पी है.

  • जब सब मोदी नाम की आंधी के खौफ में थे, तब लिखा था अकबर के नाम पत्र

    जब सब मोदी नाम की आंधी के खौफ में थे, तब लिखा था अकबर के नाम पत्र

    6 जुलाई 2016 को अकबर के नाम पत्र लिखा था. तब सब मोदी नाम की आंधी के ख़ौफ़ में थे. उन्हें लगता था कि मोदी जिसे छू देंगे वो हीरा बन जाएगा. तब लोग चुप रहे, लगा कि अकबर कोई क़ाबिल शख़्स है जिसकी तलाश मोदी के मुस्तकबिल है. मैं जानता था अकबर क्या है, क्यों अकबर को लेकर सवाल करना चाहिए. आप चाहें तो उस पत्र को पढ़ सकते हैं. 

  • मोबाइल उत्पादन के नाम पर झांसेबाज़ी, ONGC का ख़ज़ाना ख़ाली, निर्यात भी घटा

    मोबाइल उत्पादन के नाम पर झांसेबाज़ी, ONGC का ख़ज़ाना ख़ाली, निर्यात भी घटा

    भारत की मुद्रा दुनिया की सबसे ख़राब प्रदर्शन करने वाली चार मुद्राओं में शामिल है. जेटली यह नहीं बता रहे हैं कि मज़बूत नेता और एक दल की बहुमत की सरकार होने के बाद भी आर्थिक हालत पांच साल ख़राब क्यों रही लेकिन अभी से डराने लगे है कि गठबंधन की सरकार आएगी तो भारत की आर्थिक स्थिति ख़राब हो जाएगी. क्या अभी के लिए गठबंधन की सरकार दोषी है?

  • इलाहाबाद के बाद अब अकबर को बदलने का वक़्त आ गया है

    इलाहाबाद के बाद अब अकबर को बदलने का वक़्त आ गया है

    सोलह महिला पत्रकारों का आरोप सामान्य घटना नहीं है. सबके आरोप में कई बातें सामान्य हैं. पता चलता है कि अकबर मनोरोगी की हद तक अकेली लड़की को बुलाकर हमला करते थे. होटल के कमरे में काम के बहाने बुलाने पर ज़ोर देते थे. कमरे में शराब पीने के लिए बर्फ़ निकालने और गिलास में शराब डालने की बात करते थे.

  • अकबर लिख रहे हैं नई आइन-ए-अकबरी, रिपोर्ट कर रहे हैं रवीश कुमार

    अकबर लिख रहे हैं नई आइन-ए-अकबरी, रिपोर्ट कर रहे हैं रवीश कुमार

    मैंने कल रात सपना देखा. अख़बार में ख़बर छपी थी. बादशाह अकबर इस सवाल से तंग आ गए थे कि उन्होंने किस दर्जे की तालीम हासिल की है, 'समग्र सम्राट शास्त्र' में दीक्षित अकबर के जवाब से जनता मुतमईन नहीं हुई.

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