NDTV Khabar

Ravish kumar blog


'Ravish kumar blog' - 94 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • 10 साल में UPA से ज़्यादा 4 साल में NDA ने उत्पाद शुल्क चूस लिया...

    10 साल में UPA से ज़्यादा 4 साल में NDA ने उत्पाद शुल्क चूस लिया...

    तेल की बढ़ी क़ीमतों पर तेल मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तर्क है कि यूपीए सरकार ने 1.44 लाख करोड़ रुपये तेल बॉन्ड के ज़रिए जुटाए थे,जिस पर ब्याज की देनदारी 70,000 करोड़ बनती है. मोदी सरकार ने इसे भरा है. 90 रुपये तेल के दाम हो जाने पर यह सफ़ाई है तो इसमें भी झोल है. सरकार ने तेल के ज़रिए 'आपका तेल' निकाल दिया है. ऑनिद्यो चक्रवर्ती ने हिसाब लगाया है कि यूपीए ने 2005-6 से 2013-14 के बीच जितना पेट्रोल डीज़ल की एक्साइज़ ड्यूटी से नहीं वसूला उससे करीब तीन लाख करोड़ ज़्यादा उत्पाद शुल्क एनडीए ने चार साल में वसूला है. उस वसूली में से दो लाख करोड़ चुका देना कोई बहुत बड़ी रक़म नहीं है.

  • एक पत्र आया है, चर्चा इस पर कीजिए

    एक पत्र आया है, चर्चा इस पर कीजिए

    यह व्यवस्था किसी साहूकार या निजी कंपनियों द्वारा नहीं चलाई जा रही है बल्कि यह व्यवस्था स्वयं शासन के द्वारा चलाई जा रही है. जी हां, मैं बात कर रहा हूं मध्य प्रदेश पॉलिटेक्निक अतिथि व्याख्याताओं के लिए बनाए गए नियमों के बारे में इन नियमों के तहत अतिथि अध्यापकों को प्रति कालखंड सिर्फ 275 का भुगतान किया जाता है. अगर किसी दिन किसी भी कारण से कक्षा नहीं लगती है तो उस दिन अतिथि व्याख्याताओं को कोई भी भुगतान नहीं किया जाता है.

  • क्या आपने हिन्दी का कूड़ा अख़बार बंद किया या बदला?

    क्या आपने हिन्दी का कूड़ा अख़बार बंद किया या बदला?

    अंबानी जी पाठकों को लेकर हमेशा उदार रहे हैं. उन पर कभी मानहानि नहीं करते. कैरवान ने भी उन्हें मानहानि देने के लिए ये अंक निकाला है. आप पढ़कर ख़ुद से अंबानी की मानहानि की भरपाई करें.

  • बोलिए मोदी जी, देश को बोलने वाला नेता चाहिए था... बोलिए न... 

    बोलिए मोदी जी, देश को बोलने वाला नेता चाहिए था... बोलिए न... 

    भाषणों के मास्टर कहे जाते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. साल 2013 में जब वह डॉलर के मुक़ाबले भारतीय रुपये के गिरने पर दहाड़ रहे थे, तब लोग कहते थे, 'वाह मोदी जी, वाह... यह हुआ भाषण... यह भाषण नहीं, देश का राशन है... हमें बोलने वाला नेता चाहिए... पेट को भोजन नहीं, भाषण चाहिए...' यह बात भी उन तक पहुंची ही होगी कि पब्लिक में बोलने वाले नेता की डिमांड है. बस, उन्होंने भी बोलने में कोई कमी नहीं छोड़ी. पेट्रोल महंगा होता था, मोदी जी बोलते थे. रुपया गिरता था, मोदी जी बोलते थे. ट्वीट पर री-ट्वीट, डिबेट पर डिबेट. 2018 में हम इस मोड़ पर पहुंचे हैं, जहां 2013 का साल राष्ट्रीय फ्रॉड का साल नज़र आता है, जहां सब एक दूसरे से फ्रॉड कर रहे थे.

  • हिंदी का पाठक जब बनेगा सबसे अच्छा पाठक

    हिंदी का पाठक जब बनेगा सबसे अच्छा पाठक

    लोग पढ़ने की क्षमता कई कारणों से खोते जा रहे हैं. इसलिए उनके लिए सुबह की राम राम जी की जगह गुलाब के फूल, दो कप चाय और पहाड़ के पीछे से उगते सूरज से गुडमार्निंग भेजा जाता है. जो लोग मुश्किल से पढ़ने की साधना में लगे हैं, वो व्यापक समाज के अपढ़ होने की इस प्रक्रिया से बेचैन हैं.

  • नोटबंदी के समय उल्लू बने लोग हाज़िर हों, 99.3 पैसा बैंक में आ गया है

    नोटबंदी के समय उल्लू बने लोग हाज़िर हों, 99.3 पैसा बैंक में आ गया है

    कल्पना कीजिए, आज रात आठ बजे प्रधानमंत्री मोदी टीवी पर आते हैं और नोटबंदी के बारे में रिज़र्व बैंक की रिपोर्ट पढ़ने लगते हैं. फिर थोड़ा रूक कर वे 8 नवंबर 2016 का अपना भाषण चलाते हैं, फिर से सुनिए मैंने क्या क्या कहा, उसके बाद रिपोर्ट पढ़ते हैं. आप देखेंगे कि प्रधानमंत्री का गला सूखने लगता है. वे खांसने लगते हैं और लाइव टेलिकास्ट रोक दिया जाता है. वैसे कभी उनसे पूछिएगा कि आप अपने उस ऐतिहासिक कदम के बारे में क्यों नहीं बात करते हैं?

  • क्या चौकीदार जी ने अंबानी के लिए चौकीदारी की है?

    क्या चौकीदार जी ने अंबानी के लिए चौकीदारी की है?

    उपरोक्त संदर्भ में चौकीदार कौन है, नाम लेने की ज़रूरत नहीं है. वर्ना छापे पड़ जाएंगे और ट्विटर पर ट्रोल करने लगेंगे कि कानून में विश्वास है तो केस जीत कर दिखाइये. जैसे भारत में फर्ज़ी केस ही नहीं बनता है और इंसाफ़ झट से मिल जाता है. आप लोग भी सावधान हो जाएं. आपके ख़िलाफ़ कुछ भी आरोप लगाया जा सकता है. अगर आप कुछ नहीं कर सकते हैं तो इतना तो कर दीजिए कि हिन्दी अख़बार लेना बंद कर दें या फिर ऐसा नहीं कर सकते तो हर महीने अलग अलग हिन्दी अख़बार लें, तभी पता चलेगा कि कैसे ये हिन्दी अख़बार सरकार की थमायी पर्ची को छाप कर ही आपसे महीने का 400-500 लूट रहे हैं. हिन्दी चैनलों का तो आप हाल जानते हैं. मैं ऐसा क्यों कह रहा हूं. इसके लिए आपको 28 और 29 अगस्त के इंडियन एक्सप्रेस में ऋतिका चोपड़ा की ख़बर बांचनी होगी. आप सब इतना तो समझ ही सकते हैं कि इस तरह की ख़बर आपने अपने प्रिय हिन्दी अख़बार में कब देखी थी.

  • ये नफरत आपको दंगाई बना रही है, हमारी मोहब्बत आपको इंसान बनाएगी

    ये नफरत आपको दंगाई बना रही है, हमारी मोहब्बत आपको इंसान बनाएगी

    हम तुम्हारी हर झूठ पर भारी पड़ते हैं, भांडा फोड़ देते हैं और इस तरह आप धीरे-धीरे बदलते चले जाएंगे. नफरतों से सामान्य होना कितना सहज हो चुका है. मैं केरल नहीं गया. जाता तो गलत नहीं होता. उसके बाद भी किसी मदद करने वाले के चेहरे पर मेरा चेहरा लगाकर इस तरह से पेश किया जा रहा है ताकि कम दिमाग के लोग मान बैठे कि केरल जाना या बाढ़ पीड़ितों की मदद करना गलत है. कम दिमाग वालों में ऐसी मूर्खता होगी ही इसी भरोसे धारणा फैक्ट्री से ऐसी सामग्री बनाई जाती है. सोचिए जिसकी जगह मेरा चेहरा लगा है वह कितना अच्छा होगा. अपने कंधे पर एक बच्चे को बिठाकर ले जा रहा है. यह उस बंदे का अपमान है. हम समाज में ऐसे लोगों को तैयार कर रहे हैं जो इस तरह के झांसे में आ रहे हैं.

  • यादों में कुलदीप नैयरः शमा हर रंग में जलती है सहर होने तक...

    यादों में कुलदीप नैयरः शमा हर रंग में जलती है सहर होने तक...

    मिर्ज़ा ग़ालिब की शमा की तरह कुलदीप नैयर हर लौ में तपे हैं, हर रंग में जले हैं. शमा के जलने में उनका यक़ीन इतना गहरा था कि 15 अगस्त से पहले की शाम वाघा बॉर्डर पर मोमबत्तियां जलाने पहुंच जाते थे.

  • गंगा तो साफ नहीं हुई, सरस्वती मिल गई है, फिर भी सन्नाटा क्यों है भाई...

    गंगा तो साफ नहीं हुई, सरस्वती मिल गई है, फिर भी सन्नाटा क्यों है भाई...

    हरियाणा में मनोहरलाल खट्टर सरकार ने सरस्वती नदी की खोज में जाने कितने करोड़ बहा दिए. एक नदी की खोज का दावा कर लिया गया है. मुग़लावाली गांव के आस-पास सरस्वती नदी को लेकर जो नई संस्कृति गढ़ी जा रही है. कैसे भोले लोगों में यह विश्वास गढ़ा जा रहा है कि सरस्वती नदी मिल गई है.

  • सिस्टम की क्रूरता से इंसान का मतलब नहीं रहा...

    सिस्टम की क्रूरता से इंसान का मतलब नहीं रहा...

    हमारी राजनीतिक चर्चा थ्योरी और थीम के आसपास घूमती रहती है. शायद इनके विश्लेषण में विद्वान होने का मौक़ा मिलता होगा. राजनीति चलती भी है थीम और थ्योरी से. इस छतरी के नीचे हमारा सिस्टम कैसी-कैसी क्रूरताओं से भरा है.

  • रवीश कुमार के पास कोई सचिवालय नहीं है, काश होता कोई...

    रवीश कुमार के पास कोई सचिवालय नहीं है, काश होता कोई...

    दोस्तों, मेरे पास कोई सचिवालय नहीं है. आए दिन लोगों के इतने मैसेज आते हैं कि सबको पढ़ना भी बस की बात नहीं रही. पढ़कर वादा करना भी मुश्किल है. तादाद इतनी है कि 90 फीसदी तो यूं ही पढ़कर डिलीट कर देने पड़ते हैं. कोई 10-20 नहीं, हर दिन 500 से 1,000 तक मुझे मैसेज आते हैं.

  • लाखों नौकरियां चुरा रही हैं सरकारें, नौजवान खा रहे हैं झांसा

    लाखों नौकरियां चुरा रही हैं सरकारें, नौजवान खा रहे हैं झांसा

    क्या केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने वह कह दिया, जो सब जानते हैं. उनका बयान आया कि आरक्षण लेकर क्या करोगे, सरकार के पास नौकरी तो है नहीं. बाद में नितिन गडकरी की सफाई आ गई कि सरकार आरक्षण का आधार जाति की जगह आर्थिक नहीं करने जा रही है, मगर इसी बयान का दूसरा हिस्सा भी था कि सरकार के पास नौकरी है नहीं.

  • हाई स्किल परंतु अस्थायी काम ही रोज़गार का नया चेहरा होगा: मोदी

    हाई स्किल परंतु अस्थायी काम ही रोज़गार का नया चेहरा होगा: मोदी

    यह भाषण प्रधानमंत्री मोदी का है जो उन्होंने ब्रिक्स देशों के सम्मेलन में दिया है. यह भाषण आपको बीजेपी की साइट और यू ट्यूब पर हर जगह मिल जाएगा. आप इसे सुनें तो पता चलेगा कि रोज़गार को लेकर प्रधानमंत्री क्या सोच रहे हैं? क्या भारतीय युवाओं को पता है कि रोज़गार को लेकर उनके प्रधानमंत्री क्या राय रखते हैं? परमानेंट रोज़गार की तैयारी में जवानी के पांच पांच साल हवन कर रहे हैं भारतीय युवाओं के बीच यह बात क्यों नहीं कही जा रही है कि रोज़गार का चेहरा बदल गया है. अब अस्थायी काम ही रोज़गार का नया चेहरा होगा.

  • आठ लाख छात्रों के साथ रेलवे ऐसा क्यों कर रही है?

    आठ लाख छात्रों के साथ रेलवे ऐसा क्यों कर रही है?

    रेलवे ख़ुद मानती है कि आठ लाख छात्रों के परीक्षा केंद्र पांच सौ किमी से दूर हैं. यह नहीं बताती कि पांच सौ से पंद्रह सौ या दो हज़ार किमी दूर हैं लेकिन प्रेस विज्ञप्ति में पांच सौ से ज़्यादा दूर लिख देने से दो हज़ार किमी की दूरी वाला भाव चला जाता है. जो रेल का परीक्षा से नहीं जुड़े हैं उन्हें झांसा तो मिल जाता है मगर जो परीक्षा दे रहे हैं उन्हें सच्चाई पता है.

  • जेटली और गोयल को कौन सा मंत्री लिखा जाए!

    जेटली और गोयल को कौन सा मंत्री लिखा जाए!

    भारत का वित्त मंत्री कौन है? इसका कोई एक जवाब नहीं हो सकता. इसका एक जवाब होता तो बिज़नेस स्टैंडर्ड में छपे विज्ञापन से साफ़ हो जाता लेकिन विज्ञापन देने वाले जूता चप्पल उद्योग संग (CFLA) को पता ही नहीं चला कि किसे वित्त मंत्री लिखें.

  • रेलमंत्री जी, ये कैसी ऑनलाइन परीक्षा है कि आरा से हैदराबाद जाना पड़े...?

    रेलमंत्री जी, ये कैसी ऑनलाइन परीक्षा है कि आरा से हैदराबाद जाना पड़े...?

    9 अगस्त से रेलवे की परीक्षा शुरू हो रही है. अस्सिटेंट लोको पायलट और टेक्निशियन के 26,502 पदों के लिए परीक्षा हो रही है. इसमें 47 लाख से अधिक छात्र भाग लेंगे. रेल मंत्रालय की तरफ से दावा किया गया है कि रेलवे दुनिया की सबसे बड़ी ऑनलाइन परीक्षा कराने जा रहा है, क्योंकि इस परीक्षा में करीब एक लाख पदों के लिए दो करोड़ से अधिक छात्र हिस्सा लेंगे. यही हेडलाइन भी अख़बारों में छपता है ताकि फुल प्रोपेगैंडा हो सके.

  • राफेल लड़ाकू विमान को लेकर लड़ाई किस बात की हो रही है...

    राफेल लड़ाकू विमान को लेकर लड़ाई किस बात की हो रही है...

    हमने इस विवाद को समझने के लिए 'बिज़नेस स्टैंडर्ड' के अजय शुक्ला और 'टाइम्स ऑफ इंडिया' के रजत पंडित की रिपोर्टिंग का सहारा लिया है. ये दोनों ही रक्षा मामलों के बेहतरीन रिपोर्टर/ विशेषज्ञ माने जाते हैं.

Advertisement