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Ravish kumar blog on pm modi


'Ravish kumar blog on pm modi' - 4 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • एन इवनिंग इन पेरिस: डील, डीलर और पीएम

    एन इवनिंग इन पेरिस: डील, डीलर और पीएम

    एफ़िल टावर के नीचे बहती सीन नदी की हवा बनारस वाले गंगा पुत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पेरिस की शाम का हिसाब मांगने आ गई है. 10 अप्रैल 2015 की पेरिस यात्रा सिरे से संदिग्ध हो गई है. गंगा के सामने सीन बहुत छोटी नदी है लेकिन वो गंगा से बेहतर बहती है. उसके किनारे खड़ा एफ़िल टावर बनारस के पुल की तरह यूं ही हवा के झोंके से गिर नहीं जाता है. प्रधानमंत्री कब तक गंगा पुत्र भीष्म की तरह चुप्पी साधे रहेंगे. क्या अंबानी के लिए ख़ुद को इस महाभारत में भीष्म बना देंगे? न कहा जा रहा है न बचा जा रहा हैय 

  • लाखों नौकरियां चुरा रही हैं सरकारें, नौजवान खा रहे हैं झांसा

    लाखों नौकरियां चुरा रही हैं सरकारें, नौजवान खा रहे हैं झांसा

    क्या केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने वह कह दिया, जो सब जानते हैं. उनका बयान आया कि आरक्षण लेकर क्या करोगे, सरकार के पास नौकरी तो है नहीं. बाद में नितिन गडकरी की सफाई आ गई कि सरकार आरक्षण का आधार जाति की जगह आर्थिक नहीं करने जा रही है, मगर इसी बयान का दूसरा हिस्सा भी था कि सरकार के पास नौकरी है नहीं.

  • हाई स्किल परंतु अस्थायी काम ही रोज़गार का नया चेहरा होगा: मोदी

    हाई स्किल परंतु अस्थायी काम ही रोज़गार का नया चेहरा होगा: मोदी

    यह भाषण प्रधानमंत्री मोदी का है जो उन्होंने ब्रिक्स देशों के सम्मेलन में दिया है. यह भाषण आपको बीजेपी की साइट और यू ट्यूब पर हर जगह मिल जाएगा. आप इसे सुनें तो पता चलेगा कि रोज़गार को लेकर प्रधानमंत्री क्या सोच रहे हैं? क्या भारतीय युवाओं को पता है कि रोज़गार को लेकर उनके प्रधानमंत्री क्या राय रखते हैं? परमानेंट रोज़गार की तैयारी में जवानी के पांच पांच साल हवन कर रहे हैं भारतीय युवाओं के बीच यह बात क्यों नहीं कही जा रही है कि रोज़गार का चेहरा बदल गया है. अब अस्थायी काम ही रोज़गार का नया चेहरा होगा.

  • नेहरू से लड़ते-लड़ते अपने भाषणों में हारने लगे हैं नरेंद्र मोदी

    नेहरू से लड़ते-लड़ते अपने भाषणों में हारने लगे हैं नरेंद्र मोदी

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  के लिए चुनाव जीतना बड़ी बात नहीं है. वह जितने चुनाव जीत चुके हैं या जिता चुके हैं, यह रिकॉर्ड भी लंबे समय तक रहेगा. कर्नाटक की जीत कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन आज प्रधानमंत्री को अपनी हार देखनी चाहिए. वह किस तरह अपने भाषणों में हारते जा रहे हैं.

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