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  • रवीश का डोनाल्ड ट्रंप के नाम खुला खत : लगता है बिहार वाला भैक्सीन घोंपना पड़ेगा

    रवीश का डोनाल्ड ट्रंप के नाम खुला खत : लगता है बिहार वाला भैक्सीन घोंपना पड़ेगा

    'ए ट्रंप बाबू. ढेर डिबेट का शौक़ चढ़ल है न तो आ जाइये बिहार.आपके फ़्रेंड जाने वाले हैं. ऊहां भैक्सीन बाँटने वाले हैं. फिरी में बाँटेंगे. आठ करोड़ भैक्सीन फिरी में देंगे. त हम बूझे कि सगरो फिरी बंटेगा लेकिन फ़्रेंड भाई का पलानिंग त आप जानते ही हैं.'

  • रेटिंग के बहाने नियम बदल कर वही खेल खेले जाने का दिमाग़ किसका है भाई

    रेटिंग के बहाने नियम बदल कर वही खेल खेले जाने का दिमाग़ किसका है भाई

    आपको एक दर्शक के नाते चैनल के ऊपर जो कंटेंट दिखाया जा रहा है उस पर नज़र रखें. देखिए कि क्या उसमें वाकई कोई पत्रकारिता है, क्या आपने वाकई किसी चीज़ के बारे में जाना. जिन पर सरकार की भक्ति और भजन का आरोप लग रहा है वही एक चैनल को टारगेट करने के बहाने संत बनने का प्रयास कर रहे हैं. ऐसा नहीं होना चाहिए.

  • बिहार सरकार का यह काम तो वाक़ई शानदार है, वाक़ई

    बिहार सरकार का यह काम तो वाक़ई शानदार है, वाक़ई

    नई शिक्षा व्यवस्था के लिए नीतीश कुमार को नोबेल प्राइज़ मिलना चाहिए और सुशील मोदी को संयुक्त राष्ट्र का महासचिव बना देना चाहिए. कमाल का काम किया है दोनों ने. बल्कि दोनों को बिहार से पहले अमरीकी चुनाव में भी विजयी हो जाना चाहिए.

  • बिहार के स्वास्थ्य मंत्री के नाम रवीश कुमार का पत्र

    बिहार के स्वास्थ्य मंत्री के नाम रवीश कुमार का पत्र

    मंगल पांडे जी, समझ सकता हूं कि आप चुनाव कार्य में व्यस्त होंगे. चुनाव आयोग के कारण आप नीतिगत फैसला नहीं ले सकते लेकिन आपके सचिव जिनका काम है कि वे छात्रों की समस्याओं को देखें, उन्हें ये काम कर देना चाहिए था, या फिर छात्रों के साथ बातचीत कर अपनी बात बता देनी चाहिए थी. मुझे स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का पक्ष मालूम नहीं है लेकिन मेडिकल के छात्रों की बात से लगता है कि उन्हें राहत मिलनी चाहिए. 

  • हाथरस: राज्य ही जब झूठ और फ़्राड करे तो उसे सज़ा क्यों नहीं

    हाथरस: राज्य ही जब झूठ और फ़्राड करे तो उसे सज़ा क्यों नहीं

    बलात्कार की तमाम घटनाओं के बीच फ़र्क़ यही था कि लोगों की चर्चाओं के बीच पीड़िता के शव को जला दिया गया. यह राज्य की तरफ़ से ऐसी नाफ़रमानी थी जो लोगों को धक से लग गई. राज्य और प्रशासन इस सवाल से भाग रहा है.

  • हाथरस - विपक्ष दिखाया नहीं जाता या दिखता नहीं है?

    हाथरस - विपक्ष दिखाया नहीं जाता या दिखता नहीं है?

    सरकार से सवाल करने में डर लगता है. तब बहाना बनाया जाता है कि विपक्ष कहाँ है. विपक्ष की खोज उनकी अपनी ज़रूरत के लिए होती है ताकि डिबेट के नाम पर इस घटना बनाम उस घटना का मैच शुरू हो सके.

  • क्या लोकतांत्रिक नेता और तानाशाह नेता दोस्त हो सकते हैं?

    क्या लोकतांत्रिक नेता और तानाशाह नेता दोस्त हो सकते हैं?

    भारत लोकतंत्र का चेहरा था. आज भारत की संस्थाएं चरमराती नज़र आ रही हैं. भारत में और न ही भारत के बाहर लोकतंत्र के सवालों को लेकर भारत के नेता बोलते नज़र आ रहे हैं.

  • PM मोदी को हर 2 साल पर सपने बेचने को नई जनता चाहिए, किसानों की बारी आई है

    PM मोदी को हर 2 साल पर सपने बेचने को नई जनता चाहिए, किसानों की बारी आई है

    एक और सपना अभी तक बेचा जा रहा है. 2022-23 में किसानों की आमदनी दुगनी होगी. लेकिन यही नहीं बताया जाता है कि अभी कितनी आमदनी है और 2022 में कितनी हो जाएगी. कई जानकारों ने लिखा है कि किसानों की सालाना औसत आमदनी का डेटा आना बंद हो गया है. हैं न कमाल. पर डेटा बीच-बीच में फाइलों से फिसल कर आ ही जाता है.

  • भारत बंद करने जा रहे किसान भाइयों और बहनों को रवीश कुमार का एक पत्र

    भारत बंद करने जा रहे किसान भाइयों और बहनों को रवीश कुमार का एक पत्र

    आप भारत बंद कर रहे हैं. आपके भारत बंद से पहले ही आपको न्यूज़ चैनलों ने भारत में बंद कर दिया है. चैनलों के बनाए भारत में बेरोज़गार बंद हैं. जिनकी नौकरी गई वो बंद हैं. इसी तरह से आप किसान भी बंद हैं. आपकी थोड़ी सी जगह अख़बारों के ज़िला संस्करणों में बची है जहां आपसे जुड़ी अनाप-शनाप ख़बरें भरी होंगी मगर उन ख़बरों का कोई मतलब नहीं होगा.

  • यूपी में 5 साल तक संविदा नौकरी के प्रस्ताव से घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है सरकार

    यूपी में 5 साल तक संविदा नौकरी के प्रस्ताव से घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है सरकार

    अगर यह ख़बर सही है तो इस पर व्यापक बहस होनी चाहिए. अख़बार में छपी ख़बर के अनुसार उत्तर प्रदेश का कार्मिक विभाग यह प्रस्ताव ला रहा है कि समूह ख व ग की भर्ती अब 5 साल के लिए संविदा पर होगी. कांट्रेक्ट पर. पांच साल के दौरान जो छंटनी से बच जाएंगे उन्हें स्थायी किया जाएगा. इस दौरान संविदा के कर्मचारियों को स्थायी सेवा वालों का लाभ नहीं मिलेगा.

  • सिर्फ़ रेलवे परीक्षाओं की तारीख़ का एलान कर नौजवानों में फूट न डाले सरकार

    सिर्फ़ रेलवे परीक्षाओं की तारीख़ का एलान कर नौजवानों में फूट न डाले सरकार

    पिछले रविवार से ही छात्र ट्वीटर की टाइम लाइन पर ट्रेंड आंदोलन चला रहे हैं. 35 से 70 लाख ट्वीट करने के बाद भी पीयूष गोयल चुप रहे तब छात्रों ने 5 सितंबर को शाम 5 बजे थाली बजाने का आंदोलन शुरू किया.

  • क्या कड़े निर्णय के चक्कर में देश को गर्त में पहुंचा दिया PM मोदी ने?

    क्या कड़े निर्णय के चक्कर में देश को गर्त में पहुंचा दिया PM मोदी ने?

    नोटबंदी और तालाबंदी ये दो ऐसे निर्णय हैं जिन्हें कड़े निर्णय की श्रेणी में रखा गया. दोनों निर्णयों ने अर्थव्यवस्था को लंबे समय के लिए बर्बाद कर दिया. आर्थिक तबाही से त्रस्त लोग क्या यह सवाल पूछ पाएँगे कि जब आप तालाबंदी जैसे कड़े निर्णय लेने जा रहे थे तब आपकी मेज़ पर किस तरह के विकल्प और जानकारियाँ रखी गईं थीं.

  • पहली तिमाही की GDP -23.9%, मोदी जी आपका कोई विकल्प नहीं

    पहली तिमाही की GDP -23.9%, मोदी जी आपका कोई विकल्प नहीं

    सावधान हो जाएं. आर्थिक निर्णय सोच समझ कर लें. बल्कि अब यही ठीक रहेगा कि सुशांत सिंह राजपूत का ही कवरेज देखते रहिए. यह बर्बादी की ऐसी सतह है जहां से आप अब बेरोज़गारी के प्रश्नों पर विचार कर कुछ नहीं हासिल कर सकते.

  • अंबानी और अडानी, आओ मिलकर पढ़ते हैं साल भर यही कहानी, हम हिन्दुस्तानी

    अंबानी और अडानी, आओ मिलकर पढ़ते हैं साल भर यही कहानी, हम हिन्दुस्तानी

    भारत संचार निगम लिमिटेड वाले जानते होंगे कि एक समय कई हज़ार करोड़ का मुनाफ़ा कमाने वाली कंपनी कैसे ख़त्म की गई. उससे कहा गया कि आप 2G से 4G का मुक़ाबला करो. इस फ़ैसले से किसे लाभ हुआ BSNL के लोग जानते थे मगर हिन्दू मुसलमान की राजनीति ने कइयों के विवेक पर गोबर लीप दिया था.

  • आसमान छूने शहर आते हैं, लेकिन शहर के लोग आसमान नहीं देखते...

    आसमान छूने शहर आते हैं, लेकिन शहर के लोग आसमान नहीं देखते...

    दिल्ली की छतों का एक ही मतलब रहा है. जहां काले रंग की पानी की टंकी होती थी. जिसमें पानी मोटर से चढ़ता था.फिर उतरता था. लोग छत पर टंकी देखने जाते हैं. जब टंकी लीक करती है. क्या कभी पहले भी इस रात का आसमान इस तरह देखना होता था? हाउसिंग सोसायटी के लोग अपनी बालकनी से आती-जाती कारें देखा करते हैं. छत की सीलिंग देखते हैं. जहां छत है वहाँ डिश एंटेना लगा है. लोग घरों में बंद है. 

  • प्रातःकालीन डायरी : कहीं होता हूं, जागता कहीं और हूं...

    प्रातःकालीन डायरी : कहीं होता हूं, जागता कहीं और हूं...

    एकदम से सुबह की रौशनी बिखर जाने से ठीक पहले का सफ़ेद अंधेरा. जाती हुई रात अपने आख़िरी वक्त में सफ़ेद लगती है. रात गहराने से पहले भौंक कर सोने वाले कुत्ते भी सुबह होने से पहले भौंकने लगते हैं, कौआ पहले बोलता है या गौरैया पहले बोलती है. ची ची ची ची। ची च। ची ची ची ची. पेड़ पर कुछ कोलाहल तो है. हवा ठंडी है. ऐसे वक्त की खुली दुकानों की अपनी ख़ुश्बू होती है. भीतर बल्ब जल रहा है. बाहर सड़क पर थोड़ी सफ़ाई हो चुकी है. दुकान की बेंच बाहर रखी जा रही है. भजन बज रहा है.

  • यूपी CM योगी आदित्यनाथ के नाम रवीश कुमार का खुला खत

    यूपी CM योगी आदित्यनाथ के नाम रवीश कुमार का खुला खत

    अभ्यर्थियों के इस पत्र को सत्यापित करने का कोई ज़रिया नहीं है. आप पत्र में लिखी बातों की जांच करा सकते हैं. यह निश्चित रूप से दुखद है कि आपके राज में 2018 में शुरू हुई OCT 49568 की प्रक्रिया अगस्त 2020 तक पूरी नहीं हुई है. पत्र से यह भी नहीं लगता कि कोई क़ानूनी अड़चन है.अत: ये भर्ती तो समय से पूरी हो सकती थी.

  • इस दौर का नारा है: कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता, नौकरी जाती है जाने दो

    इस दौर का नारा है: कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता, नौकरी जाती है जाने दो

    क्या उन ख़बरों को ऐसे लिखे- छोटे, लघु व मध्यम श्रेणी के उद्योगों की अपनी रिपोर्ट है कि अगस्त तक चार करोड़ लोगों की नौकरियाँ जा सकती हैं. कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता. CMIE का कहना है कि पचास लाख वेतनभोगी लोगों की नौकरी चली गई होगी. कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता. ट्रैवल एंड टूरिज़्म सेक्टर से चार करोड़ों लोगों की नौकरियाँ जा सकती हैं.कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता. एयर इंडिया के पचास पायलट निकाले गए. कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता. बिक जाएगा एयर इंडिया, सरकार करेगी फ़ैसला.  कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता.

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