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Ravish kumar ndtv


'Ravish kumar ndtv' - 89 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • कैमरे में हिमा दास का इतिहास है, उसकी जीत के क्षणों की रिकॉर्डिंग नहीं

    कैमरे में हिमा दास का इतिहास है, उसकी जीत के क्षणों की रिकॉर्डिंग नहीं

    कई बार इस वीडियो को देख चुका हूं. मैदान की तरफ से साइड एंगल का कैमरा और कमेंटेटर की आवाज़ जिस तरह से हिमा में आगे निकलने की संभावना को देखकर उत्तेजित होती है, टॉप एंगल का कैमरा उसे ठंडा कर देता है. हिमा दास चार धाविकाओं को पीछे छोड़ते हुए निकल रही हैं. लंबी छलांग लगा रही हैं. अपना सब कुछ दांव पर लगाते इस खिलाड़ी को कैमरा दूर निगाहों से देखने लगता है. वो सिर्फ उस लाइन को क्रास करते हुए दिखाना चाहता था जिससे कोई नंबर वन होता है. काफी देर तक कैमरा सिर्फ अमेरिकन चैंपियन को देख रहा था. दौड़ के अंतिम अंतिम झणों तक अमेरिकन चैंपियन ही प्रमुखता से दिखती है. तभी उसके साये से निकलती हुई एक छाया बड़ी हो जाती है. अमेरिकन चैंपियन को पीछे छोड़ देती है.

  • क्या सरकारी कर्मचारियों की संख्या कम करना शानदार उपलब्धि है?

    क्या सरकारी कर्मचारियों की संख्या कम करना शानदार उपलब्धि है?

    एक विकल्प है कि BSNL और MTNL को 4 जी स्पेक्ट्रम दे दिया जाए. लेकिन इससे भी ये कंपनियां पटरी पर नहीं आएंगी. BSNL ने आखिरी बार 2008 में मुनाफा कमाया था. उसके बाद से यह कंपनी 82,000 करोड़ का घाटा झेल चुकी है. दिसंबर 2018 तक यह आंकड़ा 90,000 करोड़ के पार जा सकता है. इसके कर्मचारियों पर राजस्व का 66 प्रतिशत खर्च होने लगा है जो 2006 में 21 फीसदी था और 2008 में 27 फीसदी था.

  • राम का नाम आराधना के लिए या हत्या के लिए?

    राम का नाम आराधना के लिए या हत्या के लिए?

    इस सवाल पर लौट आइये इससे पहले कि हम जवाब देने के बजाए नज़रें चुराने लगें. राम का नाम साधना और अराधना के लिए है या इसके नाम पर हत्या करने के लिए है. अभी भले लगता हो कि हमारी ड्राइंग रूम से दूर शायद दिल्ली से बहुत दूर कुछ लोगों का यह काम है और भारत जैसे देश में अपवाद हैं तो आप गलती कर रहे हैं. इनके पीछे की सियासी खुराक कहां से आ रही है, आप इतने भी भोले नहीं है कि सब बताना ही पड़े.

  • वित्त मंत्रालय में पत्रकारों का जाना हुआ आसान, ख़बरों का आना हुआ मुश्किल

    वित्त मंत्रालय में पत्रकारों का जाना हुआ आसान, ख़बरों का आना हुआ मुश्किल

    मैं सपने में था. सपने में वित्त मंत्रालय था. कमरे में अफ़सर फाइलों को पलट रहे थे. उनके पलटते ही नंबर बदल जाते थे. पीले-पीले पन्नों को गुलाबी होते देख रहा था. 0 के आगे 10 लगा देने से 100 हो जा रहा था. 100 से 00 हटा देने पर नंबर 1 हो जा रहा था. कुछ अफ़सरों की निगाहें भी मिल गईं. मिलते ही उन्होंने निगाहें चुरा लीं. उनकी आंखों में काजल था, पानी नहीं था.

  • टि्वटर पर झगड़ने लगे हैं क्रोधित करोड़पतिगण, क्या भक्ति से ध्यानभंग कर दिया बजट ने

    टि्वटर पर झगड़ने लगे हैं क्रोधित करोड़पतिगण, क्या भक्ति से ध्यानभंग कर दिया बजट ने

    बहुत से पत्रकार टाइमलाइन पर दैनिक प्रासंगिकता स्नान कर रहे थे. यह नए प्रकार का स्नान है. उन्होंने कई साल से कोई ख़बर नहीं की है जिससे लगे कि उनमें पत्रकारीय क्षमता है. काफी धूल जम गई है. इसलिए वे सरकार के समर्थन में ट्विट कर किसी से सवाल दाग देते हैं. फिर उनका एडिटर या मालिक नहीं पूछता कि तुम्हारी खबर कहां हैं. यह एक प्रकार का गंगा स्नान है जिसे मैं प्रांसिगकता स्नान कहता हूं.

  • CTN यानि CLEAN THE NATION, ठीक जैसे ऑरवेल के 1984 की THOUGHT POLICE

    CTN यानि CLEAN THE NATION, ठीक जैसे ऑरवेल के 1984 की THOUGHT POLICE

    नाज़ी दौर के इतिहास को पलटिए आपको एक शब्द मिलेगा Cleansing जिसे यहूदियों की सफाई के संदर्भ में इस्तेमाल किया जाता था. उनकी बस्तियों की Cleansing से लेकर नस्ल की Cleansing तक का संदर्भ आपको जगह-जगह मिलेगा. आबादी के एक हिस्से को मिटा देने को Cleansing कहते हैं. जार्ज ऑरवेल की एक किताब है 1984. उसका कोई भी पन्ना आप पढ़ लें. एक Thought Police का ज़िक्र आता है, विचार पुलिस कह सकते हैं.

  • पर्दे पर निर्देशक की वापसी की फिल्म है 'आर्टिकल-15'

    पर्दे पर निर्देशक की वापसी की फिल्म है 'आर्टिकल-15'

    'आर्टिकल-15' में अनुभव ने उसी उत्तर प्रदेश के सींग को सामने से पकड़ा है, जहां से देश की राजनीति अपना खाद-पानी हासिल करती है. फ़िल्म का एक किरदार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की शैली में बोलता है. फ़िल्म अपनी शूटिंग के लिए योगी आदित्यनाथ का शुक्रिया भी अदा करती है. फ़िल्म बॉब डेलन को समर्पित है. एक आदमी को आदमी बनने के लिए आख़िर कितने सफ़र पूरे करने होंगे. उत्तर प्रदेश के आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे से फ़िल्म शुरू होती है.

  • कैंसर से मरना भी मंत्री बनना है

    कैंसर से मरना भी मंत्री बनना है

    लुधियाना का नाला बंद नहीं होता है. बुढ़ा दरिया कहलाता था. पहले नाले ने बुढ़ा दरिया को नाला किया. अब वह बुढ़ा नाला कहलाता है. एक दिन सतलुज को नाले में बदल देगा. नदियों को लेकर योजनाएँ बन रही हैं. योजनाओं के नाम बदल रहे हैं. मंत्रालय बन रहे हैं. मंत्रालय के नाम बदल रहे हैं. नदी नहीं बदल रही है. मरने वाले लोग भी नहीं बदल रहे हैं. जैसे कोई मंत्री बन रहा है, वैसे कोई कैंसर से मर रहा है. कैंसर से मरना भी मंत्री बनना है.

  • जय श्री राम- राजनीतिक समाज का नया हथियार

    जय श्री राम- राजनीतिक समाज का नया हथियार

    अभी तक गाय के नाम पर कमज़ोर मुसलमानों को भीड़ ने मारा. अब जय श्री राम के नाम पर मार रही है. दोनों ही एक ही प्रकार के राजनीतिक समाज से आते हैं. यह वही राजनीतिक समाज है जिसके चुने हुए प्रतिनिधि लोकसभा में एक सांसद को याद दिला रहे थे कि वह मुसलमान है और उसे जय श्री राम का नाम लेकर चिढ़ा रहे थे. सड़क पर होने वाली घटना संसद में प्रतिष्ठित हो रही थी.

  • जल संकट की अनदेखी क्यों?

    जल संकट की अनदेखी क्यों?

    सबमर्सिबल पंप पानी का ऐसा संकट लेकर आ रहा है जिसका अंदाज़ा हम सभी को है मगर नज़र हम सभी फेर ले रहे हैं. इस पंप के कारण ज़मीन के नीचे का पानी ग़ायब हो जाने वाला है. अगर ऐसा नहीं होता तो दिसंबर 2010 में पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने गुड़गांव ज़िले में बोरवेल लगाने पर रोक नहीं लगाया होता.

  • 60 करोड़ भारतीयों के आगे गंभीर जल संकट...

    60 करोड़ भारतीयों के आगे गंभीर जल संकट...

    पानी का संकट अब हर जगह है. बिहार का मधुबनी और दरभंगा का इलाका जहां कदम कदम पर तालाब हुआ करता था वहां अब पानी नहीं है. लाखों तालाब की इस धरती पर तालाब कहां गए. ज़ाहिर है कोई लूट ले गया होगा. अतिक्रमण कर घर और दुकान बना लिया होगा. हम सबने ऐसे ही बर्दाश्त किया है और अब सबको इसके बदले में पानी का संकट झेलना ही होगा.

  • रवीश कुमार का ब्लॉग: बिहार में बच्चों की मौत पर रिपोर्टिंग करती टीवी पत्रकारिता को टेटेनस हो गया

    रवीश कुमार का ब्लॉग: बिहार में बच्चों की मौत पर रिपोर्टिंग करती टीवी पत्रकारिता को टेटेनस हो गया

    आम तौर पर तीन बेड पर एक डॉक्टर होना चाहिए. अगर 1500 बेड की बात कर रहे हैं तो करीब 200-300 डॉक्टर तो चाहिए ही नहीं. बेड बनाकर फोटो खींचाना है या मरीज़ों का उपचार भी करना है. जिस मेडिकल कालेज की बात कर गए हैं वहां मेडिकल की पढ़ाई की मात्र 100 सीट है. 2014 में हर्षवर्धन 250 सीट करने की बात कर गए थे. यहां सीट दे देंगे तो प्राइवेट मेडिकल कालेजों के लिए शिकार कहां से मिलेंगे. गेम समझिए. इसलिए नीतीश कुमार की घोषणा शर्मनाक और मज़ाक है. अस्पताल बनेगा उसकी घोषणा पर मत जाइये. देश में बहुत से अस्पताल बन कर तैयार हैं मगर चल नहीं रहे हैं. गली-गली में खुलने वाले एम्स की भी ऐसी ही हालत है.

  • रवीश का ब्लॉग: 600 अरब का 2019 चुनाव और बैंकों में फ्रॉड के 71,500 मामले के बीच सेंसेक्स उछला 40,000 पार

    रवीश का ब्लॉग: 600 अरब का 2019 चुनाव और बैंकों में फ्रॉड के 71,500 मामले के बीच सेंसेक्स उछला 40,000 पार

    सीएमएस ने अपने फील्ड अध्ययन से बताया है कि राजनीतिक दलों ने प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र में 100 करोड़ ख़र्च किए हैं. प्रति वोटर 700 रुपए. हम पत्रकार और जनता के लोग भी सुनते रहते हैं कि इलाके में पैसा बंटा है. इस बार यह भी सुनने को मिला कि गांव के मौजूदा और हारे हुए प्रधानों को भी पैसा मिला है. ज़िला पंचायत के सदस्यों को भी पैसे मिलने की बात सुनते रहते हैं. इनकी पुष्टि तो संभव नहीं है लेकिन उम्मीदवार निजी बातचीत में बताते हुए पाए जाते हैं कि फलां ने 10 करोड़ बांट दिया तो फलां ने 20 करोड़. अब यह जनता ही बता सकती है कि उसने कितना लेकर वोट किया. राजनीति की यह जानी हुई बात का खंडन कोई नहीं करता. साबित भी कोई नहीं कर पाता.

  • जब रवीश कुमार ने अमित शाह का किया था इंटरव्यू, देखें Video

    जब रवीश कुमार ने अमित शाह का किया था इंटरव्यू, देखें Video

    उन्होंने बताया कि 2007 का साल था. मैं नया नया रिपोर्टर था. गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे आ रहे थे. मेरी तैनाती अमित शाह के घर पर हुई थी. 2014 के बाद से मेरी अमित शाह से कोई मुलाकात नहीं.

  • क्या 2019 के चुनाव में मैं भी हार गया हूं

    क्या 2019 के चुनाव में मैं भी हार गया हूं

    2019 का जनादेश मेरे ख़िलाफ कैसे आ गया? मैंने जो पांच साल में लिखा बोला है क्या वह भी दांव पर लगा था? जिन लाखों लोगों की पीड़ा हमने दिखाई क्या वह ग़लत थी? मुझे पता था कि नौजवान, किसान और बैंकों में गुलाम की तरह काम करने वाले लोग भाजपा के समर्थक हैं. उन्होंने भी मुझसे कभी झूठ नहीं बोला. सबने पहले या बाद में यही बोला कि वे नरेंद्र मोदी के समर्थक हैं. मैंने इस आधार पर उनकी समस्या को खारिज नहीं किया कि वे नरेंद्र मोदी के समर्थक हैं. बल्कि उनकी समस्या वास्तविक थी इसलिए दिखाई. आज एक सांसद नहीं कह सकता कि उसने पचास हज़ार से अधिक लोगों को नियुक्ति पत्र दिलवाया है. मेरी नौकरी सीरीज़ के कारण दिल्ली से लेकर बिहार तक में लोगों को नियुक्ति पत्र मिला है. कई परीक्षाओं के रिज़ल्ट निकले. उनमें से बहुतों ने नियुक्ति पत्र मिलने पर माफी मांगी की वे मुझे गालियां देते थे. मेरे पास सैंकड़ों पत्र और मैसेज के स्क्रीन शॉट पड़े हैं जिनमें लोगों ने नियुक्ति पत्र मिलने के बाद गाली देने के लिए माफी मांगी है. इनमें से एक भी यह प्रमाण नहीं दे सकता कि मैंने कभी कहा हो कि नरेंद्र मोदी को वोट नहीं देना. यह ज़रूर कहा कि वोट अपने मन से दें, वोट देने के बाद नागरिक बन जाना.

  • बिहार के नियोजित शिक्षकों के नाम रवीश कुमार का पत्र

    बिहार के नियोजित शिक्षकों के नाम रवीश कुमार का पत्र

    अब मैं जो उन्हें कहना चाहता हूं, उन्हें ध्यान से सुनना चाहिए. उन्हें देखना चाहिए कि इस मुद्दे को लेकर नैतिक बल और आत्म बल है या नहीं. गांधी को पढ़ना चाहिए. अगर उन्हें लगता है कि उनका मुद्दा सही है. नैतिकता के पैमाने पर सही है तो उन्हें सत्याग्रह का रास्ता चुनना चाहिए. बार-बार बताने की ज़रूरत नहीं है कि वे साढ़े तीन लाख से अधिक हैं. अगर हैं तो इनमें से एक-एक को गांधी मैदान में जमा हो जाना चाहिए और सत्याग्रह करना चाहिए. सत्याग्रह क्या है, इसके बारे में अध्ययन करना चाहिए. पांच हज़ार की रैली को नेता दिन भर ट्विट करते रहते हैं कि जन-सैलाब उमड़ गया है. सोचिए, अगर आपने लाखों की संख्या में जमा होकर सत्याग्रह कर दिया तो क्या होगा. यह फ़ैसला तभी करें जब सभी साढ़े तीन लाख शिक्षक सत्याग्रह के लिए तैयार हों. सत्याग्रह के लिए तभी तैयार हों जब उन्हें लगे कि उनके साथ अन्याय हुआ है. यह ध्यान में रखें कि उनकी बात को सुप्रीम कोर्ट ने सुना है. कमेटी बनवाई है. राज्य सरकार की कमेटी को भी शिक्षकों के साथ बात करनी पड़ी है. तो उनके पक्ष के बारे में भी सोचें और फिर भी लगता है कि यह ग़लत हुआ है तो मुझे मेसेज न करें. किसी मीडिया को मेसेज न करें. बल्कि मैंने तो कहा है कि आप टीवी देखना बंद कीजिए. अख़बार पढ़ना बंद कीजिए. आपने अपने केस में देख लिया कि जब आप परेशान हुए तो इनके छापने और नहीं छापने से आपकी समस्या पर कोई फर्क नहीं पड़ा. इसलिए फर्क नहीं पड़ता है कि क्योंकि आपमें नैतिक बल और आत्मबल नहीं है.

  • Exclusive: राहुल गांधी ने रवीश कुमार से कहा, नरेंद्र मोदी का समय बीत गया, इस बार वो नहीं आ रहे - पूरा इंटरव्‍यू

    Exclusive: राहुल गांधी ने रवीश कुमार से कहा, नरेंद्र मोदी का समय बीत गया, इस बार वो नहीं आ रहे - पूरा इंटरव्‍यू

    Lok Sabha Polls 2019: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एनडीटीवी के मैनेजिंग एडिटर रवीश कुमार को इंटरव्यू दिया. इस दौरान उन्होंने कई मुद्दों से जुड़े सवालों पर बेबाक जवाब दिया. यहां पढ़िए पूरा इंटरव्यू.

  • राहुल गांधी ने रवीश कुमार से कहा, मायावती देश में एक सिंबल, मैं उनका सम्मान करता हूं

    राहुल गांधी ने रवीश कुमार से कहा, मायावती देश में एक सिंबल, मैं उनका सम्मान करता हूं

    लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Election 2019) की सरगर्मियों के बीच कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एनडीटीवी के रवीश कुमार से खास बातचीत की. इस दौरान बीएसपी प्रमुख मायावती द्वारा कांग्रेस पर किये जा रहे हमलों पर राहुल गांधी (Rahul Gandhi)  ने कहा कि मायावती जी देश में एक सिंबल हैं. उन्होंने देश में एक संदेश दिया. मैं उनका आदर करता हूं, सम्मान करता हूं, उनसे प्यार करता हूं.