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Ravish kumar News in Hindi


'Ravish kumar' - more than 1000 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • कैंसर की चुनौती से निपटने की तैयारी कितनी?

    कैंसर की चुनौती से निपटने की तैयारी कितनी?

    भारत कैंसर से लड़ने के लिए कितना तैयार है? महानगरों को छोड़ राज्यों की राजधानियों और कस्बों में कैंसर से लड़ाई की हमारी तैयारी क्या है? गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पार्रिकर कैंसर से जूझ रहे हैं. विदेशों में भी इलाज के लिए गए और फिर वापस आकर एम्स में भी इलाज करवाया.

  • चुनाव प्रभारी मंत्री बन रह गए हैं देश के शिक्षा मंत्री जावड़ेकर, नई शिक्षा नीति कहां है?

    चुनाव प्रभारी मंत्री बन रह गए हैं देश के शिक्षा मंत्री जावड़ेकर, नई शिक्षा नीति कहां है?

    2014 के घोषणापत्र में बीजेपी ने नई शिक्षा नीति का वादा किया था. इंटरनेट पर सर्च कीजिए, वो नई शिक्षा नीति कहां है, अता-पता नहीं चलेगा. हमने अख़बारों में छपे इस संदर्भ में उनके बयानों का विश्लेषण किया है और साथ ही उनके ट्विटर हैंडल के ट्वीटस और री-ट्वीट्स का जिससे हम देख सकें कि प्रकाश जावड़ेकर देश की शिक्षा को लेकर कितने ट्वीट करते हैं और बीजेपी को लेकर कितने.

  • वसुंधरा जी आपने वाक़ई 44 लाख नौकरियां दी हैं?

    वसुंधरा जी आपने वाक़ई 44 लाख नौकरियां दी हैं?

    राजस्थान बीजेपी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया है कि भाजपा ने 15 लाख नौकरियां देने का वादा किया था. 44 लाख से अधिक लोगों को नौकरियां दी हैं. 9 नवंबर का ट्वीट है. राजस्थान बीजेपी का ट्वीट है तो यह राजस्थान के बारे में ही दावा होगा. मैंने एक दिन नहीं, कई हफ़्ते प्राइम टाइम में नौकरी सीरीज़ की है. हमने देखा है और दिखाया है कि कैसे पंजाब, मध्य प्रदेश, बिहार, यूपी और राजस्थान में नौजवानों को विज्ञापन देकर उलझाया जाता है. हमारे नौजवानों ने बहुत विरोध किया. प्रदर्शन किया. अपनी जवानियां बर्बाद होती देखी मगर किसी ने उनका साथ नहीं दिया. मुझे यक़ीन नहीं होता कि राजस्थान में 44 लाख नौकरियां दी गई हैं.

  • वसुंधरा जी आपने वाक़ई 44 लाख नौकरियां दी हैं?

    वसुंधरा जी आपने वाक़ई 44 लाख नौकरियां दी हैं?

    राजस्थान बीजेपी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया है कि भाजपा ने 15 लाख नौकरियां देने का वादा किया था. 44 लाख से अधिक लोगों को नौकरियां दी हैं. 9 नवंबर का ट्वीट है. राजस्थान बीजेपी का ट्वीट है तो यह राजस्थान के बारे में ही दावा होगा. मैंने एक दिन नहीं, कई हफ़्ते प्राइम टाइम में नौकरी सीरीज़ की है. हमने देखा है और दिखाया है कि कैसे पंजाब, मध्य प्रदेश, बिहार, यूपी और राजस्थान में नौजवानों को विज्ञापन देकर उलझाया जाता है. हमारे नौजवानों ने बहुत विरोध किया. प्रदर्शन किया. अपनी जवानियां बर्बाद होती देखी मगर किसी ने उनका साथ नहीं दिया. मुझे यक़ीन नहीं होता कि राजस्थान में 44 लाख नौकरियां दी गई हैं.

  • फेक न्यूज़ बनाम असली न्यूज़ की लड़ाई

    फेक न्यूज़ बनाम असली न्यूज़ की लड़ाई

    पूरी दुनिया में झूठ एक नई चुनौती बनकर उभरा है. झूठ की दीवार हमारे आस पास बड़ी होती जा रही है और चौड़ी भी होती जा रही है. झूठ की इस दीवार को भेदना आसान नहीं है. व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी के ज़रिए रोज़ना कई प्रकार के झूठ फैलाए जा रहे हैं.

  • छठ पर विशेष : येल यूनिवर्सिटी के म्यूज़ियम में कैसे पहुंची बिहार से सूर्य की कलाकृति 

    छठ पर विशेष : येल यूनिवर्सिटी के म्यूज़ियम में कैसे पहुंची बिहार से सूर्य की कलाकृति 

    क्या छठ  (Chhath Puja) का संबंध बौद्ध परंपराओं से रहा होगा? जिस तरह से छठ में पुजारी की भूमिका नगण्य है, उससे यह मुमकिन लगता है. क्या छठ बौद्ध परंपरा है जिसे बाद में सबने अपनाया. मेरी यह टिप्पणी बिना इतिहास के संदर्भों से मिलान किए हुए है, इसलिए कुछ भी आधिकारिक नज़रिए से नहीं कह रहा.

  • क्या भारत में पत्रकारों के सवालों पर अंकुश नहीं?

    क्या भारत में पत्रकारों के सवालों पर अंकुश नहीं?

    अमरीका में मध्यावधि चुनाव के नतीजे आए हैं. उन नतीज़ों पर अलग से चर्चा हो सकती है, होनी भी चाहिए लेकिन एक बात की चर्चा हिन्दुस्तान के पत्रकारों के बीच ज़्यादा है. उनके बीच भी है जो भारत की मीडिया को गोदी मीडिया में बदलते हुए देख रहे हैं.

  • रौशनी के अंधेरे में अल्पमत-अल्पसंख्यक सा अकेला खड़ा रहा सुप्रीम कोर्ट

    रौशनी के अंधेरे में अल्पमत-अल्पसंख्यक सा अकेला खड़ा रहा सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट का आदेश व्यावहारिक नहीं था. सरकार अगर आदेशों को लागू न करे तो सुप्रीम कोर्ट का हर आदेश ग़ैर व्यावहारिक हो सकता है. एक दिन ये नेता यह भी कह देंगे कि सुप्रीम कोर्ट का होना ही व्यावहारिक नहीं है. हमें जनादेश मिला है, फैसला भी हमीं करेंगे. पटाखे न छोड़ने का आदेश 23 अक्तूबर को आया था मगर भीड़ की हिंसा पर काबू पाने का आदेश तो जुलाई में आया था. कोर्ट ने ज़िला स्तर पर पुलिस को क्या करना है, इसका पूरा खाका बना दिया था. फिर भी दशहरे के बाद बिहार के सीतामढ़ी में क्या हुआ.

  • राम मंदिर का मुद्दा फिर क्यों गर्माने लगा है?

    राम मंदिर का मुद्दा फिर क्यों गर्माने लगा है?

    2019 से पहले 1992 आ रहा है बल्कि आ चुका है. इंतज़ार अब इस बात का है कि प्रधानमंत्री नरेंद मोदी कब 1992 के इस सियासी खेल में उतरते हैं. 2014 में प्रधानमंत्री की उम्मीदवार के तौर पर नरेंद मोदी के भाषणों को याद कीजिए, क्या आपको कोई भाषण याद आता है जो मुख्य रूप से राम मंदिर पर केंद्रित हो.

  • राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनावों में फोन बांटने का खेल क्या है?

    राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनावों में फोन बांटने का खेल क्या है?

    हमारे वक्त की राजनीति को सिर्फ नारों से नहीं समझा जा सकता है. इतना कुछ नया हो रहा है कि उसके अच्छे या बुरे के असर के बारे में ठीक-ठीक अंदाज़ा लगाना मुश्किल हो रहा है. समझना मुश्किल हो रहा है कि सरकार जनता के लिए काम कर रही है या चंद उद्योगपतियों के लिए.

  • बड़े डिफॉल्टरों पर आरबीआई इतना मेहरबान क्यों?

    बड़े डिफॉल्टरों पर आरबीआई इतना मेहरबान क्यों?

    भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल को उन लोगों के नाम बताने में क्या परेशानी है जिन्होंने 50 करोड़ से लेकर 1 लाख करोड़ तक के लोन नहीं चुकाए हैं. भारतीय रिज़र्व बैंक कौन होता है उनकी इज्ज़त या साख की चिन्ता करने वाला वो भी जो बैंक का लोन नहीं चुका रहे हैं.

  • क्या सरकार की नज़र भारतीय रिज़र्व बैंक के रिज़र्व पर है?

    क्या सरकार की नज़र भारतीय रिज़र्व बैंक के रिज़र्व पर है?

    भारतीय रिज़र्व बैंक के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने 2010 में अर्जेंटीना के वित्त संकट का हवाला क्यों दिया कि केंद्रीय बैंक और सरकार के बीच जब विवाद हुआ तो केंद्रीय बैंक के गवर्नर से इस्तीफा दे दिया और फिर वहां आर्थिक तबाही मच गई. एक समझदार सरकार अपने तात्कालिक सियासी फायदे के लिए एक ऐसी संस्था को कमतर नहीं करेगी जो देश के दूरगामी हितों की रक्षा करती है.

  • क्या एबीवीपी तय करेगा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर?

    क्या एबीवीपी तय करेगा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर?

    हमने कब ऐसे भारत की कल्पना कर ली कि किस यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर कौन होगा यह सत्ताधारी दल का छात्र संगठन अखिल विद्यार्थी परिषद तय करेगा और यूनिवर्सिटी मान लेगी. क्या आप वाकई ऐसा भारत चाहते थे, चाहते थे तो इस बात को खुलकर क्यों नहीं कहा या क्यों नहीं कहते हैं कि यूनिवर्सिटी में या तो पढ़ाने के लिए प्रोफेसर ही नहीं होंगे और अगर होंगे तो वही होंगे जिसकी मंज़ूरी एबीवीपी की चिट्ठी से मिलेगी.

  • भारतीय रिजर्व बैंक की स्वायत्तता में दखल क्यों?

    भारतीय रिजर्व बैंक की स्वायत्तता में दखल क्यों?

    जब स्वदेशी जागरण मंच भारतीय रिजर्व बैंक को सलाह देने लगे कि उसे क्या करना है तो इसका मतलब यही है कि भारत में ईज ऑफ डूइंग वाकई अच्छा हो गया है. नोटबंदी के समय नोटों की गिनती में जो लंबा वक्त लगा, रिज़र्व बैंक ने सामान्य रिपोर्ट में नोटबंदी पर दो चार लाइन लिख दी, तब किसी को नहीं लगा कि उर्जित पटेल को इस्तीफा दे देना चाहिए. बल्कि तब रिजर्व बैंक को भी नहीं लगा कि सरकार हस्तक्षेप कर रही है. उसकी स्वायत्तता पर हमला हो रहा है. सबको उर्जित पटेल अर्जित पटेल लग रहे थे. अब उर्जित पटेल का इस्तीफा भी मांगा जा रहा है और उनके भी इस्तीफा देने की ख़बर आ रही है. 

  • क्या हम पटेल के विचारों की ऊंचाई भी छू पाएंगे?

    क्या हम पटेल के विचारों की ऊंचाई भी छू पाएंगे?

    आज सरदार का दिन है. जन्मदिन है. हम सबके सरदार दुनिया में सबसे ऊंचे हो गए हैं. जन्मदिन पर सरदार को एक नई सोहबत मिली है. दुनिया की ऊंची प्रतिमाओं की सोहबत मिली है. अब उनकी तुलना जिन प्रतिमाओं से होगी उनमें उनकी प्रतिमा नहीं है, जिनके साथ और जिनके पीछे सरदार सरदार बने रहे. मतलब सरदार गांधी और नेहरू से अलग इन प्रतिमाओं की सोहबत में भी खूब चमक रहे हैं. फकत 3000 करोड़ से ही सरदार पटेल की प्रतिमा दुनिया में सबसे ऊंची हो गई. 3000 करोड़ सुनकर अफसोस न करें. सोचें कि आपने स्कूल कॉलेज या अस्पताल के लिए कब संघर्ष किया. कब लाइब्रेरी की मांग की.

  • जब येल यूनिवर्सिटी की क्लास में बैठे रवीश कुमार...

    जब येल यूनिवर्सिटी की क्लास में बैठे रवीश कुमार...

    मैंने हार्वर्ड में भी एक क्लास किया था. तीन घंटे की क्लास थी, मगर एक घंटे से कम बैठा. प्रोफेसर ने झट से अनुमति दे दी थी. उस क्लास में पहली बार देखा कि कई देशों से आए छात्रों की क्लास कैसी होती है. वैसे येल के ही GENDER AND SEXUALITY STUDIES की प्रोफेसर इंदरपाल ग्रेवाल ने भी न्योता दिया कि आप मेरी भी क्लास में आ जाइए, लेकिन तब समय कम था. प्रोफेसर ग्रेवाल नारीवादी मसलों पर दुनिया की जानी-मानी प्रोफेसर हैं. फेमिनिस्ट हैं. मेरी बदकिस्मती.

  • कोलंबिया जर्नलिज्म स्कूल का एक सफर

    कोलंबिया जर्नलिज्म स्कूल का एक सफर

    1912 में जब हम अपनी आज़ादी की लड़ाई की रूपरेखा बना रहे थे तब यहां न्यूयार्क में जोसेफ़ पुलित्ज़र कोलंबिया स्कूल ऑफ़ जर्नलिज़्म की स्थापना कर रहे थे. सुखद संयोग है कि 1913 में गणेश शंकर विद्यार्थी कानपुर में प्रताप की स्थापना कर रहे थे. तो ज़्यादा दुखी न हों, लेकिन यह संस्थान पत्रकारिता की पढ़ाई के लिए दुनिया भर में जाना जाता है.

  • ब्राज़ील में सांबा नहीं तांडव होगा, बोलसोनारो बोलसोनारो होगा

    ब्राज़ील में सांबा नहीं तांडव होगा, बोलसोनारो बोलसोनारो होगा

    ब्राज़ील के नए राष्ट्रपति. ख़ुद को चीली के कुख़्यात तानाशाह अगुस्तो पिनोशे का फ़ैन कहने हैं. वैसे तानाशाह के आगे कुख़्यात लगाने की ज़रूरत नहीं होती. बड़े शान से कहा था कि पिनोशे को और अधिक लोगों को मारना चाहिए था. यह भी चाहते हैं कि अपराधियों को देखते ही पुलिस गोली मार दे.

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