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Ravish kumar News in Hindi


'Ravish kumar' - more than 1000 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • मेडिकल शिक्षा के सत्यानाश की कोशिश की पड़ताल करता 'डाउन टू अर्थ'

    मेडिकल शिक्षा के सत्यानाश की कोशिश की पड़ताल करता 'डाउन टू अर्थ'

    कई लोग मिलते हैं जो दस-दस साल से एक किताब नहीं पढ़ें. अच्छे आर्टिकल को ढूंढ कर पढ़ेंगे नहीं. लंबाई देखकर छोड़ देंगे. यही वो लोग हैं जो अंध राष्ट्रवाद और सांप्रदायिकता की आंधी में आसानी से हांक लिए जाते हैं.

  • रवीश कुमार का ब्लॉग: अलविदा जेटली जी...

    रवीश कुमार का ब्लॉग: अलविदा जेटली जी...

    सुरक्षित जीवन को छोड़ असुरक्षित का चुनाव आसान नहीं होता है. 1974 में शुरू हुए जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में जेटली शामिल हुए थे. आपातकाल की घोषणा के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया क्योंकि रामलीला मैदान में जेपी के साथ वे भी मौजूद थे. बग़ावत से सियासी सफ़र शुरू करने वाले जेटली आख़िर तक पार्टी के वफ़ादार बने रहे. एक ही चुनाव लड़े मगर हार गए. राज्य सभा के सांसद रहे. मगर अपनी काबिलियत के बल पर जनता में हमेशा ही जन प्रतिनिधि बने रहे. उन्हें कभी इस तरह नहीं देखा गया कि किसी की कृपा मात्र से राज्य सभी की कुर्सी मिली है. जननेता नहीं तो क्या हुआ, राजनेता तो थे ही.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : उद्योग जगत को मिल गई इनकम टैक्स से मुक्ति!

    प्राइम टाइम इंट्रो : उद्योग जगत को मिल गई इनकम टैक्स से मुक्ति!

    2014 के बाद शायद यह पहला बड़ा मौक़ा है जब उद्योगपतियों की सुगबुगाहट, खुली नाराज़गी और अर्थव्यवस्था के संकट के दबाव में वित्त मंत्री निमर्ला सीतारमण ने प्रेस कांफ्रेस में कई बड़े एलान किए. ये वो एलान थे जिनके बारे में सरकार के पीछे हटने की उम्मीद कम नज़र आ रही थी

  • ये हैं वे ख़बरें, जो जनता देखना चाहती है...

    ये हैं वे ख़बरें, जो जनता देखना चाहती है...

    जनता ने अपनी न्यूज़ लिस्ट भेजी है. जम्मू एवं कश्मीर, गुजरात, पंजाब, बंगाल, ओडिशा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार से. आपको यह बोरिंग लगेगा, लेकिन देखिए, इतनी तकलीफों के बाद भी नेशनल सिलेबस का ज़ोर है. उसका कारण भी समझिए. कहीं कोई सुना नहीं जा रहा है. इन समस्याओं से प्रभावित लोगों की संख्या लाखों में होगी. फिर भी कहूंगा कि आप हर मैसेज को पढ़ें.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : आखिर रैगिंग को क्यों छिपा रहे हैं कुलपति?

    प्राइम टाइम इंट्रो : आखिर रैगिंग को क्यों छिपा रहे हैं कुलपति?

    इस देश में आप जिसे चाहें लाइन में खड़ा कर सकते हैं, उसे हांक सकते हैं. इसी की नुमाइश है यह वीडियो और कतार में चले आ रहे मेडिकल के छात्र. यूपी के सैफई आयुर्विज्ञान महाविद्यालय में मेडिकल कालेज के छात्र हैं, जिनकी रैगिंग हुई है और सिर मुड़वा दिया गया है.

  • रवीश कुमार का ब्लॉग: प्रिय बिहार सरकार 'यदि है'...

    रवीश कुमार का ब्लॉग: प्रिय बिहार सरकार 'यदि है'...

    मैसेज भेजने वाले छात्रों का कहना है कि 2015-18 का परिणाम 2019 में आया. वो भी पूरा परिणाम नहीं आया. 92,000 छात्रों का परिणाम कुछ दिन पहले आया है. जिसकी वजह से दारोगा भर्ती परीक्षा के फार्म नहीं भर पा रहे हैं, क्योंकि नियम यह बनाया गया है कि 1 जनवरी 2019 तक ग्रेजुएशन करने वाले छात्र ही भर सकते हैं.

  • पचास लाख नौकरियां गईं हैं टेक्सटाइल में?

    पचास लाख नौकरियां गईं हैं टेक्सटाइल में?

    क्या पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम गिरफ्तार किए जा सकते हैं? दिल्ली हाई कोर्ट के जज सुनील गौड़ ने INX Media केस में अग्रिम ज़मानत देने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों ने जो सामग्री प्रस्तुत की है, उसकी भयावहता और विशालता को देखते हुए अग्रिम ज़मानत नहीं दी जा सकती है. चिदंबरम को हाई कोर्ट से पिछले साल राहत मिली थी, तब कोर्ट ने कुछ सवालों के जवाब एजेंसियों से मांगे थे. जिस तरह से प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई दिल्ली के जंगपुरा में उनके घर पर दबिश दिए बैठी है उससे गिरफ्तारी की आशंका बेमानी नहीं लगती है.

  • ऑटो के बाद अब टेक्सटाइल सेक्टर में मंदी की मार, बड़ी तादाद में गईं नौकरियां

    ऑटो के बाद अब टेक्सटाइल सेक्टर में मंदी की मार, बड़ी तादाद में गईं नौकरियां

    अंग्रेज़ी समाचारपत्र 'इंडियन एक्सप्रेस' में मंगलवार को आधे पेज का एक बड़ा-सा विज्ञापन छपा है, जिसमें नौकरियां खत्म होने के बाद फैक्टरी से बाहर आते लोगों का स्केच बनाया गया है. इसके नीचे बारीक आकार में लिखा है कि देश की एक-तिहाई धागा मिलें बंद हो चुकी हैं, और जो चल रही हैं, वे भारी घाटे में हैं. उनकी स्थिति ऐसी भी नहीं है कि वे भारतीय कपास ख़रीद सकें, सो, कपास की आगामी फ़सल का कोई ख़रीदार नहीं होगा. अनुमान है, 80,000 करोड़ रुपये का कपास उगने जा रहे है, सो, इसका असर कपास के किसानों पर भी होगा."

  • भारत की अर्थव्यवस्था में मंदी जैसे हालात क्यों?

    भारत की अर्थव्यवस्था में मंदी जैसे हालात क्यों?

    न्यूज़ चैनल देखने से लगता है कि सारा देश कश्मीर, आबादी और आरक्षण को लेकर व्यस्त है. हो सकता है कि सारा देश व्यस्त हो भी, लेकिन डेढ़ लाख बैंकर इन विषयों को लेकर व्यस्त नहीं हैं. बल्कि इस शनिवार और रविवार तो उन्हें टीवी देखने का भी मौका नहीं मिला होगा कि कश्मीर पर नया बयान क्या आया है. उन्हें यह भी पता नहीं होगा कि चर्चा में दूसरे एंगल से प्रवेश पाने के लिए शिवराज सिंह चौहान और साध्वी प्रज्ञा ने जवाहर लाल नेहरू को अपराधी कहा है. नेहरू को कुछ भी बोलकर आप चैनलों के स्क्रीन पर टिकर से लेकर टिक टैक तक जगह पा सकते हैं. चूंकि नेता लोग नेहरू को अपराधी बताने में व्यस्त हैं, इसलिए डेढ़ लाख बैंकरों से कहा गया होगा कि कम से कम आप लोग अर्थव्यवस्था को लेकर कुछ व्यस्त रहें और आइडिया दें कि भारत की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन का कैसे बनाया जा सकता है.

  • आर्थिक रुप से फ़ेल सरकार अपनी राजनीतिक सफ़लताओं में मस्त है

    आर्थिक रुप से फ़ेल सरकार अपनी राजनीतिक सफ़लताओं में मस्त है

    जब चीन ने टैक्सटाइल सेक्टर को छोड़ अधिक मूल्य वाले उत्पादों के सेगमेंट में जगह बनाने की नीति अपनाई तब इस ख़ाली जगह को भरने के लिए बांग्लादेश और वियतनाम तेज़ी से आए. अगर आप बिजनेस की ख़बरें पढ़ते होंगे तब ध्यान होगा कि कई साल पहले मोदी सरकार ने टेक्सटाइल सेक्टर के लिए 6000 करोड़ के पैकेज का एलान किया था. आज तक भारत का टेक्सटाइल सेक्टर उबर नहीं सका है. टेक्सटाइल रोज़गार देने वाले सेक्टरों में से एक रहा है. जून 2016 में मोदी कैबिनेट ने पैकेज की घोषणा करते वक्त कहा था कि अगले तीन साल में यानी 2019 तक टेक्सटाइल सेक्टर में 1 करोड़ रोज़गार पैदा किए जाएंगे और 75,000 करोड़ का निवेश होगा. तथ्य आप पता कर लें, आपको निराशा हाथ लगेगी.

  • ...तो ब्रांच मैनेजर दे रहे हैं भारत को 5 ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने का आइडिया!

    ...तो ब्रांच मैनेजर दे रहे हैं भारत को 5 ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने का आइडिया!

    क्या आपको पता है कि बैंकों के अफसर इस महीने क्या कर रहे हैं? वे वित्त मंत्रालय के निर्देश पर चर्चा कर रहे हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था का आकार 5 ट्रिलियन डॉलर का कैसे किया जा सकता है. जब बजट के आस-पास 5 ट्रिलियन डॉलर का सपना बेचा जाने लगा तो किसी को पता नहीं होगा कि सरकार को पता नहीं है कि कैसे होगा. इसलिए उसने बैंक के मैनजरों से कहा है कि वे शनिवार और रविवार को विचार करें और सरकार को आइडिया दें.

  • क्या नेहरू युवा केंद्र के 300 प्रोग्राम कोर्डिनेटर निकाले जा रहे हैं?

    क्या नेहरू युवा केंद्र के 300 प्रोग्राम कोर्डिनेटर निकाले जा रहे हैं?

    कल कई कोर्डिनेटरों ने मुझे मैसेज पर मैसेज करना शुरू कर दिया. ज़ाहिर है किसी की नौकरी जाएगी तो परेशान होगा. जब चुनाव आया तो मिनिरत्न कंपनी बेसिल के ज़रिए 300 कार्यक्रम समन्वयक की नियुक्ति होती है. 1500 रुपये का फार्म ख़रीदा था इन युवाओं ने. ऑनलाइन परीक्षा दी और इंटरव्यू दिया. तब जाकर 3 साल के कांट्रेक्ट की नौकरी पर हुआ. इनकी सैलरी 31000 फिक्स हुई. अब इनकी आशंका है कि सरकार निकाल रही है क्योंकि चुनाव हो गया है. कांट्रेक्ट के तीन साल भी नहीं हुए हैं. उन्हीं के मैसेज के आधार पर लिख रहा हूं.

  • एक डॉक्टर और उसका कश्मीर, एक पत्रकार और उसका हिन्दी प्रदेश

    एक डॉक्टर और उसका कश्मीर, एक पत्रकार और उसका हिन्दी प्रदेश

    अचानक दरवाज़ा खुला और एक शख़्स सामने आकर खड़ा हो गया. कंधे पर आला लटका हुआ था. नाम बताने और फैन कहने के कुछ अधूरे वाक्यों के बीच वह फफक पड़ा. पल भर में संभाला, लेकिन तब तक आंखों से आंसू बाहर आ चुके थे.

  • इंसाफ़ के पहलू, अमेरिका का लिंचिंग म्यूज़ियम

    इंसाफ़ के पहलू, अमेरिका का लिंचिंग म्यूज़ियम

    भारत माता की जय करने वालों ने आरोपी का ख़्याल रखा, रखना भी चाहिए लेकिन जो मारा गया वो उनके जय के उद्घोष से बाहर कर दिया गया. आरोपी बरी हुए हैं, पहलू ख़ान को इंसाफ़ नहीं मिला है. हमारी पब्लिक ओपिनियन में इंसाफ़ की ये जगह है. जिसकी हत्या होगी उस पर चुप रहा जाएगा, आरोपी बरी होंगे तो भारत माता की जय कहा जाएगा. सब कुछ कितना बदल गया है. भारत माता की जय. भारत माता ने जयकारा सुनकर ज़रूर उस पुलिस की तरफ देखा होगा जो दो साल की तफ्तीश के बाद इंसाफ नहीं दिला सकी. पुलिस ने किस तरफ देखा होगा, ये बताने की ज़रूरत नहीं है.

  • क्या इंटरनेट के बिना विरोध प्रदर्शन मुमकिन नहीं?

    क्या इंटरनेट के बिना विरोध प्रदर्शन मुमकिन नहीं?

    दुनिया भर में सरकारी पाबंदियों का दायरा बदलता भी जा रहा है और उनका घेरा कसता भी जा रहा है. धरना-प्रदर्शन या आंदोलन करना मुश्किल होता जा रहा है. आवाज़ दबाना आसान हो गया है. भले ही असहमति के स्वर की संख्या लाखों में हो मगर अब यह संभव है और हो भी रहा है कि पहले की तुलना में इन्हें आसानी से दबा दिया जाता है, खासकर तब जब कहा जाता है कि सूचना के बहुत सारे माध्यम हो गए हैं.

  • बेरोज़गारी के मुद्दे का हल कब तक निकलेगा?

    बेरोज़गारी के मुद्दे का हल कब तक निकलेगा?

    बरोज़गारी का सवाल अजीब होता है. न चुनाव में होता है और न चुनाव के बाद होता है. सरकारी सेक्टर की नौकरियों की परीक्षाओं का हाल विकराल है. मध्यप्रेश, बिहार, यूपी से रोज़ किसी न किसी परीक्षा के नौजवानों के मेसेज आते रहते हैं. इनकी संख्या लाखों में है फिर भी सरकारों को फर्क नहीं पड़ता. किसी परीक्षा में इंतज़ार की अवधि सात महीने है तो किसी परीक्षा में 3 साल.

  • कश्मीर बनकर रह गए हैं यूपी और एमपी के 8 लाख नौजवान, मुझे व्हाट्सऐप कर रहे हैं

    कश्मीर बनकर रह गए हैं यूपी और एमपी के 8 लाख नौजवान, मुझे व्हाट्सऐप कर रहे हैं

    मेरे व्हाट्सएप के इनबॉक्स में सुबह से 500 से अधिक मैसेज आ चुके हैं. उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारी परीक्षाओं से तंग आए ये नौजवान मिनट-मिनट पर टाइप किया हुआ मैसेज भेज रहे हैं. उन तमाम मैसेज में कश्मीर पर एक शब्द नहीं है. इनकी चिन्ताओं में कश्मीर नहीं है.

  • 69,000 और अन्य भर्तियों को लेकर यूपी के मुख्यमंत्री योगी जी को रवीश कुमार का पहला पत्र

    69,000 और अन्य भर्तियों को लेकर यूपी के मुख्यमंत्री योगी जी को रवीश कुमार का पहला पत्र

    फिलहाल 69,000 सहायक शिक्षकों की भर्ती के मामले के बारे में छात्र पत्र लिख रहे हैं कि मैं इसे उठाऊं ताकि आपकी सरकार अदालत में इस मामले की सुनवाई जल्दी निपटाने में मदद करें और नौजवानों को नियुक्ति पत्र मिले.

  • बाढ़ की वजह इंसानों की बनाई नीतियां?

    बाढ़ की वजह इंसानों की बनाई नीतियां?

    ज़मीन पर बाढ़ के कारण इंसानों की बनाई नीतियां हैं जिसे मैन मेड क्राइसिस कहते हैं. प्राकृतिक संसाधनों का बेख़ौफ़ इस्तमाल जलवायु परिवर्तन के कारणों को बढ़ाता है. इस बाढ़ को दो तरह से समझिए. दो महीने की बारिश अगर दो हफ्ते में हो जाए तो क्या होगा. क्यों ऐसा हो रहा है. आप मानें या न मानें जो लोग ऊंचे बांधों, कार्बन उत्सर्जन, और नदियों के किनारे निर्माण कार्यों को लेकर चेतावनी देते रहे हैं, जिन्हें हम एक्सपर्ट कहते हैं, बुलाते हैं और सुनकर भुला देते हैं, उनका मज़ाक उड़ाते हैं, लेकिन उनकी एक एक बात सही साबित होती जा रही है.

  • नैरेटिव नेशनलिज़्म में फंसा नौजवान नौकरी के लिए व्हाट्सऐप क्यों करता है?

    नैरेटिव नेशनलिज़्म में फंसा नौजवान नौकरी के लिए व्हाट्सऐप क्यों करता है?

    मैं यही सोचता हूं कि जब उनके पीछे इतनी संख्या है तो फिर उनकी बात क्यों नहीं सुनी जा रही है. क्यों वे इतने परेशान हैं और महीनों बाद भी उनकी समस्या जस की तस है. बहुत दिनों से सीजीएल 2017 के पीड़ित छात्र लिखते रहते हैं.

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