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Ravish kumar News in Hindi


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  • बहादुरगढ़ का छोटूराम नगर: चुनावों में बदलाव के नाम पर ज़ुल्म जारी रहता है, ज़ुल्मी बदल जाते हैं

    बहादुरगढ़ का छोटूराम नगर: चुनावों में बदलाव के नाम पर ज़ुल्म जारी रहता है, ज़ुल्मी बदल जाते हैं

    कचरे के बीच कॉलोनी है या कॉलोनी के बीच कचरा, हवा में दुर्गंध इतनी तेज़ है कि बगैर रूमाल के सांस नहीं ले सकते. मक्खियां और मच्छर इस कदर भिनभिना रहे हैं कि मुंह खुलते ही उनके भीतर जाने का ख़तरा है. ज़मीन पर नालियों का पानी और कीचड़ फैला है. अपने साफ-सुथरे जूते को रखें तो रखें कहां? यह बाहर से भीतर आए मेरा नज़रिया था. भीतर रहने वालों ने इसे अलग से देखना कब का बंद कर दिया है. उन्हें पता है कि नालियों और मच्छरों के बिना नहीं बल्कि इनके साथ जीना है.

  • क्या प्रधानमंत्री मोदी के लिए चुनाव आयोग में कोई शाखा खुली है?

    क्या प्रधानमंत्री मोदी के लिए चुनाव आयोग में कोई शाखा खुली है?

    आप सभी 18 अप्रैल के चुनाव आयोग की प्रेस कांफ्रेंस का वीडियो देखिए. यह वीडियो आयोग के पतन का दस्तावेज़ (document of decline) है. जिस वक्त आयोग का सूरज डूबता नज़र आ रहा था उसी वक्त एक आयुक्त के हाथ की उंगलियों में पन्ना और माणिक की अंगूठियां चमक रही थीं.

  • क्या पीएम के हेलीकॉप्टर की जांच नहीं की जा सकती?

    क्या पीएम के हेलीकॉप्टर की जांच नहीं की जा सकती?

    क्या ऐसा कोई कानून है कि चुनाव की ड्यूटी पर तैनात अधिकारी प्रधानमंत्री के काफिले की गाड़ी चेक नहीं कर सकता है? अगर ऐसा कोई कानून है तो चुनाव आयोग को पब्लिक को इसके बारे में बताना चाहिए. और अगर किसी अधिकारी ने हेलिकाप्टर की जांच कर दी तो क्या यह इस हद तक का अपराध है कि उस अधिकारी को निलंबित कर दिया जाए.

  • प्रधानमंत्री का इंटरव्यू पढ़ते समय गूगल भी करते रहें, मज़ा आएगा

    प्रधानमंत्री का इंटरव्यू पढ़ते समय गूगल भी करते रहें, मज़ा आएगा

    प्रधानमंत्री अपने इंटरव्यू में साफ़ साफ़ की जगह तथ्यों को यहां-वहां से मिला जुलाकर बोलते हैं. उनके हर बयान की जांच करेंगे तो महीना गुज़र जाएगा.

  • सेना पर सवाल करें लेकिन इसका चुनावी राजनीति में इस्तेमाल मत कीजिए

    सेना पर सवाल करें लेकिन इसका चुनावी राजनीति में इस्तेमाल मत कीजिए

    लेफ़्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) एचएस पनाग का कहना है कि सेना पर सवाल करते रहिए. इसका चुनावी राजनीति में इस्तेमाल मत कीजिए. सवाल करते रहने से सेना का ज्यादा भला होता है. रवीश कुमार से हुई एचएस पनाग की बातचीत में उन्होंने यही संदेश दिया.

  • क्यों चुनावों में मशीन का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए?

    क्यों चुनावों में मशीन का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए?

    बताया कि ये पर्ची पांच साल तक नहीं मिटेगी. बेहतर है इसे गिना जाना चाहिए. वीवीपैट के अपने खर्चे भी हैं. इसका इस्तेमाल करने पर मतगणना की रफ्तार भी धीमी होती है. फिर बैलेट पेपर ही क्यों नहीं?

  • कॉरपोरेट सेक्टर में घटी नौकरियां और सैलरी, देश छोड़ कर भागे 36 बिजनेसमैन

    कॉरपोरेट सेक्टर में घटी नौकरियां और सैलरी, देश छोड़ कर भागे 36 बिजनेसमैन

    अगर मीडिया रिपोर्ट सही है, उनसे नौजवानों ने यही कहा है तो फिर नरेंद्र मोदी का यह कमाल ही माना जाएगा कि उन्होंने बेरोज़गारों के बीच ही बेरोज़गारी का मुद्दा ख़त्म कर दिया.

  • 2019 का चुनाव सपनों का नहीं, एक दूसरे से आंखें चुराने का चुनाव है

    2019 का चुनाव सपनों का नहीं, एक दूसरे से आंखें चुराने का चुनाव है

    दिल्ली से जाने वाले पत्रकार लोगों के बीच मोदी-मोदी की गूंज को खोज रहे हैं. 2014 में माइक निकालते ही आवाज़ आने लगती थी मोदी-मोदी. 2019 में पब्लिक के बीच माइक निकालने पर आवाज़ ही नहीं आती है.

  • मैं चुनाव जीतकर संसद जाऊं तो शायद नरेंद्र मोदी वहां नहीं हों, जानिये कन्हैया कुमार ने ऐसा क्यों कहा?

    मैं चुनाव जीतकर संसद जाऊं तो शायद नरेंद्र मोदी वहां नहीं हों, जानिये कन्हैया कुमार ने ऐसा क्यों कहा?

    जेएनयू (JNU) के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की तैयारी जोरों पर है. बिहार के बेगूसराय सीट से कन्हैया कुमार (Kanhaiya Kumar) का मुकाबला (Begusarai LS Seat) बीजेपी के केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह (Giriraj Singh) और राजद के तनवीर हसन (Tanveer Hasan) से है.

  • बिहार के 'लेनिनग्राद' बेगूसराय से कन्हैया ने ठोकी ताल

    बिहार के 'लेनिनग्राद' बेगूसराय से कन्हैया ने ठोकी ताल

    बिहार का बेगूसराय इन दिनों तरह-तरह के सराय में बदल गया है. सराय का मतलब होता तो लंबे सफर का छोटा सा ठिकाना, जहां यात्रि अंधेरे होने पर सुस्साते हैं और अगली सुबह अपनी यात्रा पर निकल पड़ते हैं. दिल्ली में एक है जुलैना सराय. यूसुफ सराय. बिहार में सबसे अधिक राजस्व देने वाला ज़िला बेगूसराय के एक गांव का लड़का जेएनयू गया था रिसर्च करने. आज उसने बेगूसराय से सीपीआई के उम्मीदवार के नाते पर्चा भर दिया.

  • बीजेपी के संकल्प पत्र से बाकी बड़े नेता ग़ायब क्यों?

    बीजेपी के संकल्प पत्र से बाकी बड़े नेता ग़ायब क्यों?

    11 अप्रैल को पहला मतदान है. मतदान से ठीक तीन दिन पहले भाजपा का घोषणापत्र आया है. 2014 और 2019 के घोषणापत्र के कवर को ही देखें तो बीजेपी या तो बदल गई है या फिर बीजेपी में सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी रह गए हैं. 2014 में कवर पर 11 नेता थे. इनमें से अटल बिहारी वाजपेयी और मनोहर पर्रिकर अब दुनिया में नहीं हैं. आडवाणी और मुरली मनोहन जोशी को टिकट नहीं मिला है.

  • फ्रांस के लोग प्रदूषण के कारण कंपनी को भगा रहे हैं, भारत में कंपनी को घर में घुसा रहे हैं

    फ्रांस के लोग प्रदूषण के कारण कंपनी को भगा रहे हैं, भारत में कंपनी को घर में घुसा रहे हैं

    स्थानीय लोगों ने इस अमरीकी कंपनी के खिलाफ मुकदमा कर दिया है. उनका कहना है कि इस तरह के प्रोजेक्ट आउटडेटेड हो गए हैं. हमें सोचना होगा कि कम प्रदूषण के साथ समाज को कैसे जीने के लिए बेहतर बनाया जा सके. अमेजन कंपनी के खिलाफ खूब प्रदर्शन हो रहे हैं. एक मांग यह भी है कि इन कंपनियों को टैक्स में बहुत छूट मिलती है जबकि इन्हीं के भीतर काम करने वाले कर्मचारियों को सारे टैक्स देने पड़ते हैं. दिन भर मज़दूरी करने वाला, कम कमाने वाला ज़्यादा टैक्स देता है, कंपनी को कम से कम देना पड़ता है. ऐसा कैसे हो सकता है.

  • गुजरात इंफ़ैंट्री बनाम अहीर बख़्तरबंद के बीच है मुक़ाबला यूपी में!

    गुजरात इंफ़ैंट्री बनाम अहीर बख़्तरबंद के बीच है मुक़ाबला यूपी में!

    गुजरात इंफ़ैंट्री रेजीमेंट. प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह दोनों समाजवादी पार्टी का घोषणापत्र पढ़कर चौंक गए होंगे. दोनों भाजपाई सोच रहे होंगे कि ये सपाई क्यों उनके राज्य के नाम पर रेजीमेंट बना रहा है? बनाना था तो गुजरात बख़्तरबंद रेजीमेंट बनाते और अहीर इंफ़ैंट्री रेजीमेंट!

  • नोटबंदी से अर्थव्‍यवस्‍था को लगा झटका कितना बड़ा?

    नोटबंदी से अर्थव्‍यवस्‍था को लगा झटका कितना बड़ा?

    इंडियन एक्सप्रेस की खुशबू नारायण की एक रिपोर्ट आई कि नोटबंदी वाले साल में 88 लाख करदाता टैक्स रिटर्न नहीं भर पाए. क्यों नहीं रिटर्न भर पाए क्योंकि नोटबंदी के बाद आर्थिक गतिविधियां ठहर गईं और लोगों की नौकरी चली गई. आमदनी घट गई. उसी वक्त ये आंकड़ा आता तो इन 88 लाख लोगों को सम्मानित किया जाता.

  • AFSPA पर कांग्रेस ने ऐसा क्या कह दिया कि BJP देश तोड़ने का आरोप लगा रही है?

    AFSPA पर कांग्रेस ने ऐसा क्या कह दिया कि BJP देश तोड़ने का आरोप लगा रही है?

    कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में ऐसा क्या कह दिया कि बीजेपी को लगता है कि इसमें देश तोड़ने का काम है. घोषणा पत्र के पहले दिन अरुण जेटली ने जब सवाल किया तो उनका फोकस इन्हीं बातों पर था. बीजेपी ने अपने प्रचार में इसी पर ज़ोर दिया है. 4 अप्रैल को रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने इन्हीं बातों पर प्रेस कांफ्रेंस की. पहले देख लेते हैं कि कांग्रेस ने सुरक्षा के सवाल पर क्या कहा है. पेज नंबर 41 पर कांग्रेस ने जम्मू कश्मीर को लेकर कहा है कि भारत के अनुच्छेद 370 को शामिल गया गया है. इस संवैधानिक स्थिति को बदलने की न तो अनुमति दी जाएगी और न ही ऐसा कुछ प्रयास किया जाएगा. ज़रूर शुरुआत से बीजेपी और आरएसएस का यह एजेंडा रहा है कि अनुच्छेद 370 बदल देंगे. वाजपेयी सरकार और मोदी सरकार यानी दो सरकारें अपना पूरा कार्यकाल करने के बाद भी क्या आपको याद है कि इसे हटाने को लेकर कोई ठोस पहल हुआ है.

  • कांग्रेस के घोषणा-पत्र पर रवीश कुमार का विश्‍लेषण

    कांग्रेस के घोषणा-पत्र पर रवीश कुमार का विश्‍लेषण

    100 करोड़ से अधिक आबादी वाले देश में कुल संपत्तियों का 70 फीसदी एक प्रतिशत आबादी के बाद चला गया है. इस एक प्रतिशत ने सुधार के नाम पर राज्य के पास जमा संसाधनों को अपने हित में बटोरा है. आज प्राइवेट जॉब की स्थिति पर चर्चा छेड़ दीजिए, दुखों का आसमान फट पड़ेगा, आप संभाल नहीं पाएंगे. हम आज एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं. हमें राज्य के संसाधन, क्षमता और कारपोरेट के अनुभवों का तुलनात्मक अध्ययन करना चाहिए. एक की कीमत पर उसे ध्वस्त करते हुए कारपोरेट का पेट भरने से व्यापक आबादी का भला नहीं हुआ.

  • कांग्रेस के घोषणा पत्र में न्याय योजना सबसे ख़ास

    कांग्रेस के घोषणा पत्र में न्याय योजना सबसे ख़ास

    2019 के चुनावों के लिए कांग्रेस का घोषणा पत्र आ गया है. इधर-उधर के बयानों से बेहतर है कि अब घोषणा पत्रों में लिखी गई बातों को पकड़ा जाए. उन्हें याद रखा जाए. उसी तरह से जैसे 2014 के चुनावों में बीजेपी के घोषणा पत्र की कई बातों को पूरे पांच साल याद रखा गया. कांग्रेस के घोषणा पत्र के कवर पर लिखा है हम निभाएंगे. पहले पन्ने पर राहुल गांधी का बयान लिखा है कि मेरा किया हुआ वादा मैंने कभी नहीं तोड़ा. प्रस्तावना में राहुल गांधी ने लिखा है कि पांच साल में जो सबसे ख़तरनाक चीज़ें हुईं हैं वह यह कि आम जनता के बीच प्रधानमंत्री और उनके मंत्रिमंडल के शब्दों ने अपना विश्वास खो दिया है. उन्होंने हमें केवल खोखले वादे, असफल कार्यक्रम, झूठे आंकड़े, भय और नफरत का वातारण दिया है.

  • क्या एक साल में 20 लाख पद भरे जा सकेंगे?

    क्या एक साल में 20 लाख पद भरे जा सकेंगे?

    राहुल गांधी ने कहा है कि उनकी सरकार आई तो 31 मार्च 2020 तक 22 लाख सरकारी वैकेंसी को भर देंगे. नंबर भी है और डेडलाइन भी. क्या वाकई कोई सरकार 26 मई 2019 को शपथ लेकर 31 मार्च 2020 तक 22 लाख नौजवानों को नौकरी दे सकती है? लगता है राहुल गांधी प्राइम टाइम देखने लगे हैं. यह सही है कि हम डेढ़ साल से नौकरी सीरीज़ के भंवर में फंसे हुए हैं.

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