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Sanjay kishore


'Sanjay kishore' - 184 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • मरी हुई संवेदना और अटैची की क़ीमत

    मरी हुई संवेदना और अटैची की क़ीमत

    आपने भी वो वीडियो या तस्वीर देखी होगी. कैसे एक मां तपती धूप में गर्म सड़क पर ट्रॉली खींचती चली जा रही है और भूख-प्यास से थक कर उसका बेटा उसी ट्रॉली पर लटका हुआ है. पत्थर दिल भी इस ह्रदय विदारक दृश्य को देखकर पिघल जाए. मगर मेरे एक मित्र को सोते हुए बच्चे और उसकी बेहाल मां का दर्द नज़र नहीं आया. कहता है-वैसे परिस्थिति इनकी क्या है ये तो पता नहीं मगर इनका ट्रॉली बैग जरूर 6 से 8 हजार का होगा.

  • बात जो वॉट्सएप से आगे न बढ़नी थी, न बढ़ी...

    बात जो वॉट्सएप से आगे न बढ़नी थी, न बढ़ी...

    सोशल मीडिया पर वर्चुअल योद्धा सिर्फ नारा बुलंद करते हैं-“वीर तुम बढ़े चलो, हम तुम्हारे साथ हैं.” मगर आगे कोई नहीं आता. शायद इसलिए भी क्योंकि आगे बढ़कर कोई परचम थाम भी ले तो उसके पीछे कोई नहीं जाएगा. खासकर जब मामला संवेदनशील हो. पुलिस और प्रशासन से जुड़ा हुआ हो. कौन कोर्ट, कचहरी और पुलिस के पचड़ों में पड़ना चाहता है. किसके पास फ़ुर्सत है. जो सचमुच उस दर्ज़ी को अवैध क़ब्ज़े से बेदख़ल करना चाहते, वे खुद आगे बढ़कर शिकायत दर्ज करा सकते थे. अपने रसूख़ का इस्तेमाल कर उसको हटवा सकते थे. लेकिन बात वॉट्सएप से आगे न बढ़नी थी, न बढ़ी.

  • कोरोनावायरस लॉकडाउन के दौरान 'एसेन्शियल आइटम' होने का एहसास

    कोरोनावायरस लॉकडाउन के दौरान 'एसेन्शियल आइटम' होने का एहसास

    सम्पूर्ण लॉकडाउन की स्थिति में भी प्रजातंत्र के चौथे स्तंभ का काम रुकता नहीं. आपदा के समय आम जन तक सूचना का सही प्रसार बेहद अहम हो जाता है. यह अलग बात है कि आज के दौर में लोकतंत्र के सभी चार खंभों की विश्वसनीयता वेंटिलेटर पर है. इनमें सबसे नाज़ुक स्थिति सूचना-तंत्र की है. आज दर्शकों और पाठकों के सामने एक बड़ी चुनौती आ खड़ी हुई है. तमाम प्रश्नचिह्नों के बीच घिरे मीडिया में उन्हें अपने लिए सही ख़बर ढूंढना है. अगर आप इसमें नाकाम रहते हैं, तो ख़बरों की आड़ लेकर निहित स्वार्थ और विचारधाराएं आपके दिलोदिमाग़ में घुसकर घर बना लेती हैं. फिर आप उस विचारधारा की कठपुतली बन कर रह जाते हैं. सोचिएगा, फ़िलहाल मुझे सोच से निकलना होगा और घर से भी.

  • देश में Coronavirus से अबतक 35 की मौत, 1400 के करीब पहुंची संक्रमितों की संख्या, 24 घंटे में आए 146 मामले

    देश में Coronavirus से अबतक 35 की मौत, 1400 के करीब पहुंची संक्रमितों की संख्या, 24 घंटे में आए 146 मामले

    Coronavirus India Updates: देश में कोरनावायरस का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है. भारत में कोरनावायरस (COVID-19) से अबतक 35 लोगों की मौत हो चुकी है और संक्रमितों की संख्या 1397 पहुंच गई है. बीते 24 घंटे में कोरोना के 146 नए मामले सामने आए हैं, वहीं एक अच्छी खबर यह है कि इसके संक्रमण से 124 लोग ठीक हो चुके हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से मंगलवार रात ये आंकड़े जारी किए गए हैं.

  • लॉकडाउन पर बिहार के मंत्री ने उठाए सवाल, बोले- नाकाम हुआ लॉकडाउन, योगी और AAP सरकार जिम्मेदार

    लॉकडाउन पर बिहार के मंत्री ने उठाए सवाल, बोले- नाकाम हुआ लॉकडाउन, योगी और AAP सरकार जिम्मेदार

    नीतीश कुमार सरकार में मंत्री संजय झा ने बेहद कड़े शब्दों में साफ-साफ कहा है कि कोरोनावायरस से लड़ने के लिए लागू किया गया लॉकडाउन नाकाम हो चुका है.

  • चाहत और नफ़रत के बीच

    चाहत और नफ़रत के बीच

    आप सोचेंगे कि भला दिल्ली के एक व्यापारी की 1500 किलोमीटर दूर कोलकाता में बैठी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से क्या रंजिश हो सकती है जो उन्हें आगामी चुनाव में हारते हुए देखना चाहता है!

  • प्रशांत किशोर यदि 'आप' के होना चाहें तो पार्टी को कोई आपत्ति नहीं : संजय सिंह

    प्रशांत किशोर यदि 'आप' के होना चाहें तो पार्टी को कोई आपत्ति नहीं : संजय सिंह

    आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता संजय सिंह (Sanjay Singh) ने शुक्रवार को कहा कि अगर राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी 'आप' में शामिल होना चाहते हैं तो पार्टी को इसमें कोई आपत्ति नहीं होगी. संजय सिंह ने मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि "अगर प्रशांत किशोर जी हमसे जुड़ना चाहते हैं, तो हमें कोई आपत्ति नहीं है. अब यह उनका फैसला है कि आना है या नहीं."

  • कैसे AAP की मेहनत और प्रशांत किशोर की रणनीति ने जिताई दिल्ली, पढ़ें इनसाइड स्टोरी

    कैसे AAP की मेहनत और प्रशांत किशोर की रणनीति ने जिताई दिल्ली, पढ़ें इनसाइड स्टोरी

    बीजेपी के ज़बरदस्त हाई प्रोफ़ाइल और तूफ़ानी चुनाव प्रचार के बाद 8 फ़रवरी 2019 देश भर की नज़रें दिल्ली पर टिकी हुई थीं, विधानसभा के लिए मतदान चालू था दोपहर 3 बजे तमाम टीवी चैनलों के स्टूडियो में चर्चा का विषय था दिल्ली में मतदान का कम प्रतिशत, लगभग 3:30 बजे तक चुनाव आयोग के मुताबिक़ मतदान का प्रतिशत लगभग 40% था सभी राजनीतिक दलों की धड़कने तेज़ थीं.

  • नागरिकता बिल का विरोध करने पर नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर पर निशाना साधने के लिए BJP को दिया जिम्मा?

    नागरिकता बिल का विरोध करने पर नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर पर निशाना साधने के लिए BJP को दिया जिम्मा?

    लोकसभा में नीतीश कुमार की जदयू ने नागरिकता संशोधन बिल का समर्थन किया था, प्रशांत किशोर ने पार्टी के इस फैसले का विरोध किया है.

  • नून रोटी खाएंगे, मोदिए को ले आएंगे...

    नून रोटी खाएंगे, मोदिए को ले आएंगे...

    भाजपा और सहयोगी दलों के सांसदों को भी इस बार ये बात समझ लेनी चाहिए कि उन्होंने नरेंद्र दामोदर दास मोदी को प्रधानमंत्री नहीं बनाया, मोदी ने उन्हें संसद तक पहुंचाया है. अमेठी के आसमान में सुराख स्मृति ईरानी ने नहीं किया है.

  • सोलह साल: कुछ हसीन और कुछ ज़ालिम 

    सोलह साल: कुछ हसीन और कुछ ज़ालिम 

    आज सोलह साल हो गए. जीवन में मज़दूर दिवस एक ख़ास तारीख़ बन गई है. डेढ़ दशक जमा एक साल के इस सफ़र में कई दफे नई तारीख़ से रुबरू हुआ. नए और लुभावने मौक़ों से तार्रुफ़ हुआ, लेकिन जिसे ज़िंदगी के बेहतरीन साल समर्पित कर दिए, उससे बेवफ़ाई करने का जी नहीं चाहा. कुछ लगाव रहा और कुछ मजबूरियां भी और साथ लंबा होता चला गया.

  • दिक्कत क्या है विराट कोहली की आक्रामकता में...

    दिक्कत क्या है विराट कोहली की आक्रामकता में...

    सौरव गांगुली ने आंख में आंख डालकर बात करना सिखाया तो टीम इंडिया ने जीतना भी सीखा. महेंद्र सिंह धोनी की ‘कूलनेस’ में भी आक्रामकता थी.अब विराट कोहली सीने टकरा रहे हैं. कोहली का सीना उस 56 इंच की तरह खोखला नहीं हैं जहां से सिर्फ बातें और वादे निकलते हैं. इस सीने के अंदर आग है जो सिर्फ जीत से बुझना चाहती है. कामयाबी के लिए ये आत्मविश्‍वास भी जरूरी है-'तुम एक स्टैंडिंग कप्तान हो और मैं दुनिया का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़!' कोहली ने ये कहा हो या न कहा हो, बंदे में क़ुव्वत है तभी दंभ भी दिखा रहा है.

  • FIFA WORLD CUP: जब पिछली बार मिस्र की टीम यहां थी तब सालाह पैदा भी नहीं हुए थे

    FIFA WORLD CUP: जब पिछली बार मिस्र की टीम यहां थी तब सालाह पैदा भी नहीं हुए थे

    जब बॉल सालाह के बूट से टकराकर गोलपोस्ट के भीतर जाती है, तो लिवरपूल फुटबॉल क्लब स्टेडियम का नज़ारा कुछ ऐसा हो उठता है - पहले जश्न और शोर, फिर कुछ क्षण की खामोशी, फिर हाथ आसमान की तरफ उठता है खुदा को शुक्रिया कहने के लिए, और फिर जब वह धरती को चूमता है, तो उन लम्हों की पवित्रता के लिए ज़रूरी शांति का उसके प्रशंसक सम्मान करते हैं.

  • विराट कोहली ने की फुटबॉल कप्तान सुनील छेत्री के समर्थन की अपील

    विराट कोहली ने की फुटबॉल कप्तान सुनील छेत्री के समर्थन की अपील

    भारतीय क्रिकेट कप्तान विराट कोहली ने प्रशंसकों से भारतीय फ़ुटबॉल टीम का समर्थन करने की अपील की है. दरअसल मुंबई में इस समय इंटर कॉन्टिनेंटल खेल जा रहा है. भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान सुनील छेत्री ने एक वीडियो ट्वीट कर स्टेडियम में आकर टीम की हौसलाआफ़जाई करने की गुज़ारिश की थी. उनके वीडियो को री-ट्वीट करते हुए कोहली ने लिखा है-मेरे अच्छे दोस्त और फुटबॉल टीम के कप्तान सुनील क्षेत्री की बात सुनिए और अपनी तरफ से कोशिश कीजिए

  • इसलिए लिवरपूल के लाड़ले बन गए नए सुपरस्टार फुटबॉलर मोहम्मद सालाह

    इसलिए लिवरपूल के लाड़ले बन गए नए सुपरस्टार फुटबॉलर मोहम्मद सालाह

    उनके बूट से टकरा कर जब गेंद गोल पोस्ट के अंदर जाती है तो लीवरपूल फुटबॉल क्लब स्टेडियम का नज़ारा कुछ ऐसा ही होता है. पहले जश्न और शोर. फिर कुछ क्षण की खामोशी. हाथ खुदा का शुक्रिया कहने के लिए आसमान की तरफ उठता है और फिर जब वो धरती को चूमते हैं तो उन लम्हों की पवित्रता के लिए जरुरी शांति का उनके प्रशंसक सम्मान करते हैं. यह फुटबॉल के नए सुपर स्टार मोहम्मद सालाह हैं और वह किए कारनामे से वह लिवरपूल क्लब के लाड़ले बन गए हैं

  • हमारा नेता कैसा हो – नॉर्थईस्ट का जवाब, ‘टशनी’ हो...

    हमारा नेता कैसा हो – नॉर्थईस्ट का जवाब, ‘टशनी’ हो...

    'मॉर्निंग वॉक' के समय 'वॉक' कम, 'टॉक' ज़्यादा होने लगा है. पहले यह बीमारी 'काउ बेल्ट' तक सीमित थी, जहां हर चर्चा राजनीति से शुरू होकर राजनीति पर खत्म होती है. इसलिए भी, क्योंकि छोटे शहरों में भागमभाग कम है और समय ज़्यादा. फुर्सत ही फुर्सत. लिहाज़ा, चाय की चुस्की के साथ राजनीति पर बहसबाज़ी सबसे पसंदीदा शगल है.

  • मेरे हिस्से की श्रीदेवी

    मेरे हिस्से की श्रीदेवी

    अस्सी के दशक के शुरुआती साल थे. बाज़ार में VHS नया-नया आया था. आज जैसे हर गली और नुक्कड़ पर सेल-फ़ोन की दुकानें हैं. ठीक उसी तरह वीडियो पार्लर कुकुरमुत्तों की भांति मानों रातो-रात उग आए थे. धक्के खाकर बदमिजाज ब्लैकिए से महंगे टिकट खरीदने की बजाए, 10 रुपये में पूरा परिवार घर के सुकून में पूरी फ़िल्म देख रहा था. जो वीसीआर-वीडियो कैसेट्स रिकॉर्डर खरीद नहीं पाए वे भाड़े पर ले आते और 3 से 4 फ़िल्म एक ही रात में देख जाते.

  • 'वरियर' और 'वॉरियर' की कशमकश

    'वरियर' और 'वॉरियर' की कशमकश

    नाम में 'किशोर' जोड़ लेने से कुदरत की अदालत से उम्र पर 'स्टे ऑर्डर' थोड़े ही मिल जाता है... ज़िन्दगी का अर्द्धशतक कुछ ही साल के फासले पर इंतज़ार कर रहा है... 'मिड-लाइफ क्राइसिस' जैसी कोई बात नहीं है, शायद इसलिए, क्योंकि बचपना बचा हुआ है.

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