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Shankar pandit


'Shankar pandit' - 159 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • NDA में DNA पर दंगल: PM मोदी के खिलाफ नीतीश के सियासी 'तीर' को क्या अब उपेंद्र कुशवाहा बना रहे हैं 'रामबाण'

    NDA में DNA पर दंगल: PM मोदी के खिलाफ नीतीश के सियासी 'तीर' को क्या अब उपेंद्र कुशवाहा बना रहे हैं 'रामबाण'

    बिहार की सियासत में क्लाइमेक्स अभी बाकी है. भले ही बिहार एनडीए की की दो सबसे बड़ी पार्टी भाजपा और जदयू ने मिल बैठकर फिफ्टी-फिप्टी फॉर्मूले से सीटों के बंटवारे की गुत्थी को सुलझा लिया हो, मगर रालोसपा प्रमुख बिहार एनडीए की सीटों के बंटवारे की उलझन को और उलझा रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार ने वोट हासिल करने का जो तरीका अपनाया था, शायद वही तरीका अब उपेंद्र कुशवाहा भी अपना रहे हैं. दरअसल, बिहार के मुजफ्फरपुर में रविवार को उपेंद्र कुशवाहा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोला और नीच बताए जाने पर नीतीश कुमार से सवाल पूछा. इतना ही नहीं, उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश कुमार से डीएनए रिपोर्ट की भी मांग की है, जिस पर बिहार में चुनाव से पहले खूब माहौल बना था. 

  • सियासी दंगल का एक और ट्रेलर? नीतीश के खिलाफ उपेंद्र कुशवाहा के बोल, कहीं खोल न दे बिहार एनडीए की 'पोल'

    सियासी दंगल का एक और ट्रेलर? नीतीश के खिलाफ उपेंद्र कुशवाहा के बोल, कहीं खोल न दे बिहार एनडीए की 'पोल'

    लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर बिहार एनडीए में उथल-पुथल अभी खत्म नहीं हुआ है. भले ही समय-समय पर ऐसी बातें आती रहती हैं कि बिहार एनडीए में सब कुछ समान्य हो गया है और सीटों को लेकर कोई विवाद नहीं होगा. मगर केंद्रीय मंत्री और रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर ताजा हमले से यह स्पष्ट हो गया है कि उपेंद्र कुशवाहा, लोकसभा में पिछले साल की तुलना में कम सीटों पर कतई नहीं मानने वाले हैं. दरअसल, रविवार को रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने अपने ही घटक दल जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए उनसे पूछा कि उनकी ‘डीएनए’ रिपोर्ट क्या है. बता दें कि बिहार एनडीए में भाजपा और जदयू के बीच लोकसभा चुनाव के लिए सीटों को लेकर बराबर-बराबर का समझौता हुआ है.

  • विज्ञापन में वकीलों की पोशाक पहन बुरे फंसे अमिताभ बच्चन, बार काउंसिल ने भेजा कानूनी नोटिस

    विज्ञापन में वकीलों की पोशाक पहन बुरे फंसे अमिताभ बच्चन, बार काउंसिल ने भेजा कानूनी नोटिस

    सदी के महानायक अमिताभ बच्चन एक विज्ञापन को लेकर विवादों में फंसते नजर आ रहे हैं. एक विज्ञापन में वकील यानी अधिवक्ता की पोशाक पहनने को लेकर अमिताभ बच्चन को नोटिस जारी किया गया है. दिल्ली बार कौंसिल ने बुधवार को अभिनेता अमिताभ बच्चन, मसाला कंपनी, यू ट्यूब और एक मीडिया घराने के खिलाफ विज्ञापन में अधिवक्ताओं की पोशाक का इस्तेमाल करने के खिलाफ कार्रवाई करने की चेतावनी दी है और कहा है कि यह कानूनी पेशे की गरिमा को कमजोर करता है. 

  • 'Zero' Poster: कैटरीना की आंखों में डूब शाहरुख बोले- हमने तो चांद को करीब से देखा है

    'Zero' Poster: कैटरीना की आंखों में डूब शाहरुख बोले- हमने तो चांद को करीब से देखा है

    बॉलीवुड के किंगखान शाहरुख खान की अपकमिंग फिल्म 'जीरी' को लेकर अभी से ही फैन्स में बेकरारी देखने को मिल रही है. शाहरुख खान की अपकमिंग फिल्म 'जीरो' रिलीज को पूरी तरह से तैयार है और दिवाली से ठीक पहले फिल्म 'जीरो' के 2 पोस्टर जारी किए गये हैं. शाहरुख खान ने खुद अपने ट्विटर अकाउंट पर भी इसके दो पोस्टर जारी किये हैं और उनके अलग-अलग कैप्शन लिखे हैं. एक पोस्टर में जहां शाहरुख कैटरीना के साथ रोमांस करते नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरे पोस्टर में अनुष्का के संग खिलखिलाते नजर आ रहे हैं. 

  • अब होगा असली सियासी दंगल? BJP-JDU में 50-50 फॉर्मूले से बिहार NDA में मच सकता है 'घमासान'

    अब होगा असली सियासी दंगल? BJP-JDU में 50-50 फॉर्मूले से बिहार NDA में मच सकता है 'घमासान'

    आगामी लोकसभा चुनाव 2019 के लिए भारतीय जनता पार्टी और नीतीश कुमार की अगुआई वाली जनता दल यूनाइटेड ने वह समीकरण सुलझा लिये हैं, जिसे लेकर बीते काफी समय से दोनों के बीच मौखिक गहमागहमी चल रही थी. भारतीय जनता पार्टी यानी बीजेपी और जदयू के बीच सीटों का 50-50 मोड में समझौता हो गया है. मगर इस समझौते ने बिहार एनडीए के अन्य घटक दलों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी है. शुक्रवार को दिल्ली में अमित शाह से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मिले और बैठक के बाद नतीजा यह निकला कि लोकसभा चुनाव में न कोई बड़ा भाई होगा और न ही कोई छोटा. दोनों फिफ्टी-फिफ्टी के पार्टनर होंगे. हालांकि, इस समौझेते के बाद बिहार की सियासी गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म हो गया है.

  • Amritsar train accident: अमृतसर ट्रेन हादसे की वो 7 वजहें, जिसने खुशी के पल को मातम में बदल दिया

    Amritsar train accident: अमृतसर ट्रेन हादसे की वो 7 वजहें, जिसने खुशी के पल को मातम में बदल दिया

    पंजाब के अमृतसर (Amritsar train accident) में दशहरे के दिन रावण दहन के दौरान मौत की रेल ने करीब 59 जिंदगिंयां छीन ली. अमृतसर में जोड़ा फाटक के पास शुक्रवार की शाम रावन दहन के दौरान ट्रेन की चपेट में आने से 59 लोगों की मौत हो गई है और 50 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है. अमृतसर के जोड़ा फाटक के पास शुक्रवार की शाम दशहरा (dussehra 2018) के मौके पर रावण दहन देखने के लिए बबड़ी संख्या में भीड़ उमड़ी थी. लोग रेल की पटरियों पर खड़े होकर रावण दहन देख रहे थे, तभी अचानक तेज रफ्तार में ट्रेन आई और सैकड़ों लोगों को कुचलती हुई चली गई. ट्रेन जालंधर से अमृतसर आ रही थी तभी जोड़ा फाटक पर यह हादसा हुआ. इस हादसे को लेकर कई तरह की बातें की जा रही हैं. तो चलिए जानते हैं कि आखिर इन हादसों की वजहें क्या थीं...

  • सुहैब इलियासी : कभी अपराधियों की नाक में दम करने वाला पत्रकार, अब पत्नी की हत्या के मामले में हुआ बरी

    सुहैब इलियासी : कभी अपराधियों की नाक में दम करने वाला पत्रकार, अब पत्नी की हत्या के मामले में हुआ बरी

    90 के दशक में अपने शो के जरिये अपराधियों की नींद उड़ाने वाले और टीवी शो 'इंडियाज मोस्ट वांटेड' के होस्ट के रूप में प्रसिद्धि पाने वाले सुहैब इलियासी को अपनी पत्नी अंजू इलियासी की हत्या के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने बरी कर दिया है. टीवी शो 'इंडियाज मोस्ट वांटेड' के होस्ट सुहैब इलियासी को पत्नी की हत्या के 17 साल पुराने मामले में दिल्‍ली की अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी. अदालत ने इस मामले में इलियासी को 17 दिसंबर को दोषी करार दिया था. सुहैब इलियासी एक ऐसे पत्रकार के रूप में जाने जाते रहे, जिन्होंने क्राइम पत्रकारिता को एक नये मुकाम पर पहुंचा दिया और खोजी पत्रकारिता का एक नया मानक स्थापित किया. एक समय था, जब इनके शो को देखकर अपराधी खौफ खाया करते थे.

  • लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को 'ट्रिपल' झटका, इन तीन राज्यों में 'हाथी' को 'हाथ' की जरूरत नहीं

    लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को 'ट्रिपल' झटका, इन तीन राज्यों में 'हाथी' को 'हाथ' की जरूरत नहीं

    आगामी चार राज्यों में बीजेपी को धूल चटाने और जीत का सपना संजो रही कांग्रेस को उस वक्त करारा झटका लगा, जब बसपा प्रमुख मायावती ने सख्त तेवर के साथ ऐलान किया कि उनकी पार्टी राजस्थान और मध्य प्रदेश में कांग्रेस के साथ चुनाव नहीं लड़ेगी. राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कम से कम जीत की उम्मीद लगाई बैठी कांग्रेस के लिए यह कहीं से भी अच्छी खबर नहीं है. कांग्रेस अब तक यह मानकर चल रही थी कि मायावती के साथ इन तीन राज्यों में जीत का स्वाद चख लेगी, मगर अब मायावती के इस ऐलान के बाद कांग्रेस के लिए 'बहुत ही कठिन है डगर पनघट की' वाली स्थिति बन गई है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए लोकसभा चुनाव से पहले इन राज्यों को जीतना सबसे बड़ी चुनौती है. हालांकि, बसपा के साथ आने पर कुछ फायदा की तस्वीर स्पष्ट होने लगी थी, मगर मायावती ने कांग्रेस के सारे अरमानों पर पानी फेर दिया है. 

  • लोकसभा चुनाव 2019: कहीं फूट न जाए 'विपक्षी एकता' का गुब्बारा, ऐसे कैसे बीजेपी को हरा पाएगी कांग्रेस

    लोकसभा चुनाव 2019: कहीं फूट न जाए 'विपक्षी एकता' का गुब्बारा, ऐसे कैसे बीजेपी को हरा पाएगी कांग्रेस

    लोकसभा चुनाव 2019 में भारतीय जनता पार्टी की नेतृत्व वाली एनडीए को सत्ता से उखाड़ फेंकने की कवायद में जुटी कांग्रेस को उस वक्त एक और बड़ा झटका लगा, जब इस साल के अंत में होने वाले मध्य प्रदेश और राजस्थान के विधानसभा चुनावों में बसपा ने कांग्रेस से अलग होकर चुनाव लड़ने का फैसला लिया. 2019 लोकसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन को मजबूत करने में जुटी कांग्रेस के लिए यह किसी बड़े झटके से कम नहीं है, क्योंकि बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने न सिर्फ मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस से अलग होकर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है, बल्कि कांग्रेस पर सीधा हमला भी बोला है. दरअसल, बुधवार को मायावती के कांग्रेस को लेकर जो तल्ख तेवर दिखे, उससे राजनीतिक पंडित यह अनुमान लगा रहे हैं कि तीन राज्यों में कांग्रेस की उम्मीदें तो ढेर हो ही गईं, बल्कि लोकसभा चुनाव 2019 में भी गठबंधन की स्थिति बनती नहीं दिख रही है. 

  • लोकतंत्र के 'मंदिर' में बैठे हैं 30 फीसदी दागी सांसद, सबसे ज्यादा BJP नेताओं के दामन हैं दागदार

    लोकतंत्र के 'मंदिर' में बैठे हैं 30 फीसदी दागी सांसद, सबसे ज्यादा BJP नेताओं के दामन हैं दागदार

    देश की सियासत में राजनेताओं और अपराध का 'चोली-दामन' का साथ रहा है. देश में ऐसी कोई भी राजनीतिक पार्टियां नहीं, जो पूरी तरह से अपराध मुक्त छवि की हो. यानी उनके किसी भी एक नेता पर अपराध के मामले दर्ज नहीं हों. यही वजह है कि राजनीति में अपराधीकरण के मामले पर अपने फैसले में भले ही सुप्रीम कोर्ट ने दागी सांसदों, विधायकों को अयोग्य ठहराने से इनकार कर दिया, मगर कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि अब संसद के भीतर कानून बनाना इसकी जरूरत है. दरअसल, राजनीति में अपराधीकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने मंगलवार को अयोग्य ठहराने से इनकार कर दिया. इस मामले पर फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वक्त आ गया है कि संसद ये कानून लाए ताकि अपराधी राजनीति से दूर रहें. राष्ट्र तत्परता से संसद द्वारा कानून का इंतजार कर रहा है. कोई ने कहा है कि सिर्फ़ आरोप तय होने से किसी को अयोग्य करार नहीं दिया जा सकता है और बिना सज़ा के चुनाव लड़ने पर रोक नहीं लगाई जा सकती है. साथ ही कोर्ट ने सभी राजनीतिक दलों को चुनाव लड़ रहे उनके जिन उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, उनकी जानकारी वेबसाइटों और इलेक्ट्रॉनिक व प्रिंट, दोनों मीडिया में सार्वजनिक करने के निर्देश दिए. 

  • चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की राजनीति में एंट्री, नीतीश कुमार की मौजूदगी में JDU में हुए शामिल

    चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की राजनीति में एंट्री,  नीतीश कुमार की मौजूदगी में JDU में हुए शामिल

    चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अब राजनीति में एंट्री ले ली है वह नीतीश की मौजूदगी में जेडीयू में शामिल हो गए हैं.

  • लोकसभा चुनाव 2019: अगर ऐसा हुआ तो उपेंद्र कुशवाहा 'यदुवंशी के दूध और कुशवंशी के चावल' से सियासी खीर पका सकते हैं

    लोकसभा चुनाव 2019: अगर ऐसा हुआ तो उपेंद्र कुशवाहा 'यदुवंशी के दूध और कुशवंशी के चावल' से सियासी खीर पका सकते हैं

    बिहार एनडीए में लोकसभा चुनाव से पहले ही सीटों को लेकर खींचतान का दौर जारी है. हालांकि, गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी ने सीटों के बंटवारे को लेकर एक फॉर्मूला पेशकर बिहार में एनडीए के सहयोगियों के बीच सीटों की तस्वीर को साफ करने की कोशिश की. बीजेपी ने जो फॉर्मूला इजात किया है, उसके मुताबिक वह भी कॉम्प्रोमाइज की स्थिति में ही दिख रही है. कारण कि बीजेपी के फॉर्मूले के मुताबिक, बीजेपी 20 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ सकती है, जबकि बीजेपी के पास पहले से ही बिहार से बीजेपी के 22 सांसद हैं. बीजेपी का यह समझौता नाराज चल रही जनता दल यूनाइटेड के साथ गठबंधन को बनाए रखने को लेकर है. बीजेपी नीतीश कुमार की पार्टी जदयू को लोकसभा चुनाव में बिहार से 12 लोकसभा सीटें देने के फॉर्मूले पर विचार कर रही है. बीते कुछ समय से रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बयानों और उनके हाव-भाव से ऐसा लग रहा है कि बीजेपी का यह फॉर्मूला उन्हें रास नहीं आने वाला है. क्योंकि बीजेपी के इस फॉर्मूले के मुताबिक, रालोसपा को 2 या 3 से अधिक सीटें मिलती नहीं दिख रही है. 

  • सिंधु जल समझौते में क्यों अटकी है पाकिस्तान की 'जान', भारत अगर संधि तोड़ दे तो फिर क्या होगा?

    सिंधु जल समझौते में क्यों अटकी है पाकिस्तान की 'जान', भारत अगर संधि तोड़ दे तो फिर क्या होगा?

    सिंधु जल समझौता अथवा सिंधु जल संधि पर काफी लंबे समय से भारत-पाकिस्तान के बीच विवाद जारी है. इसके लिए कई बैठकों का दौर चल चुका है. एक बार फिर से पाकिस्तान में नई सरकार बनने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच पहली द्विपक्षीय वार्ता के रूप में सिंधु जल संधि को ही चुना गया है. हालांकि, पाकिस्तान का आतंकवाद को लेकर जिस तरह का रवैया रहा है, उससे लग नहीं रहा है कि इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच फिलहाल को आम सहमति बन पाएगी. भारतीय जल आयोग का एक प्रतिनिधिमंडल सिंधु जल संधि के विभिन्न पहलुओं पर अपने समकक्षों से महत्वपूर्ण बातचीत करने के लिए पाकिस्तान गये. जहां बुधवार और गुरुवार को बातचीत का कार्यक्रम तय है. इमरान खान के 18 अगस्त को प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच यह पहली अधिकारिक वार्ता है. पाकिस्तान के 22वें प्रधानमंत्री बनने पर खान को लिखे पत्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दोनों देशों के बीच अच्छे पड़ोसियों के संबंध बनाने का भारत का संकल्प व्यक्त किया था. 

  • पॉलिटिक्स के लिए क्यों IAS-IPS को लुभा रही बीजेपी, ओपी चौधरी से पहले ये भी थाम चुके हैं दामन

    पॉलिटिक्स के लिए क्यों IAS-IPS को लुभा रही बीजेपी, ओपी चौधरी से पहले ये भी थाम चुके हैं दामन

    दरअसल, सिर्फ हाल की ही ये दो घटनाएं इस बात की तस्दीक नहीं करती कि आईएएस अथवा आईपीएस अधिकारियों की पहली पसंद भारतयी जनता पार्टी है. बल्कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भी पूर्व आईएएस-आईपीएस अधिकारियों की एक लंबी फेहरिस्त है, जो बीजेपी की टिकट पर चुनाव लड़े हैं और आज भारतीय जनता पार्टी या मोदी सरकार में अहम ओहदे पर हैं. फिलहाल, रायपुर के पूर्व कलेक्टर ओपी चौधरी ने बीजेपी का दामन औपचारिक रूप से थाम लिया है और उम्मीद है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में खरसिया से चुनाव लड़ सकते हैं. यह सीट रायगढ़ जिले में कांग्रेस का गढ़ है और चौधरी का पैतृक नगर भी. तो चलिए एक नजर डालते हैं उन लोगों पर जो बीजेपी से पहले प्रशासनिक अधिकारी रहे और अब बीजेपी में अलग-अलग ओहदों पर काबिज हैं. 

  • बाढ़ से तबाह केरल को उबारने में मोदी सरकार ने झोंकी ताकत, केंद्र ने अब तक क्या-क्या किया, जानें पूरी डिटेल

    बाढ़ से तबाह केरल को उबारने में मोदी सरकार ने झोंकी ताकत, केंद्र ने अब तक क्या-क्या किया, जानें पूरी डिटेल

    केरल में आई सदी की सबसे ब़ड़ी बाढ़ ने उसकी कमर तोड़ दी है. केरल में बाढ़ की तबाही से न सिर्फ लोगों की जानें गईं, बल्कि हजारों करोड़ रुपयों को नुकसान हुआ, जान-माल की क्षति हुई और जिंदगी बेपटरी हो गई है. केरल की बाढ़ ने उसे कई साल पीछे धकेल दिया. हालांकि, अब केरल में बाढ़ की त्रासदी से निपटने के लिए चारों ओर से मदद के हाथ भी उठे. केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, और व्यक्तिगत तौर पर भी केरल की सबने जितन बन सका, उतनी मदद की. बहरहाल, केरल में अब राहत और बचाव का काम लगभग पूरा हो चुका है. जिंदगियों को पटरी पर लाने के लिए अब उनके पुनर्वास के काम पर हो रहा है. दरअसल, केरल में बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हवाई सर्वे किया और 500 करोड़ रुपये की अग्रिम सहायता की. इसके अलावा, कई राज्यों ने केरल के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से मदद का ऐलान किया और राहत सामग्रियां भेजी. 

  • Exclusive: कांग्रेस ज्वाइन करने के सवाल पर AAP से अलग हुए आशीष खेतान बोले- कल क्या होगा, पता नहीं

    Exclusive: कांग्रेस ज्वाइन करने के सवाल पर AAP से अलग हुए आशीष खेतान बोले- कल क्या होगा, पता नहीं

    आम आदमी पार्टी से हाल ही में नाता तोड़ने वाले आशीष खेतान ने एनडीटीवी इंडिया से इस्तीफे की वजहों को लेकर बातें कीं. एनडीटीवी की एक्सक्लूसिव बातचीत में आशीष खेतान ने कहा कि पिछले एक-डेढ़ साल से आत्म संदेह में था कि चुनावी राजनीति करनी चाहिए या फिर इसमें और गहरे तौर पर उतरना चाहिए. मुझे लगा कि जीवन के इस क्षण में और चुनावी राजनीति नहीं करना चाहिए. इसलिए अब दोबारा लिखने-पढ़ने का काम करूंगा. हो सकता है कि कभी किसी मोड़ पर पत्रकारिता भी करूं. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि अभी वक़ालत पर फोकस करना चाहता हूं, इसलिए पार्टी छोड़ी.

  • अपनों से दूर होती जा रही अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी, किसी ने खुद छोड़ा तो कोई हुआ बेदखल

    अपनों से दूर होती जा रही अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी, किसी ने खुद छोड़ा तो कोई हुआ बेदखल

    अपने गठन के दिनों से ही देश में एक नई तरह की राजनीति की नींव रखने वाली आम आदमी पार्टी कई सारी आंतरिक चीजों से जूझ रही है. बीते कुछ समय से आम आदमी पार्टी के भीतर चल रही सियासी खींचतान पर गौर करें तो ऐसा लगता है कि पार्टी के भीतर काफी उठा पटक है और वह अपने ही लोगों से जूझ रही है. एक के बाद एक आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफों से यह स्पष्ट हो गया है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल पार्टी को एकजुट रख पाने में असफल साबित हुए हैं. दरअसल, बुधवार को आप नेता आशीष खेतान की भी इस्तीफे की खबर आई. इससे पहले पत्रकार से नेता बने आशुतोष ने भी इस्तीफा दे दिया है. हालांकि, बाद में यह स्पष्ट हो गया कि आशीष खेतान ने आशुतोष के साथ ही 15 अगस्त को पार्टी से इस्तीफा दे दिया था और अब वह लीगल प्रैक्टिस पर ध्यान दे रहे हैं. आशीष खेतान ने ट्वीट कर स्पष्ट कर दिया कि फिलहाल वह सक्रिय राजनीति से किनारा ले रहे हैं. 

  • उम्र 62 साल, जुर्म 113, नाम बशीरन उर्फ मम्मी, पढ़ें खौफ का पर्याय बन चुकी 'लेडी डॉन' की कहानी

    उम्र 62 साल, जुर्म 113, नाम बशीरन उर्फ मम्मी, पढ़ें खौफ का पर्याय बन चुकी 'लेडी डॉन' की कहानी

    इस लेडी डॉन के खौफ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह 45 साल पहले ही जुर्म की दुनिया में कदम रख चुकी थी, मगर पुलिस को पकड़ने में उसे इतने साल लग गये. लेडी डॉन का तमगा हासिल कर चुकी बशीरन को उसके साथी गैंगस्टर और सिपहसालार मम्मी कहकर बुलाते हैं. हैरानी होगी यह जानकर कि 62 वर्षीय बशीरन पर हत्या सहित करीब 113 आपराधिक मामलें हैं. खैर, पुलिस ने 17 अगस्त को दिल्ली के संगम विहार इलाके से उसे धरदबोचा है. 

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