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Sudhir jain


'Sudhir jain' - 156 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • सोने की दोगुनी खरीद का माजरा क्या है...?

    सोने की दोगुनी खरीद का माजरा क्या है...?

    इस हफ्ते सूचना मिली कि देश में सोना खूब खरीदा जा रहा है, और बिक्री इतनी बढ़ गई है कि पिछले महीने दोगुने से भी ज़्यादा सोना विदेश से भारत में आया. यह सामान्य घटना नहीं है, लेकिन मीडिया में इस ख़बर का विश्लेषण ज्य़ादा नहीं दिखा. क्या इस घटना का आगा-पीछा नहीं देखा जाना चाहिए...?

  • असहमति को 'सेफ्टी वॉल्व' कहे जाने के मायने...

    असहमति को 'सेफ्टी वॉल्व' कहे जाने के मायने...

    पुलिस ने जिन विद्वानों को दबिश डालकर पकड़ लिया था, उन्हें वापस उनके घर छोड़कर आना पड़ा. लेखकों, कवियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर यह रोक सुप्रीम कोर्ट के आदेश से हो पाई. गौरतलब है कि भारतीय न्याय व्यवस्था की एक-एक बात संजोकर रखी जाती है. अदालतों के आदेशों को इतिहास की अलमारी में संगवाकर रखा जाता है. सुप्रीम कोर्ट ने इन विद्वानों की गिरफ्तारी पर रोक लगाकर उसे नज़रबंदी में तब्दील करने का जो अंतरिम आदेश दिया, वह भी इतिहास में सुरक्षित रखा जाएगा. यह आदेश जिनके खिलाफ है, वे कह सकते हैं कि यह आदेश अंतिम निर्णय नहीं है, लेकिन इस मामले में सुनवाई के दौरान अदालत ने एक दार्शनिक वाक्य भी बोला है - असहमति लोकतंत्र का 'सेफ्टी वॉल्व' है... यह सार्थक वाक्य इतिहास में ज़रूर जाएगा. इतना ही नहीं, अदालत ने अपराधशास्त्रियों और न्यायशास्त्रियों को सोच-विचार का एक विषय भी दे दिया है.

  • दो बार चुनाव होने से किसे नफा, किसे नुकसान...

    दो बार चुनाव होने से किसे नफा, किसे नुकसान...

    देश में विधानसभा और लोकसभा चुनाव एक साथ करवाने की बात फिर उठवाई जा रही है. फिलहाल सारी नहीं, तो कुछ विधानसभाओं और लोकसभा चुनाव साथ-साथ करवाने की सुगबुगाहट तो है ही. इस काम में कई किंतु-परंतु लगे हैं. इस समय कानूनन एक साथ चुनाव संभव नहीं है, कुछ ही घंटे पहले चुनाव आयोग यह बता चुका है.

  • अब किसान के उत्पाद की कीमत घटाने की कवायद...?

    अब किसान के उत्पाद की कीमत घटाने की कवायद...?

    रिज़र्व बैंक ने कर्ज़ को महंगा करने का फैसला किया. खास बात यह कि यह काम दो महीने में दूसरी बार किया गया. इसका मुख्य कारण यह समझाया गया है कि महंगाई बढ़ रही है. लिहाज़ा महंगाई को काबू में रखने के लिए बाज़ार में पैसे की मात्रा कम करने की ज़रूरत है.

  • ढूंढने निकले मॉब लिंचिंग का कानूनी उपाय...

    ढूंढने निकले मॉब लिंचिंग का कानूनी उपाय...

    हालांकि इस बात में शक नहीं कि लिंचिंग ने देश और दुनिया में अपनी केंद्र सरकार और संबधित राज्य सरकारों की छवि मटियामेट कर दी है. लिहाज़ा, मौजूदा सरकार यह ज़रूर चाहेगी कि लिंचिंग की वारदात हाल-फिलहाल रुक जाएं, और फिर सरकार आखिर सरकार होती है, वह जो चाहेगी, वैसा होगा कैसे नहीं.

  • कड़े कानून को मुलायम बनाने के मायने...

    कड़े कानून को मुलायम बनाने के मायने...

    बिहार में शराब कानून को बदलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, हालांकि बहुत संभलकर. यह कहते हुए कि कानून जरा ज़्यादा कड़ा बन गया था और अब इसे हल्का करेंगे. एक नुक्ता यह भी निकाला गया है कि इस कानून के दुरुपयोग की गुंजाइश कम की जाएगी.

  • सरकार दिखा रही है अदृश्य रोज़गार के अप्रत्यक्ष आंकड़े...

    सरकार दिखा रही है अदृश्य रोज़गार के अप्रत्यक्ष आंकड़े...

    अपनी केंद्र सरकार बेरोज़गारी के मोर्चे पर बुरी तरह फंसी है. अब तक तो यह कहकर काम चल जाया करता था कि रोज़गार पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब सरकार के कार्यकाल का लगभग सारा समय ही गुज़र गया है, सो, अचानक ये दावे किए जाने लगे हैं कि सरकार ने कितने करोड़ लोगों को रोज़गार दे दिया.

  • उत्तराखंड के 'जनता दरबार' में कुदृश्य कांड

    उत्तराखंड के 'जनता दरबार' में कुदृश्य कांड

    सरकार और जनता के बीच संवाद का एक कुदृश्य इस समय पूरे देश में सनसनी फैला रहा है. कोशिश पूरी हुई कि यह नज़ारा किसी तरह जनता के बीच पहुंच न पाए, लेकिन ज़माना सोशल मीडिया का है. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के उस 'जनता दरबार' में सरकार से एक नागरिक की फरियाद करने के दौरान हुई 'तू-तू मैं-मैं' का नज़ारा कैमरों में कैद हो चुका था. वह 'जनता मिलन' उर्फ 'जनता दरबार' था.

  • 'कश्मीर कांड' के कारण की तलाश...

    'कश्मीर कांड' के कारण की तलाश...

    जम्मू एवं कश्मीर में ऐसा होने की भनक किसी को नहीं लगी. मीडिया को अचानक बताया गया कि BJP वहां महबूबा मुफ्ती सरकार से अलग होने जा रही है, और दो घंटे के भीतर ही नाकामियों का ठीकरा महबूबा पर फोड़ते हुए BJP ने सरकार गिराने का ऐलान कर दिया. मसला एक विशेष राज्य में सरकार गिराए जाने का है.

  • गांव बंद का एक पहलू यह भी

    गांव बंद का एक पहलू यह भी

    गांव बंद नए तरह का आंदोलन है. लिहाजा इसका आगा-पीछा देखना कठिन काम है. अभी दो दिन हुए हैं. हर दिन इसके असर की समीक्षा होगी. धीरे-धीरे पता चलेगा कि आंदोलनकारी किसानों की रणनीति किस तरह बदलती है. यह सवाल बिल्कुल अंधेरे में है कि आंदोलन के नौवें या दसवें दिन क्या हालात होंगे? फिलहाल सूचनाएं हैं कि देश में जगह-जगह इस आंदोलन ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है. अब यह देखा जाना बाकी है कि देश में इस समय सबसे ज्यादा मुफलिस यह तबका अपने उत्पाद को कितने और दिन तक अपने घर या गांव में रखे रख सकता है. यानी ये किसान कब तक शहर जाकर अपना उत्पाद बेचने को मजबूर नहीं होते. बहुत संभव है कि शहर उसे मजबूर कर दे. अगर कर भी दिया तो इस आंदोलन के कुछ हासिल उसे जरूर होंगे. हो सकता है कि इस आंदोलन के दौरान उसे बाजार के कुछ रहस्य हाथ लग जाएं.

  • कर्नाटक ने फूंक ही दिया 2019 का बिगुल...

    कर्नाटक ने फूंक ही दिया 2019 का बिगुल...

    मीडिया और राजनीतिक पंडितों ने पहले ही भांप लिया था कि कर्नाटक चुनाव का असर 2019 के लोकसभा चुनाव तक जाएगा. आखिर वही हुआ. बीएस येदियुरप्पा की हरचंद कोशिश नाकाम होने के बाद अब एचडी कुमारस्वामी शपथ लेने जा रहे हैं. ऐसे बानक बन गए हैं कि इस समारोह में गैर-भाजपाई दलों के नेताओं की आकाशगंगा दिखेगी, और यही अद्भुत नज़ारा 2019 के बिगुल फूंकने जैसा मौका बन सकता है. कर्नाटक चुनाव को इतना महत्व देने का तर्क यह है कि अगर यह मौका न आता, तो देश में राजनीतिक विपक्ष के एक चौपाल पर बैठने की शुरुआत पता नहीं कैसे और कब बन पाती.

  • कर्नाटक में कौन सी अनहोनी हो गई?

    कर्नाटक में कौन सी अनहोनी हो गई?

    उसने अपने पास विकल्प खुले रखे थे, यानी आज जब नतीजे आ गए हैं तब हमें कर्नाटक में कुछ अनहोनी हो जाने की मुद्राएं नहीं बनानी चाहिए. हद से हद हम ये बात कर सकते हैं कि कर्नाटक में जो खंडित जनादेश आया है और उसके हिसाब से जो हो रहा है उसमें कुछ नाजायज़ तो होने नहीं जा रहा है.

  • राहुल गांधी के PM बनने की बात से इतनी हलचल क्यों...?

    राहुल गांधी के PM बनने की बात से इतनी हलचल क्यों...?

    अब राहुल गांधी देश में जहां-जहां जाएंगे और बोलेंगे, जनता उनसे यही उम्मीद लगाएगी कि वह देश के लिए भविष्य की योजनाएं भी बताएं. हालांकि किसानों और बेरोज़गारों की चिंताओं को वह पहले से उठा रहे हैं, लेकिन अब किसानों और बेरोज़गारों के लिए मांग उठाने का वक्त नहीं बचा. उन्हें अब वैसी योजनाओं का खाका लेकर आना पड़ेगा, जिनमें इन दोनों वर्गों की समस्याओं का समाधान हो.

  • कृषि में निजी निवेश का आश्चर्यजनक सुझाव

    कृषि में निजी निवेश का आश्चर्यजनक सुझाव

    भारतीय उद्योग परिसंघ के नए अध्यक्ष ने देश के कृषि क्षेत्र में अचानक एक सपना बो दिया. हालांकि परिसंघ अध्यक्ष ने फिलहाल कहा इतना भर है कि कृषि क्षेत्र में निजी क्षेत्र को लाना जरूरी है. बेशक यह सुझाव सुनकर ही सरकार की बांछें खिल गई होंगी.

  • उन्नाव कांड अपराध शास्त्र के नजरिए से

    उन्नाव कांड अपराध शास्त्र के नजरिए से

    उन्नाव कांड की खबर देश भर में फैल रही है. बलात्कार कांड में पीड़ित लड़की के पिता की बेरहम पिटाई से मौत के बाद तो कोई कितनी भी कोशिश कर लेता, इस कांड की चर्चा को दबाया ही नहीं जा सकता था. वैसे आमतौर पर ऐसे मामलों की चर्चा जिले स्तर पर ही निपट जाती है. लेकिन यह कांड जल्द ही पूरे प्रदेश में फैला और देखते ही देखते इसने पूरे देश में सनसनी फैला दी.

  • देशभर में दलितों का उठ पड़ना

    देशभर में दलितों का उठ पड़ना

    दलितों ने भारत बंद की अपील की थी. सरकार को लग रहा होगा कि एक प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन के बाद आंदोलन खत्म हो जाएगा. लेकिन ये तो पूरे देश में सनसनीखेज ढंग से उठ पड़ा.

  • विश्व खुशहाली रिपोर्ट ने मटियामेट कर दी हमारी छवि

    विश्व खुशहाली रिपोर्ट ने मटियामेट कर दी हमारी छवि

    दुनिया की हर राजनीतिक व्यवस्था का एक ही लक्ष्य होता है कि उसकी जनता या प्रजा की खुशहाली बढ़े या बदहाली कम हो. लोकतांत्रिक व्यवस्था तो इसी मकसद से ईजाद हुई थी कि उसके सभी नागरिकों की खुशहाली सुनिश्चित हो सके. हर सरकार बदहाली कम करने का नारा लेकर आती है. मौजूदा सरकार इस मामले में कुछ अलग नारा लेकर आई थी, अच्छे दिन या खुशहाली ला देने का नारा. हालांकि, खुशहाली का मापने का विश्वसनीय पैमाना किसी ने नहीं बना पाया. इसीलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राष्ट्र ने पूरी दुनिया के अलग अलग देशों में खुशहाली को आंकना शुरू किया. छह साल से संयुक्त राष्ट्र हर साल इस तरह का आकलन करवा रहा है और बाकायदा एक सूचकांक के जरिए एक रिपोर्ट बनती है जो यह बताती है कि किस देश में खुशहाली का क्या स्तर है. इस साल का यह विश्व खुशहाली सूचकांक दो दिन पहले ही जारी हुआ है. चौंकाने और बुरी तरह से झकझोर देने वाली बात यह है कि दुनिया कि 156 देशों में हमारे देश की खुशहाली का नंबर 133वां आया है. यानी औसत से बहुत ही नीचे. पिछले साल से भी 11 नंबर नीचे. इस विश्व रिपोर्ट ने हमें डेढ़ सौ देशों के बीच सबसे बदहाल 25 देशों के संग बैठा दिया है.

  • विज्ञान मंत्री के दावे से खड़ा एक बखेड़ा

    विज्ञान मंत्री के दावे से खड़ा एक बखेड़ा

    इस साल की विज्ञान कांग्रेस में विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री के दिए भाषण की चर्चा ने जोर पकड़ लिया है. आमतौर पर ऐसे आयोजनों को आजकल एक औपचारिकता ही माना जाता है. इसीलिए मीडिया में ऐसे भाषणों को ज्यादा तरजीह मिलना बंद हो चला था.

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