NDTV Khabar

Sushil mohapatra blog


'Sushil mohapatra blog' - 85 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • ...जब मैं 45 दिनों के बाद चक्रवात फोनी का असर देखने पहुंचा

    ...जब मैं 45 दिनों के बाद चक्रवात फोनी का असर देखने पहुंचा

    15 जून को पुरी के अलग-अलग गांव में जब मैं घूम रहा था, तब मैंने यह नहीं सोचा था कि लोग साइक्लोन फोनी के 45 दिनों के बाद भी संघर्ष कर रहे होंगे. भुवनेश्वर से करीब 120 किलोमीटर दूर मेरी गाड़ी जब कृष्ण-प्रसाद ब्लॉक के लिए निकली, तब मेरे मन में कई सवाल थे. मेरी गाड़ी जब धीरे-धीरे आगे बढ़ती गई, सभी सवालों ks जवाब मिलते गए. रास्ते के चारों तरफ बिखरे हुए पेड़ और टूटे हुए मकान देखकर मैं समझ गया साइक्लोन फोनी कितना खतरनाक था.

  • ब्लॉग: PM मोदी हैं 'मैन ऑफ द मैच', पत्रकार इसे अपनी जीत न समझे

    ब्लॉग: PM मोदी हैं 'मैन ऑफ द मैच', पत्रकार इसे अपनी जीत न समझे

    ऐसी सोच पत्रकारिता को खत्म करती है. किसी भी पार्टी की हार या जीत पर पत्रकार को खुश या दुखी नहीं होना चाहिए. पत्रकार को अपना काम करना चाहिए. पत्रकार का काम लोगों की समस्या पर ध्यान देना, लोगों की समस्या दिखाना है, न की किसी पार्टी की गोद में बैठ जाना. इस देश में कुछ ऐसे पत्रकार भी हैं जो सरकार की हमेशा आलोचना करते हैं, कुछ लोगों को यह अच्छा नहीं लगता है. इन पत्रकारों को गाली दी जाती है. परेशान किया जाता है. कई लोग यह भी कहते हैं कि यह पत्रकार सरकार की तारीफ क्यों नहीं करते. पत्रकार का काम सरकार की तारीफ करना नहीं है चाहे किसी भी पार्टी की सरकार हो. पत्रकार का काम है सवाल करना लोगों की समस्या को सामने रखना है. पत्रकारों को उस दिन सरकार की तारीफ करनी चाहिए जिस दिन सभी समस्या खत्म हो जाये.

  • ब्लॉग: कांग्रेस के नेता चुनाव क्षेत्र को अपनी संपत्ति न मानें, यह लोगों की संपत्ति है

    ब्लॉग: कांग्रेस के नेता चुनाव क्षेत्र को अपनी संपत्ति न मानें, यह लोगों की संपत्ति है

    ऑस्ट्रेलिया टीम इसीलिए अच्छा प्रदर्शन करती है. भारत की राजनीति में भी यह फार्मूला लागू होना चाहिए. फॉर्म में जो नेता नहीं हैं उनके जगह नए नेताओं को टिकट देना चाहिए. यह जो पुराने नेता है उन्हें टेनिस की तरह नॉन प्लेइंग कप्तान बना देना चाहिए जो बाहर बैठकर सलाह देते रहे.

  • समय के साथ-साथ कितने बदले हैं राहुल गांधी?

    समय के साथ-साथ कितने बदले हैं राहुल गांधी?

    2014 से लेकर 2019 के बीच राहुल गांधी के अंदर बहुत बदलाव आया है. इस चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने कई इंटरव्यू दिए है. शुक्रवार को राहुल गांधी ने एनडीटीवी के रवीश कुमार को इंटरव्यू दिया. मध्य प्रदेश के सुजालपुर में यह इंटरव्यू हुआ. इंटरव्यू के लिए मैं भी रवीश कुमार के साथ ट्रेवल कर रहा था. हम सबके मन में एक सवाल यह भी था क्या राहुल गांधी लाइव इंटरव्यू देंगे? समय के मुताबिक राहुल गांधी सुजालपुर पहुंचते है फिर कार्यक्रम शुरू होता है. स्टेज पर कमल नाथ समेत कई बड़े नेता मौजूद थे. मेरी नजर राहुल गांधी पर थी, यह पहला मौका था जब मैं राहुल गांधी को करीब से देख रहा था. राहुल के हावभाव पर मेरी नजर थी. मैं राहुल गांधी का आत्मविश्वास को मापने में लगा हुआ था.

  • 1999 के सुपर साइक्लोन से मेरा सामना और इस साइक्लोन से क्या सीखा ओडिशा सरकार ने

    1999 के सुपर साइक्लोन से मेरा सामना और इस साइक्लोन से क्या सीखा ओडिशा सरकार ने

    सुबह सुबह साइक्लोन की रफ्तार बढ़ती चली गई और फिर भयंकर रूप धारण कर लिया. उस समय गांव में मेरा पक्का घर था लेकिन मुझे याद है हवा की रफ्तार इतनी तेज थी कि घर के मुख्य दरवाज़े को मेरे परिवार के कई लोग पकड़कर रखे थे. ऐसा लग रहा था जैसे हवा दरवाज़े को उखाड़कर ले जाएगी. हवा की गति 300 किलोमीटर प्रति घंटा से भी ज्यादा थी. कितने घंटों तक हवा का तांडव चलता रहा मुझे याद नहीं लेकिन तीन दिन तक लगातार बारिश हुई थी.

  • मजदूरों की समस्या को लेकर कितनी गंभीर है सरकार और मीडिया

    मजदूरों की समस्या को लेकर कितनी गंभीर है सरकार और मीडिया

    बीते रविवार को दिल्ली रैली की राजधानी बना रहा. देश के अलग हिस्सों से हजारों की संख्या में मजदूर अपनी मांगों को लेकर सड़क पर प्रदर्शन करते हुए नजर आए. संसद मार्ग पर एक तरफ आंगनवाड़ी कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे थे तो दूसरी तरफ अलग-अलग राज्यों से आए मजदूर विरोध जता रहे थे. संसद मार्ग से थोड़ी दूर जंतर मंतर पर मिलिट्री फोर्स के रिटायर्ड जवान प्रदर्शन कर रहे थे. दूर-दूर तक इन मजदूरों ली आवाज सुनाई दे रही थी लेकिन इन आवाजों को कैद करने के लिए मीडिया चैनलों के कैमरे नहीं थे.

  • यह हार बीजेपी के साथ-साथ मीडिया की भी है, लेकिन जीत कांग्रेस की नहीं किसानों की हुई है

    यह हार बीजेपी के साथ-साथ मीडिया की भी है, लेकिन जीत कांग्रेस की नहीं किसानों की हुई है

    जिन किसानों ने बीजेपी को वोट दिया था आज वो परेशान है .अनाज का सही MSP नहीं मिल रहा है. किसान आज सड़क पर प्रदर्शन कर रहा है. अपना हक मांग रहा है. पांच राज्यों के चुनाव परिणाम यह दर्शाती है कि लोग बीजेपी से खुश नहीं है. मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में बीजेपी की बड़ी हार है. तीनों राज्यों में बीजेपी की सरकार थी. यह हार सिर्फ बीजेपी की नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी है. 

  • केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के नाम खुला खत...

    केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के नाम खुला खत...

    राजबाई ने बताया कि उनके पति किसी असंगठित क्षेत्र में काम करते थे. तीन साल पहले उनकी मौत हो गई. पेंशन के रूप में राजबाई को सिर्फ 300 रुपये मिलते हैं. 80 साल की उम्र में भी राजबाई दूसरों के खेत में काम करके गुजारा कर रही हैं.

  • अगर पीएम मोदी ओडिशा के पुरी से चुनाव लड़े तो...

    अगर पीएम मोदी ओडिशा के पुरी से चुनाव लड़े तो...

    मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2019 में ओडिशा की पुरी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने वाले हैं. वाराणसी के बाद पुरी. इसके पीछे एक ही वजह हो सकती है, हिंदुत्व का एजेंडा. ओडिशा में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होने वाले हैं. ऐसे में भगवान जगन्नाथ के नाम पर बीजेपी वोट मांगेगी.

  • मंत्री जी, बलात्कार पर बयान देने से पहले आंकड़ों पर तो जरा नज़र डाल लेते...

    मंत्री जी, बलात्कार पर बयान देने से पहले आंकड़ों पर तो जरा नज़र डाल लेते...

    रविवार को सुबह-सुबह खबर आई की राष्ट्रपति ने POCSO एक्ट पर हस्ताक्षर कर दिया है. यानी बच्चियों के साथ हो रहे बलात्कार के मामलों को लेकर सरकार काफी गंभीर है. अब इस एक्ट के तहत 12 साल से कम उम्र की बच्‍ची के साथ हुए दुष्कर्म के लिए दोषी साबित होने पर कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी जिसमें फांसी भी शामिल है.

  • जेल से डॉक्टर कफील खान ने लिखा, 'क्या सच में मैं दोषी हूं'

    जेल से डॉक्टर कफील खान ने लिखा, 'क्या सच में मैं दोषी हूं'

    पिछले आठ महीने से डॉक्टर कफील खान जेल में है. अभी तक उन्हें बेल नहीं मिली है. शुक्रवार को डॉक्टर खान का परिवार एनडीटीवी ऑफिस पहुंचा और सिस्टम पर कई आरोप लगाए. एनडीटीवी ने बात करते हुए डॉक्टर कफील खान की पत्नी ने कहा कि जेल के अंदर डॉक्टर कफील खान बीमार हैं, लेकिन उन्हें सही इलाज नहीं मिल रहा है. पत्नी के कहा कि ऊपरी स्तर के लोगों को बचाने के लिए कफील खान को फंसाया जा रहा है. जान-बूझकर उनके बेल को रोका जा रहा है.

  • नरेश अग्रवाल बीजेपी को सिखाने आए हैं या सीखने?

    नरेश अग्रवाल बीजेपी को सिखाने आए हैं या सीखने?

    14 नवंबर 2013 को उत्तर प्रदेश के हरदोई में नरेश अग्रवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा था एक चाय बेचने वाला कभी भी देश का प्रधानमंत्री नहीं बन सकता है.

  • BCCI के द्वारा जारी की गई कॉन्ट्रैक्ट लिस्ट पर क्यों उठाया जा सकता है सवाल?

    BCCI के द्वारा जारी की गई कॉन्ट्रैक्ट लिस्ट पर क्यों उठाया जा सकता है सवाल?

    बीसीसीआई के तरफ बुधवार को खिलाड़ियों के साथ नये कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम का ऐलान कर दि गया. इस बार एक नया वर्ग A प्लस के नाम से लागू कर दिया गया है. जो भी खिलाड़ी इस वर्ग में होंगे उन्हें सात करोड़ मिलेगा.

  • रेलवे में भर्ती : क्या रेलमंत्री पीयूष गोयल इन सवालों का जवाब देंगे?

    रेलवे में भर्ती : क्या रेलमंत्री पीयूष गोयल इन सवालों का जवाब देंगे?

    कुछ दिन पहले रेलवे में निकली भर्ती के नियमों में तीन बड़े बदलाव किये गए थे. कुछ पदों के लिए अधिकतम उम्र सीमा को को 30 से घटाकर 28 कर दिया गया था, जनरल कैंडिडेट के लिए परीक्षा शुल्‍क बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया गया था जबकि SC/ST कैंडिडेट के लिए 250 रखा गया था. तीसरा जो बदलाव था वह था कि कुछ पदों के लिए आईटीआई अनिवार्य कर दिया गया था.

  • प्रोटेस्ट@मिडनाइट : जब छात्राओं की जिद के आगे प्रशासन को झुकना पड़ा

    प्रोटेस्ट@मिडनाइट : जब छात्राओं की जिद के आगे प्रशासन को झुकना पड़ा

    छात्राओं का गुस्सा चरम पर था कि हॉस्टल में आग लग जाने के बाद प्रशासन इतनी लापरवाही कैसे कर सकता है. वे प्लानिंग ब्लॉक के सामने धरने पर बैठ गईं. न क्लास जाने के लिए तैयार थीं, न हॉस्टल. कॉलेज के दूसरे छात्रों ने भी उनका साथ दिया.

  • बच्चों की मौत पर भी नहीं संभले नेताओं के बयान

    बच्चों की मौत पर भी नहीं संभले नेताओं के बयान

    एकला गांव की बहादुर के चार साल के बेटे की ऑक्सीजन के कमी से मौत हो गयी. वंदना नाम की एक 12 साल की लड़की की भी मौत हो गयी.

  • साइंस मार्च : ऐसा क्या हुआ कि देश के हज़ारों वैज्ञानिकों को सड़क पर उतरना पड़ा...?

    साइंस मार्च : ऐसा क्या हुआ कि देश के हज़ारों वैज्ञानिकों को सड़क पर उतरना पड़ा...?

    22 अप्रैल 2017 को वॉशिंगटन डीसी के नेशनल मॉल के सामने जब हज़ारों की संख्या में वैज्ञानिक हाथ में पोस्टर लेकर सड़क पर उतरे थे तब अलग अलग देशों से उन्हें समर्थन मिला था.

  • सैंडविच पत्रकारिता के बाद अब पपीता पत्रकारिता का दौर चल रहा है

    सैंडविच पत्रकारिता के बाद अब पपीता पत्रकारिता का दौर चल रहा है

    देश में बहुत ख़बरें हैं लेकिन उत्तर प्रदेश एक पत्रकार के लिए 'जीना यहां मरना यहां' जैसा बन गया है. जिस खबरों का कोई महत्व नहीं, वो छाई हुई हैं. आदित्यनाथ योगी के मुख्यमंत्री बनने के बाद बाल की खाल निकाली जा रही है. उनका बचपन का नाम क्या था, उत्तर प्रदेश में पैदा हुए थे या उत्तराखंड में. नाश्ते में क्या-क्या लेते हैं, पपीता कब खाते हैं ,दलिया कब खाते हैं. ऐसा लगा रहा है जैसे पपीता पत्रकारिता का दौर चल रहा है.