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Times ranking


'Times ranking' - 9 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • वर्ल्ड रैंकिग में जामिया मिलिया इस्लामिया की रैंकिंग हुई बेहतर

    वर्ल्ड रैंकिग में जामिया मिलिया इस्लामिया की रैंकिंग हुई बेहतर

    टाइम्स हायर एजुकेशन इमर्जिंग इकोनॉमीज यूनिवर्सिटी की 2019 की रैंकिंग में जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने एक बड़ी छलांग लगाई है. पिछले साल की रैंकिंग में 201-250 के बीच जगह बनाने वाली जेएमआई इस साल 187 वें स्थान पर आ पंहुची है. इस बार टाइम्स हायर एजुकेशन इमर्जिंग इकोनॉमीज यूनिवर्सिटी की रैंकिंग में सिर्फ उन्हीं शैक्षिक संस्थानों को शामिल किया गया है जिन्हें एफटीसएसई ने ''एडवांस्ड इमरजिंग'', ''सैकण्डरी इमरजिंग'' या ''फ्रंटिअर'' के रूप मान्यता मिली हुई है. भारत सेकंडरी इमरजिंग श्रेणी में आता है.

  • IIT Kharagpur को टाइम्स टॉप 100 गोल्डन एज यूनिवर्सिटी रैकिंग में मिली जगह

    IIT Kharagpur को टाइम्स टॉप 100 गोल्डन एज यूनिवर्सिटी रैकिंग में मिली जगह

    IIT खड़गपुर को टाइम्स की टॉप 100 हायर एजुकेशन गोल्डन एज यूूनिवर्सिटी रैंकिंग में शामिल किया गया है. साथ ही, आईआईटी खड़गपुर का नाम उभरते हुई 50 यूनिवर्सिटियों की सूची में भी दर्ज किया गया है.

  • नौकरी की जंग लड़ते जवान-नौजवान, सरकार से मिला भरोसा कब पूरा होगा?

    नौकरी की जंग लड़ते जवान-नौजवान, सरकार से मिला भरोसा कब पूरा होगा?

    लाखों अर्धसैनिक बल सेना की तरह समान पेंशन और वेतन की मांग को लेकर सड़क पर हैं, यूपी के 8000 बीटीसी शिक्षक नियुक्ति पत्र मिलने के इंतज़ार में धरने पर बैठे हैं, इन्हीं के साथ 4000 उर्दू शिक्षक नियुक्ति पत्र के इंतज़ार में सड़क पर हैं, पौने दो लाख शिक्षा मित्र समय से वेतन मिलने और 10,000 से 40,000 होने की मांग को लेकर दर दर भटक रहे हैं.

  • वर्ल्ड रैंकिंग 2018 में भारतीय यूनिवर्सिटीज का प्रदर्शन हुआ कमजोर

    वर्ल्ड रैंकिंग 2018 में भारतीय यूनिवर्सिटीज का प्रदर्शन हुआ कमजोर

    चीन ही एकमात्र ब्रिक्स राष्ट्र है, जो नाटकीय रूप से उन्नत हुआ है, यह अब तालिका में चौथा सबसे अधिक प्रतिनिधित्व वाला राष्ट्र है, टॉप 200 में इसके 60 विश्वविद्यालय शामिल हैं.यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड ने लगातर दूसरे साल में अपना पहला स्थान बनाए रखा है, जबकि कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय चौथे स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंच गया है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : क्या रैंकिंग सही तस्वीर पेश करती है किसी कॉलेज या शिक्षा व्यवस्था की?

    प्राइम टाइम इंट्रो : क्या रैंकिंग सही तस्वीर पेश करती है किसी कॉलेज या शिक्षा व्यवस्था की?

    दावे के साथ तो नहीं कह सकता मगर इंडिया टुडे, आउटलुक और वीक जैसी अंग्रेजी की साप्ताहिक पत्रिकाओं ने सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों की रेटिंग शुरू की. पहली बार इंडिया टुडे ने कॉलेजों की रैंकिंग कब की थी इसका तो ध्यान नहीं मगर दस बारह साल से यह पत्रिका रेटिंग तो कर ही रही है. हर साल बेस्ट कॉलेज का विशेषांक आता था. नंबर वन कॉलेज की तस्वीर होती थी. खुशहाल छात्रों की तस्वीर होती थी, जिन्हें देखकर लगता था कि भारत में भी नंबर वन कॉलेज हैं. हम सबने इन विशेषांकों को देखा ही होगा. इसके बाद कई एजेंसियां और न्यूज़ चैनल नंबर वन, नंबर टू बनाने लगे जिनमें प्राइवेट कॉलेजों का बोलबाला होने लगा. फिर भी कुछ कॉलेज तमाम तरह की सूचियों में स्थायी भाव से बने रहे. ऐसा नहीं है कि उस वक्त सरकार कॉलेजों की ग्रेडिंग नहीं कर रही थी.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : वन रैंक, वन पेंशन पर क्यों आ रही है मुश्किल?

    प्राइम टाइम इंट्रो : वन रैंक, वन पेंशन पर क्यों आ रही है मुश्किल?

    पूर्व सैनिक रामकिशन गेरेवाल ने मंगलवार को दिल्ली में ज़हर खाकर आत्महत्या कर ली. हरियाणा के भिवानी ज़िले के बामला गांव के रहने वाले रामकिशन ने ज़हर खाने से पहले किसी को नहीं बताया. रामकिशन ने ज़हर खाने के बाद अपने बेटे को भी फोन किया कि मैंने ज़हर खा ली है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : कैसे सुधरेगी भारत की कारोबारी रैंकिंग?

    प्राइम टाइम इंट्रो : कैसे सुधरेगी भारत की कारोबारी रैंकिंग?

    विश्व बैंक 2004 से ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस के आधार पर रैकिंग कर रहा है, लेकिन भारतीय राजनीति में इसे प्रचलित किया है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने. पहले गुजरात को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का मुखड़ा बनाया, फिर इसे अपने गर्वनेंस की विचारधारा.

  • दुनिया के तीसरे सबसे रईस शख्स वॉरेन बफे से सीखें निवेश और कामयाबी के गुर

    दुनिया के तीसरे सबसे रईस शख्स वॉरेन बफे से सीखें निवेश और कामयाबी के गुर

    फोर्ब्स की बिलियनेअर्स रियल टाइम रैंकिंग के मुताबिक, वॉरेन बफे आज की तारीख में दुनिया के तीसरे सबसे अमीर शख्स हैं. शेयर बाजार, निवेश, सफलता और पैसा बनाने के इनके गुर बेहद चर्चित रहते हैं. आइए आज जानें वॉरेन बफे के कुछ ऐसे टिप्स और वक्तव्य जो 'अमीर' बनने की दिशा में बेहद काम के साबित होते पाए गए हैं.

  • वन रैंक वन पेंशन : 35 साल से जारी है लड़ाई

    वन रैंक वन पेंशन : 35 साल से जारी है लड़ाई

    वन रैंक वन पेशन के मुद्दे पर ऐसा कुछ भी नहीं बचा है जो पिछले 35 सालों में नहीं कहा गया हो। कई कमेटियों की रिपोर्ट है और 2009 में सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि इसे लागू करना चाहिए, बल्कि फरवरी 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसे बिना देरी के लागू करना चाहिए।