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'Unemployement' - 128 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • रवीश कुमार का BLOG: पकौड़े के पीछे नौकरी के सवाल से भागती मोदी सरकार

    रवीश कुमार का BLOG: पकौड़े के पीछे नौकरी के सवाल से भागती मोदी सरकार

    अगस्त 2018 से जनवरी 2019 आ गया लेकिन इस रिपोर्ट का कुछ पता नहीं है. 25 दिसंबर को बिजनेस स्टैंडर्ड में वित्त मंत्री अरुण जेटली का इंटरव्यू छपता है. इस इंटरव्यू में सवाल पूछा जाता है कि क्या आप मौजूदा 7.5 प्रति वर्ष की विकास दर से संतुष्ट हैं, इसी से जुड़ा सवाल है नौकरियों को लेकर. जवाब में वित्त मंत्री कहते हैं, 'मैं मानता हूं कि जब अर्थव्यवस्था लगातार विस्तार कर रही हो, यहां तक कि 7.5 प्रतिशत की दर से, नौकरियों में वृद्धि तो होनी ही है.

  • पीएम मोदी नौकरियां देने का श्रेय ले रहे हैं तो देश में बेरोजगारी बढ़ने की भी जिम्मेदारी लें : शिवसेना

    पीएम मोदी नौकरियां देने का श्रेय ले रहे हैं तो देश में बेरोजगारी बढ़ने की भी जिम्मेदारी लें : शिवसेना

    देश में बेरोजगारी बढ़ने पर शिवसेना ने पीएम नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों लिया है. शिवसेना ने सोमवार को पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर वह रोजगार सृजन का श्रेय लेना चाहते हैं तो उन्हें देश में घटी नौकरियों की भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए.

  • 'भारत में साल 2018 में 1 करोड़ से ज्यादा नौकरियां हुईं खत्म', कांग्रेस ने इस रिपोर्ट के हवाले से BJP को घेरा

    'भारत में साल 2018 में 1 करोड़ से ज्यादा नौकरियां हुईं खत्म', कांग्रेस ने इस रिपोर्ट के हवाले से BJP को घेरा

    सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) की इस रिपोर्ट को लेकर कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष तिवारी ने मोदी सरकार पर जमकर हमला किया और कहा कि इस सरकार ने सत्ता में आने से पहले वादा किया था कि हर साल दो करोड़ रोजगार पैदा करेंगे, लेकिन यह सरकार पूरी तरह से नाकाम साबित हुई है.

  • रेल भर्ती के हों या यूपी पुलिस भर्ती के, कब तक होगा ऐसा

    रेल भर्ती के हों या यूपी पुलिस भर्ती के, कब तक होगा ऐसा

    सरकारी नौकरी से संबंधित समस्याओं को देखकर लगता है कि एक समस्या खुद नौजवान भी हैं. अलग-अलग भर्ती परीक्षा के नौजवान अपनी परीक्षा के आंदोलन में तो जाते हैं मगर दूसरी परीक्षा के पीड़ित नौजवानों से कोई सहानुभूति नहीं रखते.

  • क्या आपको नौकरी मिल रही है?

    क्या आपको नौकरी मिल रही है?

    मुख्यमंत्री कमलनाथ के बयान के बहाने आपने देखा कि भारत के कई राज्यों में उद्योगों में 70 से 90 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोज़गार देने की नीति है. मगर हमारे पास यह देखने का आंकड़ा नहीं है कि इस नीति से स्थानीय लोगों को कितना रोजगार मिला और वह रोज़गार उस राज़्य के कुल बेरोज़गारों का कितना प्रतिशत था.

  • प्रधानमंत्री जी मोबाइल कंपनियां 120 हो गई हैं तो रोज़गार कितनों को मिला...

    प्रधानमंत्री जी मोबाइल कंपनियां 120 हो गई हैं तो रोज़गार कितनों को मिला...

    प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया है कि 2014 के पहले मोबाइल बनाने वाली सिर्फ 2 कंपनियां थीं. आज मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों की संख्या 120 हो गई है. अगर 120 कंपनियां हो गई हैं तो फिर निर्यात होने लगा होगा या फिर आयात घट गया होगा. सब कुछ नहीं तो बहुत कुछ भारत में बनने लगा होगा जिसके कारण रोज़गार पैदा हुआ होगा.

  • 35 लाख लोगों की नौकरी गई और विज्ञापन पर ख़र्च हुआ 5000 करोड़

    35 लाख लोगों की नौकरी गई और विज्ञापन पर ख़र्च हुआ 5000 करोड़

    उन 35 लाख लोगों को प्रधानमंत्री सपने में आते होंगे, जिनके एक सनक भरे फैसले के कारण नौकरियां चली गईं. नोटबंदी से दर-बदर हुए इन लोगों तक सपनों की सप्लाई कम न हो इसलिए विज्ञापनों में हज़ारों करोड़ फूंके जा रहे हैं.

  • रोजगार के मुद्दे पर हमारी सरकारें कितनी गंभीर?

    रोजगार के मुद्दे पर हमारी सरकारें कितनी गंभीर?

    नौजवानों का सबसे बड़ा इम्तिहान यह है कि वे नौकरी को लेकर किए जा रहे किसी भी वादे और बहस को लेकर भावुक न हों. न तो कांग्रेस की तरफ से भावुक हों न बीजेपी की तरफ से. आपने नौकरी सीरीज़ के दौरान देखा है कि किस तरह देश के कई राज्यों में चयन आयोगों ने नौजवानों को अपमानित और प्रताड़ित किया है.

  • बिहार से लेकर यूपी की परीक्षाओं को लेकर क्यों परेशान हैं छात्र

    बिहार से लेकर यूपी की परीक्षाओं को लेकर क्यों परेशान हैं छात्र

    ऐसा लगता है कि सरकारें ज़िद पर अड़ी हैं कि हम इन चयन आयोगों में कोई बदलाव नहीं करेंगे. हर परीक्षा विवादों से गुज़र रही है. प्रश्न पत्र लीक होने से लेकर रिश्वत लेकर नौकरी देने के आरोपों और किस्सों ने नौजवानों की रातों की नींद उड़ा दी. सिस्टम का अपने प्रति इस तरह अविश्वास पैदा करते जाना उसके लिए सही नहीं होगा.

  • सरकारी चयन आयोग इतने लचर क्यों?

    सरकारी चयन आयोग इतने लचर क्यों?

    प्राइम टाइम में नौकरी सीरीज़ में हमने आपको कई राज्यों से दिखाया था कि हर राज्य में सरकारी चयन आयोग किस तरह से खिलवाड़ कर रहे हैं. परीक्षा का विज्ञापन निकलता है, मोटी फीस ली जाती है लेकिन परीक्षा कभी अंजाम पर नहीं पहुंचती है. पहुंच भी जाती है तो तीन-तीन चार-चार महीने नौजवान नियुक्ति पत्र के इंतज़ार में गुज़ार देता है.

  • EPFO के आंकड़ों को समझने का तरीका और ईज़ ऑफ डूइंग नथिंग का ढिंढोरा

    EPFO के आंकड़ों को समझने का तरीका और ईज़ ऑफ डूइंग नथिंग का ढिंढोरा

    Huffington post के अक्षय देशमाने ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की दावेदारी को लेकर एक लंबी स्टोरी की है. अक्षय ने लिखा है कि इस रपट के लिए उन्होंने बैठकों के मिनट्स के सैकड़ों पन्ने देख लिए हैं. कई प्रमुख लोगों से बात की है और सरकारी पत्रचार को भी देखा है तब जाकर यह रिपोर्ट की है. रिपोर्ट 20 नवंबर को छपी है.

  • राजस्थान: बेरोजगारी से परेशान 4 दोस्तों ने ट्रेन के आगे कूदकर की खुदकुशी

    राजस्थान: बेरोजगारी से परेशान 4 दोस्तों ने ट्रेन के आगे कूदकर की खुदकुशी

    राजस्थान (Rajasthan) के अलवर (Alwar) में बेरोजगारी (Unemployment) से परेशान चार युवा दोस्तों ने एक साथ ट्रेन के आगे कूदकर खुदकुशी कर ली. चुनावी माहौल में इस मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है. कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा व केंद्र की राजग सरकार को आड़े हाथ लिया है.

  • चुनावों में बेरोजगारी का मुद्दा कहां उठ रहा है?

    चुनावों में बेरोजगारी का मुद्दा कहां उठ रहा है?

    नौकरी की समस्या गंभीर होती जा रही है. भले ही बेरोज़गारी के बाद भी किसी के चुनाव जीतने या हारने पर असर न पड़े. मैं आपको अपना अनुभव बताता हूं. हर दिन नौजवान नौकरी को लेकर मैसेज करते हैं. उनके लिए कोई दूसरी प्राथमिकता नहीं है.

  • #MeToo कैंपेन पर राज ठाकरे का बड़ा बयान, बोले- यह पेट्रोल-डीजल के दाम, बेरोजगारी से ध्यान भटकाने के लिए है

    #MeToo कैंपेन पर राज ठाकरे का बड़ा बयान, बोले- यह पेट्रोल-डीजल के दाम, बेरोजगारी से ध्यान भटकाने के लिए है

    भारत में चल रहे #MeToo कैंपेन की जद में कई ऐसे बड़े-बड़े नाम सामने आए हैं, जिन पर यौन शोषण के आरोप लगे हैं और इस कैंपेन की वजह से उनके चेहरे पर से नकाब हटा है. मगर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के मुखिया राज ठाकरे ने मीटू अभियान जिस वक्त उठाया गया है, उसे लेकर ठाकरे ने कई सवाल खड़े किये हैं. राज ठाकरे को लगता है कि मीटू कैंपेन गंभीर मुद्दों से ध्यान भटकाने वाला है. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने बुधवार को कहा कि ऐसा लगता है कि मीटू की कैंपेन पेट्रोल-डीजल की कीमतों, बेरोजगारी और रुपये की गिरती कीमतों से ध्यान भटकाने के लिए किया गया है. 

  • देश में बेरोजगारी दर 20 वर्षों में सबसे ज्यादा, उत्तर प्रदेश-बिहार जैसे राज्यों पर सर्वाधिक मार

    देश में बेरोजगारी दर 20 वर्षों में सबसे ज्यादा, उत्तर प्रदेश-बिहार जैसे राज्यों पर सर्वाधिक मार

    केंद्र सरकार तमाम सेक्टरों में रोजगार सृजन के दावे कर रही है, लेकिन इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में बेरोजदारी दर 20 वर्षों में सबसे अधिक हो गई है. चौंकाने वाली बात यह है कि युवाओं में बेरोजगारी की दर 16 फीसद तक पहुंच गई है. बेरोजगारी दर बढ़ने के पीछे दो वजहें सामने आई हैं.

  • देश में युवाओं को सबसे ज्यादा टेंशन है इन दो चीजों की, फ्यूचर बना खतरा

    देश में युवाओं को सबसे ज्यादा टेंशन है इन दो चीजों की, फ्यूचर बना खतरा

    86 प्रतिशत नौजवान भारत के भविष्य को लेकर आशावादी हैं. उनमें से अधिकतर का मानना है कि राजनीतिक दलों के नेता उनका ख्याल रखते हैं.

  • नौकरियों से परेशान युवा अब मुझे मैसेज भेजना बंद कर दें, प्रधानमंत्री को भेजें

    नौकरियों से परेशान युवा अब मुझे मैसेज भेजना बंद कर दें, प्रधानमंत्री को भेजें

    EPFO ने फिर से नौकरियों को लेकर डेटा जारी किया है. सितंबर 2017 से जुलाई 2018 के बीच नौकरियों के डेटा को EPFO ने कई बार समीक्षा की है. इस बार इनका कहना है कि 11 महीने में 62 लाख लोग पे-रोल से जुड़े हैं. इनमें से 15 लाख वो हैं जिन्होंने EPFO को छोड़ा और फिर कुछ समय के बाद अपना खाता खुलवा लिया. यह दो स्थिति में होता है. या तो आप कोई नई संस्था से जुड़ते हैं या बिजनेस करने लगते हैं जिसे छोड़ कर वापस फिर से नौकरी में आ जाते हैं.

  • सरकारी नौकरियों में ज्वाइनिंग में देरी क्यों?

    सरकारी नौकरियों में ज्वाइनिंग में देरी क्यों?

    मुझे पता है कि आज भी नेताओं ने बड़े-बड़े बयान दिए हैं. बहस के गरमा गरम मुद्दे दिए हैं. लेकिन मैं आज आपको सुमित के बारे में बताना चाहता हूं. इसलिए बता रहा हूं ताकि आप यह समझ सकें कि इस मुद्दे को क्यों देश की प्राथमिकता सूची में पहले नंबर पर लाना ज़रूरी है. सुमित उस भारत के नौजवानों का प्रतिनिधित्व करता है जिसकी संख्या करोड़ों में है. जिन्हें सियासत और सिस्टम सिर्फ उल्लू बनाती है. जिनके लिए पॉलिटिक्स में आए दिन भावुक मुद्दों को गढ़ा जाता है, ताकि ऐसे नौजवानों को बहकाया जा सके. क्योंकि सबको पता है कि जिस दिन सुमित जैसे नौजवानों को इन भावुक मुद्दों का खेल समझ आ गया उस दिन सियासी नेताओं का खेल खत्म हो जाएगा. मगर चिंता मत कीजिए. इस लड़ाई में हमेशा सियासी नेता ही जीतेंगे. उन्हें आप बदल सकते हैं, हरा नहीं सकते हैं. इसलिए सुमित जैसे नौजवानों को हार जाना पड़ता है.

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