NDTV Khabar

Unemployment


'Unemployment' - 99 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • वित्त मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार बोले : क्या ट्रक ड्राइवरों की नौकरियों को रोजगार नहीं माना जाएगा ?

    वित्त मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार बोले : क्या ट्रक ड्राइवरों की नौकरियों को रोजगार नहीं माना जाएगा ?

    संजीव सान्याल ने कहा कि आंकड़ों की कमी के कारण देश में बेरोजगारी बढ़ने की बात कही जा रही है. बोले कि इस साल ट्रकों की बिक्री में भारी वृद्धि हुई थी. अब उन ट्रकों को कोई न कोई चला रहा होगा. क्या यह रोजगार नहीं है.

  • सरकारी नौकरियों की भर्ती में सालों क्यों लगते हैं?

    सरकारी नौकरियों की भर्ती में सालों क्यों लगते हैं?

    हर दिन सोचता हूं कि अब नौकरी सीरीज़ बंद कर दें. क्योंकि देश भर में चयन आयोग किसी गिरोह की तरह काम कर रहे हैं. उन्होंने नौजवानों को इस कदर लूटा है कि आफ चाह कर भी सबकी कहानी नहीं दिखा सकते हैं. नौजवानों से फॉर्म भरने कई करोड़ लिए जाते हैं, मगर परीक्षा का पता ही नहीं चलता है. देश में कोई भी खबर होती है, ये नौजवान दिन रात अपनी नौकरी को लेकर ही मैसेज करते रहते हैं. मेरी नौकरी, मेरी परीक्षा का कब दिखाएंगे. परीक्षा देकर नौजवान एक साल से लेकर तीन साल तक इंतज़ार कर रहे हैं तो कई बार फॉर्म भरने के बाद चार तक परीक्षा का पता ही नहीं चलता है. यह सीरीज़ इसलिए बंद करना ज़रूरी है क्योंकि समस्या विकराल हो चुकी है. जब भी बंद करने की सोचता हूं किसी नौजवान की कहानी सुनकर कांप जाता हूं. तब लगता है कि आज एक और बार के लिए दिखा देते हैं और फिर सीरीज़ बंद नहीं कर पाता. 

  • देश में रोज़गार के दावों पर गंभीर सवाल

    देश में रोज़गार के दावों पर गंभीर सवाल

    सरकार ईपीएफओ यानी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के आंकड़ों को इस तरह पेश करती है कि रोज़गार बढ़ा है. 20 जुलाई को लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने रोज़गार के कई आंकड़े दिए जिसमें ईपीएफओ का भी आंकड़ा था. अब प्रधानमंत्री ने लोकसभा में तो बोल दिया कि संगठित क्षेत्र में 45 लाख नौकरियां बनी हैं, लेकिन जब ईपीएफओ ने समीक्षा की तो इसमें 6 लाख नौकरियां कम हो गईं.

  • रामविलास पासवान ऊंची जाति के युवाओं को दिखा रहे हैं आरक्षण का सब्जबाग : शिवानंद तिवारी

    रामविलास पासवान ऊंची जाति के युवाओं को दिखा रहे हैं आरक्षण का सब्जबाग : शिवानंद तिवारी

    राष्‍ट्रीय जनता दल के उपाध्‍यक्ष और बिहार के वरिष्‍ठ नेता शि‍वानंद तिवारी ने कहा है कि रामविलास पासवान तथा सत्ताधारी गठबंधन के अन्य नेता ऊंची जाति के नौजवानों को फुसलाने के लिए उन्हें सरकारी नौकरियों में आरक्षण का सब्ज़बाग दिखा रहे हैं. सबको मालूम है कि आरक्षण का संवैधानिक आधार आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ापन है.

  • करते रहें हिन्दू मुस्लिम डिबेट, SAIL, IOC, BSNL में 55000 नौकरियां घटीं

    करते रहें हिन्दू मुस्लिम डिबेट, SAIL, IOC, BSNL में 55000 नौकरियां घटीं

    आज की राजनीति नौजवानों आपको चुपके से एक नारा थमा रही है. तुम हमें वोट दो, हम तुम्हें हिन्दू मुस्लिम डिबेट देंगे. इस डिबेट में तुम्हारे जीवन के दस-बीस साल टीवी के सामने और चाय की दुकानों पर आराम से कट जाएंगे.

  • मॉब लिंचिंग पर बोले PM मोदी - ऐसी घटना दुर्भाग्यपूर्ण, हर किसी को राजनीति से ऊपर उठना चाहिए

    मॉब लिंचिंग पर बोले PM मोदी - ऐसी घटना दुर्भाग्यपूर्ण, हर किसी को राजनीति से ऊपर उठना चाहिए

    महिलाओं के खिलाफ अपराध की घटनाओं और मॉब लिंचिंग (MOb lynching) की घटनाओं पर पीएम मोदी ने कहा, इस तरह की एक भी घटना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है. हमारे समाज में शांति और एकता सुनिश्चित करने के लिए हर किसी को राजनीति से ऊपर उठना चाहिए. उन्होंने कहा कि मेरी पार्टी और मैंने कई मौकों पर ऐसी घटनाओं और ऐसी मानसिकता वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात साफ तौर पर कही है.

  • बेरोजगारी दर 2015-16 में 3.7 फीसदी रही : संतोष गंगवार

    बेरोजगारी दर 2015-16 में 3.7 फीसदी रही : संतोष गंगवार

    केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के श्रम ब्यूरो द्वारा रोजगार-बेरोजगारी पर कराए गए श्रम बल सर्वेक्षण के निष्कर्षों के अनुसार, देश में सामान्य स्थिति के आधार पर 15 साल एवं उससे ज्यादा उम्र के लोगों के लिए अनुमानित बेरोजगारी दर वर्ष 2011-12, 2012-13, 2013-14 और 2015-16 में क्रमश: 3.3, 4.0, 3.4 और 3.7 प्रतिशत आंकी गई.

  • बाबा रामदेव का बड़ा बयान- पूरे देश में बेरोजगारी एक बड़ा सवाल, यह भारत माता के माथे पर कलंक

    बाबा रामदेव का बड़ा बयान- पूरे देश में बेरोजगारी एक बड़ा सवाल, यह भारत माता के माथे पर कलंक

    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बाबा रामदेव ने एक बड़ा बयान दिया है. चुनावी राज्य मध्य प्रदेश में बाबा रामदेव ने कहा कि पूरे देश में बेरोजगारी एक बड़ा सवाल बन गया है. एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने आए बाबा रामदेव ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर उस दिशा में जितने काम करने चाहिए, उतनी नहीं कर पा रही हैं.  बता दें कि इस साल के अंत में मध्य प्रदेश में चुनाव होने हैं. 

  • मोदी सरकार में कितने लोगों को मिला रोजगार, दो महीनों में हो जाएगा साफ

    मोदी सरकार में कितने लोगों को मिला रोजगार, दो महीनों में हो जाएगा साफ

    देश में रोजगार सृजन के प्रति सरकार के गंभीर होने का दावा करते हुए श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने राज्यसभा में कहा कि 2016 से बेरोजगारी के संबंध में रिपोर्ट अगले दो महीने में सामने आ जाएगी. गंगवार ने उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों के जवाब में यह जानकारी दी. उन्होंने इस बात से इनकार कि देश में रोजगार के अवसरों में कमी आयी है. उन्होंने कहा कि वैश्विक आंकड़े भी दिखाते हैं कि भारत में बेरोजगारी की दर कम है.

  • मॉनसून सत्र: संसद में सरकार ने कहा, दुनिया में सबसे कम बेरोजगारी भारत में

    मॉनसून सत्र: संसद में सरकार ने कहा, दुनिया में सबसे कम बेरोजगारी भारत में

    आनंद शर्मा ने पूछा कि नोटबंदी के बाद कितने एमएसएमई बंद हुए और उसकी वजह से कितने बेरोज़गार हुए? इस पर मंत्री संतोष गंगवार ने कहा कि 2 महीने में डेटा आ जाएगा कि नवम्बर 2016 के बाद एमएसएमई सेक्टर में रोजगार पर कितना असर पड़ा है. 

  • मुद्रा लोन से 7 करोड़ स्वरोज़गार पैदा हुआ, अमित शाह को ये डेटा कहां से मिला मोदी जी...

    मुद्रा लोन से 7 करोड़ स्वरोज़गार पैदा हुआ, अमित शाह को ये डेटा कहां से मिला मोदी जी...

    यह न तंज है और न व्यंग्य है. न ही स्लोगन बाज़ी के लिए बनाया गया सियासी व्यंजन है. रोज़गार के डेटा को लेकर काम करने वाले बहुत पहले से एक ठोस सिस्टम की मांग करते रहे हैं जहां रोज़गार से संबंधित डेटा का संग्रह होता रहा हो. लेकिन ऐसा नहीं है कि रोज़गार का कोई डेटा ही नहीं है.

  • नौकरी की जंग लड़ते जवान-नौजवान, सरकार से मिला भरोसा कब पूरा होगा?

    नौकरी की जंग लड़ते जवान-नौजवान, सरकार से मिला भरोसा कब पूरा होगा?

    लाखों अर्धसैनिक बल सेना की तरह समान पेंशन और वेतन की मांग को लेकर सड़क पर हैं, यूपी के 8000 बीटीसी शिक्षक नियुक्ति पत्र मिलने के इंतज़ार में धरने पर बैठे हैं, इन्हीं के साथ 4000 उर्दू शिक्षक नियुक्ति पत्र के इंतज़ार में सड़क पर हैं, पौने दो लाख शिक्षा मित्र समय से वेतन मिलने और 10,000 से 40,000 होने की मांग को लेकर दर दर भटक रहे हैं.

  • सरकार दिखा रही है अदृश्य रोज़गार के अप्रत्यक्ष आंकड़े...

    सरकार दिखा रही है अदृश्य रोज़गार के अप्रत्यक्ष आंकड़े...

    अपनी केंद्र सरकार बेरोज़गारी के मोर्चे पर बुरी तरह फंसी है. अब तक तो यह कहकर काम चल जाया करता था कि रोज़गार पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब सरकार के कार्यकाल का लगभग सारा समय ही गुज़र गया है, सो, अचानक ये दावे किए जाने लगे हैं कि सरकार ने कितने करोड़ लोगों को रोज़गार दे दिया.

  • बेरोजगारी की कमी कैसे पैदा कर सकता है केंद्र?: पीएम मोदी ने राज्यों के आंकड़ों का दिया हवाला

    बेरोजगारी की कमी कैसे पैदा कर सकता है केंद्र?: पीएम मोदी ने राज्यों के आंकड़ों का दिया हवाला

    रोजगार के सवाल पर विपक्ष की आलोचना को सिरे से खारिज करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बारे में राज्य सरकारों के आंकड़ों का हवाला दिया और सवाल किया कि अगर राज्यों में अच्छी संख्या में रोजगार सृजित हो रहे हैं तब केंद्र कैसे बेरोजगारी की स्थिति पैदा करेगा. प्रधानमंत्री ने स्वराज मैगजीन को दिए साक्षात्कार में कहा कि नौकरियों के मुद्दे पर हमारे ऊपर अंगुली उठाने के लिए वह विपक्ष को दोष नहीं देते, मगर यह बताना जरूरी है कि नौकरियों का सटीक आंकड़ा नहीं होना एक कारण है. 

  • पीएम मोदी ने कहा, नौकरियों की कमी नहीं, बस वा‍स्‍तविक आंकड़े नहीं हैं

    पीएम मोदी ने कहा, नौकरियों की कमी नहीं, बस वा‍स्‍तविक आंकड़े नहीं हैं

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि विपक्षी नौकरियों के मामले में 'अपनी इच्छानुसार' एक तस्वीर बना रहे हैं, क्योंकि हमारे पास नौकरियों पर पर्याप्त आंकड़े मौजूद नहीं हैं.

  • सरकार को नौकरों की कितनी चिंता?

    सरकार को नौकरों की कितनी चिंता?

    देहरादून का एक वीडियो वायरल हो रहा है. 28 जून के इस वीडियो में दिख रहा है उसमें देखने के लिए कई बातें हैं. एक अध्यापिका हैं जो सिस्टम से झुंझलाई हुई हैं, उनकी कोई नहीं सुन रहा है, सामने एक मुख्यमंत्री हैं जो बैठे तो हैं सुनने के लिए मगर सुनते ही झुंझला जा रहे हैं, एक मीडिया है जो कभी आम लोगों की समस्या से वास्ता नहीं रखता मगर एक मुख्यमंत्री ने बेअदबी की है तो उसमें चटखारे ले रहा है.

  • शिक्षा व्यवस्था को लेकर कितने गंभीर हैं हम?  

    शिक्षा व्यवस्था को लेकर कितने गंभीर हैं हम?  

    कई बार हमें लगता है कि किसी विश्वविद्यालय की समस्या इसलिए है क्योंकि वहां स्वायत्तता नहीं है इसलिए उसे स्वायत्तता दे दी जाए. जब भी उच्च शिक्षा की समस्याओं पर बात होती है, ऑटोनमी यानी स्वायत्तता को एंटी बायेटिक टैबलेट के रूप में पेश किया जाता है. लेकिन आप किसी भी विश्वविद्यालय को देखिए, चाहे वो प्राइवेट हो या पब्लिक यानी सरकारी क्या वहां सरकार या राजनीतिक प्रभाव से स्वायत्त होने की स्वतंत्रता है. सरकार ही क्यों हस्तक्षेप करती है, वो हस्तक्षेप करना बंद कर दे. कभी आपने सुना है कि वाइस चांसलर की नियुक्ति की प्रक्रिया बेहतर की जाएगी, उनका चयन राजनीतिक तौर पर नहीं होगा.

  • नौकरी के लिए इतना संघर्ष क्यों?

    नौकरी के लिए इतना संघर्ष क्यों?

    कई बार जवानों और किसानों की हालत देखकर लगता है कि हम सब ज़िद पर अड़े हैं कि इनकी तरफ देखना ही नहीं है. समस्या इतनी बड़ी है कि समाधान के नाम पर पुड़िया पेश कर दी जाती है जो मीडिया में हेडलाइन बनकर गायब हो जाती है. अनाज और आदमी दोनों छितराए हुए हैं. न तो दाम मिल रहा है न काम मिल रहा है. सत्ता पक्ष और विपक्ष के लिए ये मुद्दे एक दूसरे की निंदा करने भर के लिए हैं मगर कोई भी ठोस प्रस्ताव जनता के बीच नहीं रखता है कि वाकई क्या करने वाला है, जो कर रहा है वो क्यों चूक जा रहा है. कई बार लगता है कि हमारे राजनेता, हमारे अर्थशास्त्री, सिस्टम में बैठे लोगों ने ज़िद कर ली है कि इन बुनियादी सवालों पर बात नहीं करना है, मीडिया को हर रात कोई न कोई थीम मिल जाता है, सब कुछ इसी थीम की तलाश के लिए हो रहा है. इसके बाद भी भारत के भीतर से तस्वीरें उथला कर सतह पर आ जा रही हैं.

Advertisement