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Virag gupta


'Virag gupta' - 127 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • CBI और सुप्रीम कोर्ट के दंगल से संवैधानिक संकट...

    CBI और सुप्रीम कोर्ट के दंगल से संवैधानिक संकट...

    भ्रष्टाचार के विरुद्ध अन्ना आंदोलन में लोकपाल को हर मर्ज़ की दवा बताया गया. 'सुशासन' और 'अच्छे दिन' के नाम पर आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दिल्ली की सत्ता हासिल कर ली, पर लोकपाल का कोई अता-पता नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस और उसके बाद CBI में आधी रात को तख्तापलट की घटना के बाद संस्थाओं में आंतरिक संघर्ष बढ़ता जा रहा है. इन घटनाओं से भारत के लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्था पर अनेक सवाल खड़े हो गए हैं.

  • राजीव गांधी को 'भारत रत्न' - सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन हो

    राजीव गांधी को 'भारत रत्न' - सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन हो

    जनता पार्टी ने पद्म सम्मानों को खत्म किया, तो अब BJP पहल करे : पद्म सम्मानों की शुरुआत नेहरू सरकार ने 1955 में की थी, जिस पर सदैव विवाद होते रहे हैं. आचार्य जेबी कृपलानी ने पद्म सम्मानों को खत्म करने के लिए 1969 में लोकसभा में बिल पेश किया, जिसे इंदिरा सरकार ने नहीं स्वीकारा. कृपलानी के अनुसार संविधान के अनुच्छेद 18 से अंग्रेज़ी शासनकाल के दौर के सम्मान ख़त्म हो गए थे, जिन्हें नेहरू ने पद्म सम्मान के तौर पर पिछली खिड़की से लागू कर दिया.

  • फेसबुक, व्हॉट्सऐप, गूगल और ट्विटर से भारत में चुनावी सफलता

    फेसबुक, व्हॉट्सऐप, गूगल और ट्विटर से भारत में चुनावी सफलता

    कांग्रेस के शशि थरूर ने भारत में सोशल मीडिया के राजनीतिक इस्तेमाल की शुरुआत की थी, जिस पर बाद में BJP ने आधिपत्य जमा लिया. नवीनतम रिपोर्टों के मुताबिक पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में व्हॉट्सऐप, फेसबुक, गूगल और ट्विटर का जमकर इस्तेमाल हुआ, जिसमें कांग्रेस ने अब फिर बढ़त हासिल कर ली है. राज्यों में चुनाव से पहले सेन्टर फॉर एकाउन्टेबिलिटी एंड सिस्टेमिक चेंज (CASC) संस्था ने विस्तृत सुझाव देकर चुनाव आयोग से 2013 के नियमों का पालन सुनिश्चित कराने की अपील की थी. इसके जवाब में चुनाव आयोग ने फेसबुक और ट्विटर को पत्र लिखकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली. केंद्रीय कानून और आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी सोशल मीडिया कंपनियों को भारतीय चुनावों में हस्तक्षेप नहीं करने की अनेक चेतावनी दी हैं, परंतु इन सभी चेतावनियों से बेख़बर सोशल मीडिया कंपनियों का भारतीय चुनावों में दखल बढ़ता ही जा रहा है, जो अगले आम चुनाव में संकट का सबब बन सकता है.

  • यदि CBI चीफ घूसखोर हों, तो जज क्या करें...?

    यदि CBI चीफ घूसखोर हों, तो जज क्या करें...?

    इलाहाबाद हाईकोर्ट के घूसखोर जज को नहीं हटाया गया : न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम जजों ने जनवरी, 2018 में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अनेक मामलों पर सवाल उठाए गए थे, जिनमें मेडिकल काउंसिल में भ्रष्टाचार का मामला प्रमुख था. मेडिकल कॉलेजों को मान्यता दिए जाने में अनियमितताओं के मामलों में जजों को घूस दिए जाने के अनेक प्रमाण मिले थे.

  • CBI का गैरकानूनी सिस्टम, सुप्रीम कोर्ट से कैसे सुधरेगा

    CBI का गैरकानूनी सिस्टम, सुप्रीम कोर्ट से कैसे सुधरेगा

    CBI चीफ मामले की सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट ने अगले हफ्ते के लिए स्थगित कर दिया है. राफेल मामले की विशेष जांच की याचिका पर भी सुनवाई खत्म होने के बाद, फैसला आना बाकी है. आरोपों की जांच करने वाली CBI के संदेह के दायरे में आने के बाद, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों ने भी आंखे तरेरना शुरू कर दिया है. अफसरों के परस्पर विवाद के भयानक दौर में, क्या CBI के कानूनी सिस्टम को ठीक करने की पहल होगी...?

  • CBI में तख्तापलट - इन सवालों का जवाब कब मिलेगा...?

    CBI में तख्तापलट - इन सवालों का जवाब कब मिलेगा...?

    CBI डायरेक्टर के दो साल के कार्यकाल को वैधानिक सुरक्षा होने की वजह से उन्हें जबरन छुट्टी पर भेजना गैरकानूनी है. संवैधानिक पदों पर बैठे अन्य लोग यदि सरकार के लिए तकलीफदेह हो जाएं, तो क्या राष्ट्रपति के माध्यम से उन्हें भी जबरन छुट्टी पर भेज दिया जाएगा...?

  • अमृतसर रेल हादसा : राम भरोसे सिस्टम में मानव वध का अपराधी कौन?

    अमृतसर रेल हादसा : राम भरोसे सिस्टम में मानव वध का अपराधी कौन?

    अमृतसर में रेल हादसे के बाद मुख्यमंत्री और केन्द्रीय रेल मंत्री विदेशी दौरों को रद्द करके भारी चिंता व्यक्त की है. विजयदशमी को रावण दहन के दिन हुई इन मौतों से यह फिर साबित हुआ कि राम भरोसे चल रहे देश में इन्सानों की जान की कोई कीमत नहीं है। देश में ट्रेन से कटकर मौत के सबसे बड़े हादसे के लिए किसकी जवाबदेही है और कौन है अपराधी?

  • #MeToo पीड़िताओं का नाम उजागर करने का अपराध - क्या करेगा कानून...?

    #MeToo पीड़िताओं का नाम उजागर करने का अपराध - क्या करेगा कानून...?

    मीडिया, बॉलीवुड और राजनीति की नामी शख्सियतों के विरुद्ध यौन उत्पीड़न के खुलासों के मामलों को कानूनी समाधान कैसे मिलेगा...? महिला आयोग ने रस्मी तौर पर कारवाई की है, लेकिन #MeToo से जुड़े मामलों में सोशल मीडिया के भारीभरकम अभियान के बावजूद पुलिस, अदालत और सरकार की चुप्पी निराशाजनक है.

  • आधार जरूरी नहीं, पर उसके बगैर कैसे होगा गुजारा?

    आधार जरूरी नहीं, पर उसके बगैर कैसे होगा गुजारा?

    केशवानंद भारती मामले में 13 जजों द्वारा 1973 में 700 पेज में दिया गया फैसला आज भी नजीर माना जाता है. सुप्रीम कोर्ट में 6 साल की मुकदमेबाजी के दौर में 26 जजों ने आधार मामले को सुना और अब 1448 पेज के अंतिम फैसले से उलझनें और बढ़ गई हैं.

  • समलैंगिकता के फैसले पर अनेक सवाल

    समलैंगिकता के फैसले पर अनेक सवाल

    सुप्रीम कोर्ट के प्रांगण में मीडिया द्वारा फोटोग्राफी निषेध है. इसके बावजूद समलैंगिकता पर फैसले के बाद पूरा परिसर इन्द्रधनुषीय रंग से सराबोर हो गया. दो वयस्‍क लोगों का निजी सम्बन्ध मानते हुए समलैंगिकता को सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक संरक्षण प्रदान किया परन्तु इस फैसले के लिए अपनाई गयी कानूनी प्रक्रिया पर अनेक सवाल खड़े हो गये हैं.

  • रेहड़ी के लिए लाइसेंस ज़रूरी पर, व्हॉट्सऐप के आगे सिस्टम फेल

    रेहड़ी के लिए लाइसेंस ज़रूरी पर, व्हॉट्सऐप के आगे सिस्टम फेल

    'डिजिटल इंडिया' में व्हॉट्सऐप कंपनी के 20 करोड़ यूज़र हैं, जो विश्व में सर्वाधिक हैं. जब डाटा को तेल सरीखा बहुमूल्य माना जाता हो, उस दौर में फ्री सर्विस देकर भी व्हॉट्सऐप 5.76 लाख करोड़ से ज़्यादा वैल्यू की कंपनी है. फ़ेक न्यूज़ को लेकर समाज, सरकार और सुप्रीम कोर्ट सभी चिन्तित हैं, लेकिन व्हॉट्सऐप के भारतीय कारोबार में फर्क क्यों नहीं आया.

  • स्मार्ट फोन में आधार-गूगल की गफलत या प्राइवेसी पर हमला

    स्मार्ट फोन में आधार-गूगल की गफलत या प्राइवेसी पर हमला

    स्मार्ट फोन मोबाइलों में आधार का टोल-फ्री नम्बर ऑटोमेटिक सेव होने से सोशल मीडिया में हड़कम्प मच गया है. आधार की नियामक संस्था यूआईडीएआई और गूगल की सफाई के बावजूद विवाद में नये मोड़ क्यों आ रहे हैं? मोबाइल में आधार का टोल फ्री नम्बर कैसे आया- गूगल के सर्च इंजन में लता मंगेशकर और प्रधानमंत्री मोदी के बारे में पहले भी गफलत हो चुकी है और अब एंड्रायड डेटा बेस पर यह विवाद सामने आया है.

  • भुखमरी से मौत - अब कौन है दिल्ली का 'बॉस', जवाब दे...

    भुखमरी से मौत - अब कौन है दिल्ली का 'बॉस', जवाब दे...

    दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के चुनाव क्षेत्र मंडावली में भूख से तीन बच्चियों की मौत के बाद AAP, BJP और कांग्रेसी नेताओं के बीच बयानबाजी शुरू हो गई है. बच्चियों की मौत से गरीबी, अवसाद, बेरोज़गारी, क़र्ज़, अशिक्षा, जनसंख्या, नशा, अस्वच्छता जैसे राष्ट्रीय मुद्दों पर सभी सरकारों की गवर्नेन्स पर विफलता उजागर होती है.

  • मॉब लिंचिंग पर सुप्रीम कोर्ट : कानूनों पर अमल की बजाय सिर्फ दिशानिर्देश

    मॉब लिंचिंग पर सुप्रीम कोर्ट : कानूनों पर अमल की बजाय सिर्फ दिशानिर्देश

    सुप्रीम कोर्ट ने गाइडलाइन जारी करते हुए कहा है कि मॉब लिंचिंग की घटना होने पर तुरंत FIR, जल्द जांच और चार्जशीट, छह महीने में मुकदमे का ट्रायल, अपराधियों को अधिकतम सज़ा, गवाहों की सुरक्षा, लापरवाह पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई, पीड़ितों को त्वरित मुआवज़े जैसे कदम राज्यों द्वारा उठाए जाएं.

  • सुप्रीम कोर्ट का फैसला - अरविंद केजरीवाल को कैसे मिलेंगे तबादलों के अधिकार...?

    सुप्रीम कोर्ट का फैसला - अरविंद केजरीवाल को कैसे मिलेंगे तबादलों के अधिकार...?

    अफसरों के ट्रांसफर और पोस्टिंग पर हक हासिल करने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना का मामला दर्ज करवाने की धमकी दी जा रही है. फैसले के अनुसार यदि नियमों की व्याख्या की जाए, तो यह स्पष्ट है कि दिल्ली सरकार के पास ही अधिकारियों के तबादलों का अधिकार है, परन्तु सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के फैसले से मई, 2015 की नोटिफिकेशन रद्द तो हुई नहीं, फिर अवमानना की कारवाई कैसे होगी...?

  • उत्तराखंड में यदि शिक्षिका सस्पेंड तो राजस्थान में मंत्री बर्खास्त क्यों नहीं?

    उत्तराखंड में यदि शिक्षिका सस्पेंड तो राजस्थान में मंत्री बर्खास्त क्यों नहीं?

    उत्तराखंड में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के जनता दरबार में कथित अभद्रता किए जाने पर शिक्षिका उत्तरा पन्त की गिरफ्तारी और निलंबन से अनेक सवाल खड़े हो गए हैं? 

  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद कैसे होगा SC/ST प्रमोशन

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद कैसे होगा SC/ST प्रमोशन

    गर्मियों की छुट्टी के दौरान काम कर रही अवकाशकालीन पीठ के जजों ने सरकार के विशेष निवेदन पर सिर्फ यह स्पष्टीकरण दिया कि कानून के अनुसार SC/ST वर्ग में प्रमोशन देने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन उसे प्रमोशन के लिए सुप्रीम कोर्ट का आदेश बताकर प्रचारित कर दिया गया, जिससे आने वाले समय में समस्या और जटिल हो सकती है. केंद्र और राज्य सरकारें सुप्रीम कोर्ट के 2006 के आदेश के बावजूद कानूनी प्रक्रिया का पालन करने में विफल रही हैं, तो फिर इस स्पष्टीकरण से हज़ारों कर्मचारियों का प्रमोशन कैसे हो जाएगा...?

  • लोकसभा, 13 राज्यों में 'एक साल, एक चुनाव' - कानूनी अड़चनें...

    लोकसभा, 13 राज्यों में 'एक साल, एक चुनाव' - कानूनी अड़चनें...

    प्रधानमंत्री मोदी का ‘एक देश एक चुनाव’ का विजन सफल नहीं होने पर उसको ‘एक साल एक चुनाव’में बदलने की तैयारी है. विधि आयोग ने इस बारे में 17 अप्रैल 2018 को पब्लिक नोटिस जारी करके सभी पक्षों से राय मांगी थी. विधि आयोग द्वारा 24 अप्रैल को लिखे पत्र के जवाब में चुनाव आयोग के पूर्व विधि सलाहकार एसके मेन्दिरत्ता ने अनेक कानूनी बदलावों का मसौदा पेश किया है.

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