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रवीश कुमार का प्राइम टाइम: बिहार में जल संकट को बुलावा देते सब‍मर्सिबल पंप...

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पानी का संकट अब हर जगह है. बिहार का मधुबनी और दरभंगा का इलाका जहां कदम-कदम पर तालाब हुआ करता था वहां अब पानी नहीं है. लाखों तालाब की इस धरती पर तालाब कहां गए. ज़ाहिर है कोई लूट ले गया होगा. अतिक्रमण कर घर और दुकान बना लिया होगा. हम सबने ऐसे ही बर्दाश्त किया है और अब सबको इसके बदले में पानी का संकट झेलना ही होगा. तालाब सूख गए तो लोगों को लगा कि बोरिंग से काम चल जाएगा मगर बोरिंग से भी पानी ऊपर नहीं आ रहा है. हर जगह टैंकर दौड़ रहे हैं. इस वक्त भारत में पानी अगर कहीं हैं तो टैंकर में है. हमारे सहयोगी प्रमोद गुप्ता ने इस पर पहले स्टोरी की थी, हम फिर से इसके बारे में बताना चाहते हैं. दरभंगा में 9 ऐसे विशाल तालाब हैं जो 900 साल से अधिक पुराने हैं. इस वक्त यहां सरकारी और प्राइवेट तालाबों की संख्या 839 है. ज्यादातर सूख गए हैं. इस ज़िले का एक प्रखंड है बिरौल जहां 890 तालाब हैं. इस ज़िले के किसी भी प्रखंड में जाइये दो सौ ढाई सौ तालाब मिलेंगे जिन्हें स्थानीय भाषा में पोखर कहा जाता है. 40 साल पहले दरभंगा जिले में करीब चार हजार तालाब थे.



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