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हिंदी साहित्य जगत के शीर्ष व्यक्तित्व मुक्तिबोध के सौ साल

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दिल्ली में पुस्तक मेला लगता है तो लाखों लोग चले आते हैं. लिखने वाले भी हैरान होते हैं कि इतने पाठक इतने ख़रीदार कहां से आ गए. अक्सर हम पाठकों की दुनिया को कम आंकते हैं इसलिए उन्हें मेले में देखकर हैरान होते रहते हैं. हर पाठक की ज़िंदगी में एक कवि होता है, एक किताब होती है और एक लेखक होता है. इन तीनों के बिना वह पाठक नहीं होता. मुक्तिबोध किनके प्रिय कवि थे, उनकी कौन सी कविता आपकी प्रिय थी, यह तो जब आप मेले में आएंगे तभी पता चलेगा.



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