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मैं किसान हूं, मेरी आवाज़ सुनो

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2 अक्टूबर के दिन “जय जवान जय किसान” का नारे देने वाले पूर्व प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्मदिन जब पूरी देश में मनाया जा रहा था, तब हज़ारों के संख्या में किसान ग़ाज़ियाबाद में अपने हक़ के लिए सड़क पर प्रदर्शन कर रहे थे और पुलिस की लाठी खा रहे थे. 23 सितम्बर उत्तराखंड के हरिद्वार से यह किसान दिल्ली के तरफ निकले पड़े थे. दस दिन तक सफर करना इन के लिए आसान नहीं था. ट्रैक्टर इनका घर बन गया था. हमारे संवाददाता सुशील महापात्र ने इन किसानों से बातचीत की. इस समाज को भी जानने का अधिकार है की जिस किसान लोगों की पेट भरने के लिए रोज़ मेहनत करता है क्या उसकी पेट भर पाता है? क्या उसकी बच्चे अच्छे स्कूल जा पाते हैं? इलाहाबाद का कौन है वो राजनेता जो किसानों की ज़मीन हड़प रहा है? क्यों सतना के किसान शिवराज सिंह के सरकार से नाराज़ है? प्रधान मंत्री मोदी जी से क्या कहना चाहते हैं किसान? बुंदेलखंड में क्या क्या है समस्या? मीडिया से किसान क्यों है नाराज़? आप किसानों की दर्द सुनिए और खुद तय कीजिये क्या किसानों को उनकी हक़ नहीं मिलना चाहिए?



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