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फिल्म रिव्यू: द ताशकंत फाइल्ज

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फिल्म की कहानी घूमती है 1966 में ताशकन्त के दौरे पर गए देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की आकस्मिक मृत्यु के इर्द-गिर्द. फिल्म ढूंढने की कोशिश करती है की आखिर शास्त्री जी की मृत्यु की वजह क्या थी. फिल्म पत्रकार रगिनी फुले को उसके बॉस से अल्टिमेटम मिलता है की उसे दो दिन के अंदर एक बड़ा ख़ुलासा चाहिए और तभी रगिनी को एक फोन आता है और उसे कहा जाता है की एक बड़ी ख़बर के कुछ काग़ज़ात उसकी दराज में पड़े हैं. बस फिर क्या था रगिनी लग जाती है शास्त्री जी मृत्यु की छानबीन करने, राजनीतिक गलियरों में हड़कम्प मचता है और एक कमेटी बिठायी जाती है, सच जान ने के लिए. जिसकी एक मेम्बर खुद रगिनी भी है. और फिर एक बंद कमरे में सारे मेम्बर्ज़ के सामने शुरू होती है तहकीकात, और इस तहक़ीक़ात से कुछ नतीजा निकलता है या नहीं उसके लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.



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