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रवीश कुमार का प्राइम टाइम: क्या जनता की जान इतनी सस्ती है?

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आज बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने एक ट्वीट किया है कि राबड़ी देवी बताएं, उनके शासन में मेडिकल कालेजों की क्या स्थिति थी. यह सुनकर किसी को भी लग सकता है कि राबड़ी देवी के कार्यकाल समाप्त होने के बाद काफी कुछ सुधार हुआ होगा. सुशील मोदी को बताना चाहिए कि 2005 के बाद से जब नीतीश सरकार सत्ता में आई और वे भी कुछ समय को छोड़ दें तो उप मुख्यमंत्री रहे, तो इन 14 वर्षों में बिहार में कितने नए सरकारी मेडिकल कालेज बने. बेतिया, पावापुरी और मधेपुरा में सरकारी अस्पताल बनाने का एलान हुआ था मगर अभी तक दो ही चालू हो पाया है. सुशील मोदी यह भी बता सकते हैं कि ऐसा क्या हो गया बिहार में कि 2017-18 के बजट में 1000 करोड़ की कमी करनी पड़ गई. ज़रूर प्राथमिक स्वास्थ्य केंदों की तारीफ होती है लेकिन वह भी तो पर्याप्त नहीं है. कुछ जगहों के पीएचसी को छोड़ दें तो सरकार बताए कि उसके पास पीएचसी के लिए पर्याप्त डाक्टर हैं. जब बिहार में 5000 डाक्टरों की कमी है तो ज़ाहिर है उस कमी का असर प्राइमरी हेल्थ सेंटर पर भी होता होगा. बिहार सरकार को बताना चाहिए कि वह चार साल तक राज्य में बनने वाले दूसरे एम्स के लिए ज़मीन क्यों नहीं खोज पाई. क्यों उसे दरभंगा मेडिकल कालेज को ही एम्स में अपग्रेड करना पड़ा. 2015-16 के बजट में ही अरुण जेटली ने बिहार में एक नए एम्स बनाने की घोषणा की थी.



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