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प्राइम टाइम : अतिथि विद्वानों को बुनियादी सुविधाएं तक नसीब नहीं

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यह यूनिवर्सिटी सीरीज़ का 23वां अंक है. नौकरी का मतलब होता आर्थिक तरक्की. आज हम ऐसी नौकरी की बात करेंगे जिसे करते हुए आदमी ग़रीब होता है. मध्य प्रदेश में जो ठेके पर रखे जाते हैं उन्हें अतिथि विद्वान कहते हैं. लाइब्रेरी में जो रखे जाते हैं उन्हें अतिथि ग्रंथपाल कहते है. कायदे से तो अतिथि की ख़ातिरदारी करने का दंभ भरते हैं मगर राज्य के अतिथि विद्वानों की सिस्टम ने ऐसी ख़ातिरदारी की है वे दस दस साल की नौकरी के बाद भी किसी की ख़ातिरदारी के लायक नहीं रहे. हमने यूनिवर्सिटी सीरीज़ पर अतिथि विद्वानों की हालत पर कई बार दिखाया लेकिन लगता है कि किसी को फर्क नहीं पड़ा. फर्क नहीं पड़ने से जानने और समझने की हमारी कोशिश धीमी नहीं पड़ेगी.



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