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प्राइम टाइम: लोकतंत्र का साथी गुरुद्वारा बंगला साहिब

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टीवी की बहस और सोशल मीडिया की अफवाहों के बीच धर्म की एक ऐसी छवि बना दी गई है, जिससे लगता ही नहीं कि यहां इंसानियत का कोई तत्व बचा होगा. और उस छवि में भी तमाम तरह की जो जानकारियों की विविधता है उसे खत्म किया जा रहा है. एक ही तरह की बात, एक ही तरह के प्रतीक धर्म का चेहरा बनते जा रहे हैं. एक हिंसक तस्वीर के अलावा अगर आप दूसरी तस्वीर भी देखना चाहें, दूसरे धर्मों की विविधता देखना चाहें तो आपकों बहुत कुछ हिंदुस्तान के बारे में जानने को मिलेगा. ऐसा ही एक उदाहरण गुरुद्वारा बंगाला साहिब में देखा जा सकता है.



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