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रवीश कुमार का प्राइम टाइम : मंदी के इस दौर से कैसे उबरेगा ऑटो सेक्‍टर?

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12 अगस्त के प्राइम टाइम में हमने दिखाया था कि किस तरह ऑटो कंपनियां संकट में हैं. सैंकड़ों की संख्या में डीलर शॉप बंद हो रहे हैं. इनकी संस्था कहती है कि 3 लाख लोगों की नौकरी चली गई है. लेकिन एक डीलर ने संपर्क किया और कहा कि वे ऑफ रिकार्ड कुछ कहना चाहते हैं. वो ये कि 3 लाख सही संख्या नहीं है, इससे भी ज्यादा लोगों का काम चला गया है. डर के कारण कोई सही संख्या नहीं बता रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि जीएसटी के कारण कारों की कीमतें बहुत ज्यादा हो गई हैं. 28 फीसदी जीएसटी ने इस सेक्टर को गहरा नुकसान पहुंचाया है. जब तक इसे 18 प्रतिशत तक नहीं लाया जाएगा या उससे भी कम नहीं किया जाएगा, सुधार के संकेत नहीं हैं. दूसरी तरफ बैंक से भी सपोर्ट नहीं मिल रहा है. इन सब कारणों से डीलरशिप बचाना मुश्किल हो गया है. एक डिलर के यहां 150 से 200 लोग काम करते हैं, जहां एक डीलर शॉप बंद होता है, वहां 200 लोगों की नौकरी चली जा रही है. सोसायटी फॉर इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चर्स सियाम के महानिदेशक विष्णु माथुर ने हमारे सहयोगी हिमांशु शेखर से कहा है कि ऑटोमोबिल सेक्टर में 3 लाख, 45 हज़ार लोगों की नौकरी चली गई है. ये नौकरियां डीलर के यहां से गई हैं और उन जगहों से जहां कारों के पार्ट्स बनते हैं. यही नहीं 10 लाख लोगों की नौकरी पर ख़तरा है.



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