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रवीश कुमार का प्राइम टाइम: सिस्टम से हारता कमजोर आदमी

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क्या आप जानना चाहेंगे कि भारत का बेरोज़गार किन हालात में सरकारी भर्ती की परीक्षा देने जाता है. हममें से किसी को अंदाज़ा नहीं कि जब कहीं भर्ती निकलती है तो छात्रों पर क्या गुज़रती है. छात्र पढ़ाई के साथ प्रदर्शन की भी रणनीति बनाने लगते हैं. अब देखिए रेलवे के ग्रुप डी में बहुत से छात्रों के फार्म रिजेक्ट हो गए. एक बार रेलवे ने सुधार का मौका दिया लेकिन उसके बाद भी बहुतों के रिजेक्ट हो गए. छात्रों का कहना है कि फोटो के कारण रिजेक्ट हुआ जो समझ नहीं आ रहा है क्योंकि फोटो तो ठीक लगा. कभी वो ट्विटर पर ट्रेंड कराते हैं तो कभी प्रदर्शन करते हैं मगर उन्हें सफलता नहीं मिलती है. अगर हम सरकारी भर्ती की परीक्षा देने के इनके अनुभवों को रिकार्ड करें और आप देखें तो आपको अलग ही भारत दिखेगा जहां सब ठीक ठाक लगेगा. वाकई ठीक ठाक वाली बात है क्योंकि आप हैरान हो जाएंगे कि इतनी पीड़ा और मानसिक परेशानी के बाद भी ठीक है, यही हैरत की बात है. हरियाणा में पिछले तीन दिनों में एक परीक्षा को लेकर क्या हुआ, हम उसका हाल दिखाना चाहते हैं. 4858 क्लर्क के पदों के लिए 15 लाख से अधिक आवेदन आ गए. उसकी परीक्षा के लिए छात्र जब एक ज़िले से दूसरे ज़िले की तरफ जाने लगे, जब घरों से निकले तो बस कम पड़ गई, ट्रेनें कम पड़ गईं. हमारा नौजवान जब परीक्षा देने निकलता है तब प्रशासन सतर्क हो जाता है. वह नकल रोकने का मोर्चा खोल लेता है. परीक्षा आयोजित कराने के लिए जहां सेंटर था वहां धारा 144 लगानी पड़ी थी. हरियाणा से पूछिए कि शनिवार से लेकर सोमवार का दिन इस परीक्षा के कारण कैसे गुज़रा है.



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