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सीबीआई अफसर नागेश्वर राव अवमानना के दोषी

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कुछ ख़बरों की प्रकृति विचित्र होती है. पता नहीं चलता कि मज़ाक हुआ है या ख़बर गंभीर है. कुछ दिन पहले तक सीबीआई के अंतरिम निदेशक रहे एम नागेश्वर राव ने आज सीबीआई की प्रतिष्ठा बढ़ा दी. कैसे बढ़ा दी आगे बताऊंगाॉ. एम नागेश्वर राव सीबीआई में इस वक्त अतिरिक्त निदेशक हैं. आपको याद होगा कि इन्हें अंतरिम निदेशक के तौर पर कुसच् पर बिठाने के लिए आधी रात को दिल्ली पुलिस बुलवाई गई. उसके जवानों से सीबीआई के मुख्यालय को घेरवाया गया और तब जाकर अपने पद पर आसीन हुए. आधी रात को दफ्तर जाने वाले प्राइवेट सेक्टर में भी कम होते हैं. नागेश्वर राव तो सरकारी सेवक होकर भी आधी रात को जा रहे थे. ऐसा भी नहीं था कि पूर्व निदेशक आलोक वर्मा की कोई अपनी निजी सेना थी जिसे लेकर वे मुख्यालय पहुंचने वाले थे. फिर भी कोई आधी रात को चार्ज लेने जाए तो इसके लिए विशेष सलामी तो मिलनी ही चाहिए. अंधेरे पर शान से पदासीन होने वाले एम नागेश्वर राव उजाले में पकड़े गए. फ्लैश बैक में स्टोरी इसलिए बता रहा हूं ताकि आपको एम नागेश्वर राव याद आ जाएं.आपको याद होगा कि मुज़फ्फरपुर शेल्टर होम मामले में जांच अधिकारी का तबादला कर दिया गया था.जबकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि तबादला नहीं होगा. एक शेल्ट होम यानी एक कैंपस के भीतर 34 अधिक बच्चियों के साथ बलात्कार और यौन शोषण की घटना होती है फिर भी सत्ता तंत्र के लोग आरोपियों को बचाने का प्रयास करते हैं. सुप्रीम कोर्ट को यह अहसास हो गया था, इसलिए सर्वोच्च अदालत की शुरू से ही निगाह रही है. सुप्रीम कोर्ट की इस मामले में सख़्ती नहीं होती तो इस केस में जिस तरह से धीमी गति से प्रगति हो रही थी, उससे यकीन बढ़ गया था कि कुछ नहीं होगा. उसके बाद भी सुप्रीम कोर्ट के मना करने पर जांच अधिकारी ए के शर्मा का तबादला कर दिया जाए यह कम बड़ी बात नहीं है. इससे पता चलता है कि हमारे अधिकारियों में साहस की कोई कमी नहीं है. वे आरोपियों को बचाने की कोशिश पूरी ईमानदारी से करते हैं.



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