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रवीश कुमार का प्राइम टाइम : आर्थिक मंदी अपने पैर कहां तक पसारेगी

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आर्थिक मंदी का असर देश की अर्थव्यवस्था में नई नई शक्ल में सामने आ रहा है. ऑटो उद्योग बीते दो दशक की सबसे बड़ी मंदी की चपेट में है और अब बाकी क्षेत्र भी इसकी चपेट में आते दिख रहे हैं. ऊपर से अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल के बढ़ते दाम नई चुनौती की तरह सामने आए हैं. बीते एक हफ़्ते से लगातार पेट्रोल, डीज़ल की क़ीमतें बढ़ रही हैं. जनवरी के बाद पेट्रोल डीज़ल के दाम में एक हफ़्ते में सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी हुई. उधर बुनियादी ढांचों से जुड़ी परियोजनाओं की सुस्त रफ़्तार और डरा रही है. सरकार की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक डेढ़ सौ करोड़ रुपये से ज़्यादा बजट वाला हर तीसरा प्रोजेक्ट लटका हुआ है. इस सबके बीच बीते दो कारोबारी दिनों से शेयर बाज़ार झूम कर नाच रहा है. दो दिन में सेंसेक्स 3000 अंक ऊपर चढ़ गया है. जानकार बता रहे हैं कि ये कॉर्पोरेट टैक्स घटाने का असर है. लेकिन ये खुशी कितने दिन की है और आम आदमी को इससे कितना फ़ायदा होगा कहना मुश्किल है.



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