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रवीश कुमार का प्राइम टाइम: क्या शादी के फैसले पर भी अब सरकार मुहर लगाएगी?

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भारत के राजनीतिक दल संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के मामले में लगातार निराश कर रहे हैं. यह बात सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए लागू होती है. राजनीति का काम है कि वो समाज व्याप्त धार्मिक और जातिगत संकीर्णता के खिलाफ काम करें. आर्टिकल 15 के तहत संविधान देश के नागरिकों के साथ धर्म, जाति, लिंग के आधार पर भेदभाव को इजाजत नहीं देता है. लेकिन आए दिन भेदभाव की राजनीति खड़ी की जा रही है.



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