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प्राइम टाइम: शिक्षा हमारी प्राथमिकता में आख़िर कहां?

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नेताओं के प्रेस कांफ्रेंस में जो मुद्दे सजाए जाते हैं वो अगली प्रेस कांफ्रेंस तक भी नहीं टिकते हैं. उनके बयानों के पीछे भागा जा सकता है बस यही कि अभी तक किसी ने इस बात की परवाह नहीं कि कॉलेजों की ख़राब हालत पर बोले. सबको पता है कि इस पर बोलने का मतलब है कि जवाबदेही स्वीकार करना कि कॉलेजों की हालत ऐसी क्यों है. चाहे जिसकी सरकार हो, चाहे कोई भी दल हो, शहर दर शहर कॉलेज जर्जर हो चुके हैं.



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