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रवीश कुमार का प्राइम टाइम: प्रतियोगी परीक्षाओं के नतीजे में देरी क्यों?

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सोचिए 6 साल पहले इनकी परीक्षा का विज्ञापन आया था, अभी तक परीक्षा पूरी नहीं हुई है, रिज़ल्ट नहीं आया. काश कोई रिसर्च करता है कि ऐसा कैसे हो सकता है कि कोई परीक्षा 6 साल में पूरी नहीं होती है. ये अब छात्र नहीं रहे बल्कि हमारी सरकारी परीक्षा व्यवस्था के पोस्टर ब्वाय हैं. उत्तर प्रदेश की परीक्षा की यह कथा है. इनमें नारे लगाने का ज़ोर नहीं बचा है. फिर भी ये जानते हैं कि कुछ न होने से तो अच्छा है कि नारे लगाए जाएं. 3222 पदों का विज्ञापन निकला 2013 में, परीक्षा हुई 2016 में और रिज़ल्ट का पता नहीं. ये लोग मार्च, जून और सितंबर में अलग अलग प्रदर्शन कर चुके हैं.



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