NDTV Khabar

रवीश कुमार का प्राइम टाइम: क्या धार्मिक आधार पर नागरिकता तय होनी चाहिए?

 Share

राष्ट्रवाद की चादर में लपेट कर सांप्रदायिकता अमृत नहीं हो जाती है. उसी तरह जैसे ज़हर पर चांदी का वर्क चढ़ा कर आप बर्फी नहीं बना सकते हैं. हम चले थे ऐसी नागरिकता की ओर जो धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव नहीं करती हो लेकिन पहुंचने जा रहे हैं वहां जहां धर्म के आधार पर नागरिकता का फैसला होगा. नागरिकता को लेकर बहस करने वाले लोग पहले यही फैसला कर लें कि इस देश में किस किस की नागरिकता अभी तय होनी है। हम जिस रजिस्टर की बात कर रहे हैं उस रजिस्टर में क्या उन लड़कियों के भी नाम होंगे जिन्हें बलात्कार के बाद जलाया गया है. पश्चिम बंगाल के मालदा में एक महिला का जला हुआ शव मिला है. पुलिस को शक है कि बलात्कार के बाद हत्या हुई है. उत्तर प्रदेश के संभल ज़िले में 16 साल की उस लड़की की मौत हो गई जिसे बलात्कार के बाद जला दिया गया था. उन्नाव में गैंग रेप की एक पीड़िता को कोर्ट जाने के रास्ते में पकड़ कर जला दिया गया। कुछ दिन पहले बिहार के बक्सर में एक महिला का शवर मिला है जिसे जला दिया गया है. पहचान मुश्किल हो गई है. यह ख़बर भारत के बाहर खाली बैठे उन नॉन रेज़िडेंट इंडियन के लिए भी है जिन्होंने बग़ैर किसी भेदभाव का सामाना किए नागरिकता ली है और एक अच्छी व्यवस्था का लाभ उठा कर उन देशों के लिए और भारत के लिए भी गौरव के क्षण हासिल किए है. क्या भारत में जैसा नागिरकता बिल लाया जा रहा है क्या इस तरह के बिल का समर्थन न्यूज़ीलैंड, आस्ट्रेलिया, पुर्तगाल, मलेशिया, अमरीका और ब्रिटेन में उनकी नागरिकता लेकर रहने वाले भारतीय भी समर्थन करेंगे.



संबंधित

Advertisement

 
 
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com