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देश के विश्वविद्यालयों की बदहाली की दास्तान

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नेताओं के भाषण को ध्यान से सुनना बंद कर दीजिए. उसमें आप बार-बार युवा-युवा का ज़िक्र सुनेंगे मगर युवाओं के साथ क्या हो रहा है यही बात सामने लाई जाए तो आप हैरान रह जाएंगे. आपने बैचलर इन होमियोपैथिक मेडिसीन इन सर्जरी कोर्स का नाम सुना ही होगा. उसी के छात्र मुज़फ्फरपुर में वाइस चांसलर के घर के बाहर धरना दे रहे थे. इन छात्रों की दो साल से परीक्षा नहीं हुई है. 2016 से एडमिशन लेकर परीक्षा का इंतज़ार कर रहे हैं. वाइस चांसलर के घर धरना देने गए तो गर्मी में एक छात्रा बेहोश हो गई. इसके बाद स्थिति बिगड़ी तो छात्र उग्र हो गए और जवाब में पुलिस भी उग्रतर हो गई. स्थानीय मीडिया में छपा है कि छात्रों ने पत्थरबाज़ी की और पुलिस ने इन्हें बांड भरने के बाद छोड़ा. साढ़े पांच साल का कोर्स होता है, उसमें अगर दो साल परीक्षा नहीं होगी तो यह कोर्स साढ़े सात साल का हो जाएगा. भारत के नौजवानों को बर्बाद करने का प्रोजेक्ट चल रहा है. नौजवानों को यह बात पूरी तरह ख़ाक हो जाने के बाद भी समझ नहीं आएगी.



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