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रवीश कुमार का प्राइम टाइम: व्यापक रहा बंद का असर, सरकारी और निजी कर्मचारी भी हुए शामिल

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भारत भर में आज दस से अधिक मज़दूर संघों की हड़ताल हुई. इस हड़ताल को सिर्फ एक चश्मे से देखा गया लेकिन बैंक सेक्टर के लोग अलग सवालों के साथ इसमें थे. पावर सेक्टर के लोग भी इस हड़ताल में शामिल हुए. पावर सेक्टर में निजीकरण, बिजली कानून में प्रस्तावित संशोधन के खिलाफ 15 लाख कर्मचारियों और इंजीनियरों ने इस हड़ताल में हिस्सा लिया. पेट्रोलियम सेक्टर की कंपनी बीपीसीएल के कर्मचारी भी इस हड़ताल में इसलिए थे कि उनकी कंपनी का विनिवेश किया जा रहा है. हरियाणा के मानेसर में भी छंटनी के सवाल को लेकर हड़ताल में हिस्सा लिया. हरियाणा रोडवेज़ के कर्मचारी किलोमीटर स्कीम के खिलाफ हड़ताल में हिस्सा लिया। हर संगठन का एक सवाल था जिस पर न सरकार बात करती है और न कोई राजनीतिक दल. वो है पुरानी पेंशन की बहाली. ये एक ऐसा मुद्दा है जिसके बारे में हर दूसरा कर्मचारी राय रखता है कि पुरानी पेंशन की व्यवस्था फिर से बहाल होनी चाहिए. उसी तरह से जैसे एम पी एम एल ए को पेंशन मिलती है. आज न कल राजनीतिक दलों को इस सवाल से टकराना ही पड़ेगा. कई जगहों पर कर्मचारियों को हड़ताल में शामिल होने को लेकर चेतावनी दी गई थी. फिर भी शामिल हुए. कई जगहों पर हिंसा भी हुई. लेकिन मज़दूर हड़ताल की बात कर रहे हैं बड़े सवालों के बीच मज़दूर और उसकी कहानी गायब हो गई. वो इस आर्थिक मंदी के दौर में किन चुनौतियों के साथ जी रहा है.



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