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रवीश कुमार का प्राइम टाइम: ट्रांसपोर्टरों पर भी आर्थिक मंदी की मार

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देश की अर्थव्यवस्था बीते छह साल में सबसे ज़्यादा ख़राब हालत में है. इस वित्तीय साल की पहली तिमाही में जीडीपी विकास दर घटते घटते 5 फीसदी तक आ गई. जबकि पिछले वित्तीय साल की पहली तिमाही में ये आठ फीसदी थी. तीन ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी भारत की अर्थव्यवस्था अब घटकर 2.7 ट्रिलियन डॉलर पर आ चुकी है. फ्रांस और ब्रिटेन फिर भारत से आगे निकल गए हैं. दुनिया के देशों में भारत की जीडीपी पांचवें से खिसककर सातवें स्थान पर आ गई है. एक तरफ़ अर्थव्यवस्था संभल नहीं रही और उधर प्रधानमंत्री 2024 तक देश को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का सपना दिखा रहे हैं. जबकि बीते एक साल में अर्थव्यवस्था के हर सेक्टर में गिरावट आई है. बाज़ार का बैरोमीटर माने जाने वाले ऑटोमोबाइल सेक्टर में बीते दो दशक की सबसे बड़ी मंदी दिख रही है. ख़रीदार बाज़ार से ग़ायब हैं. उद्योग धंधों की भी यही हालत है. मांग है नहीं, उत्पादन होगा कहां से. नतीजा ये है कि फैक्टरियों में ताले लगाने की नौबत आती जा रही है. जब उत्पादन नहीं होगा तो माल ढुलाई कहां से होगी, यही वजह है कि ट्रांसपोर्टर भी खाली हाथ बैठे हैं. ट्रांसपोर्टरों पर इस मंदी का असर अगर देखना है तो ट्रक नगरी कहे जाने वाले मुरादाबाद के डींगरपुर इलाके में जाइए जहां कई किलोमीटर तक सड़क के दोनों ओर ट्रक खाली खड़े हैं. मुरादाबाद से अनवर कमाल की रिपोर्ट.



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