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रवीश कुमार का प्राइम टाइम : कब तक गटर में उतरना पड़ेगा गरीब इंसान को?

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15 जून को गुजरात के बड़ौदा में होटल के सेप्टिक टैंक को साफ करते हुए 7 सफाई कर्मचारी मर गए. उनका दम घुट गया था. आज यानी 27 जून को कोयंबटूर में तीन सफाई मज़दूर सेप्टिक टैंक की सफाई करते वक्त दम घुटने से मर गए. 26 जून यानी बुधवार को रोहतक में भी एक घटना हुई. चार लोग सफाई करते हुए दम घुटने से मर गए. इनमें कैथल का अनिल है, बिहार का संजय है, रोहतक से धर्मेंद्र और सोराकोठी. इनमें से तीन प्राइवेट ठेकेदार के यहां काम करते थे. अस्पताल में सफेद चादरों से लिपटे इनके पार्थिव शरीर से आपको उस हालात का अंदाज़ा नहीं होगा. दरअसल ये काम यहां कर रहे थे. रोहतक कच्चा बेरी रोड पर. बिना सुरक्षा उपकरण के सीवर के चलते हुए पंप को साफ करने उतरे. जैसे ही वाल्व खोला गैस से दम घुट गया और मौके पर ही मौत हो गई. गैस का खतरा होने के बाद भी मास्क तक नहीं दिया गया. ये सभी जन स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी थे. सबको पता है कि इस तरह के मामले में मौत हो जाती है मगर सब ऐसे बेखबर हैं जैसे मौत का इंतज़ार कर रहे हों. इनके परिवारों की बात अब मुआवज़े की बात होगी. ये गरीब लोग हैं इसलिए इनकी ज़िंदगी मुआवज़े के एलान के बाद पटरी पर लौटती हुई मान ली जाती है.



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