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रवीश कुमार का प्राइम टाइम : ऑटो सेक्टर की मंदी क्या इशारा कर रही है?

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पिछले दो महीने से ऑटोमोबिल सेक्टर में उत्पादन और मांग में गिरावट से संबंधित कई खबरें छपी हैं. बिजनेस अखबारों की यह प्रमुख ख़बरों में से एक है. अगर इसी तरह मंदी एक तिमाही और रही और दिवाली के आस-पास मांग नहीं बढ़ी तो अनुमान है कि ऑटो सेक्टर से 10 लाख लोगों को नौकरी और काम गंवानी पड़ सकती है. झारखंड के लौह उद्योग में मंदी है. 26 जुलाई के प्रभात ख़बर में एक ख़बर छपी थी कि ऑटोसेक्टर में मंदी के कारण आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग की कमर टूट गई है. 700 के करीब छोटे उद्योगों में काम बंद हो गए हैं या बंद होने की स्थिति में हैं. इसमें 30000 से अधिक कामगार प्रभावित हुए हैं. यानी नौकरी चली गई है. झारखंड से चेन्नई आइये. अंबात्तूर में वॉल्व बनाने वाले जॉन पीटर टीवी के डिबेट में नहीं है. कभी महीने में 8 लाख का काम करते थे, अब 1 लाख का भी काम नहीं कर पा रहे हैं. 13 कामदारों को काम से हटा चुके हैं. बाकी बचे कामगारों का वेतन कम कर दिया है. चंद बोस की सैलरी 18 हज़ार से घट कर 12 हज़ार हो गई है. चेन्नई का ही एंड्रयू इलाका है जहां इस कारखाने में ब्रेक से जुड़े उपकरण बनते हैं. अब बंद हो गए हैं. एक तिहाई मशीनों पर काम नहीं है. कर्मचारियों की छंटनी कर पड़ी है. 35,000 करोड़ की कारें बिकने का इंतज़ार कर रही हैं. कारें नहीं बिक रही हैं तो ऑटो डीलर बंद हो गए हैं. जिन डीलरों के पास कर्ज़ का बोझ है, उन्हें सिर्फ कश्मीर पर बहस ही चिन्ता से दूर कर सकती है.



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