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रवीश कुमार का प्राइम टाइम: दिल्ली-एनसीआर में कहां है साफ हवा का अधिकार?

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ख़तरा आपके फेफड़े को है, मगर बीमार भेजा नज़र आ रहा है. दिल्ली की हवा को लेकर जो बातें हो रही हैं वो बेहद निराश करने वाली हैं. दिल्ली की बहस को शेष भारत के शहरों में प्रदूषण झेल रहे लोग इस तरह देख रहे हैं जैसे किसी ने हवा में जलेबी टांग दी हो कि टूट कर गिरेगी तो मेरठ और बनारस वालों को भी मिलेगी. जलेबी रेस याद है आपको. तो दिल्ली में भी कोर्ट के आदेश, मंत्रियों के बयान और अख़बारों में छपे लेख कुछ नहीं कर सके. ऐसा नहीं था कि इस साल ही हवा के खराब होने की ख़बर आई. ज़रूर इस साल यानी 4 नवंबर को दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स 497 है. तीन साल में सबसे अधिक. 2015 में ही सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी कि दिल्ली में हर साल दस से तीस हज़ार लोग वायु प्रदूषण के कारण मर जाते हैं. ये 2019 है. इतनी सीरियस रिपोर्ट के बाद भी हम करीब करीब ज़ीरो की स्थिति पर खड़े हैं. यही नहीं एक साल बाद 2016 में वायु प्रदूषण इतना खतरनाक हो गया जो कभी 17 साल में नहीं हुआ था.



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