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रवीश कुमार का प्राइम टाइम: क्यों सूरत में नहीं बचाए जा सके बच्चे?

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कई बार हम अपना कार्यक्रम इस सवाल से शुरू करते हैं कि क्या आपको पता है, लेकिन सच यह है कि हमें ही पता नहीं होता है, जब रिसर्च के दौरान पता चल जाता है तो हम शेखी बघारने आ जाते हैं कि क्या आपको पता है. जैसे मुझे नहीं पता था और आज ही शाम 5 बजकर 22 मिनट पर पता चला कि आग बुझाने वाली लाल रंग की जो गाड़ी हनहनाते हुए घरों तक आती है उसकी कीमत 40 से 50 लाख होती है और आर्डर करने पर छह महीने में बनकर आती है. बनी बनाई शो रूम में उपलब्ध नहीं होती है. टाटा कंपनी और हिन्दुजा आर्डर देने पर बनाती हैं. इस गाड़ी को आप देखते ही होंगे. इसके ज़रिए आप 35 फीट ऊंचाई तक आग लगने पर बुझा सकते हैं. आबादी के हिसाब से फायर स्टेशन होता है.



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