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रवीश कुमार का प्राइम टाइम : कृषि कानूनों पर भ्रम किसानों को या सरकार को?

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किसानों के संकट के कई चेहरे हैं. सरकार से बातचीत के नतीजों से पहले अलग-अलग आवाज़ों को सुनिए और समझिए कि किसान चाहे धान उगाने वाला हो या मक्का उगाने वाला हो, सही दाम पाने के लिए कितना बेचैन है. खेती के अलावा कोई दूसरा सेक्टर नहीं है जो अपने उत्पाद की कीमत के लिए इतना असुरक्षित और आशंकित हो. 30 नवंबर को कृषि मंत्रालय के सचिव संजय अग्रवाल 32 किसान संगठनों को पत्र भेजते हैं कि 1 दिसंबर को दोपहर तीन बजे विज्ञान भवन में बातचीत के लिए आमंत्रित किया जाता है. वहीं सुबह होते ही कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ट्वीट करते हैं कि नए कृषि कानूनों के प्रति भ्रम को दूर करने के लिए मैं सभी किसान संगठनों के प्रतिनिधियों एवं किसान भाइयों को चर्चा के लिए आमंत्रित करता हूं. अगर बातचीत से पहले ये कहा जाए कि किसानों का भ्रम दूर करना है तो साफ हो जाता है कि बातचीत किस लिए हो रही है.



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