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रवीश कुमार का प्राइम टाइम : कहीं शरणार्थियों का स्‍वागत तो कहीं नो एंट्री

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रिफ्यूज़ी के बारे में दुनिया के कई देशों में राजनीति बदल रही है. जर्मनी जैसे देश जहां शरणार्थियों को जगह दे रहे हैं तो रूस चेतावनी दे रहा है कि यह ठीक नहीं है. अमरीका में रोज़ इस मसले को लेकर राजनीतिक टकराव होता रहता है. वसुधैव कुटुंबकम सारी दुनिया परिवार है तो फिर परिवार के लिए सारी दुनिया क्यों नहीं है. कहीं लोग जान बचाने के लिए भाग रहे हैं तो कहीं ग़रीबी और प्रकृति की तबाही के कारण. एक बार आप शरणार्थी और रिफ्यूजी का मतलब भी समझिए. आज शहरों में रहने वाले कई लोग भी खुद को इस तरह से देख सकते हैं. अमरीका के राष्ट्रपति ट्रंप और उनसे मिलने गईं याज़िदी एक्टिविस्ट नादिया मुराद की बातचीत का वीडियो देखा जा रहा है. आप नादिया की बातों के भाव को समझिए. वो किन हालात में इराक़ से भागी थी. वो जिस याज़िदी समुदाय की है उसकी हज़ारों औरतों और बच्चों पर आईएसआईएस कहर बनकर टूटा था. मार दी गईं थीं. नादिया बच कर निकल भागी और उन्हें नोबेल पुरस्कार मिला. राष्ट्रपति ट्रंप की प्रतिक्रिया से ज़्यादा आप नादिया की बातों पर ध्यान दें. चेहरे पर भाव को समझें. आपको रिफ्यूज़ी होने के और भी पहलू समझ आएंगे.



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