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रणनीति: क्या नफरत के निशाने पर थे उमर खालिद?

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संसद के बिल्कुल करीब कांस्टिट्यूशन क्लब में 'खौफ से आज़ादी' नाम का कार्यक्रम, लेकिन जिस खौफ की बात होनी थी वो खौफ आज वहां नजर आया. 15 अगस्त के ठीक पहले संसद के बिल्कुल करीब कांस्टिट्यूशन क्लब के बाहर उमर ख़ालिद पर गोली चलाने की कोशिश हुई. गोली का निशाना उमर खालिद था या कोई और. सुरक्षा के लिहाज़ से इस हाई अलर्ट ज़ोन में कोई पिस्टल लेकर आया ये बड़ी चूक है और फिर फरार भी हो गया. उमर ख़ालिद कांस्टिट्यूशन क्लब के बाहर चाय की दुकान से लौट रहे थे, हमला पीछे से हुआ. ढाई बजे से वहां 'ख़ौफ़ से आज़ादी' नाम का कार्यक्रम होने वाला था, उसी के लिए उमर ख़ालिद समय से पहले पहुंच कर चाय पी रहे थे.



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