'द ट्रैजेडी किंग' 

दिलीप कुमार

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दिलीप कुमार का असली नाम मोहम्मद यूसुफ खान है. उनका जन्म 11 दिसंबर, 1922 को ब्रिटिश इंडिया के पेशावर में हुआ.

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दिलीप कुमार ने 1940 में ही अपना घर छोड़ दिया था और पुणे में रहने लगे थे. उन्होंने आर्मी क्लब के बाहर एक सैंडविच स्टॉल भी शुरू किया था.

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1943 में दिलीप कुमार की मुलाकात डॉक्टर मसानी से हुई, जिन्होंने उनसे बॉम्बे टॉकीज में साथ आने को कहा. यहां वो  एक्ट्रेस देविका रानी से मिले.

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दिलीप कुमार शुरुआती दिनों में स्टोरी राइटिंग और स्क्रिप्ट डिपार्टमेंट में काम करते थे. देविका रानी ने उन्हें नाम बदलकर दिलीप कुमार रखने के लिए कहा.

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देविका रानी ने उन्हें 1944 में 'ज्वार भाटा' में कास्ट किया, जिससे दिलीप कुमार ने हिंदी सिनेमा में अपनी जबरदस्त पहचान बनाई.

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दिलीप कुमार 1948 में शहीद और 'मेला' फिल्म में नजर आए. 1949 में महबूब खान की 'अंदाज' में दिखाई दिए, जो बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हुई.

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दिलीप कुमर ने 1950 के दशक के दौरान 'जोगन', 'बाबुल', 'हलचल', 'दीदार', दाग जैसी कई हिट फिल्में कीं. उन्हें 'द ट्रैजेडी किंग' नाम मिला.

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'दाग' के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड जीतने वाले दिलीप कुमार पहले अभिनेता बने. 1960 में उन्होंने मुगल-ए-आजम में सलीम का किरदार अदा किया.

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दिलीप कुमार ने 1976 में फिल्मों से पांच साल का ब्रेक ले लिया था और फिल्म क्रांति के जरिए 1981 में दिलीप कुमार ने वापसी की.

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दिलीप कुमार कांग्रेस पार्टी से राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं. उन्हें पद्म भूषण, निशान-ए-इम्तियाज और पद्म विभूषण से भी नवाजा जा चुका है.

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