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UP Polls 2017: जानें तीसरे चरण का मतदान अखिलेश यादव के लिए क्यों है सबसे बड़ी चुनौती

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UP Polls 2017: जानें तीसरे चरण का मतदान अखिलेश यादव के लिए क्यों है सबसे बड़ी चुनौती

खास बातें

  1. सपा के गढ़ इटावा और आसपास के इलाके अखिलेश के लिए चुनौती
  2. अखिलेश ने मौजूदा विधायकों को हटाकर नये लोगों को मौका दिया है
  3. ऐसे में सपा के बागी विधायक और सदस्य अखिलेश का काम आसान नहीं होने देंगे
इटावा: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव का तीसरा चरण सपा के लिए सबसे महत्वपूर्ण है और अखिलेश यादव के लिए सबसे बड़ी चुनौती सपा के गढ़ इटावा और आसपास के ज़िलों को बचाने की होगी. इस इलाके से कई जगह सपा से बागी उम्मीदवार मैदान में हैं और बीजेपी की पूरी कोशिश है सपा के किले को ढहा दिया जाए. इस बात को अखिलेश अच्छी तरह से जानते हैं इसलिए इटावा और मैनपुरी में जमकर रैलियां कर पसीना बहा रहे हैं. उन्हें पता है कि इस बार सपा के गढ़ में मुक़ाबला आसान नहीं है, तीसरे चरण में 69 सीटों पर वोट डाले जाने हैं. 2012 के चुनावों में 69 सीटों में सपा का प्रदर्शन बेहतरीन रहा था और उसे कुल 55 सीटें मिली थीं. वहीं बसपा को 6, बीजेपी को 5 और कांग्रेस को 2 सीटें और एक सीट निर्दलीय को मिली थी.

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अखिलेश ने इस बार इस इलाके के कई मौजूदा विधायकों का टिकट काट कर नए प्रत्याशियों पर भरोसा जताया है. ऐसी ही एक सीट है इटावा सदर, यहां से सपा ने कुलदीप शंटू को टिकट दिया है. इन्हें सपा ने मौजूदा विधायक शिवपाल गुट के रघुराज शाक्य को 'शंट' करके टिकट दिया है और इनकी साइकिल के ख़िलाफ़ सपा के बाग़ी आशीष राजपूत लोकदल का हल जोतता किसान लेकर कूद पड़े हैं. बताया जाता है कि यह शिवपाल के बेहद क़रीबी हैं और वह जीतने से ज़्यादा सपा को हराने के लिए मैदान में उतरे हैं. ऐसे और भी कई सपा के बाग़ी हैं जो टिकट न मिलने पर लोकदल या फिर निर्दलीय खड़े होकर सपा का खेल बिगाड़ रहे हैं.

उधर बीजेपी की पूरी तैयारी सपा का किला ढहाने की है क्योंकि 2012 में बीजेपी का सपा के गढ़ इटावा, मैनपुरी में खाता तक नहीं खुला था. राजनाथ से लेकर उमा भारती, अमित शाह, स्वामी प्रसाद मौर्य, केशव मौर्य सपा के गढ़ में ताबड़ तोड़ रैलियां कर रहे हैं. उन्हें पता है कि उन्हें मुलायम के किले में सेंध लगाने का इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा और 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने इटावा से जीत दर्ज़ की थी. अखिलेश यादव भी चाहते हैं कि वह पार्टी को यहां से जीता कर शिवपाल गुट को एक संदेश दें लेकिन ये सब कुछ ज़मीन उतना आसान नहीं दिखता है. अखिलेश के लिए एक शेर बड़ा फ़िट बैठता है 'हमें अपनों ने लूटा ग़ैरों में कहां दम था..'


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