Election Results 2018: कभी विदेशों में लगवाते थे नौकरी, इस तरह तेलंगाना के 'किंग' बने चंद्रशेखर राव

Assembly Election Results 2018:के. चंद्रशेखर राव (K. Chandrashekar Rao) का पहली बार सियासी दुनिया से साबका हुआ और वे छात्र राजनीति के अखाड़े में कूद पड़े.

Election Results 2018: कभी विदेशों में लगवाते थे नौकरी, इस तरह तेलंगाना के 'किंग' बने चंद्रशेखर राव

Assembly Election Results 2018: के. चंद्रशेखर राव (K. Chandrashekar Rao) की पार्टी को तेलंगाना ( Telangana Election Results) में बहुमत मिल गया है.

नई दिल्ली :

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों (Assembly Election Results 2018) में सबसे चौंकाने वाला परिणाम तेलंगाना  (Telangana Election Results) का रहा. राज्य में के. चंद्रशेखर राव की पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) की आंधी चली. अब तक के रुझानों के मुताबिक टीआरएस की 119 सीटों में से 87 सीटों पर आगे है. तेलंगाना में सरकार गठन के लिए किसी भी दल को 60 सीटों की जरूरत पड़ती है और  के. चंद्रशेखर राव (K. Chandrashekar Rao) की टीआरएस ने अकेले ही बहुमत के लिए जरूरी जादुई आंकड़े को पार कर लिया है. के. चंद्रशेखर राव यूं ही यहां तक नहीं पहुंचे हैं. इसके पीछे एक लंबी कहानी है. कल्वाकुंतला चंद्रशेखर राव (Kalvakuntla Chandrashekar Rao) यानी के. चंद्रशेखर राव का जन्म 17 फरवरी 1954 को आंध्रप्रदेश के एक छोटे से गांव में हुआ. उनकी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई आंध्रप्रदेश में ही हुई. इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने हैदराबाद का रुख किया और उस्मानिया यूनिवर्सिटी में तेलुगू साहित्य की पढ़ाई शुरू की.

के. चंद्रशेखर राव (K. Chandrashekar Rao) का पहली बार सियासी दुनिया से साबका हुआ और वे छात्र राजनीति के अखाड़े में कूद पड़े. चूंकि घर भी चलाना था तो उन्होंने बतौर एंप्लॉयमेंट कंसल्टेंट (रोजगार सलाहकार) एक नई पारी शुरू की. वे आंध्रप्रदेश और दक्षिण के अन्य राज्यों के लोगों को खासकर खाड़ी देशों में नौकरी के लिए भेजने में मदद करने लगे, लेकिन कॉलेज के दिनों में सियासत का जो चस्का लगा था वो आसानी से नहीं छूटने वाला था.

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तेलुगुदेशम पार्टी से शुरू किया सफर 
के. चंद्रशेखर राव  (K. Chandrashekar Rao) साल 1983 में तेलुगुदेशम पार्टी यानी टीडीपी में शामिल हो गए. 1985 में वह सिद्धीपेट जिले से चुनाव लड़े और जीत गए. इसके बाद वे चार बार लगातार इस सीट से जीतते रहे.  इस दौरान 1987-88 में वे मंत्री भी रहे. इस दौरान उन्होंने अलग-अलग पद भी संभाले. 1997 से 1999 तक केंद्रीय मंत्री रहे और 1999-2001 तक आंध्रप्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष भी रहे. इसी दौरान आंध्रप्रदेश में अलग राज्य की मांग ने जोर पकड़ी और तेलुगू साहित्य के छात्र रहे के. चंद्रशेखर राव ने अलग तेलंगाना राज्य के निर्माण की मांग करते हुए तेलुगुदेशम पार्टी से अलग हो गए. 

2001 में बनाई अलग पार्टी 
टीडीपी से अलग होने के बाद के. चंद्रशेखर राव ने 2001 में अपनी अलग पार्टी बनाई और इसका नाम रखा तेलंगाना राष्ट्र समिति (Telangana Rashtra Samithi) . टीआरएस ने गठन के तीन वर्षों के बाद साल 2004 में कांग्रेस के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव के अखाड़े में उतरी और 5 सीटें जीतने में कामयाब रही. 2004 में केंद्र में आई यूपीए की सरकार में राव बतौर श्रम और नियोजन मंत्री नियुक्त हुए. इस बीच अलग राज्य के गठन के मसले पर उनकी यूपीए सरकार से नाराजगी और टकराव जारी रहा 2006 और 2008 में इस्तीफा भी दिया. हालांकि इसके बाद भी चीजें उनके मनमुताबिक नहीं हुईं और अंतत: 2009 में वे यूपीए से अलग हो गए. 

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अलग राज्य की मांग, बात मनवाकर ही दम लिया 
यूपीए से अलग होने के बाद केसीआर ने अलग राज्य के लिए जोरशोर से आंदोलन शुरू कर दिया और इस दौरान वे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर भी बैठे. इस हड़ताल के बाद अलग राज्य के मुद्दे ने जोर पकड़ा और अंतत: 2 जून 2014 को तेलंगाना अलग राज्य बना और के. चंद्रशेखर राव तेलंगाना के पहले मुख्यमंत्री बने. विशेषज्ञों की मानें तो बतौर राज्य तेलंगाना के स्वरूप में आने के बाद केसीआर की लोकप्रियता जबर्दस्त तरीके से बढ़ी. राज्य के हर वर्ग में केसीआर की पैठ बनी और विधानसभा चुनाव नतीजों (Assembly Election Results 2018) में उन्हें इसका लाभ मिला.  

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